08. तोरई की उत्पत्ति, क्षेत्रफल, उत्पादन, किस्में एवं सस्य प्रबंधन (ORIGIN, AREA, PRODUCTION, VARIETIES, PACKAGE OF PRACTICES FOR RIDGE GOURD)

वानस्पतिक नाम एवं सामान्य परिचय (Botany and Introduction)

धारीदार तोरई (Ridge Gourd): Luffa acutangula Roxb. (गुणसूत्र संख्या: $2n = 26$) (हिंदी: घिया तोरई)।

चिकनी तोरई / स्पंज तोरई (Smooth Gourd): Luffa cylindrica Roem. (गुणसूत्र संख्या: $2n = 26$) (हिंदी: काली तोरई / नेनुआ)।

धारीदार या पसलियों वाली तोरई (ridge or ribbed gourd) और चिकनी या स्पंज तोरई (smooth or sponge gourd) दोनों लूफा (Luffa) वंश से संबंधित हैं। वंश का नाम इसके उत्पाद 'लूफाह' (Loofah) से लिया गया है जिसका उपयोग नहाने के स्पंज (bathing sponges), बर्तन मांजने के स्क्रबर पैड (scrubber pads), पायदान (doormats), जूतों के इनसोल (soles for shoes) और ध्वनि रोधी (sound proof) लाइनिंग बनाने में किया जाता है। अपरिपक्व फल आसानी से पचने वाली सब्जी के रूप में पकाने हेतु प्रयुक्त होते हैं। इसके फलों में 'लुफीन' (Luffein) नामक कड़वा यौगिक पाया जाता है।

Ridge Gourd and Sponge Gourd Varieties
Ridge Gourd and Sponge Gourd Varieties
Ridge Gourd and Sponge Gourd Varieties
Ridge Gourd and Sponge Gourd Varieties
Ridge Gourd and Sponge Gourd Varieties

उत्पत्ति एवं वितरण (Origin and Distribution)

धारीदार तोरई की उत्पत्ति का सटीक स्थान ज्ञात नहीं है। चिकनी तोरई (smooth gourd) दक्षिण एशिया, अफ्रीका या ऑस्ट्रेलिया की मूल निवासी मानी जाती है।

धारीदार तोरई की उन्नत किस्में (Varieties - Ridge Gourd)

विकसित करने वाली संस्था (Developing Institution) किस्म का नाम (Variety) प्रमुख विशेषताएं (Special Features)
IIHR, बैंगलोर अर्का सुमीत (Arka Sumeet) फल लंबे ($55\text{ cm}$), गहरे हरे, आकर्षक उभरी हुई पसलियों वाले, पहली तुड़ाई बुवाई के 50-55 दिन बाद। उपज $28-30\text{ t/ha}$ (160 दिन)।
अर्का सुजाता (Arka Sujat) फल बेलनाकार, सीधे, हल्के हरे, बिना कड़वाहट वाले, कोमल गूदे वाले। उपज $25-28\text{ t/ha}$।
IARI, नई दिल्ली पूसा नसदार (Pusa Nasdar) फल क्लब के आकार के, हल्के हरे, 10 प्रमुख धारियों वाले, लंबाई $15-20\text{ cm}$। उपज $15-18\text{ t/ha}$।
GBPUA&T, पंतनगर पंत तोरई-1 (Pant Torai-1) फल $15-20\text{ cm}$ लंबे, हल्के हरे, अगेती किस्म। उपज $15\text{ t/ha}$।
TNAU, तमिलनाडु CO.1 फल मध्यम लंबे ($60-75\text{ cm}$), गहरे हरे, वजन $300-400\text{ g}$, प्रति किलो 2-3 फल। उपज $14\text{ t/ha}$।
CO.2 फल अत्यंत लंबे ($90-100\text{ cm}$), वजन $350-400\text{ g}$, हरी त्वचा पर उथली धारियां, अवधि 120 दिन। उपज $25\text{ t/ha}$।
PKM-1 फल लंबे, गहरे हरे, उच्च उपजशील।
HARP, रांची स्वर्ण मंजरी (Swarna Manjari) चूर्णिल आसिता (powdery mildew) रोग के प्रति अत्यधिक सहिष्णु/प्रतिरोधी, फल मध्यम लंबे, फसल अवधि 140-150 दिन।
PAU, लुधियाना पंजाब सदाबहार (Punjab Sadabahar) फल लंबे, पतले, सीधे से हल्के मुड़े हुए। उपज $10\text{ t/ha}$।
KKV, दापोली कोंकण हरिता (Konkan Harita) फल गहरे हरे, सीधे, $30-45\text{ cm}$ लंबे। उपज $10-12\text{ t/ha}$।

चिकनी तोरई की उन्नत किस्में (Varieties - Sponge Gourd)

विकसित करने वाली संस्था (Developing Institution) किस्म का नाम (Variety) प्रमुख विशेषताएं (Special Features)
IARI, नई दिल्ली पूसा चिकनी (Pusa Chikni) फल गहरे हरे, सीधे, चिकने, $20-25\text{ cm}$ लंबे। ग्रीष्म एवं वर्षा दोनों ऋतुओं हेतु उपयुक्त। उपज $15-18\text{ t/ha}$।
पूसा सुप्रिया (Pusa Supriya) फल लंबे, सीधे, आकर्षक हरे, $20-25\text{ cm}$ लंबे। उपज $18\text{ t/ha}$।
पूसा स्नेहा (Pusa Sneha) लंबी दूरी के परिवहन हेतु उपयुक्त, फल गहरे हरे, $20-25\text{ cm}$ लंबे, कठोर छिलका और कोमल गूदा। उपज $12\text{ t/ha}$।
MPAU, राहुरी फुले प्राजक्ता (Phule Prajakta) फल बेलनाकार, हल्के हरे, $25-30\text{ cm}$ लंबे। उपज $15\text{ t/ha}$।
BAC, RAU, सबौर (बिहार) राजेन्द्र नेनुआ 1 (Rajendra Nenua 1) फल सीधे, हरे, कोमल गूदे वाले, उत्कृष्ट स्वाद। उपज $12-15\text{ t/ha}$।

जलवायु एवं मृदा (Climate and Soil)

तोरई एक विशिष्ट गर्म और नम (warm and humid) मौसम की फसल है। यह पाले (frost) के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। उचित जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मृदा, जिसका pH $6.0 - 7.0$ हो, तोरई की सफल खेती के लिए सर्वोत्तम होती है।

सस्य क्रियाएं (Cultivation Practices)

खेत की तैयारी, बुवाई, खाद-उर्वरक आवश्यकता एवं सिंचाई प्रबंधन की सभी सस्य क्रियाएं करेले (bitter gourd) के समान होती हैं। खेत में $1.5 - 2.0\text{ m}$ की दूरी पर नालियां बनाकर $0.6\text{ m}$ के अंतराल पर थालों में बुवाई की जाती है।

तुड़ाई एवं उपज (Harvesting and Yield)

फलों की तुड़ाई कोमल एवं अपरिपक्व अवस्था में की जाती है जब फल पूरी तरह कोमल और रेशारहित हों। तुड़ाई के पश्चात फलों को ठंडे वातावरण में $3 - 4$ दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। औसत उपज: $7.5 - 15.0\text{ t/ha}$ होती है। पसलियों वाली तोरई में $5 - 7$ दिन के अंतराल पर कुल $8 - 10$ बार तुड़ाई की जाती है।

कुकुरबिट्स के प्रमुख कीट एवं उनका समेकित नियंत्रण (Pests and Integrated Management)

फल मक्खी, लाल कद्दू भृंग और एपिलाखना बीटल अधिकांश कुकुरबिट्स को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अतिरिक्त गॉल फ्लाई, एफिड्स, लीफ हॉपर, चींटियां, कीट, भूमिगत सेमी लूपर्स, लीफ माइनर्स, फ्रूट बोरर्स और माइट्स विशिष्ट कुकुरबिट्स को प्रभावित करते हैं। प्रकोप की तीव्रता स्थान-स्थान पर भिन्न होती है।

1. फल मक्खी (Fruit Fly - Bactrocera cucurbitae)

यह कुकुरबिट्स का सबसे विनाशकारी कीट है। इसका प्रकोप विशेष रूप से वर्षा ऋतु में अधिक गंभीर होता है। मादा मक्खी कोमल फलों के छिलके के ठीक नीचे $1.0 - 2.0\text{ mm}$ गहराई पर अंडे देती है। $4 - 5$ दिनों में अंडों से मैगट्स (maggots) बाहर निकलते हैं और आंतरिक गूदे को खाकर सड़ा देते हैं। ग्रसित फल से गोंद जैसा स्राव निकलता है, फल विकृत हो जाता है और समय से पूर्व सड़कर गिर जाता है। मैगट अवस्था $9 - 12$ दिन की होती है और पूर्ण विकसित मैगट फल से बाहर निकलकर भूमि में $0.5 - 1.0\text{ inch}$ गहराई पर प्यूपा (pupa) में बदल जाता है। प्यूपा अवस्था $8 - 9$ दिन तक चलती है।

नियंत्रण उपाय:

2. लाल कद्दू भृंग (Red Pumpkin Beetle - Aulacophora foveicollis)

यह कीट अंकुरण से लेकर प्रारंभिक वानस्पतिक अवस्था तक पौधों को भारी नुकसान पहुंचाता है। चमकदार नारंगी-लाल रंग का वयस्क भृंग पत्तियों में छेद कर देता है और कभी-कभी पूर्ण पर्णविहीनता (defoliation) कर देता है। मादा भृंग पौधे के आधार के पास मिट्टी में अंडे देती है। अंडों से निकलने वाले ग्रब (grubs) भूमि के अंदर जड़ों और तने के भूमिगत भाग को खाकर नुकसान पहुंचाते हैं जिससे पौधा सूख जाता है।

नियंत्रण उपाय: अंकुरण के तुरंत बाद कार्बेरिल ($0.2\%$) या मैलाथियान ($0.15\%$) का छिड़काव करें। नव-अंकुरित पौधों की सुरक्षा हेतु पौधे के आधार पर $3-4\text{ cm}$ गहराई पर फ्यूराडान 3G (Furadan 3G) दाने डालें।

3. एपिलाखना बीटल (Epilachna Beetle - Epilachna septima)

यह करेला और चिचिंडा का एक गंभीर कीट है। वयस्क भृंग पत्तियों में छेद करते हैं। पत्तियों की निचली सतह पर बड़ी संख्या में पीले रंग के कांटेदार ग्रब (yellow thorny grubs) देखे जाते हैं जो क्लोरोफिल को खुरचकर खा जाते हैं, जिससे पत्तियां पूरी तरह जालीदार (skeletonisation of leaves) हो जाती हैं। नियंत्रण हेतु मैलाथियान ($0.15\%$) या कार्बेरिल का छिड़काव करें।

4. एफिड्स / माहू (Aphids - Aphis gossypii)

छोटे हरे-काले कीट पत्तियों की निचली सतह और कोमल प्ररोहों से रस चूसते हैं। पत्तियां मुड़ जाती हैं और पौधे की वृद्धि रुक जाती है। ये मीठे चिपचिपे तरल (honey dew) का उत्सर्जन करते हैं जिस पर काली फफूंद (Sooty mould) जम जाती है। यह कीट कुकुम्बर मोजेक वायरस (CMV) का प्रमुख वाहक भी है। नियंत्रण हेतु डाइमेथोएट ($0.05\%$) या मेटासिस्टॉक्स ($0.15\%$) का छिड़काव करें।

5. सर्पिलाकार लीफ माइनर (Serpentine Leaf Miner - Liriomyza trifolii)

यह कीट पत्तियों के भीतर टेढ़ी-मेढ़ी सर्पिलाकार सफेद सुरंगें बनाता है। मादा मक्खी पत्तियों के किनारे अंडे देती है और सुरंग बनाते हुए केंद्र की ओर बढ़ती है। सुरंग के सिरे पर पीले रंग का लार्वा देखा जा सकता है। लार्वा अवधि $4-6$ दिन होती है। प्यूपा बनने से पहले लार्वा पत्ती पर अर्धचंद्राकार चीरा लगाकर सुबह $8:00$ बजे से पूर्व जमीन पर गिर जाता है। नियंत्रण हेतु पीले चिपचिपे कार्ड (Yellow sticky traps) लगाएं, सूखी ग्रसित पत्तियों को जलाएं और सूर्योदय से पूर्व नीम तेल-लहसुन मिश्रण का छिड़काव करें।

6. गॉल फ्लाई (Gall Fly - Lasioptera falcata)

मच्छर जैसी आकृति वाली गॉल फ्लाई करेला, चिचिंडा और कुंदरू के कोमल तनों में अंडे देती है। तने के अंदर अनेक लार्वा भोजन करते हैं जिससे तना फूलकर मोटी गांठ (gall) बन जाता है और पौधे की वृद्धि रुक जाती है। प्रकोप दिखने पर सिंचाई और नाइट्रोजन उर्वरकों को सीमित करें, गांठों को काटकर नष्ट करें तथा गंभीर अवस्था में प्रणालीगत कीटनाशकों का छिड़काव करें।

प्रमुख कवक एवं जीवाणु रोग (Diseases and Management)

1. फ्यूजेरियम विल्ट / उकठा रोग (Fusarium Wilt - Fusarium oxysporum)

यह तरबूज, खरबूजा, लौकी आदि का एक अत्यंत गंभीर मृदा-जनित रोग है। छोटे पौधों में बीजपत्र लटक जाते हैं और सूख जाते हैं। बड़े पौधे अचानक मुरझा जाते हैं और कॉलर क्षेत्र में संवहनी बंडल (vascular bundles) भूरे रंग के हो जाते हैं। नियंत्रण: प्रतिरोधी किस्में उगाएं, गैर-पोषी फसलों से फसल चक्र अपनाएं, बीजों को $55^\circ\text{C}$ गर्म जल में 15 मिनट उपचारित करें तथा कार्बेन्डाजिम से मृदा को तर (drenching) करें।

2. कॉलर रॉट एवं पिथियम रॉट (Collar Rot - Rhizoctonia solani / Pythium sp.)

भूमि की सतह पर तने के आधार पर गहरे भूरे, जल-सिक्त घाव (water-soaked lesions) बनते हैं जो तने को चारों ओर से घेर लेते हैं और पौधा मर जाता है। यह जलभराव और वर्षा ऋतु में अधिक गंभीर होता है। नियंत्रण: थीरम ($3\text{ g/kg}$) से बीजोपचार करें, उठी हुई क्यारियों (raised beds) पर बुवाई करें तथा रिडोमिल ($0.2\%$) या कार्बेन्डाजिम ($0.1\%$) से जड़ों के पास मृदा तर करें।

3. चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew - Sphaerotheca fuliginea / Erysiphe cichoracearum)

यह रोग कद्दू, लौकी, खरबूजा और खीरे में वर्षा-रहित शुष्क अवधियों में अत्यधिक विनाशकारी होता है। पत्तियों पर सफेद से मटमैले भूरे रंग के धब्बे बनते हैं जो फैलकर पूरे पौधे को सफेद चूर्ण से ढक देते हैं जिससे पत्तियां सूखकर गिर जाती हैं। नियंत्रण: कैराथेन ($0.5\%$), कैलिक्सिन ($0.05\%$) या कार्बेन्डाजिम ($0.1\%$) का पाक्षिक छिड़काव करें।

4. मृदुरोमिल आसिता (Downy Mildew - Pseudoperonospora cubensis)

उच्च आर्द्रता और वर्षा ऋतु में करेला, चिचिंडा, खरबूजा, लौकी और तोरई में यह रोग व्यापक रूप से फैलता है। पत्ती की निचली सतह पर जल-सिक्त धब्बे और ऊपरी सतह पर कोणीय पीले धब्बे बनते हैं। रोग बहुत तेजी से फैलता है। नियंत्रण: ग्रसित पत्तियों को तोड़कर नष्ट करें तथा पत्तियों की निचली सतह पर डायथेन एम-45 ($0.2\%$) या रिडोमिल एमजेड ($0.2\%$) का छिड़काव करें।

5. एंथ्रेक्नोज (Anthracnose - Colletotrichum lagenarium)

गर्म और आर्द्र परिस्थितियों में तरबूज, लौकी, खीरा और चिचिंडा में यह रोग महामारी का रूप ले लेता है। युवा फलों पर धंसे हुए अंडाकार जल-सिक्त धब्बे बनते हैं जो आपस में मिलकर बड़े क्षेत्र को ढक लेते हैं। आर्द्र मौसम में इन धब्बों के केंद्र में गुलाबी रंग के बीजाणु समूह (pink masses of spores) और गुलाबी गोंद जैसा स्राव दिखाई देता है। लताओं पर भूरे रंग के धब्बे बनकर झुलसा लक्षण उत्पन्न करते हैं। नियंत्रण: कार्बेन्डाजिम ($25\text{ g/kg}$) से बीजोपचार करें तथा इंडोफिल एम-45 ($0.35\%$) या बेनोमिल ($0.1\%$) का 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।

6. अल्टरनेरिया झुलसा एवं फल सड़न (Alternaria Blight - Alternaria cucumerina)

पत्तियों पर पीले धब्बे बनते हैं जो भूरे और फिर काले हो जाते हैं तथा संकेंद्री छल्ले (concentric rings) बनाते हैं। गंभीर रूप से ग्रसित लताएं जले हुए कोयले (burnt charcoal) जैसी दिखाई देती हैं। नियंत्रण: इंडोफिल एम-45 ($0.25\%$) का $10 - 15$ दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।

विषाणु जनित रोग एवं समेकित नियंत्रण (Mosaic and Viral Diseases)

विभिन्न कुकुरबिट्स में विषाणु रोग व्यापक क्षति पहुंचाते हैं। सघन खेती और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से यह समस्या बढ़ रही है। एफिड्स द्वारा संचरित कुकुम्बर मोजेक वायरस (CMV), वाटरमेलन मोजेक वायरस (WMV), यांत्रिक रूप से फैलने वाले टोबैको वायरस समूह तथा सफेद मक्खी द्वारा संचरित पीत शिरा मोजेक वायरस (YVMV) प्रमुख हैं। लक्षणों में मोजेक चितकबरापन, पत्तियों का मुड़ना व ऐंठना, पर्वसंधियों का छोटा होना और पौधा बौना रह जाना सम्मिलित हैं जिससे फलन और उपज पूरी तरह नष्ट हो जाती है।

समेकित विषाणु नियंत्रण उपाय:

सूत्रकृमि प्रबंधन (Nematodes - Meloidogyne incognita acrita)

कुकुरबिट्स रूट नॉट निमेटोड के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। लक्षणों में समय से पूर्व पत्तियों का गिरना, मुरझाना, वृद्धि में गिरावट तथा जड़ों में विशिष्ट गांठें (root galls) बनना शामिल हैं। नियंत्रण: प्रतिरोधी किस्में उगाएं, गैर-पोषी फसलों से फसल चक्र अपनाएं, ग्रीष्म ऋतु में लगातार गहरी जुताई करें, पॉलीथीन शीट से मृदा सौरीकरण (soil solarization) करें तथा निमेटिसाइड्स से मृदा धूमीकरण (soil fumigation) करें।

तमिलनाडु में उर्वरक अनुप्रयोग (Application of Fertilizers in Tamil Nadu)

प्रति थाला $10\text{ kg}$ गोबर की खाद (FYM), $100\text{ g}$ NPK 6:12:12 मिश्रण बेसल ड्रेसिंग के रूप में दें तथा बुवाई के 30 दिन बाद $10\text{ g}$ नाइट्रोजन प्रति थाला डालें।

समीक्षा प्रश्न / वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Review Questions / MCQs)

  1. 'Luffa' शब्द इसके स्पंज जैसे गुणों के कारण किस भाषा से व्युत्पन्न हुआ है?
    (a) ग्रीक (Greek)
    (b) लैटिन (Latin)
    (c) अरबी (Arabic - सही उत्तर)
    (d) संस्कृत
  2. धारीदार तोरई की वृद्धि हेतु अनुकूलतम तापमान कितना है?
    (a) 10-15°C
    (b) 15-25°C
    (c) 25-35°C (सही उत्तर)
    (d) 35-40°C
  3. धारीदार तोरई की कौन सी किस्म डाउन्य मिल्ड्यू (mriduromil aasita) के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है?
    (a) अर्का नसदार
    (b) पूसा नसदार (सही उत्तर)
    (c) अर्का सुजात
    (d) CO - 1
  4. तोरई की कौन सी किस्म अत्यधिक लंबी ($90-100\text{ cm}$) होती है?
    (a) CO 1
    (b) CO 2 (सही उत्तर)
    (c) पूसा चिकनी
    (d) कोई नहीं
  5. धारीदार तोरई में 5-7 दिन के अंतराल पर कुल कितनी बार तुड़ाई की जा सकती है?
    (a) 3-5 बार
    (b) 6-7 बार
    (c) 8-10 बार (सही उत्तर)
    (d) 11-13 बार

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अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।

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