व्याख्यान 07 - सेब के रोग (Disease of Apple) (2 व्याख्यान)

स्कैब (Scab) – Venturia inaequalis

लक्षण (Symptoms)

लक्षण पत्तियों और फलों पर दिखाई देते हैं। पत्ती के निचले हिस्से पर घाव (lesion) जैतून के धब्बों (olivaceous spots) के रूप में दिखाई देते हैं जो गहरे भूरे से काले हो जाते हैं और मखमली (velvety) हो जाते हैं। युवा पर्णसमूह (young foliage) पर, धब्बों में पंख वाले किनारे (feathery edge) के साथ एक विकिरण उपस्थिति (radiating appearance) होती है। पुरानी पत्तियों पर घाव रूपरेखा (outline) में अधिक निश्चित होते हैं। घाव विपरीत दिशा (opposite side) में संबंधित अवतल क्षेत्र (concave area) के साथ उत्तल सतह (convex surface) बना सकता है। गंभीर संक्रमण में पत्ती का ब्लेड (leaf blade) मुड़ा हुआ, बौना (dwarfed) और विकृत (distorted) हो जाता है। फल छोटे, खुरदरे, काले गोलाकार घाव (circular lesions) दिखाते हैं। धब्बों का केंद्र कॉर्की (corky) हो जाता है और पके फलों पर, घावों के चारों ओर पीला प्रभामंडल (yellow halo) दिखाई देता है।

लक्षण

रोगजनक (Pathogen)

मायसेलियम (mycelium) आंतरिक (internal) है। एस्कोस्पोर्स (Ascospores) दो कोशिका वाले, हरे, भूरे या पीले रंग के होते हैं।

प्रसार और अस्तित्व का तरीका (Mode of Spread and Survival)

शरद ऋतु (autumn) और सर्दियों में बने स्यूडोथेसिया (Pseudothecia) प्राथमिक संक्रमण के लिए मुख्य इनोकुलम, एस्कोस्पोर्स का उत्पादन करने के लिए वसंत (spring) में परिपक्व होते हैं। द्वितीयक प्रसार (secondary spread) कोनिडिया के माध्यम से होता है।

रोग चक्र (Disease cycle)

कवक Venturia inaequalis (एनामॉर्फ / anamorph Spilocaea pomi) के कारण होने वाली यह बीमारी वसंत ऋतु में बारिश, ठंडे मौसम होने पर काफी गंभीर हो सकती है। कवक के बीजाणु (Fungal spores) शुरुआती वसंत में मृत, गिरे हुए सेब के पत्तों पर उस समय उत्पन्न होते हैं जब कलियां (buds) विकसित होने लगती हैं। ये बीजाणु बारिश से छलकते (splashed) हैं और हवा से उड़कर पौधे के विकासशील ऊतकों (developing plant tissue) पर गिरते हैं और संक्रमण शुरू करते हैं। नई बनी पत्तियों पर धब्बे दिखाई देने के बाद, अधिक बीजाणु उत्पन्न होते हैं जो पेड़ के अन्य भागों में संक्रमण फैलाते हैं। फिर से, बरसात का मौसम बीजाणु उत्पादन के द्वितीयक चरण (secondary phase) के दौरान बीजाणु प्रसार और संक्रमण को बहुत प्रोत्साहित करता है। कवक गिरी हुई पत्तियों पर सर्दियों में जीवित (over winters) रहता है।

प्रबंधन (Management)

यौन चक्र (sexual cycle) को रोकने के लिए सर्दियों में स्वच्छ खेती (Clean cultivation), गिरे हुए पत्तों का संग्रह और विनाश और छंटाई (pruned) की गई सामग्री। फूल आने से पहले ट्राइडेमोर्फ (Tridemorph) 0.1% का छिड़काव करें। असर वाले चरण (bearing stage) पर मैनकोजेब (Mancozeb) 0.25% का छिड़काव करें। पत्तियों के अपघटन (decomposition) को तेज (hasten) करने के लिए शरद ऋतु में पत्ती गिरने से पहले 5% यूरिया और कली टूटने (bud break) से पहले 2% का छिड़काव करें।

क्र.सं. (S.No) पेड़ का चरण (Tree stage) कवकनाशी / 100 लीटर (Fungicide/100lit)
1 सिल्वर टिप से दिए गए टिप तक (Silver tip to given tip) कैप्टाफोल (Captafol) 200 ग्राम (या) कैप्टान (Captan) 300 ग्राम या मैनकोजेब 400 ग्राम
2 गुलाबी कली (Pink bud) या पहले स्प्रे के 15 दिन बाद कैप्टान 250 ग्राम या मैनकोजेब 300 ग्राम
3 पंखुड़ी गिरना (Petal fall) कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) 50 ग्राम
4 10 दिन बाद कैप्टान 200 ग्राम या मैनकोजेब 300 ग्राम
5 फल लगने (fruit set) के 14 दिन बाद कैप्टाफोल (Captofol) 150 ग्राम

स्टिकर (stickers) जोड़ें - टीपोल (teepol) या ट्राइटन (triton) 6 मिली/10 लीटर स्प्रे तरल (spray fluid)।

पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery mildew) – Podosphaera leucotricha.

लक्षण (Symptom)

पाउडरी मिल्ड्यू कलियों (buds), फूलों (blossoms), पत्तियों, टहनियों (twigs) और फलों पर पाया जा सकता है। वसंत (spring) में, संक्रमित फूलों की कलियाँ स्वस्थ कलियों की तुलना में 5-8 दिन बाद खुलती हैं। कलियाँ मर जाती हैं या विकृत हो जाती हैं। लक्षण सबसे पहले वसंत ऋतु में पत्तियों की निचली सतह पर दिखाई देते हैं, आमतौर पर शाखाओं के सिरों (ends) पर। फंगल वृद्धि के छोटे, सफेद नमदे (felt-like) जैसे पैच दिखाई देते हैं और जल्दी से पूरी पत्ती को ढक लेते हैं। रोगग्रस्त पत्तियाँ संकरी (narrow), सिकुड़ी (crinkled), बौनी और भंगुर (brittle) हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप वे सूखकर गिर जाती हैं। कवक तेजी से टहनियों में फैलता है, जो बढ़ना बंद कर देते हैं और बौने हो जाते हैं। कुछ मामलों में टहनियां मर सकती हैं (killed back)। संक्रमित कलियों से पत्तियाँ और फूल अगली वसंत ऋतु में खुलने पर रोगग्रस्त हो जाएँगे। संक्रमित फूल सिकुड़ जाते हैं और कोई फल नहीं देते। फलों के लक्षण आमतौर पर तब तक नहीं देखे जाते जब तक कि बीमारी अतिसंवेदनशील किस्मों (susceptible cultivars) पर उच्च स्तर (high levels) तक न बन जाए। फलों की सतह भूरी (russetted) या फीकी (discolored) और बौनी हो सकती है। भारी फफूंदी (Heavily mildewed) वाले पेड़ कमजोर हो जाते हैं, और अन्य कीटों (pests) और सर्दियों की चोट (winter injury) के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। यह सेब की एकमात्र फंगल बीमारी है जो बारिश या ओस (dew) से भीगे बिना भी संक्रमित करने में सक्षम (capable) है। नर्सरी में कवक सभी विकासशील पत्तियों में फैल सकता है और वानस्पतिक टर्मिनल वृद्धि (vegetative terminal growth) को रोक (stunting) सकता है।

लक्षण

रोगजनक (Pathogen)

पाउडरी मिल्ड्यू Podosphaera leucotricha के कारण होता है, जो एक एस्कोमाइसेटस हेटेरोथैलिक (ascomycetous heterothallic) कवक है। कोनिडिया एलिप्सोइडल (ellipsoidal), ट्रंकेट (truncate) और हाइलिन होते हैं। पेरिथेसिया (Perithecia) सबग्लोबोज़ (subglobose) होते हैं, सघन रूप से (densely) यूथचारी (gregarious) होते हैं, और शायद ही कभी बिखरे (scattered) होते हैं, और इनमें शिखर (apical) और बेसल उपांग (basal appendages) होते हैं। पेरिथेसिया में एस्की (asci) आयताकार (oblong) से सबग्लोबोज़ होते हैं। एस्कस (ascus) में आठ एस्कोस्पोर्स मौजूद होते हैं। कवक वानस्पतिक या फलों की कलियों में फंगल स्ट्रैंड (मायसेलियम) के रूप में सर्दियों में जीवित (over winters) रहता है जो पिछले मौसम में संक्रमित थे।

प्रसार और अस्तित्व का तरीका (Mode of Spread and Survival)

कवक रोगग्रस्त वानस्पतिक कलियों और फलों में मायसेलियम के रूप में सर्दियों में जीवित (overwinters) रहता है। द्वितीयक प्रसार वायुजनित कोनिडिया के माध्यम से होता है।

रोग चक्र (Disease Cycle)

फफूंदी (mildew) कवक मुख्य रूप से निष्क्रिय (dormant) फूल में मायसेलियम के रूप में सर्दियों में जीवित रहता है और पिछले बढ़ते मौसम (growing season) में टहनी कलियों (shoot buds) को उत्पन्न और संक्रमित करता है। कोनिडिया उत्पन्न होते हैं और खुलने वाली पत्तियों (unfolding leaves) से मुक्त होते हैं क्योंकि वे लगभग तंग गुच्छा (tight cluster) चरण में संक्रमित कलियों से निकलते हैं। कोनिडिया उच्च सापेक्ष आर्द्रता में अंकुरित होते हैं जो आमतौर पर पत्ती की सतह पर 10-25˚C पर 19-22˚C के इष्टतम (optimum) के साथ उपलब्ध होती है। मुक्त नमी (free moisture) में अंकुरण नहीं होता है। प्रारंभिक-मौसम फफूंदी (Early-season mildew) का विकास सापेक्ष आर्द्रता की तुलना में तापमान से अधिक प्रभावित होता है। ओवर विंटरिंग शूट्स और युवा पर्णसमूह (young foliage) पर द्वितीयक घावों (secondary lesions) से प्रचुर मात्रा में बीजाणुकरण (Abundant sporulation) इनोकुलम के तेजी से निर्माण की ओर ले जाता है। द्वितीयक संक्रमण चक्र तब तक जारी रह सकता है जब तक अतिसंवेदनशील ऊतक (susceptible tissue) उपलब्ध न हों। चूँकि पत्तियाँ निकलने के तुरंत बाद सबसे अधिक अतिसंवेदनशील होती हैं, नई पत्तियों का संक्रमण तब तक हो सकता है जब तक टहनी की वृद्धि (shoot growth) जारी रहती है। फलों का संक्रमण गुलाबी (pink) से खिलने (bloom) तक होता है।

कली शुरू (bud initiation) होने के तुरंत बाद ओवर विंटरिंग (Over wintering) कलियाँ संक्रमित हो जाती हैं। भारी रूप से संक्रमित टहनियों और कलियों में ओज (vigor) कम होता है और सर्दियों की कठोरता (winter hardiness) की कमी होती है, जिसके परिणामस्वरूप -24˚C से नीचे के तापमान पर प्राथमिक इनोकुलम में कमी आती है।

रोग चक्र

प्रबंधन (Management):

डायनोकैप (Dinocap) 0.05% या चिनोमेथियोनेट (Chinomethionate) 0.1% का छिड़काव करें।

फायर ब्लाइट (Fire blight)- Erwinia amylovora

लक्षण (Symptom)

प्रारंभिक लक्षण आमतौर पर पत्तियों पर होता है, जो पानी से लथपथ (water soaked) हो जाते हैं, फिर सिकुड़ (shrivel) जाते हैं, भूरे से काले रंग के हो जाते हैं और गिर जाते हैं या पेड़ में लटकते रहते हैं। लक्षण टहनियों (twigs) तक फैल जाते हैं। टर्मिनल (Terminal) टहनियां सिरे (tip) से नीचे की ओर मुरझा (wilt) जाती हैं और शाखाओं (branches) तक भी फैल जाती हैं। फल पानी से लथपथ हो जाते हैं, भूरे हो जाते हैं, सिकुड़ जाते हैं और अंत में काले हो जाते हैं। प्रभावित क्षेत्र में ऊज़िंग (Oozing) देखी जा सकती है।

लक्षण

रोगजनक (Pathogen)

जीवाणु (bacterium) छड़ के आकार (rod shaped) का होता है और पेरिट्रिचस फ्लैगेला (peritrichous flagella) द्वारा गतिशील (motile) होता है। जीवाणु आमतौर पर अकेले होते हैं, लेकिन 3 या 4 जीवाणुओं के जोड़े (pairs) या जंजीरें (chains) भी मौजूद होती हैं। प्रत्येक जीवाणु कोशिका एक कैप्सूल (capsule) में बंद होती है।

प्रसार और अस्तित्व का तरीका (Mode of Spread and Survival)

जीवाणु पिछले मौसम के दौरान बने कैंकर (cankers) के किनारे (margin) पर सर्दियों में जीवित (overwinters) रहते हैं। वे अक्सर बड़ी शाखाओं में जीवित रहते हैं और 1 सेमी से कम व्यास (dia) वाली टहनियों में शायद ही कभी (seldom) होते हैं। मक्खियाँ (Flies), ततैया (Wasps) और मधुमक्खियाँ (honey bees) और बारिश की बूंदें (rain splashes) पत्तियों के अंदर ताजे घाव वाले ऊतकों (freshly wounded tissues) में बैक्टीरिया को फैलाती हैं। युवा कोमल (tender) टहनियां उनके लेंटिकल्स (lenticels) के माध्यम से, विभिन्न एजेंटों (agents) द्वारा किए गए घावों के माध्यम से और बैक्टीरिया ले जाने वाले और टहनियों को खाने वाले (feeding) कीड़ों (insects) के माध्यम से बैक्टीरिया से संक्रमित होती हैं।

रोग चक्र (Disease Cycle)

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प्रबंधन (Management)

प्रभावित भागों को हटाना और नष्ट करना। झुलसी (blighted) टहनियों को हटाना। स्ट्रेप्टोमाइसिन (Streptomycin) 500 पीपीएम (ppm) का छिड़काव करें।

सॉफ्ट रॉट (Soft rot) – Penicillium expansum

लक्षण (Symptom)

युवा धब्बे फल के तने के सिरे (stem end) से हल्के भूरे रंग के पानीदार सड़न (watery rot) के रूप में शुरू होते हैं। जैसे-जैसे फल पकता (ripens) है, सड़न का क्षेत्र बढ़ता है, त्वचा झुर्रीदार (wrinkled) हो जाती है। नम स्थिति (humid condition) में एक अजीबोगरीब बासी गंध (peculiar musty odour) निकलती है, एक नीला हरा (bluish green) बीजाणु (sporulating) विकास दिखाई देता है। संक्रमण कीड़ों (insects) के कारण त्वचा में घावों (wounds) और भंडारण (storage) और परिवहन (transport) में सौंपने (handing) के दौरान होता है।

लक्षण

रोगजनक (Pathogen)

कोनिडियोफोर्स (Conidiophores) 1-3 मुख्य शाखाओं (main branches) को जन्म देते हैं। वे बदले में शाखाओं (branchlets) के भीड़भाड़ वाले चक्कर (crowdwd whorls) उत्पन्न करते हैं। कोनिडिया श्रृंखलाओं (chains) में बनते हैं। कोनिडिया द्रव्यमान (mass) में हरे या नीले हरे होते हैं।

प्रसार और अस्तित्व का तरीका (Mode of Spread and Survival)

फंगल बीजाणु हवा द्वारा फैलते हैं। मायसेलियम (Mycelium) निकट संपर्क (close contact) में कुचले (bruised) या घायल फलों (wounded fruits) के माध्यम से संक्रमित कर सकता है। फल का संक्रमण आमतौर पर त्वचा में घावों के माध्यम से होता है, जैसे कि कीट के काटने (insect bites), लापरवाह छंटाई (careless picking), धोने के दौरान खुरदरी हैंडलिंग (rough handling), ग्रेडिंग (grading), पैकिंग (packing), पारगमन (transit) और भंडारण (storage) के कारण होने वाले घाव। संक्रमण लेंटिकल्स (lenticels) के माध्यम से भी होता है।

रोग चक्र (Disease cycle)

सॉफ्ट रॉट (soft rot) कवक के बीजाणु (Spores) लगभग हर जगह मौजूद होते हैं और प्रतिकूल परिस्थितियों (unfavorable conditions) की लंबी अवधि तक जीवित रह सकते हैं। बल्क डिब्बे (Bulk bins), फील्ड क्रेट (field crates), पैक हाउस लाइन (pack house lines), और भंडारण कक्ष (storage rooms) आमतौर पर दूषित (contaminated) होते हैं। फलों में चोट (Injuries), विशेष रूप से चुनने और संभालने (picking and handling) के संचालन के दौरान, प्रवेश के प्राथमिक बिंदु (primary points) हैं। सामान्य तापमान पर, संक्रमित फल 2 सप्ताह या उससे कम समय में सड़ (rot) सकता है।

प्रबंधन (Management)

बिना कोई घाव (wounds) किए फलों को सावधानी से संभालना। 20 मिनट के लिए ऑरोफंगिनसोल (aureofunginsol) @ 500 पीपीएम (ppm) में फलों को डुबाना (Dipping) सबसे अच्छा नियंत्रण देता है।

बिटर रॉट (Bitter rot) – Glomerella cingulata

लक्षण (Symptom)

त्वचा के नीचे बेहोश (Faint), हल्का भूरा मलिनकिरण (discolouration) विकसित होता है। मलिनकिरण शंक्वाकार (cone shape) में फैलता है। गोलाकार, खुरदरे घाव उदास (depressed) हो जाते हैं। घाव बढ़ गए और फलों के पूरे क्षेत्रों को कवर करते हैं। छल्ली (cuticle) के नीचे छोटे (Diny) काले बिंदु दिखाई देते हैं जो एसरवुली (acervuli) को जन्म देते हैं। बीजाणुओं के गुलाबी द्रव्यमान (Pink masses) परिभाषित छल्लों (defined rings) में व्यवस्थित पाए जाते हैं।

लक्षण

रोग चक्र (Disease Cycle)

कवक ममीकृत फलों (mummified fruit) में, छाल (bark) में दरारों (cracks) और दरारों (crevices) में, और बिटर रॉट कवक या अन्य बीमारियों, जैसे फायर ब्लाइट (fire blight) द्वारा उत्पादित कैंकर (cankers) में सर्दियों में जीवित (over winters) रहता है। टूटे हुए अंगों (broken limbs) के दांतेदार किनारे (Jagged edges) भी आदर्श स्थल (ideal sites) हैं। बिटर रॉट कवक उन कुछ सड़ांध जीवों (rot organisms) में से एक है जो फल की अटूट (unbroken) त्वचा में प्रवेश कर सकता है। यद्यपि प्रवेश सीधा (direct) है, फिर भी कवक द्वारा घावों (wounds) को तेजी से उपनिवेशित (colonized) किया जा सकता है। बीजाणु जलजनित (waterborne) होते हैं और पूरे बढ़ते मौसम (growing season) में वर्षा के दौरान मुक्त (released) होते हैं। फलों का संक्रमण जल्दी हो सकता है लेकिन मध्य से देर के मौसम में अधिक आम (common) है। अक्सर, पहले संक्रमण ममी (mummies) या कैंकर के नीचे पेड़ के भीतर शंक्वाकार (cone-shaped) क्षेत्रों में दिखाई देते हैं। वे कारक (Factors) जो बिटर रॉट की उपस्थिति का समय निर्धारित करते हैं, वे हैं फल की परिपक्वता (maturity), तापमान और आर्द्रता (humidity), और क्षेत्र में बीमारी की उपस्थिति। रोग के विकास के लिए इष्टतम (optimum) स्थितियों में वर्षा, 80 से 100 प्रतिशत की सापेक्ष आर्द्रता और गर्म तापमान शामिल हैं। 26˚C पर पांच घंटे से कम समय में संक्रमण हो सकता है।

प्रबंधन (Management)

खेत में मैनकोजेब (Mancozeb) 0.25% का छिड़काव करें। भंडारण (storage) में बीमारी को रोकने (check) के लिए मैनकोजेब 0.25% के साथ उपचार (Treatment)।

अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।

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