पादप रोग विज्ञान (Plant Pathology या Phytopathology) कृषि एवं वनस्पति विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत पौधों के रोगों, उनके कारणों (etiology), उनसे होने वाली आर्थिक हानियों और उनके प्रभावी प्रबंधन एवं नियंत्रण का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।
शब्द व्युत्पत्ति: फाइटोपैथोलॉजी (Phytopathology) शब्द ग्रीक भाषा के तीन शब्दों से बना है:
| वैज्ञानिक का नाम | योगदान एवं ऐतिहासिक उपलब्धि |
|---|---|
| एंटोन डी बेरी | 'आधुनिक पादप रोग विज्ञान एवं कवक विज्ञान के जनक' (Father of Modern Plant Pathology & Mycology)। इन्होंने 1845 के आयरिश अकाल के कारण आलू के पछेती झुलसा रोग के रोगजनक कवक Phytophthora infestans की खोज की। |
| ई. जे. बटलर | 'भारतीय पादप रोग विज्ञान एवं कवक विज्ञान के जनक' (Father of Indian Plant Pathology & Mycology)। इन्होंने भारत में कवक रोगों पर व्यापक शोध किया तथा 1918 में ऐतिहासिक पुस्तक Fungi and Disease in Plants लिखी। |
| प्रो. पी. एम. ए. मिलार्डेट | अंगूर के अवनत फफूंद (डाउनी मिल्ड्यू / Downy Mildew) की रोकथाम हेतु विश्व के प्रथम कवकनाशी 'बोर्डो मिश्रण' (Bordeaux Mixture) की खोज की। (संघटन: कॉपर सल्फेट + चूना + पानी = 5:5:50)। |
| टी. जे. बुरिल | नाशपाती के अग्नि अंगमारी रोग (Fire Blight of Pear - Erwinia amylovora) की खोज कर सिद्ध किया कि जीवाणु भी पौधों में रोग उत्पन्न कर सकते हैं। |
| के. सी. मेहता | भारत में गेहूं के रतुआ / गेरुआ रोग (Wheat Rust) के जीवन चक्र और पहाड़ी क्षेत्रों से मैदानी क्षेत्रों में प्राथमिक संक्रामक बीजाणुओं के प्रसार की खोज की। |
| बी. बी. मुंडकुर | भारत में 'इंडियन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसाइटी' (IPS) की स्थापना की तथा Indian Phytopathology पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ किया। |
| एडॉल्फ मेयर, इवानोवस्की, बेइजरिंक, स्टैनली | तम्बाकू के मोज़ेक रोग पर शोध कर विषाणु विज्ञान की नींव रखी। डब्लू. एम. स्टैनली (1935) ने TMV का क्रिस्टलीकरण किया (नोबेल पुरस्कार विजेता)। |
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