फलों का राजा (King of fruits), आम (Mango) (Mangifera indica), भारत (India) में 400 से अधिक वर्षों से उगाया जा रहा है। विश्व में कुल आम उत्पादन (Total mango production) में भारत की हिस्सेदारी लगभग 56% है। स्वतंत्रता (Independence) के बाद से इसके उत्पादन में वृद्धि हो रही है, जो भारत के कुल फल उत्पादन (Total fruit production) का 39.5% योगदान देता है। कुल उत्पादन में आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) शीर्ष पर है, जबकि क्षेत्रफल (Area-wise) की दृष्टि से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सबसे ऊपर है। आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और गुजरात मिलकर भारत में कुल उत्पादन का लगभग 82% योगदान करते हैं।
आम (Mango) को विभिन्न जलवायु परिस्थितियों (Varied climatic conditions) के तहत विभिन्न प्रकार की मिट्टी (Wide variety of soils) पर उगाया जा सकता है। इसे जलोढ़ (Alluvial) से लेकर लेटराइट मिट्टी (Lateritic soils) तक उगाया जा सकता है, सिवाय खराब जल निकासी (Poor drainage) वाली काली कपास मिट्टी (Black cotton soil) के। यह हल्की अम्लीय पीएच (Slightly acidic pH) वाली मिट्टी में अच्छी तरह से बढ़ता है। यह 7.5 से अधिक पीएच (pH beyond 7.5) वाली मिट्टी में अच्छा प्रदर्शन नहीं करता है। अच्छी जल निकासी (Good drainage) वाली मिट्टी आम के लिए आदर्श (Ideal) होती है।
आम एक उष्णकटिबंधीय फल (Tropical fruit) है, लेकिन इसे औसत समुद्र तल (Mean sea level) से 1,100 मीटर ऊपर तक उगाया जा सकता है। फूल आने (Flowering) के दौरान उच्च आर्द्रता (High humidity), बारिश (Rain) या पाला (Frost) नहीं होना चाहिए। इसकी खेती (Cultivation) के लिए 24 और 27°C के बीच का तापमान आदर्श (Ideal) है। फल के विकास (Fruit development) और परिपक्वता (Maturity) के दौरान उच्च तापमान (Higher temperature) बेहतर गुणवत्ता (Better-quality) वाले फल देता है। लगातार बारिश (Frequent showers) और उच्च आर्द्रता (High humidity) वाले क्षेत्र कई कीटों (Pests) और बीमारियों (Diseases) के प्रति संवेदनशील (Prone) होते हैं। इस प्रकार इसे 25 सेमी और 250 सेमी के बीच वर्षा (Rainfall) वाले क्षेत्रों में सबसे अच्छी तरह से उगाया जा सकता है। फूल आने के दौरान तेज धूप वाले दिन (Bright sunny days) और मध्यम आर्द्रता (Moderate humidity) वाले क्षेत्र आम उगाने के लिए आदर्श (Ideal) हैं।
भारत लगभग 1,000 किस्मों (Varieties) का घर है। उनमें से अधिकांश खुले परागण (Open pollination) का परिणाम हैं जो संयोगवश उत्पन्न हुए अंकुर (Chance seedlings) के रूप में उगे हैं। हालांकि, पूरे भारत में व्यावसायिक रूप से (Commercially) केवल कुछ किस्मों की ही खेती (Cultivated) की जाती है।
| राज्य (State) | किस्में (Varieties) |
|---|---|
| आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) | बंगनपल्ली (Banganapalli), सुवर्णरेखा (Suvarnarekha), नीलम (Neelum) और तोतापुरी (Totapuri) |
| बिहार (Bihar) | बॉम्बे ग्रीन (Bombay green), चौसा (Chausa), दशहरी (Dashehari), फजली (Fazli), गुलाबखास (Gulabkhas), किशन भोग (Kishen Bhog), हिमसागर (Himsagar), जरदालु (Zardalu) और लंगड़ा (Langra) |
| गुजरात (Gujarat) | केसर (Kesar), अल्फांसो (Alphonso), राजापुरी (Rajapuri), जमादार (Jamadar), तोतापुरी (Totapuri), नीलम (Neelum), दशहरी (Dashehari) और लंगड़ा (Langra) |
| हरियाणा (Haryana) | चौसा (Chausa), दशहरी (Dashehari), लंगड़ा (Langra) और फजली (Fazli) |
| हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) | चौसा (Chausa), दशहरी (Dashehari) और लंगड़ा (Langra) |
| कर्नाटक (Karnataka) | अल्फांसो (Alphonso), तोतापुरी (Totapuri), बंगनपल्ली (Banganapalli), पैरी (Pairi), नीलम (Neelum) और मलगोआ (Mulgoa) |
| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) | अल्फांसो (Alphonso), बॉम्बे ग्रीन (Bombay Green), दशहरी (Dashehari), फजली (Fazli), लंगड़ा (Langra) और नीलम (Neelum) |
| महाराष्ट्र (Maharashtra) | अल्फांसो (Alphonso), केसर (Kesar) और पैरी (Pairi) |
| पंजाब (Punjab) | चौसा (Chausa), दशहरी (Dashehari) और मालदा (Malda) |
| राजस्थान (Rajasthan) | बॉम्बे ग्रीन (Bombay Green), चौसा (Chausa), दशहरी (Dashehari) और लंगड़ा (Langra) |
| तमिलनाडु (Tamil Nadu) | अल्फांसो (Alphonso), तोतापुरी (Totapuri), बंगनपल्ली (Banganapalli) और नीलम (Neelum) |
| उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) | बॉम्बे ग्रीन (Bombay Green), चौसा (Chausa), दशहरी (Dashehari) और लंगड़ा (Langra) |
| पश्चिम बंगाल (West Bengal) | फजली (Fazli), गुलाबखास (Gulabkhas), हिमसागर (Himsagar), किशनभोग (Kishenbhog), लंगड़ा (Langra) और बॉम्बे ग्रीन (Bombay Green) |
| राज्य (State) | उपलब्धता (Availability) |
|---|---|
| आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) | मार्च से मध्य अगस्त (March to mid – August) |
| बिहार (Bihar) | मई के अंत से मध्य अगस्त (May-end to mid-August) |
| गुजरात (Gujarat) | अप्रैल से जुलाई (April to July) |
| हरियाणा (Haryana) | जून से अगस्त (June to August) |
| हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) | मध्य जून से मध्य अगस्त (mid-June to mid- August) |
| कर्नाटक (Karnataka) | मई से जुलाई (May to July) |
| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) | मध्य अप्रैल से जुलाई (Mid-April to July) |
| महाराष्ट्र (Maharashtra) | अप्रैल से जुलाई (April to July) |
| राजस्थान (Rajasthan) | मई से जुलाई (May to July) |
| तमिलनाडु (Tamil Nadu) | अप्रैल से अगस्त (April to August) |
| उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) | मध्य मई से अगस्त (Mid-May to August) |
| पश्चिम बंगाल (West Bengal) | मई से अगस्त (May to August) |
भारत (India) में, आम मार्च (March) से मध्य अगस्त (mid-August) तक उपलब्ध रहता है। उत्तर भारतीय किस्में (North Indian cultivars) एकांतर-फलन (Alternate-bearer) वाली होती हैं जबकि दक्षिण भारतीय (South Indian) किस्में आमतौर पर नियमित-फलन (Regular-bearer) वाली होती हैं। लगभग 20 किस्में व्यावसायिक रूप से (Commercially) उगाई जाती हैं। वे हैं:
भारत की सबसे लोकप्रिय किस्मों (Most popular variety) में से एक, यह मुख्य रूप से महाराष्ट्र (Maharashtra) के रत्नागिरी (Ratnagiri) क्षेत्र में और कुछ हद तक दक्षिण गुजरात (South Gujarat) और कर्नाटक (Karnataka) के कुछ हिस्सों में उगाई जाती है। इसके फल मध्यम आकार (Medium-sized) (250 ग्राम) के होते हैं, जिनमें बेसल छोर (Basal end) की ओर आकर्षक लालिमा (Attractive blush) होती है। गूदा (Pulp) दृढ़ (Firm), बिना रेशे वाला (Fibreless) और उत्कृष्ट नारंगी रंग (Excellent orange colour) का होता है। इसमें चीनी: एसिड (Sugar: acid) का अच्छा मिश्रण (Blend) होता है। भंडारण क्षमता (Keeping quality) अच्छी है। यह स्पंजी ऊतक (Spongy tissue) के प्रति संवेदनशील (Susceptible) है。
दक्षिण भारत (South India) का व्यापक रूप से खेती (Widely cultivated) किया जाने वाला, जल्दी पकने वाला (Early-maturing) आम। यह आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) की मुख्य व्यावसायिक किस्म (Main commercial variety) है। इसके फल बड़े आकार (Large-sized) के होते हैं, जिनका औसत वजन (Average weighing) 350-400 ग्राम होता है। गूदा (Pulp) बिना रेशे वाला (Fibreless), दृढ़ (Firm) और मीठे स्वाद (Sweet taste) के साथ पीला (Yellow) होता है। फलों की भंडारण क्षमता (Keeping quality) अच्छी होती है।
यह उत्तर भारत (North India) की सबसे शुरुआती किस्मों (Earliest varieties) में से एक है। इसके फल मध्यम आकार (Medium-sized) के होते हैं, जिनका वजन लगभग 250 ग्राम होता है। फलों में तेज और सुखद सुगंध (Strong and pleasant flavour) होती है। गूदा (Pulp) नरम (Soft) और मीठा (Sweet) होता है।
उत्तर भारत की देर से पकने वाली किस्म (Late-maturing variety), यह जुलाई या अगस्त की शुरुआत में पकती है। फल बड़े (Large) होते हैं, जिनका वजन लगभग 350 ग्राम होता है। फल नरम (Soft) और मीठे गूदे (Sweet pulp) के साथ चमकीले पीले (Bright yellow) रंग के होते हैं। यह कम फलने वाली (Shy bearing) किस्म है।
उत्तर भारत की सबसे लोकप्रिय किस्मों (Most popular variety) में से एक, यह एक मध्य-मौसम (Mid-season) का आम है। फल सुखद सुगंध (Pleasant flavour), मीठे, दृढ़ और बिना रेशे वाले गूदे (Fibreless pulp) के साथ मध्यम आकार (Medium-sized) के होते हैं। गुठली (Stone) पतली होती है और भंडारण क्षमता (Keeping quality) अच्छी होती है।
यह बिहार (Bihar) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) का स्वदेशी (Indigenous) है। फजली एक देर से पकने वाला (Late-maturing) (अगस्त) आम है। फल दृढ़ से नरम गूदे (Firm to soft flesh) के साथ बड़े (Large) होते हैं। सुगंध (Flavour) सुखद (Pleasant) होती है और गूदा मीठा (Sweet) और बिना रेशे वाला (Fibre less) होता है। भंडारण क्षमता (Keeping quality) अच्छी है।
यह बिहार का स्वदेशी (Indigenous) है। नियमित और भारी फलन (Regular and heavy-bearer) वाला, यह मध्य-मौसम (Mid-season) का आम है। फल छोटे से मध्यम आकार (Small to medium-sized) के होते हैं। इसमें गुलाबी सुगंध (Rosy flavour) होती है। फल आधार (Base) और किनारों (Sides) पर लालिमा (Reddish blush) के साथ एम्बर-पीले (Ambre-yellow) रंग के होते हैं। भंडारण क्षमता (Keeping quality) अच्छी है।
पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बहुत लोकप्रिय, यह एक नियमित फलन (Regular-bearing) वाला आम है। इसके फल मध्यम आकार (Medium-sized) के होते हैं, जिनकी गुणवत्ता (Quality) अच्छी होती है। गूदा (Flesh) दृढ़ (Firm), पीला, बिना रेशे वाला (Fibreless) और सुखद सुगंध (Pleasant flavour) वाला होता है। भंडारण क्षमता (Keeping quality) अच्छी है।
गुजरात के सौराष्ट्र (Saurashtra) क्षेत्र में लोकप्रिय, केसर एक अनियमित फलन (Irregular-bearing) वाला आम है। फल मध्यम आकार (Medium-sized) के होते हैं। गूदा (Flesh) मीठा (Sweet) और बिना रेशे वाला (Fibreless) होता है। इसमें उत्कृष्ट चीनी: एसिड मिश्रण (Excellent sugar: acid blend) होता है। फल आकर्षक खुबानी-पीले रंग (Attractive apricot-yellow colour) के साथ लालिमा (Red blush) में पकते हैं। इसकी प्रसंस्करण गुणवत्ता (Processing quality) अच्छी है।
पश्चिम बंगाल का स्वदेशी (Indigenous), यह एक मध्य-मौसम (Mid-season) का आम है। फल सुखद सुगंध (Pleasant flavour) के साथ मध्यम से बड़े आकार (Medium to large-sized) के होते हैं। इसमें तारपीन (Turpentine) के निशान होते हैं। गूदा (Flesh) कुछ रेशों (Few fibres) के साथ दृढ़ (Firm) होता है। भंडारण क्षमता (Keeping quality) अच्छी है।
उत्तर भारत की एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक आम की किस्म (Commercial mango variety), यह द्विवार्षिक-फलन (Biennial-bearer) वाली और मध्य-मौसम (Mid-season) की किस्म है, जिसके फलों की गुणवत्ता अच्छी होती है। गूदा (Flesh) दृढ़ (Firm), नींबू-पीला (Lemon-yellow) रंग का और शायद ही रेशेदार (Scarcely fibrous) होता है। इसमें विशिष्ट तारपीन सुगंध (Characteristic turpentine flavour) होती है। भंडारण क्षमता (Keeping quality) मध्यम (Medium) होती है।
यह एक मध्य-मौसम किस्म (Mid-season variety) है, जो गोवा (Goa) में लोकप्रिय है। फल पीली त्वचा (Yellow skin) के साथ मध्यम आकार (Medium-sized) के होते हैं। गूदा (Flesh) दृढ़ (Firm), कैडमियम पीला (Cadmium yellow) और बिना रेशे वाला (Fibreless) होता है। भंडारण क्षमता (Keeping quality) अच्छी है।
दक्षिण भारत में एक भारी-उपज (Heavy-yielding), देर के मौसम (Late-season) का आम, इसकी नियमित-फलन आदत (Regular-bearing habit) है। फल अच्छी सुगंध (Good flavour) के साथ मध्यम आकार (Medium-sized) के होते हैं। गूदा (Flesh) नरम (Soft), पीला और बिना रेशे वाला (Fibreless) होता है। भंडारण क्षमता (Keeping quality) अच्छी है।
गोवा (Goa) सहित तटीय महाराष्ट्र (Coastal Maharashtra) का मूल निवासी (Native), यह जल्दी पकने वाला (Early-maturing), भारी (Heavy) और नियमित फलन (Regular-bearer) वाला आम है। फल अच्छी गुणवत्ता वाले मध्यम आकार (Medium-sized) के होते हैं। इसमें चीनी: एसिड मिश्रण (Sugar: acid blend) के साथ अच्छी सुगंध (Good flavour) होती है। गूदा (Flesh) नरम (Soft), प्रिमुलिन-पीला (Primuline-yellow) और बिना रेशे वाला (Fibreless) होता है। भंडारण क्षमता (Keeping quality) खराब (Poor) है।
दक्षिण भारत में व्यापक रूप से उगाया जाने वाला, तोतापुरी एक नियमित और भारी फलन (Regular and heavy-bearing) वाला आम है। फल प्रमुख साइनस (Prominent sinus) के साथ मध्यम से बड़े (Medium to large) होते हैं। फल की गुणवत्ता मध्यम (Medium) होती है। इसका एक विशिष्ट स्वाद (Typical flavour) और सपाट स्वाद (Flat taste) होता है। गूदा (Flesh) कैडमियम-पीला (Cadmium-yellow) और बिना रेशे वाला (Fibreless) होता है。
आम के कई चयन/संकर (Selections/hybrids) विकसित (Evolved) किए गए हैं। इनमें CISH, लखनऊ (Lucknow) में चयनित दशहरी (Dashehari) से क्लोन C-51 (Clone C-51), और परभणी (Parbhani) में चयनित एक बेमौसम चयन (Off-season selection), निरंजन (Niranjan) शामिल हैं। लंगड़ा (Langra) और सुंदरजा (Sunderja) से नए क्लोनल चयन (Clonal selections) वाराणसी (Varanasi) और रीवा (Rewa) में किए गए हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र (North-eastern region) में किए गए कुछ बौने बहुभ्रूणीय चयनों (Dwarf polyembryonic selections) के अलावा, नीलम (Neelum) से एक क्लोनल चयन (Clonal selection), पय्यूर 1 (Paiyur 1), किया गया है।
व्यवस्थित संकरण (Systematic hybridization) के परिणामस्वरूप, कई संकर (Hybrids) जारी किए गए हैं। हालांकि केवल कुछ ही व्यावसायिक रूप से स्वीकार्य (Commercially acceptable) हुए हैं। इनमें से, मल्लिका (Mallika), रत्ना (Ratna) और अर्क पुनीत (Arka Puneet) काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।
| संकर (Hybrid) | अनुसंधान का स्थान (Place of research) | वंशावली (Parentage) | महत्वपूर्ण लक्षण (Important characters) |
|---|---|---|---|
| मल्लिका (Mallika) | IARI, नई दिल्ली (New Delhi) | नीलम x दशहरी (Neelum x Dashehari) | नियमित-फलन (Regular-bearers), उच्च टीएसएस (High TSS), अच्छा रंग (Good colour), एक समान फल (Uniform fruits), मध्यम भंडारण क्षमता (Moderate keeping quality) |
| आम्रपाली (Amrapali) | IARI, नई दिल्ली (New Delhi) | दशहरी x नीलम (Dashehari x Neelum) | बौना (Dwarf), नियमित-फलन (Regular-bearers), गुच्छों में फलन (Cluster-bearing), छोटे आकार के फल (Small-sized fruits), अच्छी भंडारण क्षमता (Good keeping quality) |
| रत्ना (Ratna) | FRS, वेंगुर्ला (Vengurla) | नीलम x अल्फांसो (Neelum x Alphonso) | नियमित-फलन (Regular-bearers), स्पंजी ऊतक (Spongy tissue) और रेशे (Fibre) से मुक्त |
| सिंधु (Sindhu) | FRS, वेंगुर्ला (Vengurla) | रत्ना x अल्फांसो (Ratna x Alphonso) | नियमित-फलन (Regular-bearer), गुठली पतली (Stone thin) |
| अर्क पुनीत (Arka Puneet) | IIHR, बैंगलोर (Bangalore) | अल्फांसो x बंगनपल्ली (Alphonso x Banganapalli) | नियमित-फलन (Regular-bearer), आकर्षक त्वचा का रंग (Attractive skin colour), मध्यम आकार (Medium-sized), स्पंजी ऊतक (Spongy tissue) से मुक्त। अच्छी भंडारण क्षमता (Good keeping quality), अच्छा चीनी, एसिड मिश्रण (Good sugar, acid blend) |
आम एक अत्यधिक विषमयुग्मजी (Highly heterozygous) और पर-परागित (Cross-pollinated) फसल है। आम की किस्मों के 2 प्रकार (2 types) होते हैं। दक्षिण (South) में अधिकांश किस्में बहुभ्रूणीय (Polyembryonic) हैं और इस प्रकार सत्य-प्रकार के अंकुर (True-to-type seedlings) देती हैं। उत्तर (North) में, उगाई जाने वाली किस्में एकभ्रूणीय (Monoembryonic) होती हैं और उन्हें वानस्पतिक रूप से (Vegetatively) प्रसारित करने की आवश्यकता होती है।
आम को आम के रूटस्टॉक (Rootstock) पर प्रसारित किया जाता है। रूटस्टॉक (Rootstock) उगाने के लिए, आम के बीजों (Seeds) को निष्कर्षण (Extraction) के 4-5 सप्ताह के भीतर बोया जाता है अन्यथा वे अपनी व्यवहार्यता (Viability) खो देते हैं। बीज बोने के लिए, फार्मयार्ड खाद (Farmyard manure), लाल मिट्टी (Red soil) और रेत (Sand) के मिश्रण (Mixture) से उठी हुई क्यारियां (Raised beds) तैयार की जाती हैं। कुछ स्थानों पर, बीज सीधे पॉलीथीन बैग (Polythene bags) में बोए जाते हैं। अंकुरण (Germination) के बाद, 2-4 सप्ताह में पत्तियां (Leaves) हरी (Green) हो जाती हैं। इन बीजों (Seedlings) को लाल मिट्टी (Red soil), रेत (Sand) और फार्मयार्ड खाद (Farmyard manure) वाले पॉलीथीन कवर (Polythene covers) में प्रत्यारोपित (Transplanted) किया जाता है। पौधों के स्थापना (Establishment) के बाद पॉलीथीन कवर (Polythene covers) में नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक (Nitrogenous fertilizer) मिलाने से बीजों के त्वरित विकास (Quick growth) में मदद मिलती है। इस प्रकार उठाए गए बीजों का उपयोग विभिन्न आयु में ग्राफ्टिंग (Grafting) के लिए किया जाना चाहिए। ग्राफ्टिंग (Grafting) की कई विधियों (Methods) का अभ्यास किया जाता है। वे हैं:
विभिन्न स्थानों पर रोपण की विभिन्न प्रणालियों (Systems of planting) जैसे वर्गाकार (Square), आयताकार (Rectangular) और षट्कोणीय (Hexagonal) का पालन किया जाता है। हालाँकि, वर्गाकार (Square) और आयताकार (Rectangular) प्रणालियाँ भी लोकप्रिय हैं। रिक्ति (Spacing) किस्म की शक्ति (Vigour of the variety) और फसल प्रणाली (Cropping system) पर निर्भर करती है। रोपण का मौसम (Planting season) जून (Jun) से सितंबर (Sep) तक भिन्न होता है। मुख्य खेत (Main field) को अच्छी जुताई (Fine tilth) में लाया जाता है। 1m x 1m x 1m आकार के गड्ढे (Pits) खोदे जाते हैं। इन्हें लगभग 30 दिनों के लिए धूप (Sun) में खुला छोड़ दिया जाता है। रोपण से पहले, गड्ढों को अच्छी तरह से सड़ी हुई फार्मयार्ड खाद (Well-rotten farmyard manure) से भर दिया जाता है। गड्ढे खोदते समय ऊपरी मिट्टी (Top soil) और उप-मिट्टी (Sub-soil) को अलग-अलग निकाला जाता है। ग्राफ्ट्स (Grafts) को बारिश के मौसम (Rainy season) में लगाया जाना चाहिए। इन-सीटू ग्राफ्टिंग (In-situ grafting) में, रूटस्टॉक्स (Rootstocks) को मुख्य खेत में लगाया जाता है। फिर उन्हें 6 महीने से 1 साल तक पाला जाता है। फिर उस किस्म के सायन (Scions) जो उगाने की जरूरत है, ले लिए जाते हैं और ग्राफ्ट (Grafted) किए जाते हैं। यह आमतौर पर तब किया जाता है जब आर्द्रता (Humidity) अधिक होती है। ग्राफ्टिंग के बाद सायन (Scions) को पॉलीथीन कवर (Polythene covers) से ढक दिया जाता है।
उच्च-घनत्व रोपण (High-density planting) प्रति इकाई क्षेत्र उपज (Yield/unit area) बढ़ाने में मदद करता है। उत्तर भारत (North India) में, आम्रपाली (Amrapali) आम को 2.5m x 2.5m की दूरी (Spacing) के साथ उच्च-घनत्व रोपण के लिए अनुकूल (Amenable) पाया जाता है। पैक्लोबुट्राज़ोल (Paclobutrazol) (2 मिली/पेड़) के साथ मिट्टी को भिगोने (Soil drenching) से ऑफ ईयर (Off year) के दौरान फूल (Flowering) आने को प्रेरित (Induces) किया जाता है। यह महाराष्ट्र (Maharashtra) के कोंकण क्षेत्र (Konkan region) में एक व्यावसायिक अभ्यास (Commercial practice) बन गया है। यदि इसे छंटाई (Pruning) के साथ जोड़ा जाए, तो यह दशहरी (Dashehari) में प्रति इकाई क्षेत्र उत्पादन (Production /unit area) बढ़ाने में मदद करता है। बहुभ्रूणीय (Polyembryonic) आम वेल्लैकोलंबन (Vellaikolumban) जब रूटस्टॉक (Rootstock) के रूप में उपयोग किया जाता है, तो अल्फांसो (Alphonso) में बौनापन (Dwarfing) प्रदान करता है।
सधाई (Training) रोपण के बाद पहले कुछ वर्षों के दौरान एक महत्वपूर्ण अभ्यास है। अंतःकृषि कार्यों (Intercultural operations) को सुविधाजनक बनाने के लिए शाखाओं (Branches) को उचित रूप से जगह (Space) देना आवश्यक है।
आम की पोषण संबंधी आवश्यकता (Nutritional requirement) क्षेत्र (Region), मिट्टी के प्रकार (Soil type) और उम्र (Age) के साथ बदलती रहती है। पहले से दसवें वर्ष तक प्रति वर्ष (Year of age) 73 ग्राम N, 18 ग्राम P2O5 और 68 ग्राम K2O की खुराक (Dose), और उसके बाद 730 ग्राम N, 180 ग्राम P2O5 और 680 ग्राम K2O की खुराक 2 विभाजित खुराकों (Split doses) में क्रमशः जून-जुलाई और सितंबर-अक्टूबर के दौरान दी जानी चाहिए।
जिंक की कमी (Zinc deficiency) को दूर करने के लिए फरवरी, मार्च और मई के दौरान जिंक सल्फेट (Zinc sulphate) (0.3%) का छिड़काव (Spraying) अनुशंसित है। फल लगने (Fruit set) के बाद मासिक अंतराल (Monthly intervals) पर दो बार बोरेक्स (Borax) (0.5%) का छिड़काव और फूल आने (Blooming) के बाद 0.5% मैंगनीज सल्फेट (Manganese sulphate) क्रमशः बोरॉन (Boron) और मैंगनीज (Manganese) की कमियों (Deficiencies) को ठीक करता है।
जैविक खाद (Organic manures) और फॉस्फेटिक उर्वरक (Phosphatic fertilizers) कटाई (Harvest) के तुरंत बाद लगाए जाने चाहिए, जबकि अमोनियम শর্फेट (Ammonium sulphate) फूल आने (Flowering) से पहले दिया जाना चाहिए।
आम में, अंतरफसल (Intercropping) खरपतवार वृद्धि (Weed growth) को रोकने में मदद करती है और पोषक तत्वों की हानि (Nutrient losses) को कम करती है। उड़द-गेहूं-आम (Blackgram-wheat-mango) और बैंगन-प्याज-आम (Brinjal-onion-mango) की अंतरफसल बेहतर मौद्रिक लाभ (Monetary benefits) देती है। इसके अलावा, सनई (Sunhemp), लोबिया (Cowpea), मटर (Pea) जैसी कवर फसलें (Cover crops) लेने से मिट्टी के कटाव (Soil erosion) को रोकने में मदद मिलती है।
2 साल तक के छोटे पौधों (Young plants) को नियमित रूप से पानी दिया जाना चाहिए। नए लगाए गए ग्राफ्ट्स (Newly-planted grafts) को हर हफ्ते लगभग 30 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। फूल आने से पहले के चरण (Preflowering phase) के दौरान सिंचाई (Irrigation) फूल (Flowering) को बढ़ाती है। फल लगने (Fruit set) के बाद 10 दिन के अंतराल पर बड़े पेड़ों (Grown-up trees) की सिंचाई करने से उपज (Yield) बढ़ती है।
आमों को डंठल (Pedicel) के साथ काटा जाना चाहिए। कटाई के दौरान फलों को चोट (Injury) लगने से उनकी गुणवत्ता (Quality) कम हो जाती है और वे फंगल संक्रमण (Fungal attack) के प्रति भी संवेदनशील (Prone) हो जाते हैं। एक औसत आम का पेड़ 8 टन/हेक्टेयर उपज (Yields 8 tonnes /ha) देता है। फलने की उम्र (Bearing age) के दौरान प्रति पेड़ फलों की संख्या (Number of fruits per tree) आम तौर पर 1000 से 2000 फलों तक भिन्न होती है। आंध्र प्रदेश और बिहार में आम की उत्पादकता (Productivity) अधिक है। उत्तर भारतीय (North Indian) आम लंगड़ा और दशहरी एकांतर-फलन (Alternate-bearers) वाले हैं, जबकि अधिकांश दक्षिण भारतीय आम (South Indian mangoes) नियमित फलन (Regular bearers) वाले हैं। मल्लिका (Mallika) और आम्रपाली (Amrapali) आम भी तुलनात्मक रूप से नियमित-फलन (Regular-bearer) वाले हैं।
कटाई के बाद, आमों को उनके आकार के अनुसार श्रेणीबद्ध (Graded) किया जाता है। गुणवत्ता (Quality) बनाए रखने के लिए, उचित पैकेजिंग (Proper packaging) आवश्यक है। पश्चिमी क्षेत्र (Western region) में, पैकिंग के लिए बांस की टोकरियों (Bamboo baskets) का उपयोग किया जाता है। एक टोकरी में 50-100 फल होते हैं। पैकिंग के लिए पुआल (Straw) का उपयोग किया जाता है। कुछ जगहों पर लकड़ी के बक्से (Wooden boxes) का भी उपयोग किया जाता है। हालांकि, अब आम तौर पर छिद्रित कार्डबोर्ड (Perforated cardboard) का उपयोग किया जाता है। इन बक्सों में या तो फलों को पैकिंग से पहले अलग-अलग टिशू पेपर (Tissue paper) में लपेटा जाता है या कुशनिंग (Cushioning) के लिए पेपर शेविंग्स (Paper shavings) का उपयोग किया जाता है।
फसल के बाद के नुकसान (Post harvest losses) को कम करना सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं (Important aspects) में से एक है। आमतौर पर पेड़ों से काटे गए पके आमों की तुलना में हरे (Green) और परिपक्व (Mature) आमों को बेहतर ढंग से संग्रहीत (Stored better) किया जाता है। कम तापमान भंडारण (Low temperature storage), नियंत्रित वायुमंडलीय भंडारण (Controlled atmospheric storage), पकने में देरी (Delaying ripening) के लिए रासायनिक उपचार (Chemical treatment) का उपयोग, विकिरण (Irradiation), ताप उपचार (Heat treatment), पैकेजिंग (Packaging) और श्रिंक रैपिंग (Shrink wrapping) उनकी शेल्फ-लाइफ (Shelf-life) बढ़ाने के तरीके हैं। विभिन्न किस्मों (Different varieties) के भंडारण (Storing) के लिए 5-16°C का तापमान आदर्श (Ideal) है। आम कम तापमान की चोट (Low temperature injury) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (Highly susceptible) होते हैं। स्वाद की हानि (Loss of flavour) और अवांछनीय नरमी (Undesirable softening) का विकास चिलिंग इंजरी (Chilling injury) के प्रमुख लक्षण हैं।
नियंत्रित वायुमंडलीय भंडारण (Controlled atmospheric storage) के तहत, श्वसन गतिविधि (Respiratory activity) में मंदी (Retardation), नरम होने में देरी (Delaying of softening), रंग विकास (Colour development) और फलों की जीर्णता (Senescence of fruits) होती है। इसलिए, आम में इस विधि को नहीं अपनाया गया है। गर्म पानी के उपचार (Hot-water treatment) के साथ वैक्सिंग (Waxing) (3%) के संयोजन (Combination) से विस्तारित भंडारण जीवन (Extended storage life) के साथ अच्छी गुणवत्ता वाले फल (Good quality fruits) प्राप्त होते हैं। फल की व्यक्तिगत रैपिंग (Individual wrapping) समान रंग (Uniform colour) प्रदान करती है और संकोचन (Shrinkage) को कम करती है। 12°-15°C पर हाइड्रो-कूलिंग (Hydro-cooling) और 15°C पर 2 सप्ताह तक रखना, उसके बाद परिवेश के तापमान (Ambient temperature) पर 1 सप्ताह तक भंडारण फलों को अच्छा भंडारण जीवन (Good storage life) देता है।