बड रॉट (Bud rot): Phytophthora palmivora
सभी उम्र के ताड़ (Palms) इस बीमारी के प्रति संवेदनशील (susceptible) होते हैं, लेकिन 5-20 वर्ष के युवा ताड़ के पेड़ों में यह अधिक गंभीर (severe) होता है। रोगों का पहला संकेत (indication) पेड़ (spindle) की केंद्रीय शूटिंग (central shoot) पर देखा जाता है। हृदय की पत्ती (heart leaf) मलिनकिरण (discolouration) दिखाती है जो पीले भूरे (yellowish brown) रंग के बजाय भूरे (brown) रंग की हो जाती है। इसके बाद हृदय की पत्ती का गिरना (drooping) और टूटना (breading off) होता है। बीमारियों की प्रगति के साथ, अधिक संख्या में पत्तियां चमक के नुकसान (loss of lusture) के साथ प्रभावित हो जाती हैं और पीली हो जाती हैं। मुकुट (crown) का पूरा आधार (base) सड़ सकता है जिससे दुर्गंध (foul smell) आती है। थोड़ा खींचने (slight pulling) पर केंद्रीय प्ररोह (central shoot) आसानी से उतर (comes off) जाता है। मुकुट के ऊपर से शुरू होकर पत्तियाँ उत्तराधिकार (succession) में गिरती हैं। पत्ती का गिरना और गुच्छों का गिरना (bunch shedding) तब तक जारी रहता है जब तक कि कुछ बाहरी पत्तियां अप्रभावित (unaffected) न रह जाएं। लेकिन कुछ ही महीनों के भीतर संक्रमण पत्तियों के पूर्ण रूप से गिरने की ओर ले जाता है, जिसके बाद पेड़ मुरझाकर (wilt) मर जाता है (death)।
लक्षण
कवक अंतरकोशिकीय (intercellur), गैर-सेप्टेट (non septate), हाइलिन मायसेलियम (hyaline mycelium) पैदा करता है। स्पोरैंजियोफोर्स (Sporangiophores) हाइलिन होते हैं और कभी-कभी सरल या शाखित (branched) होते हैं। स्पोरैंजियोफोर्स हाइलिन, पतली दीवार वाले, नाशपाती के आकार (pear shaped) के एक प्रमुख पैपिला (prominent papillae) के साथ होते हैं। स्पोरैंजिया (Sporangia) अंकुरण (germination) पर रेनिफॉर्म (reniform), बाइफ्लैगेलेट ज़ूस्पोर्स (biflagellate zoospores) छोड़ता है। कवक मोटी दीवार वाले, गोलाकार (spherical) ओस्पोर्स (oospores) भी पैदा करता है। इसके अलावा, मोटी दीवार वाले, पीले भूरे रंग के क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores) भी पैदा होते हैं।
अधिक वर्षा (High rainfall), उच्च वायुमंडलीय आर्द्रता (high atmospheric humidity) (90 प्रतिशत से ऊपर), कम तापमान (18-20˚C) और टैपर (tappper) और गैंडे भृंगों (Rhinoceros beetles) के कारण होने वाले घाव (wounds)।
कवक संक्रमित ऊतकों (infected tissues) में निष्क्रिय मायसेलियम (dormant mycelium) के रूप में रहता है और मिट्टी में फसल के अवशेषों (crop residues) में क्लैमाइडोस्पोर्स और ओस्पोर्स के रूप में भी जीवित रहता है। रोग मुख्य रूप से हवा से चलने वाले (air-borne) स्पोरैंगिया (sporangia) और ज़ूस्पोर्स के माध्यम से फैलता है। वर्षा (Rainfall) भी रोगों को फैलाने में मदद करती है। कीड़े (Insects) और टैपर्स (tappers) भी रोगग्रस्त पेड़ों से इनोकुलम (inoculum) के प्रसार में मदद करते हैं।
बुरी तरह प्रभावित पेड़ों को हटा दें और जला (burn) दें जो ठीक (recovery) होने से परे (beyond) हैं। यदि प्रारंभिक अवस्था में रोगों का पता चल जाता है, तो संक्रमित स्पिंडल (infected spindle) को इसके चारों ओर दो पत्तियों के साथ काटकर संक्रमित ऊतक को अच्छी तरह से हटा दें और कटे हुए हिस्से (cut portion) को बोर्डोक्स पेस्ट (Bordeauex paste) से सुरक्षित (protect) करें। आस-पास के सभी स्वस्थ ताड़ के पेड़ों पर 1% बोर्डो मिश्रण (Bordeaux mixture) के साथ रोगनिरोधी छिड़काव (prophylactic spray) करें और मानसूनी बारिश शुरू होने से पहले भी।
बेसल स्टेम रॉट (Basal Stem Rot / Thanjavur wilt / Bole rot): Ganoderma lucidum
10-30 वर्ष के आयु वर्ग (age group) के पेड़ों पर रोगजनक (pathogen) द्वारा आसानी से हमला किया जाता है। कवक मिट्टी जनित (soil-borne) है और जड़ों (roots) को संक्रमित करता है। सबसे सामान्य लक्षण बाहरी मोर्चों (outer fronds) का पीला पड़ना, मुरझाना (withering) और गिरना (drooping) है जो बहाने (shedding) से पहले कई महीनों तक ट्रंक (trunk) के चारों ओर लटके रहते हैं। युवा पत्तियां (younger leaves) कुछ समय के लिए हरी रहती हैं और बाद में पीली भूरी हो जाती हैं। नए प्ररोह (new fronds) क्रमिक (successively) रूप से छोटे और पीले रंग के होते हैं जो ठीक से नहीं खुलते हैं।
लक्षण
कली (bud) में नरम सड़ांध (Soft rot) होती है और नई बनी पत्तियाँ (newly formed leaves) मुरझा (wither away) जाती हैं। अधिक बार धड़ (spindle) को उड़ा दिया जाता है (blown off) जिससे कटा हुआ तना (decapitated stem) रह जाता है।
मुरझाए हुए पौधे (wilting plants) ट्रंक के आधार (base) के पास खून बहने वाले धब्बे (bleeding patches) भी दिखाते हैं। पेड़ की दरारों (cracks) से एक भूरे रंग का चिपचिपा तरल (brown gummy liquid) निकलता है जो धीरे-धीरे बाहरी ऊतकों की मृत्यु का कारण बनता है। जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता (advances) है, 3-5 मीटर की ऊंचाई तक, पुराने के ऊपर नए रक्तस्राव के पैच (fresh bleeding patches) दिखाई देते हैं। बेसल हिस्से (basal portion) का क्षय (decay) धीरे-धीरे होता है और 2-3 वर्षों में पेड़ बीमारियों का शिकार (succumbs) हो जाता है। संक्रमण के उन्नत चरणों (advanced stages) में, कवक बेसल ट्रंक के किनारे के साथ फलने वाले शरीर (fruiting body - Bracket) का उत्पादन करता है। मुरझाए पेड़ों (wilting trees) की जड़ें मलिनकिरण (discoloration) और गंभीर सड़ांध (severe rotting) दिखाती हैं।
कवक एक अर्धवृत्ताकार बेसिडिओकार्प (semi circular basidiocarp - bracket) पैदा करता है, जो एक डंठल (stalk) के साथ पेड़ से जुड़ा होता है। ब्रैकेट (bracket) लगभग 10-12 सेमी व्यास और लकड़ी (woody) का बहुत बड़ा है। ऊपरी सतह (upper surface) सख्त, चमकदार, हल्के से गहरे भूरे रंग की या संकेंद्रित खांचों (concentric furrows) के साथ लगभग काली होती है। निचली सतह सफेद और मुलायम होती है जिसमें असंख्य सूक्ष्म छिद्र (minute pores) होते हैं। ये छिद्र हाइमेनियल ट्यूबों (hymenial tubes) के उद्घाटन (opening) का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बेसिडिया (basidia) और बेसिडियो-स्पोर्स (basidio-spores) के साथ पंक्तिबद्ध (lined) होते हैं। बेसिडिओस्पोर्स (Basidiospores) अंडाकार, भूरे और मोटी दीवार (thick walled) वाले होते हैं।
रेतीली दोमट (sandy loam) और रेतीली मिट्टी (sandy soils) में उगाए गए पेड़, भारी बारिश (severe rains) के दौरान जल भराव (water logging), गर्मी के महीनों (summer months) के दौरान कम मिट्टी की नमी (soil moisture content) और घुन (weevils) और भृंग (beetles) से होने वाले नुकसान (damages)।
कवक मिट्टी जनित (soil-borne) है और लंबे समय तक मिट्टी में जीवित रहता है। प्राथमिक संक्रमण (primary infection) मिट्टी में बेसिडिओस्पोर्स (basidiospores) के माध्यम से होता है, जो जड़ों पर हमला करते हैं। सिंचाई (irrigation) का पानी और बारिश का पानी भी कवक के प्रसार में मदद करता है।
गंभीर रूप से संक्रमित पेड़ों को हटा दें और जला दें जो ठीक (recovery) होने से परे हैं। आगे के प्रसार को रोकने के लिए चारों ओर एक खाई (trench) खोदकर (digging) रोगग्रस्त पेड़ों को अलग (Isolate) करें। गर्मी के महीनों के दौरान कम से कम एक पखवाड़े (fortnight) में एक बार ताड़ की सिंचाई (Irrigate) करें। 50 किग्रा / पेड़ / वर्ष पर हरी खाद (green manure) के लिए खेत की खाद (farm yard manure) या खाद (compost) की भारी खुराक 5 किलो नीम की खली (neem cake) के साथ लागू करें। पेड़ के पास की मिट्टी को 40 लीटर 1 प्रतिशत बोर्डो मिश्रण (Bordeaux mixture) के साथ त्रैमासिक अंतराल (quarterly interval) पर साल में तीन बार ड्रेंच (Drench) करें और 2-3 साल बाद दोहराएं (repeat)। ऑरोफंगिनसोल (Aureofunginsol) 2 ग्राम + कॉपर सल्फेट 1 ग्राम को 100 मिली पानी में या ट्राइडेमोर्फ (Tridemorph) 2 मिली/100 मिली पानी को तने में इंजेक्शन (stem injection) या जड़ में खिलाने (root feeding) के माध्यम से एक वर्ष के लिए त्रैमासिक अंतराल पर लागू करें।
तने का रक्तस्राव (Stem bleeding): Theilaviopsis paradoxa (Ceratocystis paradoxa)
विशिष्ट लक्षण (characteristic symptom) तने में दरारें (cracks) से लाल भूरे रंग के द्रव (reddish brown fluid) का निकलना (exudation) है। तरल पदार्थ तने पर कई फीट नीचे तक गिर (trickles) जाता है और एक्सयूडेट्स (exudates) सूखकर एक काली पपड़ी (black crust) बनाते हैं। दरारें (cracks) के नीचे के ऊतक पीले हो जाते हैं और सड़ (decay) जाते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, छाल (bark) के नीचे अधिक क्षेत्र (area) सड़ (decayed) जाता है और खून बहने वाला पैच (bleeding patch) आगे बढ़ता है। पेड़ का ओज (vigour) प्रभावित होता है और अखरोट की उपज (nut yield) कम हो जाती है। पेड़ को तुरंत नहीं मारा जाता है लेकिन बनाए रखने के लिए अलाभकारी (uneconomical) हो जाता है। चरम मामलों (extreme cases) में, पेड़ बंजर (barren) हो सकते हैं और मर सकते हैं।
लक्षण
कवक दो प्रकार के कोनिडिया (conidia) पैदा करता है। मैक्रोकोनिडिया (Macroconidia) कोनिडियोफोर्स (conidiophores) पर अकेले (singly) या श्रृंखलाओं (chains) में उत्पन्न होते हैं। वे गोलाकार (spherical) और गहरे हरे रंग के होते हैं। माइक्रोकोंडिनिया (Microcondinia) परिपक्व (mature) होने पर लंबी कोशिकाओं के टूटने (ruptures) के अंदर अंतर्जात (endogenously) रूप से उत्पन्न होते हैं और माइक्रोकोंडिया (microcondia) को लंबी श्रृंखला में छोड़ते हैं। माइक्रोकोनिडिया (एंडोकोनिडिया / endoconidia) पतली दीवार वाले, हाइलिन और बेलनाकार (cylindrical) रूप में होते हैं। C. paradoxa एक लंबी गर्दन के आधार (base) के साथ हाइलिन पेरिथेसिया (hyaline perithecia) भी पैदा करता है जो घुंडीदार उपांगों (knobbed appendages) से सजा (ornamented) होता है और ओस्टियोल (ostiole) कई हल्के-भूरे, सीधे, पतले हाइफे (tapering hyphae) से ढका होता है। एस्की (Asci) क्लेवेट (clavate) हैं और एस्कोस्पोर्स (ascospores) हाइलिन विज्ञापन एलिप्सॉइड (hyaline ad ellipsoid) हैं।
प्रचुर सिंचाई (Copious irrigation) या वर्षा (rainfall) के बाद सूखा (drought), उथली दोमट मिट्टी (shallow loamy soils) या मिट्टी के नीचे मिट्टी या चट्टान की परत (rock layer) के साथ लेटराइट मिट्टी (laterite soil), बगीचों का खराब रखरखाव और डियोकलैंड्रा (Diocalandra) और ज़ाइलबोरस (Xyleborus) भृंगों (beetles) द्वारा नुकसान।
कवक संक्रमित पौधे के मलबे और मिट्टी में पेरिथेसिया (perithecia) और कोनिडिया (conidia) के रूप में जीवित रहता है। प्रसार मुख्य रूप से पवन-जनित (wind-borne) कोनिडिया के माध्यम से होता है। सिंचाई और बारिश का पानी भी बीमारी फैलने में मदद करता है। रोगग्रस्त पौधों को खाने वाले भृंग (beetles) भी संचरण (transmission) में मदद करते हैं।
उचित निषेचन (adequate fertilization) के साथ बगीचों (gardens) को ठीक से बनाए रखें। स्वस्थ ऊतकों के एक हिस्से के साथ रोगग्रस्त ऊतक को बाहर निकालें (Scoop out), उजागर ऊतक (exposed tissue) को जला दें और पिघला हुआ कोयला टार (molten coal tar) लागू करें, उसके बाद बोर्डो पेस्ट (Bordeaux paste) पोंछें (swabbing)। जब तने से रक्तस्राव (stem bleeding) गैनोडर्मा (Ganoderma) के संबंध में देखा जाता है, तो जड़ खिलाने (root feeding) या स्टेम इंजेक्शन तकनीक (stem injection technique) का पालन करें। गर्मी के महीनों में सिंचाई करें।
रूट विल्ट रोग / केरल विल्ट (Root wilt disease - Kerala wilt): फाइटोप्लाज्मा (Phytoplasma)
रोगजनक (pathogen) से सभी उम्र के ताड़ के पेड़ (Palms) संक्रमित पाए जाते हैं। महत्वपूर्ण नैदानिक लक्षण (diagnostic symptom) पत्तियों का "ढीलापन" (flaccidity) है यानी वे असामान्य रूप से (abnormally) आवक (inwards) वक्र (curve) होते हैं, जो स्तनधारियों (mammals) की पसलियों (ribs) के समान होते हैं। पत्तियों का पीला पड़ना और पत्रक (leaflets) का सीमांत परिगलन (marginal necrosis) भी स्पष्ट रूप से (conspicuously) होता है। बीच के चक्कर (middle whorl) से बाहर की ओर पत्तियों का मुरझाना (Wilting) और बटनों (buttons) और अपरिपक्व मेवों (immature nuts) का गिरना होता है। पतले कर्नेल (thin kernel) के साथ परिपक्व नट्स (mature nuts) का आकार छोटा होता है। मुकुट का आकार (crown size) भी उन्नत चरणों (advanced stages) में कम हो जाता है और पेड़ अनुत्पादक (unproductive) रहते हैं।
लक्षण
जड़ें सड़ने (rotting) के लक्षण दिखाती हैं, जो नोक (tip) से पीछे की ओर (backwards) सड़ जाती हैं। पुरानी जड़ें दरारें (cracks) और धब्बे (blotches) दिखाती हैं और प्रांतस्था (cortex) भूरे रंग के काले (brownish black) हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप गुच्छे (flakes) सूख जाते हैं। जड़ के मुरझाने (root wilt) से प्रभावित हथेलियाँ (palms) Bipolaris halodes के कारण होने वाली पत्ती सड़न रोग (leaf rot disease) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (highly susceptible) हो जाती हैं। जड़ के मुरझाने (root wilt) से स्वतंत्र पत्ती सड़न की घटना बहुत दुर्लभ (rare) है। पहला लक्षण केंद्रीय स्पिंडल (central spindle) में पत्रक (leaflets) के दूरस्थ सिरों (distal ends) का काला पड़ना और सिकुड़ना (shrivelling) और कुछ युवा पत्तियों में है। बाद में प्रभावित भाग टुकड़ों (bits) में टूट जाता है जिससे पत्ती पंखे (fan-like) जैसी दिखाई देती है। यह सड़ांध (rotting) हथेलियों (palms) के पतन (decline) को तेज (hastens) करती है।
यह बीमारी फाइटोप्लास्मा (Phytoplsama) के कारण होती है जिसे अक्सर संक्रमित पेड़ों के फ्लोएम ऊतकों (phloem tissues) में पहचाना (identified) जाता है।
रेतीली (Sandy) और रेतीली दोमट मिट्टी (sandy loam soils), गंभीर बाढ़ (severe floods) और फीता विंग बग (lace wing bug) Stephanitis typia की बहुतायत (abundance)।
गंभीर रूप से संक्रमित पौधे इनोकुलम (inoculum) के प्राथमिक स्रोतों (primary sources) के रूप में काम करते हैं। एमएलओ (MLO) रोगग्रस्त से स्वस्थ ताड़ के पेड़ों (palms) में लेस विंग बग (lace wing bug) Stephanitis typicuc द्वारा प्रेषित (transmitted) होता है।
सभी गंभीर रूप से संक्रमित और अनार्थिक हथेलियों (uneconomic palms) को हटा दें और सीडीओ एक्स डब्ल्यूसीटी (CDO X WCT) या डब्ल्यूसीटी एक्स सीडीओ (WCT X CDO) जैसे स्वस्थ संकर (hybrid) अंकुर के साथ फिर से रोपण (replant) करें। इसकी तीव्रता (intensity) के बावजूद लक्षण दिखाने वाली सभी किशोर (युवा) हथेलियों को हटा दें। पत्तियों पर 0.01 प्रतिशत मोनोक्रोटोफॉस (Monocroptophos) का छिड़काव (Spray) करें। उर्वरकों (fertilizers) की संतुलित खुराक (balanced doses) लागू करें (1 किग्रा यूरिया, 1.7 किग्रा सुपर फॉस्फेट, 1.7 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश और 3 किग्रा मैग्नीशियम सल्फेट प्रति ताड़ प्रति वर्ष दो भागों (splits) में, 1/3 अप्रैल-मई के दौरान और 2/3 सितंबर-अक्टूबर के दौरान वर्षा आधारित (rainfed) ताड़ के लिए और 4 भागों में जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के दौरान सिंचित (irrigated) ताड़ के लिए)।
50 किग्रा फार्मयार्ड खाद/ताड़/वर्ष लागू करें। बेसिन (basin) में हरी खाद की फसलें उगाएं और उर्वरक आवेदन के समय शामिल (incorporate) करें। 1% बोर्डो मिश्रण या 0.3% मैनकोजेब का छिड़काव करके पत्ती सड़न रोग को नियंत्रित करें। गर्मी के महीनों के दौरान 4 से 6 दिनों में एक बार 600-900 लीटर पानी/बेसिन की दर से ताड़ की सिंचाई (Irrigate) करें। बारिश के मौसम (rainy seasons) में उचित जल निकासी (proper drainage) प्रदान करके जल भराव (water logging) से बचें। बीच के स्थान (inter space) में फसलें उगाएं और प्रभावित बगीचों में अखरोट की उपज (nut yield) बढ़ाने के लिए खाद और अन्य जैविक कचरे (organic wastes) को रीसायकल (recycle) करने के लिए दुधारू गायों (milch cows) को बनाए रखें।
ग्रे लीफ ब्लाइट (Grey leaf blight): Pestalotia palmarum
शुरू में लक्षण केवल पत्तियों के बाहरी भंवर (outer whorl) पर विकसित होते हैं, खासकर पुरानी पत्तियों में। पत्रक (leaflets) पर धूसर (greyish) मार्जिन से घिरे छोटे पीले धब्बे दिखाई देते हैं। धीरे-धीरे (Gradually), धब्बों का केंद्र (centre) पीले प्रभामंडल (yellow halo) के साथ गहरे भूरे (dark brown) मार्जिन के साथ भूरे रंग के सफेद (greyish white) हो जाता है। कई धब्बे अनियमित ग्रे नेक्रोटिक पैच (grey necrotic patches) में विलीन (coalesce) हो जाते हैं। पत्ती के ब्लेड (leaf blade) का पूरा सूखना और सिकुड़ना (shrivelling) होता है जो एक धुंधला (blighted) या जला हुआ रूप (burnt appearance) देता है। पत्तियों की ऊपरी सतह पर बड़ी संख्या में गोलाकार (globose) या ओवॉइड (ovoid) काले एसर्वुली (acervuli) दिखाई देते हैं।
कवक एसर्वुली (acervuli) के अंदर कोनिडिया पैदा करता है। एसर्वुली रंग में काले, कुशन के आकार (cushion shaped) के और उप एपिडर्मल (sub epidermal) होते हैं और कोनिडिया (conidia) और काले बाँझ (sterile) संरचनाओं, सेटे (setae) को उजागर करने के लिए टूट जाते हैं। कोनिडियोफोर्स हाइलिन, छोटे और सरल होते हैं, टिप पर अकेले (singly) कोनिडिया सहन (bear) करते हैं। कोनिडिया पांच कोशिका (five celled) वाले होते हैं, मध्य तीन कोशिकाएं गहरे रंग की होती हैं, जबकि अंतिम कोशिकाएं बीजाणु के शीर्ष (apex) पर 3-5 पतले, लम्बे उपांगों (elongated appendages) के साथ हाइलिन होती हैं।
खराब जल निकासी वाली मिट्टी (Ill drained soils), पोटाश की कमी (potash deficiency) वाली मिट्टी, 4-5 दिनों तक लगातार बारिश (rainy weather) का मौसम और तेज हवाएं (strong winds)।
कवक मिट्टी में संक्रमित पौधे के मलबे में रहता है। यह बीमारी पवन-जनित (wind-borne) कोनिडिया के माध्यम से फैलती है।
संक्रमित, गिरी हुई पत्तियों (fallen leaves) को समय-समय (periodically) पर हटाकर जला दें। पोटाश (potash) की भारी खुराक लागू करें। मिट्टी की जल निकासी (drainage) की स्थिति में सुधार करें। बारिश शुरू होने से पहले 0.25 प्रतिशत कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या 1 प्रतिशत बोर्डो मिश्रण (Bordeaux mixture) के साथ मुकुट (crown) का छिड़काव करें।
एंथ्रेक्नोज (Anthracnose): Botryodiplodia palmarum
यह बीमारी नर्सरी (nursery) में होती है। इसे नियमित या अनियमित भूरे (brown) से काले पत्तों के धब्बे (leaf blotches) द्वारा पहचाना जाता है जो पीले प्रभामंडल (yellow haloes) से घिरे होते हैं, जो पत्तियों के मार्जिन, केंद्र या टिप (tip) के साथ विकसित होते हैं। इससे भारी पौध (seedling) का नुकसान होता है।
200 ग्राम / 100 लीटर पानी की दर (rate) से मैनकोजेब या कैप्टान (Captan) का छिड़काव करके रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। कॉपर बर्न (Copper burn - चिलचिलाती / scorching) के लिए तेल पाम के पौधों (oil palm seedlings) की अत्यधिक संवेदनशीलता (extreme susceptibility) के कारण तांबे के कवकनाशी (Copper fungicides) का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।