फल सब्जियों की उत्पत्ति, क्षेत्रफल, उत्पादन, किस्में एवं उत्पादन तकनीक – टमाटर (Origin, Area, Production, Varieties & Package of Practices for Fruit Vegetables – Tomato)
1. उत्पत्ति एवं इतिहास (Origin)
टमाटर (Tomato) की उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका (South America) के एंडीज पर्वतमाला क्षेत्र (Andes region) यानी पेरू, इक्वाडोर और बोलीविया (Peru-Ecuador-Bolivia) में मानी जाती है।
2. क्षेत्रफल एवं उत्पादन (Area and Production)
टमाटर भारत और दुनिया की सबसे लोकप्रिय एवं व्यापक रूप से उगाई जाने वाली सब्जियों में से एक है। भारत में यह प्रमुख उत्पादक राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार और तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है।
3. वनस्पति वर्गीकरण एवं वर्गिकी (Taxonomy & Botanical Classification)
टमाटर सोलेनेसी कुल (Family: Solanaceae) से संबंधित है। पूर्व में इसका वानस्पतिक नाम लाइकोपर्सिकॉन एस्कुलेंटम (Lycopersicon esculentum Mill.) था, जिसे आधुनिक वर्गीकरण में सोलेनम लाइकोपर्सिकम (Solanum lycopersicum L.) नाम दिया गया है।
लाइकोपर्सिकॉन वंश को दो उप-वंशों (Sub-genera) में विभाजित किया गया है:
- यूलैकोपर्सिकॉन (Eulycopersicon): लाल फल वाले प्रकार।
- एरियोपर्सिकॉन (Eriopersicon): हरे फल वाले प्रकार।
इसके अंतर्गत दो प्रमुख प्रजाति संकुल (species complexes) आते हैं:
- एस्कुलेंटम संकुल (Esculentum complex - खेती योग्य टमाटर से संकरण योग्य):
L. esculentum, L. pimpinellifolium (करंट टमाटर / Currant tomato - रोगों के प्रति प्रतिरोधी), L. cheesmanii (लवण सहनशील), तथा L. hirsutum (कीट प्रतिरोधी)।
- पेरुवियानम संकुल (Peruvianum complex - सामान्यतः संकरण अयोग्य):
L. peruvianum (विषाणु एवं सूत्रकृमि प्रतिरोधी) तथा L. chilense।
4. पादप वानस्पतिकी एवं वृद्धि स्वभाव (Botany and Growth Habit)
टमाटर एक सत्य द्विगुणित पौधा है जिसमें गुणसूत्र संख्या $2n = 24$ होती है। यह शाकीय, अर्ध-प्रसारित तने वाला एकवर्षीय पौधा है जिसमें दो प्रकार का वृद्धि स्वभाव पाया जाता है:
-
A. असीमित वृद्धि स्वभाव (Indeterminate Growth Habit):
पौधे की शीर्ष कलिका (terminal bud) लगातार वानस्पतिक वृद्धि करती रहती है और फूल पत्तियों के कक्ष में पार्श्व शाखाओं पर निकलते हैं। पौधे लंबे, बेलनुमा होते हैं जिन्हें तार, डोरी या खूंटियों (staking/trellising) से सहारा देना आवश्यक होता है। (उदा. पूसा रूबी, अर्का विकास, पंत बहार)।
-
B. सीमित वृद्धि स्वभाव (Determinate Growth Habit):
पौधे की मुख्य शाखा की शीर्ष कलिका अंततः एक पुष्पगुच्छ (flower cluster) में समाप्त हो जाती है जिससे पौधे की ऊंचाई सीमित (झाड़ीनुमा) रहती है। सभी फल लगभग एक साथ पकते हैं जो एकसाथ कटाई (mechanical harvesting) हेतु उपयुक्त होते हैं। (उदा. पूसा अर्ली ड्वार्फ, रोमा, पंजाब छुहारा)।
-
C. अर्ध-सीमित वृद्धि स्वभाव (Semi-determinate):
यह सीमित और असीमित के बीच का मध्यवर्ती रूप होता है। (उदा. CO 1, CO 2, अर्का सौरभ)।
5. पुष्पीय जैविकी एवं परागण (Floral Biology and Pollination)
टमाटर मुख्य रूप से एक स्व-परागित फसल (Self-pollinated crop) है। स्व-परागण निम्नलिखित संरचनात्मक विशेषताओं के कारण होता है:
- उभयलिंगी फूल (Hermaphrodite / Bisexual flowers)।
- अंतर्मुखी वर्तिकाग्र (Introvert Stigma): वर्तिकाग्र पुंकेसरों के शंकु (staminal cone / anther cone) के भीतर सुरक्षित ढका रहता है।
- समकालिक परागकोश प्रस्फुटन (Synchronized anther dehiscence): परागकोश अंदर की ओर फटते हैं और वर्तिका के बढ़ते समय परागकण वर्तिकाग्र पर गिर जाते हैं।
- गर्म एवं शुष्क मौसम में कभी-कभी वर्तिकाग्र पुंकेसर शंकु से बाहर निकल आता है (exserted stigma), जिससे 0.5% से 4% तक पर-परागण (Cross-pollination) भी हो सकता है।
6. टमाटर की प्रमुख किस्में (Important Varieties of Tomato)
भारतीय अनुसंधान संस्थानों द्वारा विभिन्न जलवायु, प्रसंस्करण और विपणन आवश्यकताओं के लिए विकसित उन्नत किस्में:
A. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI, नई दिल्ली) द्वारा विकसित किस्में:
- पूसा रूबी (Pusa Ruby): 'सियोक्स' (Sioux) $\times$ 'इम्प्रूव्ड मीरिटी' के संकरण से विकसित। असीमित वृद्धि, फल मध्यम, चपटे-गोल, लाल, अम्लीय स्वाद। उपज $30-35\text{ t/ha}$।
- पूसा अर्ली ड्वार्फ (Pusa Early Dwarf): पूसा रूबी $\times$ EB-3 का संकरण। सीमित वृद्धि स्वभाव, बौना पौधा, जल्दी पकने वाली (बुवाई के 65-70 दिन बाद)। फल चपटे-गोल।
- पूसा 120 (Pusa 120): जड़-गांठ सूत्रकृमि (Root-knot nematode - Meloidogyne incognita) के प्रति प्रतिरोधी। फल बड़े, गोल, आकर्षक लाल।
- पूसा गौरव (Pusa Gaurav): सीमित वृद्धि, फल चिकने, अंडाकार, 2-3 कोष्ठकीय (locules), मोटा गूदा। लंबी दूरी के परिवहन और डिब्बाबंदी / प्रसंस्करण (canning & processing) के लिए सर्वोत्तम।
- पूसा रोहिणी (Pusa Rohini): सीमित वृद्धि, फल मध्यम, गोल, गहरे लाल, फल पकने के बाद भी लंबे समय तक सख्त रहते हैं (उत्कृष्ट शेल्फ लाइफ)।
- पूसा उपहार (Pusa Uphar): फल गोल, मध्यम आकार, गहरे लाल रंग के गुच्छों में लगते हैं। प्रसंस्करण (paste & puree) हेतु उपयुक्त।
- पूसा सदाबहार (Pusa Sadabahar): उच्च और निम्न तापमान दोनों परिस्थितियों में फल सेट करने की क्षमता। टोमैटो लीफ कर्ल वायरस (TLCV) के प्रति सहनशील।
B. भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR, हेसरघट्टा, बेंगलुरु) द्वारा विकसित 'अर्का' किस्में:
- अर्का विकास (Arka Vikas): सीमित वृद्धि, बड़े गोल फल ($100-120\text{ g}$), आकर्षक गहरे लाल, सूखा सहनशील। उपज $35-40\text{ t/ha}$।
- अर्का सौरभ (Arka Saurabh): अर्ध-सीमित, फल गोल, ठोस, उच्च TSS ($4.8-5.0^\circ\text{Brix}$) और उच्च अम्लता। ताजा बाजार और प्रसंस्करण दोनों हेतु उत्तम।
- अर्का आभा (Arka Abha / BWR-1): जीवाणु उकठा रोग (Bacterial Wilt - Ralstonia solanacearum) के प्रति प्रतिरोधी।
- अर्का आलोक (Arka Alok / BWR-5): सीमित वृद्धि, जीवाणु उकठा प्रतिरोधी, बड़े फल।
- अर्का आशीष (Arka Ashish): फल अंडाकार, 2 कोष्ठकीय, फल फटने के प्रति प्रतिरोधी, प्रसंस्करण हेतु आदर्श।
- अर्का अनन्य (Arka Ananya): TLCV (लीफ कर्ल वायरस) और जीवाणु उकठा दोनों के प्रति संयुक्त प्रतिरोधी संकर किस्म।
C. अन्य राज्य विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों द्वारा विकसित किस्में:
- पंजाब छुहारा (Punjab Chhuhara - PAU लुधियाना): सीमित वृद्धि, अत्यधिक सघन पर्णसमूह। फल नाशपाती/छुहारा के आकार के (pear-shaped), कम बीज, मोटी भित्ति, लंबी दूरी के परिवहन और प्रसंस्करण हेतु अत्यधिक लोकप्रिय।
- पंत बहार (Pant Bahar - GBPUAT पंतनगर): असीमित वृद्धि, अत्यधिक शाखाएं, फल गोल, हल्के खांचदार।
- रोमा (Roma): सीमित वृद्धि, नाशपाती के आकार के फल, मोटा छिलका, प्रसंस्करण और लंबी दूरी के परिवहन हेतु अंतर्राष्ट्रीय मानक किस्म।
- हिसार अरुण (Hisar Arun - HAU): अत्यधिक अगेती किस्म, अत्यधिक बौना पौधा, फल गुच्छों में लगते हैं।
- हिसार ललित (Hisar Lalit): जड़-गांठ सूत्रकृमि प्रतिरोधी किस्म।
- CO 1, CO 2, CO 3, PKM 1 (TNAU कोयंबटूर): तमिलनाडु एवं दक्षिण भारत में लोकप्रिय किस्में।
7. प्रमुख संकर किस्में (Important F1 Hybrids)
- पूसा हाइब्रिड 1 (Pusa Hybrid 1): सीमित वृद्धि, फल गोल, चमकीले लाल, अधिक तापमान पर भी फल सेट होता है। उपज $45-50\text{ t/ha}$।
- पूसा हाइब्रिड 2 (Pusa Hybrid 2): अर्ध-सीमित, गोल फल, सूत्रकृमि प्रतिरोधी।
- अर्का श्रेष्ठ (Arka Shrestha) एवं अर्का विशाल (Arka Vishal): IIHR द्वारा विकसित उच्च उपज ($75-80\text{ t/ha}$) और जीवाणु उकठा प्रतिरोधी संकर।
- COTH 1 एवं COTH 2 (TNAU): उच्च उपज ($90\text{ t/ha}$), गुच्छों में फलने वाले संकर।
- निजी क्षेत्र के लोकप्रिय संकर: रश्मि (Rashmi), वैशाली (Vaishali), रूपाली (Rupali), नवीन (Naveen), अविनाश 2 (Avinash-2), ही-मैन (He-Man), बादशाह (Badshah), गुलमोहर।
8. जलवायु एवं मृदा संबंधी आवश्यकताएं (Climate and Soil)
- जलवायु: टमाटर एक गर्म मौसम की संवेदनशील फसल है। पाले (frost) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
- बीज अंकुरण हेतु अनुकूलतम तापमान: $20^\circ - 25^\circ\text{C}$।
- वानस्पतिक वृद्धि एवं फल विकास हेतु: दिन का तापमान $21^\circ - 24^\circ\text{C}$ तथा रात का तापमान $15^\circ - 20^\circ\text{C}$।
- लाइकोपीन (लाल रंग वर्णक) निर्माण: $21^\circ - 24^\circ\text{C}$ पर सर्वाधिक होता है। जब तापमान $30^\circ\text{C}$ से ऊपर जाता है तो लाइकोपीन निर्माण बंद हो जाता है और केवल कैरोटीन (पीला रंग) बनता है।
- मृदा: उचित जल निकास वाली गहरी, भुरभुरी बलुई दोमट से चिकनी दोमट मृदा जिसका pH 6.0 से 7.0 हो, सर्वोत्तम मानी जाती है।
9. बुवाई का समय, बीज दर एवं नर्सरी प्रबंधन (Sowing Season, Seed Rate & Nursery)
| फसल सत्र (Season) |
नर्सरी में बुवाई का समय (Sowing Time) |
खेत में रोपाई का समय (Transplanting Time) |
| शरद/शीतकालीन फसल (Autumn/Winter Crop) | जून - जुलाई | जुलाई - अगस्त |
| वसंत/ग्रीष्मकालीन फसल (Spring/Summer Crop) | नवंबर - दिसंबर | दिसंबर - जनवरी |
| पहाड़ी क्षेत्रों में फसल (Hills) | मार्च - अप्रैल | अप्रैल - मई |
- बीज दर (Seed Rate):
- सामान्य खुली परागित किस्में (Open Pollinated): $400\text{ से }500\text{ g/ha}$।
- संकर किस्में (F1 Hybrids): $100\text{ से }150\text{ g/ha}$।
- नर्सरी प्रबंधन: $3\text{ m} \times 1\text{ m} \times 15\text{ cm}$ आकार की उठी हुई क्यारियां (raised beds) तैयार की जाती हैं। $1\text{ ha}$ की रोपाई के लिए $200-250\text{ m}^2$ नर्सरी क्षेत्रफल पर्याप्त होता है। ट्राइकोडर्मा ($4\text{ g/kg}$) या कैप्टन/थीरम ($2-3\text{ g/kg}$) से बीजोपचार कर $7.5\text{ cm}$ दूरी पर पंक्तियों में बुवाई की जाती है। 25 से 30 दिन बाद (4-6 पत्ती अवस्था पर) पौध रोपाई योग्य हो जाती है।
10. खेत की तैयारी, रोपाई एवं अंतरालन (Transplanting & Spacing)
खेत की 4-5 बार जुताई कर 80-90 सेमी चौड़ी क्यारियां या मेड़ें-नालियां (ridges & furrows) बनाई जाती हैं:
- सीमित किस्में (Determinate varieties): $60\text{ cm} \times 45-60\text{ cm}$।
- असीमित किस्में (Indeterminate varieties): $75-90\text{ cm} \times 60-75\text{ cm}$।
11. खाद एवं उर्वरक (Manures and Fertilizers)
- गोबर की अच्छी सड़ी खाद (FYM): $20-25\text{ t/ha}$ खेत की अंतिम जुताई के समय।
- उर्वरक मात्रा:
- सामान्य किस्में: 100-120 किग्रा N : 60-80 किग्रा P2O5 : 60-80 किग्रा K2O प्रति हेक्टेयर।
- संकर किस्में: 180-250 किग्रा N : 100-150 किग्रा P2O5 : 100-150 किग्रा K2O प्रति हेक्टेयर।
- फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा रोपाई के समय बेसल ड्रेसिंग के रूप में दें। शेष नाइट्रोजन को दो बराबर भागों में रोपाई के 30 और 45 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग करें।
12. सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई (Irrigation & Weed Management)
- गर्मियों में 3-4 दिन के अंतराल पर तथा सर्दियों में 7-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
- पुष्पन और फल विकास के समय जल तनाव (water stress) नहीं होना चाहिए। लंबे सूखे के बाद अचानक भारी सिंचाई करने से फल फटने (Fruit cracking) लगते हैं।
- खरपतवार नियंत्रण: पेंडीमेथालिन ($1.0\text{ kg a.i./ha}$) का रोपाई पूर्व छिड़काव तथा रोपाई के 45 दिन बाद एक निराई-गुड़ाई। पुआल या प्लास्टिक मल्चिंग मिट्टी का तापमान नियंत्रित करने और खरपतवार रोकने में अत्यधिक प्रभावी है।
13. सहारा देना एवं छंटाई (Training, Staking and Pruning)
असीमित वृद्धि वाली किस्मों में पौधों को जमीन पर गिरने से बचाने तथा फलों को मिट्टी और रोगों के संपर्क से दूर रखने हेतु लकड़ी की खूंटियों या जीआई तारों (GI wire trellising) से सहारा (Staking/Training) दिया जाता है। अवांछित पार्श्व शाखाओं को हटाकर (Pruning) फलों के आकार और गुणवत्ता में सुधार किया जाता है।
14. पादप वृद्धि नियामक (Plant Growth Regulators - PGRs)
विपरीत तापमान में फल सेट बढ़ाने, अगेती उपज प्राप्त करने और फलों के पकने को नियंत्रित करने हेतु उपयोगी रसायन:
| उद्देश्य (Purpose) |
वृद्धि नियामक एवं सांद्रता (PGR & Concentration) |
अनुप्रयोग विधि एवं समय (Application Method) |
| उच्च उपज एवं वृद्धि (High Yield) |
GA3 ($5-25\text{ ppm}$) |
बीजोपचार (Seed treatment)। |
| PCPA ($10-20\text{ ppm}$) |
पर्णीय छिड़काव। |
| NAA ($1000\text{ ppm}$) |
पर्णीय छिड़काव। |
| 2,4-D ($5\text{ ppm}$) |
पर्णीय छिड़काव। |
| फल सेट में वृद्धि (Increased Fruit Set) |
NAA ($0.1\text{ ppm}$) |
पौध की जड़ों को 24 घंटे डुबोना। |
| IAA ($50\text{ ppm}$) |
फूल आते समय छिड़काव। |
| ग्रीष्मकाल में फल सेट |
बोरेक्स ($1.0\%$) |
पर्णीय छिड़काव। |
| निम्न तापमान पर फल सेट बढ़ाना |
PCPA ($50-100\text{ ppm}$) |
पुष्प गुच्छों पर छिड़काव। |
| फलों का एकसमान पकना (Fruit Ripening) |
इथ्रेल / एथेफॉन (Ethrel: $1000\text{ ppm}$) |
फल पकने की शुरुआत पर संपूर्ण पौधे पर छिड़काव। |
15. तुड़ाई एवं परिपक्वता अवस्थाएं (Harvesting & Maturity Standards)
रोपाई के लगभग 70 दिन बाद तुड़ाई प्रारंभ हो जाती है। फलों को हल्का घुमाव देकर डंठल सहित तोड़ा जाता है:
- परिपक्व हरी अवस्था (Mature Green): फल पूरी तरह विकसित, रंग हरे से हल्का पीलापन लिए हुए। लंबी दूरी के बाजारों में परिवहन हेतु इस अवस्था पर तुड़ाई की जाती है।
- टर्निंग या ब्रेकर अवस्था (Turning / Breaker Stage): फल का $1/4$ भाग गुलाबी या लाल रंग में बदल जाता है लेकिन कंधा अभी पीला-हरा होता है। लंबी दूरी के विपणन हेतु सर्वोत्तम।
- गुलाबी अवस्था (Pink Stage): फल की सतह का $3/4$ भाग गुलाबी हो जाता है। स्थानीय बाजारों हेतु तुड़ाई।
- हल्की लाल अवस्था (Light Red): संपूर्ण सतह लाल/गुलाबी लेकिन गूदा सख्त। स्थानीय बाजार हेतु।
- पूर्ण लाल पकी अवस्था (Red Ripe / Hard Ripe): फल पूरी तरह लाल रंग का हो जाता है और गूदा मुलायम हो जाता है। प्रसंस्करण (processing/ketchup) एवं बीज उत्पादन हेतु तुड़ाई।
16. उपज (Yield)
- खुली परागित उन्नत किस्में: $20\text{ से }25\text{ t/ha}$ ($200-250\text{ क्विंटल/हेक्टेयर}$)।
- संकर किस्में (F1 Hybrids): $50\text{ से }80+\text{ t/ha}$ ($500-800\text{ क्विंटल/हेक्टेयर}$)।
17. प्रसंस्करण हेतु टमाटर के आवश्यक गुण (Qualities for Processing Tomatoes)
- गहरा आकर्षक लाल रंग (जो प्रसंस्करण के बाद भी बना रहे)।
- कम pH: पाश्चुरीकरण समय घटाने हेतु फल रस का pH $4.0\text{ से }4.5$ से कम होना चाहिए।
- उच्च कुल घुलनशील ठोस (High TSS): प्रति टन कच्चे फल से अधिक तैयार उत्पाद प्राप्त करने हेतु TSS न्यूनतम $4.5^\circ\text{Brix}$ होना चाहिए।
- फल भित्ति / पेरिकार्प की मोटाई $0.5\text{ cm}$ से अधिक तथा फल फटने के प्रति प्रतिरोधी।
- प्रसंस्करण हेतु आदर्श किस्में: पूसा गौरव, रोमा, पंजाब छुहारा, पूसा उपहार, अर्का सौरभ।
18. कार्यिकीय विकार (Physiological Disorders)
1. फल फटना (Fruit Cracking):
- अरीय दरारें (Radial Cracking): पके फलों में डंठल के सिरे से नीचे की ओर फैलती हैं (सर्वाधिक हानिकारक)।
- संकेंद्री दरारें (Concentric Cracking): फलों के कंधे के चारों ओर गोल छल्लों के रूप में।
- कारण: बोरॉन (Boron) की कमी, लंबे सूखे के बाद अचानक भारी सिंचाई, तथा दिन व रात के तापमान में भारी अंतर।
- रोकथाम: नियमित सिंचाई, मल्चिंग, तथा $0.2-0.3\%$ बोरेक्स का छिड़काव। प्रतिरोधी किस्में उगाएं (जैसे सियोक्स, पूसा रूबी, पंजाब छुहारा)।
2. ब्लॉसम एंड रॉट (Blossom End Rot - BER):
- लक्षण: फल के निचले सिरे (blossom end) पर जल-सिक्त धब्बे बनते हैं जो बाद में धंसे हुए, चपटे, गहरे भूरे या काले चमड़े जैसे हो जाते हैं।
- कारण: कैल्शियम ($Ca^{2+}$) की कमी तथा तीव्र वाष्पोत्सर्जन व अनियमित जलापूर्ति।
- रोकथाम: फल विकास के समय $0.5\%$ कैल्शियम क्लोराइड ($CaCl_2$) का पर्णीय छिड़काव तथा संतुलित सिंचाई।
3. सनस्कैल्ड (Sunscald):
तेज धूप और अत्यधिक गर्मी ($>38^\circ ext{C}$) के कारण पौधों की पत्तियां हटने पर सीधे सूर्य के संपर्क में आने वाले फलों की सतह पर सफेद या हल्के धूसर रंग के फफोलेनुमा धब्बे बन जाते हैं। सघन पत्तियों वाली किस्में लगाने से सनस्कैल्ड नहीं होता।
19. प्रमुख कीट एवं रोग प्रबंधन (Pest & Disease Management)
- टमाटर फल छेदक (Fruit Borer - Helicoverpa armigera): लार्वा पत्तियों और फलों में गोल छेद बनाकर अंदर का गूदा खाता है।
नियंत्रण: फेरोमोन ट्रैप (12/ha), ट्राइकोग्रामा परजीवी (50,000/ha), इंडोक्साकार्ब 14.5 SC ($1\text{ ml/L}$) या स्पाइनोसाड 45 SC ($0.3\text{ ml/L}$) का छिड़काव।
- टमाटर पर्ण कुंचन विषाणु (Tomato Leaf Curl Virus - TLCV): पत्तियां छोटी होकर ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं (कर्ल), पौधा झाड़ीनुमा बौना हो जाता है। इसका वाहक सफेद मक्खी (Whitefly - Bemisia tabaci) है।
नियंत्रण: नर्सरी में नायलॉन नेट (40 मेश), इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL ($0.3\text{ ml/L}$) या डाइमेथोएट ($1.5\text{ ml/L}$) का छिड़काव। प्रतिरोधी संकर (जैसे अर्का अनन्य, पूसा सदाबहार) लगाएं।
- जीवाणु उकठा रोग (Bacterial Wilt - Ralstonia solanacearum): पौधा बिना पीला पड़े अचानक दिन में मुरझा जाता है। तने को पानी में काटने पर सफेद जीवाणु स्राव (bacterial ooze) निकलता है।
नियंत्रण: प्रतिरोधी किस्में लगाएं (अर्का आभा, अर्का आलोक, अर्का श्रेष्ठ), स्ट्रेप्टोसाइक्लिन ($200\text{ ppm}$) से पौधों की जड़ों में ड्रेन्चिंग करें।
- अगेती एवं पछेती झुलसा (Early & Late Blight - Alternaria / Phytophthora): पत्तियों पर संकेंद्री छल्लेदार भूरे-काले धब्बे।
नियंत्रण: मैंकोजेब ($2.5\text{ g/L}$) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड ($3.0\text{ g/L}$) या मेटालैक्सिल-एमजेड ($2.0\text{ g/L}$) का छिड़काव।
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अस्वीकरण (Disclaimer):
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