लीची (LITCHI OR LYCHEE) - मिट्टी (Soil), जलवायु (Climate), रोपण (Planting), किस्में (Varieties), पोषक तत्व और जल प्रबंधन (Nutrient and Water Management), विशेष कृषि कार्य (Special Cultural Operations), शारीरिक विकार (Physiological Disorders), कीट और रोग (Pests and Diseases), प्रबंधन प्रथाएं (Management Practices)

लीची (LITCHI OR LYCHEE)

यह उत्कृष्ट गुणवत्ता (excellent quality) के रस वाले चीन (China) के गर्म उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र (warm subtropic zone) का एक मूल फल (native fruit) है। फल चीनी (sugar) (6-20%), प्रोटीन (protein) 0.7% और वसा (fat) (0.3%), कैल्शियम (calcium) (10mg), फास्फोरस (phosphorus) (35mg) जैसे खनिज (minerals) और विटामिन सी (vitamin C) (64mg), विटामिन बी1 (vitamin B1) (0.2mg), बी2 (B2) (0.03 mg) और बी3 (B3) (0.1 mg) प्रति 100 ग्राम जैसे विटामिनों (vitamins) का एक समृद्ध स्रोत (rich source) हैं। फलों को डिब्बाबंद (canned) किया जा सकता है, स्क्वैश (squash), अचार (pickles) और वाइन (wine) में बनाया जा सकता है या लीची नट (litchi nut) बनाने के लिए सुखाया (dried) जा सकता है। पेड़ एक मध्यम बड़ा सदाबहार (medium large evergreen) पेड़ है जिसमें अधिक शाखाएं (branches) होती हैं। फल गुच्छों (bunches) में लगते हैं। प्रत्येक फल एक बीज वाला अखरोट (one seeded nut) होता है, पेरीकार्प (pericarp) त्वचा (skin) है, जिसमें स्ट्रॉबेरी (strawberry) की तरह पैपिलाइट प्रोजेक्शन (papillate projection) होता है। बीज (seed) के चारों ओर मांसल एरिल (fleshy aril) खाने योग्य भाग (edible portion) है, जो बीज (seed) और त्वचा (skin) से आसानी से अलग हो जाता है। चीन (China), ताइवान (Taiwan), थाईलैंड (Thailand), भारत (India), दक्षिण अफ्रीका (South Africa), ऑस्ट्रेलिया (Australia) और मेडागास्कर (Madagascar) मुख्य लीची उगाने वाले देश (litchi growing countries) हैं।

जलवायु और मिट्टी की आवश्यकताएं (Climatic and soil requirements):

लीची (litchi) में वृद्धि (growth) और फूलने (flowering) के लिए एक गर्म उपोष्णकटिबंधीय जलवायु (warm subtropical climate) आदर्श है। सर्दी (winter) ठंडी (cool) के साथ-साथ शुष्क (dry) और पाले से मुक्त (devoid of frost) होनी चाहिए (न्यूनतम तापमान (minimum temperature) 15°C)। इसके बाद फूल आने (flowering) के दौरान हल्की बारिश (light rainfall) के साथ काफी लंबी गर्म (hot) (16-22°C) जलवायु होनी चाहिए और फिर मध्यम आर्द्रता (medium humidity) के साथ फ्रूटसेट (fruitset) (18-24°C) के दौरान उच्च तापमान (high temperature) होना चाहिए। कटाई (harvest) के दौरान तापमान 24-28°C के आसपास तेज धूप (bright sunlight) और उच्च सापेक्ष आर्द्रता (high relative humidity) के साथ होना चाहिए। नई फ्लश (new flush) के दौरान, उच्च आरएच (high RH) और भारी वर्षा (heavy rainfall) के साथ तापमान 28-30°C होना चाहिए। अच्छी जल निकासी (good drainage) और जल स्तर (water table) तक आसान पहुंच वाली जलोढ़ मिट्टी (alluvial soil) लीची (litchi) के विकास के लिए सबसे अच्छी है। पौधों में जड़ों (roots) से पत्तियों (leaves) तक पानी ले जाने की क्षमता कम (low ability to transport water) होती है। मिट्टी का पीएच (soil pH) 5.5 के आसपास होना चाहिए।

किस्में (CULTIVARS):

हाक यिप (Haak Yip):

फल दिल के आकार (heart shaped) का होता है, प्रत्येक का वजन 20-22 ग्राम होता है, त्वचा पतली, मुलायम और लाल-बैंगनी (purplish red) होती है। गूदे (Flesh) में एक उत्कृष्ट सुगंध (excellent aroma) होती है और स्वाद में मीठा होता है। यह गूदे से आसानी से अलग हो जाता है। यह थाईलैंड (Thailand), ताइवान (Taiwan) और चीन (China) की व्यावसायिक किस्म (commercial cultivar) है।

ताइसो (Taiso):

फल अंडे के आकार (eggshaped) के होते हैं, प्रत्येक का वजन 22-26 ग्राम होता है, चमकदार लाल त्वचा (bright red skin) परिपक्वता (maturity) पर सुस्त लाल (dull red) में बदल जाती है, गूदा (flesh) मीठा होता है। यह ऑस्ट्रेलिया (Australia), क्वींसलैंड (Queensland) और दक्षिण अफ्रीका (South Africa) की व्यावसायिक किस्म (commercial cultivar) है (जहां इसे मॉरीशस (Mauritius) के नाम से जाना जाता है)।

वाइची (Waichee):

फल गहरे लाल रंग की त्वचा (deep red skin) वाले छोटे (16-18 ग्राम) गोल होते हैं। इसमें प्रचुर मीठे रस (abundant sweet juice) के साथ मुलायम गूदा (soft flesh) होता है। इसकी खेती चीन (China) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) में की जाती है।

रोज सेंटेड (Rose scented):

फल गहरे गुलाबी रंग की त्वचा (deep rose pink skin), भूरे सफेद गूदे (grayish white pulp) के साथ आयताकार शंक्वाकार (oblong conical) होते हैं। एरिल (aril) में एक नाजुक गुलाबी स्वाद (delicate rosy flavour) होता है। यह भारत (India) की एक महत्वपूर्ण किस्म (important cultivar) है।

मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur):

फल मध्यम रसदार मीठे गूदे (medium juicy sweet pulp) के साथ गहरे नारंगी से गुलाबी (deep orange to pink) रंग के होते हैं। यह भारत (India) में उगाया जाता है।

बंबई (Bombai):

फल दिल के आकार (heart shaped) का होता है, वजन में 15-20 ग्राम आमतौर पर डंठल (stalk) से जुड़े एक अन्य अविकसित फल (under-developed fruit) के साथ होता है। ट्यूबरकल्स (Tubercles) यूरेनियम हरे इंटरस्पेस (uranium green interspace) के साथ कारमाइन लाल (carmine red) होते हैं। यह पश्चिम बंगाल (West Bengal) की एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक किस्म (commercial cultivar) है।

चीन (China):

फल नास्टर्टियम लाल (nasturtium red) और गेंदा नारंगी (marigold orange) के मिश्रण के साथ गोलाकार (globose) होते हैं। फल बड़े, 25-27 ग्राम के होते हैं जिनमें अच्छे रस (good juice) और सुखद सुगंध (pleasant aroma) के साथ मीठा गूदा (sweet flesh) होता है। यह भारत (India) की महत्वपूर्ण किस्मों (important cultivars) में से एक है।

प्रवर्धन और रोपण (Propagation and planting)

उच्च परिवर्तनशीलता (high variability) और लंबी किशोर अवधि (long juvenile period) से बचने के लिए, बीज प्रवर्धन (seed propagation) की सिफारिश नहीं की जाती है। 15-20 सेमी लंबाई की अर्ध-कठोर (Semihard) और कठोर लकड़ी की कटिंग (hard wood cuttings) जिन्हें पहले मदर प्लांट (mother plant) से जुड़े रहने के दौरान रिंग (ringed) किया गया था और फिर 10000 पीपीएम आईबीए (IBA) और फेरुलिक एसिड (Ferulic acid) के साथ इलाज किया गया था, आसानी से जड़ (root easily) बन जाएंगी। वसंत (spring) और शुरुआती गर्मी (early summer) के मौसम के दौरान की जाने वाली एयर लेयरिंग (Air layering) का व्यावसायिक रूप से (commercially) उपयोग किया जाता है। स्टूलिंग (Stooling), एपिकल ग्राफ्टिंग (apical grafting), अप्रोच ग्राफ्टिंग (approach grafting) और शील्ड बडिंग (shield budding) प्रवर्धन के अन्य तरीके (other methods of propagation) हैं।

खेत (land) को जुताई (ploughing) और समतलन (leveling) करके अच्छी तरह से तैयार किया जाना चाहिए। लीची के बगीचे (litchi orchard) की स्थापना के एक साल पहले अधिमानतः नीलगिरी (eucalyptus), कैसुरीना (casuarina), जामुन (jamun) का उपयोग करके लीची के बगीचे के चारों ओर एक विंडब्रेक (windbreak) स्थापित किया जाना चाहिए।

1 M x 1 M x 1 M के गड्ढे (Pits) खोदे जाते हैं, एक सप्ताह के लिए छोड़ दिए जाते हैं, 25 किलो FYM + 2 किलो बोन मील (bone meal) और 300 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश (muriate of potash) + माइकोरिज़ल कवक (mycorrhizal fungi) युक्त लीची के बगीचे से 1 टोकरी मिट्टी के साथ भरे जाते हैं। अनुशंसित दूरी (spacing recommended) 10 M x 10 M है। यदि मिट्टी उपजाऊ (fertile) नहीं है और जलवायु तुलनात्मक रूप से शुष्क (dry) है, तो दूरी को घटाकर 8 M x 8 M किया जा सकता है। युवा पौधों (young plants) को सहारा (staked) दिया जाना चाहिए।

सिंचाई और खाद (Irrigation and manuring):

युवा पौधों (young plants) की उचित स्थापना (proper establishment) के लिए पर्याप्त मिट्टी की नमी (adequate soil moisture) बनाए रखने के लिए लगातार सिंचाई (Frequent irrigation) आवश्यक है। यदि नमी का तनाव (moisture stress) है तो पौधे स्थापित (establish) नहीं होंगे। लीची की खाद की आवश्यकता (Manurial requirement) इस प्रकार है:

पेड़ की आयु (वर्ष) (Tree’s age (Years)) नाइट्रोजन (N) (g) फास्फोरस (P) (g) पोटेशियम (K) (g/tree)
1 75 25 75
2 100 25 100
3 150 50 150
4 250 75 250
5 250 75 250
6 वर्ष और उससे अधिक (6 years & above) 600 200 250

फल देने वाले पेड़ों (bearing trees) के लिए भी मिट्टी में नमी का तनाव (moisture stress) नहीं होना चाहिए।

ट्रेनिंग और इंटरकल्चर (Training and interculture):

संकीर्ण क्रोच (narrow crotches) वाली शाखाओं (Branches) को हटा दिया जाना चाहिए। शाखाओं (branching) को प्रोत्साहित करने के लिए लंबी शाखाओं वाली किस्मों (long branching cultivars) में टर्मिनल कलियों (Terminal buds) को हटा दिया जाना चाहिए। हालांकि वानस्पतिक विकास (vegetative growth) को अत्यधिक हटाने से बचा जाना चाहिए क्योंकि अन्यथा यह अगले मौसम के फूलने (next season flowering) में देरी करेगा। मिट्टी की नमी (soil moisture) को संरक्षित करने के लिए ज्वार के ठूंठ (Sorghum stubble), गेहूं के भूसे (wheat straw), मूंगफली के छिलके (groundnut shells) का उपयोग मल्च (mulch) के रूप में किया जा सकता है.

पौधा संरक्षण (Plant protection):

बार्क फीडर (bark feeder) (Indarbela tetraonis) को कार्बन डाइसल्फाइड (carbondisulphide) या फॉर्मेलिन (formalin) लगाने के बाद छिद्रों (holes) को प्लग करके नियंत्रित किया जा सकता है। लीफ रोलर्स (Leaf rollers) को नुवान (Nuvan) जैसे कीटनाशक (insecticide) द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है जिसमें फ्यूमिगेंट एक्शन (fumigant action) भी होता है। लाल जंग (Red rust) को शरद ऋतु (autumn) के दौरान 3 बार और वसंत (spring) के दौरान 3 बार लाइम - सल्फर (lime - sulphur) का छिड़काव करके नियंत्रित किया जा सकता है।

पत्ती के पित्त (Leaf galls), जो एरियोफिड घुन (eriophid mite) एसेरिया लीची (Aceria litchi) के कारण होते हैं, एक आम समस्या है। इसे छंटाई (pruning) और पारंपरिक (conventional) (या) नए एवरमेक्टिन यौगिकों (new avermectin compounds) जैसे स्पिनोसिन (spinosyn), एमेक्टिन (emamectin), स्पाइरोमेसिफेन (spiromesifen) आदि के छिड़काव से कम किया जा सकता है।

फूल आना, कटाई और उपज (Flowering, harvest and yield):

वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित (vegetatively propagated) लीची के पेड़ 3-5 साल की उम्र में फूल (flower) देते हैं। वसंत (spring) के अंत में उठने वाला नया फ्लश (new flush) पुष्पक्रम (inflorescence) में समाप्त होता है। फलों को पूर्ण परिपक्वता (full maturity) के बाद और पेड़ (tree) पर ही पकने (ripening) पर काटा जाता है। फलों को गुच्छों (bunches) के रूप में काटा जाता है, पहले से ठंडा (precooled) किया जाता है और फिर 0°C से 1°C पर संग्रहीत (stored) किया जाता है।

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