पनामा रोग (Panama disease) : Fusarium oxysporum f. sp. cubense
केले पर हमला करने वाली पहली बड़ी बीमारी को उस क्षेत्र से पनामा रोग कहा जाता था जहां यह पहली बार गंभीर हुई थी। केले का विल्ट (Banana wilt) एक मिट्टी जनित फंगल रोग है और पौधे के शरीर में जड़ों (roots) और नेमाटोड (nematodes) के कारण होने वाले घावों के माध्यम से प्रवेश करता है। खराब जल निकासी वाली मिट्टी (poorly drained soil) में यह सबसे गंभीर है। रोग संक्रमित चूसक (infected suckers) के माध्यम से फैलता है।
पत्तियों के किनारे से लेकर मध्य शिरा (midrib) तक सबसे निचली पत्तियों का पीला पड़ना शुरू हो जाता है। पीलापन ऊपर की ओर बढ़ता है और अंततः केवल हृदय पत्ती (heart leaf) ही कुछ समय तक हरी रहती है और यह भी प्रभावित होती है। पत्तियां आधार (base) के पास टूट जाती हैं और स्यूडोस्टेम (pseudostem) के चारों ओर लटक जाती हैं। स्यूडोस्टेम का अनुदैर्ध्य विभाजन (Longitudinal splitting)। लाल या भूरे रंग की धारियों (streaks) के रूप में संवहनी वाहिकाओं (vascular vessels) का मलिनकिरण (Discolouration)। कवक संक्रमित प्रकंदों (infected rhizomes) के उपयोग के माध्यम से फैलता है। निरंतर खेती (Continuous cultivation) से इनोकुलम (inoculum) का निर्माण होता है।
लक्षण
मायसेलियम सेप्टेट, हाइलिन और शाखित है। कवक माइक्रो, मैक्रो कोनिडिया और क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores) भी पैदा करता है। माइक्रो कोनिडिया - सिंगल सेल या शायद ही कभी एक सेप्टेट हाइलिन अण्डाकार (elliptical) या अंडाकार (oval)। मैक्रो कोनिडिया - दरांती के आकार (Sickle shaped) का हाइलिन, 3-5 सेप्टेट और दोनों सिरों पर पतला (tapering)। क्लैमाइडोस्पोर्स - मोटी दीवार वाले, गोलाकार (spherical) से अंडाकार, हाइलिन से हल्के पीले रंग के होते हैं।
रोगजनक मिट्टी जनित (soil borne) है। यह लंबी अवधि तक मिट्टी में क्लैमाइडोस्पोर्स के रूप में जीवित रहता है। रोग का प्राथमिक प्रसार संक्रमित प्रकंदों (infected rhizomes) के माध्यम से होता है और द्वितीयक प्रसार सिंचाई के पानी के माध्यम से होता है। निरंतर खेती से इनोकुलम का निर्माण होता है।
संवेदनशील किस्मों (susceptible cultivars) यानी रस्थाली (Rasthali), मंथन (Monthan), रेड बनाना (Red banana) और विरुपाक्षी (Virupakshi) को उगाने से बचें। प्रतिरोधी कल्टीवेटर (resistant cultivar) पूवन (Poovan) उगाएं। चूंकि नेमाटोड बीमारी की भविष्यवाणी करते हैं, इसलिए कार्बोफुरन (Carbofuran) कणिकाओं (granules) के साथ पेयरिंग (pairing) और प्रोलिनेज (prolinage) करें। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, 5 वें और 7 वें महीने में 450 के कोण (angle) के साथ 10 सेमी की गहराई तक एक छेद बनाकर कॉर्म (corm) में 2% कार्बोन्डेजिम (Carbendezim) के 3 मिलीलीटर का कॉर्म इंजेक्शन (Corm injection)।
मोको रोग (Moko disease) : Pseudomonas solanacearum / Burkholderia solanacearum
पत्तियां पीली हो जाती हैं और ऊपर की ओर बढ़ती हैं। पेटीओल (petiole) टूट जाता है और पत्तियां लटक जाती हैं। जब इसे काटा जाता है तो संवहनी क्षेत्र (vascular region) में हल्के पीले से गहरे भूरे रंग के मलिनकिरण को खोला जाता है। मलिनकिरण कॉर्म (corm) के मध्य भाग में होता है। गहरे भूरे रंग के मलिनकिरण के साथ फलों की आंतरिक सड़न (Internal rot)। जब स्यूडोस्टेम (pseudostem) को आड़े (transversely) काटा जाता है तो जीवाणु का रिसाव (bacterial ooze) देखा जा सकता है।
लक्षण
यह छड़ के आकार (rod shaped) का, एक ध्रुवीय फ्लैगेलम (polar flagellum) वाला ग्राम नेगेटिव बैक्टीरियम (gram negative bacterium) है।
रोगजनक मिट्टी जनित है, यह केले और हेलिकोनिया एसपीपी (Heliconia spp.) जैसे संवेदनशील मेजबानों (susceptible hosts) में जीवित रहता है।
संक्रमित पौधे को नष्ट करें (Eradicate)। मिट्टी को सीधी धूप में रखें (Expose)। साफ रोपण सामग्री का उपयोग करें। परती (Fallowing) और फसल चक्र (crop rotation) उचित है। उपकरणों की छंटाई (pruning) का कीटाणुशोधन (Disinfection)। अच्छी जल निकासी (drainage) प्रदान करना।
टिप ओवर या हार्ट रॉट (Tip over or Heart rot): Erwinia carotovora subsp. carotovora
स्यूडोस्टेम का आधार और कॉर्म (corm) का ऊपरी हिस्सा प्रभावित होता है और सड़न (rotting) का कारण बनता है। गर्मी के महीनों के दौरान युवा 1-3 महीने पुराने वृक्षारोपण (plantation) अतिसंवेदनशील होते हैं।
लक्षण
रोग मुक्त चूसक (disease free suckers) पौधे लगाएं। संक्रमित पौधों को निकालें और नष्ट करें। मेथॉक्सी एथिल मर्क्यूरिक क्लोराइड (Methoxy ethyl mercuric chloride - Emisan-6) 0.1 / या सोडियम हाइपोक्लोराइट (Sodium hypohlorite) 10% या ब्लीचिंग पाउडर (Bleaching powder) 20 ग्राम/लीटर/पेड़ के साथ ड्रेंच (Drench) करें।
सिगाटोका रोग (Sigatoka disease) : Mycosphaerella musicola (Cercospora musae)
पत्तियों पर छोटी हल्की पीली या भूरी हरी संकीर्ण धारियां (narrow streaks) दिखाई देती हैं। वे आकार में बढ़ते हैं और गहरे भूरे रंग के ब्रांड (dark brown brand) और पीले प्रभामंडल (yellow halo) के साथ रैखिक (linear), आयताकार (oblong), भूरे से काले धब्बे बन जाते हैं। फंगल फ्रूटीफिकेशन (fungal fruitification) के काले धब्बे (Black specks) प्रभावित पत्तियों में दिखाई देते हैं। पत्तियों का तेजी से सूखना और गिरना (defoliation)।
लक्षण
कोनिडिया लम्बे, संकीर्ण और बहु सेप्टेट (multi septate) होते हैं और 20-80 x 2-6 माइक्रोन मीटर के होते हैं। पेरिथेसिया (Perithecia) गहरे भूरे से काले रंग के होते हैं और एस्की (asci) आयताकार (oblong), क्लैवेट (clavate) और 28.8- 36.8x8.0-10.8 माइक्रोन मीटर मापते हैं। एस्कोस्पोर्स एक सेप्टेट (septate), हाइलिन, कुंद (obtuse) होते हैं जिनकी ऊपरी कोशिका थोड़ी चौड़ी होती है।
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प्रभावित पत्तियों को हटाना और नष्ट करना। प्रोपिकोनाज़ोल (Propiconazole) + कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) 0.1% या क्लोरोथालोनिल (Chlorothalonil) 0.25% का छिड़काव करें। टीपोल (teepol) या सैंडोविट (sandovit) जैसे वेटिंग एजेंट (wetting agent) को 1 मिली/लीटर पानी की दर से मिलाएं।
सिगार एंड रॉट (Cigar end Rot) (Verticillium theobromae, Trachsphaera fructigena और Gloeosporium musarum)
पेरियनथ (perianth) से अपरिपक्व उंगलियों (immature fingers) की नोक (tip) में एक काला नेक्रोसिस (black necrosis) फैलता है। केले की उंगली का सड़ा हुआ हिस्सा सूखा होता है और फलों का पालन (adhere) करता है (सिगार की राख के समान दिखाई देता है)।
कोनिडियोफोर्स (Conidiophores) आमतौर पर अकेले या छोटे समूहों में होते हैं। कोनिडिया हाइलिन, आयताकार (oblong) से बेलनाकार (cylindrical) होते हैं। वे टेपरिंग फियालाइड्स (tapering phialides) के अंत में पैदा होते हैं, गोल (rounded), श्लेष्म पारभासी सिर (mucilaginous translucent heads) में एकत्रित होते हैं।
गुच्छा (bunch) बनने के 8-10 दिन बाद हाथ से स्त्रीकेसर (pistil) और पेरियनथ (perianth) को हटाना और गुच्छे पर डाइथेन एम-45 (Dithane M-45) (0.1%) या टॉप्सिन एम (Topsin M) (0.1%) का छिड़काव (spraying) रोग को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है। चोट को कम करना (Minimising bruising); 14°C तक शीघ्र ठंडा करना (prompt cooling); प्रबंधन सुविधाओं (handling facilities) की उचित स्वच्छता (proper sanitation) कोल्ड स्टोरेज (cold storage) में घटनाओं को कम करती है।
एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose): Gloeosporium gloeosporioides
उंगलियों के दूरस्थ सिरों (distal ends) पर त्वचा काली होकर सिकुड़ (shrivels) जाती है। कवक कोनिडिया (conidia) के द्रव्यमान (masses) पैदा करता है जो गुलाबी रंग का कोट (pinkish coat) बनाते हैं। गंभीर मामलों में पूरा फल और गुच्छा प्रभावित होता है। कभी-कभी गुच्छे का मुख्य डंठल (stalk) रोगग्रस्त हो जाता है। गुच्छा काला और सड़ा (rotten) हुआ हो जाता है। एसरवुली (Acervuli) बेलनाकार कोनिडियोफोर्स (cylindrical conidiophores), हाइलिन (hyaline), सेप्टेट (septate), शाखित (branched) पैदा करता है। कोनिडिया हाइलिन, गैर-सेप्टेट (non-septate), अंडाकार (oval) से दीर्घवृत्ताकार (elliptical) होते हैं।
लक्षण
एसरवुली (Acervuli) आमतौर पर गोल होते हैं या कभी-कभी लम्बे, एरुम्पेंट (erumpent) होते हैं। कोनिडियोफोर्स बेलनाकार होते हैं, शीर्ष (apex) की ओर टेपर (tapered) होते हैं, हाइलिन और सेप्टेट होते हैं। कोनिडिया हाइलिन, एसेप्टेट (aseptate), आकार में अंडाकार से दीर्घवृत्ताकार (ellipitical) होते हैं।
रोग का प्रसार वायुजनित (air borne) कोनिडिया द्वारा होता है और कई कीड़े जो अक्सर केले के फूलों पर जाते हैं, वे भी रोग फैलाते हैं।
कटाई के बाद (Post harvest) फलों को कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) 400 पीपीएम (ppm), या बेनोमाइल (Benomyl) 1000 पीपीएम, या ऑरोफंगिनसोल (Aureofunginsol) 100 पीपीएम में डुबाना (dipping)।
फ्रेकल या ब्लैक स्पॉट (Freckle or Black Spot): Phyllostictina musarum
पत्तियों और फलों पर केंद्र में काले बिंदुओं (black dots) के साथ छोटे उभरे हुए (raised) गहरे भूरे रंग के धब्बे (dark brown spots) दिखाई देते हैं। फलों पर रोगजनक त्वचा (skin) तक ही सीमित (confined) रहता है। कवक पिक्निडियम (pycnidium) पैदा करता है जो गहरे रंग के होते हैं। कोनिडियोफोर्स सरल, छोटे, लम्बे (elongate) होते हैं। कोनिडिया हाइलिन, एकल कोशिका वाले (single celled) ओवोइड (ovoid) होते हैं। कवक संक्रमित पौधे के मलबे में जीवित रहता है। कोनिडिया बारिश के पानी और हवा से फैलता है।
लक्षण
कवक पिक्निडिया (pycnidia) और पिक्निडियोस्पोर्स (pycnidiospores) पैदा करता है। पिक्निडियोस्पोर्स सुई के आकार (needle shape), हाइलिन और मल्टी सेप्टेट (multi septate) होते हैं।
कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper oxychloride) 0.25% का छिड़काव करें। 1 मिली/लीटर पानी की दर से टीपोल (teepol) या सैंडोविट (sandovit) जैसे वेटिंग एजेंट (wetting agent) मिलाएं।
बनाना बंची टॉप (Banana bunchy top): बनाना बंची टॉप वायरस (Banana bunchy top virus)
बीमारी घरेलू संगरोध नियमों (domestic quarantine regulations) द्वारा कवर की जाती है। हर साल 4 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान (estimated) लगाया गया था और यदि संक्रमित चूसक (suckers) लगाए जाते हैं तो 100% नुकसान होता है।
बाद में निकलने वाली पत्तियां वही लक्षण दिखाती हैं और बौनी (dwarfed) हो जाती हैं। नसों, पत्तियों और पेटीओल्स (petioles) पर हरे ऊतकों के गहरे टूटे हुए बैंड (Dark broken bands)। पौधे बेहद बौने (stunted) हो जाते हैं। पत्तियां आकार में कम हो जाती हैं (reduced), सीमांत क्लोरोसिस (marginal chlorosis) और मुड़ना (curling)। पत्तियां सीधी (upright) और भंगुर (brittle) हो जाती हैं। कई पत्तियां शीर्ष पर भीड़भाड़ (crowded) वाली होती हैं। शाखाओं का आकार बहुत छोटा होगा। यदि पहले संक्रमित हो जाए तो कोई गुच्छा (bunch) नहीं बनेगा। बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित चूसक (infected suckers) द्वारा फैलती है।
लक्षण
द्वितीयक प्रसार (Secondary spread) एफिड वेक्टर (aphid vector) Pentalonia nigronervosa के माध्यम से होता है।
रोग मुक्त क्षेत्रों से चूसक (suckers) का चयन करें। मिथाइल डेमटन (methyl demoton) 1 मिली/लीटर या मोनोक्रोटोफोस (Monocrotophos), 2 मिली/लीटर या फॉस्फोमिडोन (Phosphomidon) 1 मिली/लीटर का छिड़काव करके या मोनोक्रोटोफोस 1 मिली/पौधे (4 मिलीलीटर में 1 मिलीलीटर पतला) का इंजेक्शन (Injection) लगाकर वेक्टर (vector) को नियंत्रित करें। संक्रमित पौधों को 2, 4, D के 4 मिली (400 मिली पानी में 50 ग्राम) का उपयोग करके नष्ट कर दिया जाता है।
संक्रामक क्लोरोसिस (Infectious chlorosis): ककड़ी मोज़ेक वायरस (Cucumber mosaic virus)
केले का संक्रामक क्लोरोसिस (Infectious chlorosis) या हार्ट रॉट (heart rot) ककड़ी मोज़ेक वायरस (Cucumber Mosaic Virus - CMV) के कारण होता है, हाल ही में गंभीर (serious) हो गया है, पूवन कल्टीवेटर (Poovan cultivar) में यह बीमारी 20 से 80 प्रतिशत तक दर्ज (recorded) की गई है।
पत्तियों पर क्लोरोटिक (Chlorotic) या पीली रेखीय असंतत धारियां (yellow linear discontinuous streaks), पत्तियों का ऊपर की ओर मुड़ना (upward curling), क्राउन (crown) पर पत्तियों का मुड़ना (twisting) और गुच्छेदार (bunching) होना, नई उभरी हुई पत्तियों का सीधा (erectness) होना। कभी-कभी हार्ट रॉट (heart rot) के लक्षण भी दिखाई देते हैं। रोगग्रस्त पौधे बौने (dwarf) होते हैं, गुच्छे (bunches) पैदा नहीं करते हैं। वायरस संक्रमित चूसक और एफिड वैक्टर (aphid vectors) - Aphis gossypii के माध्यम से फैलता है।
लक्षण
संक्रमित पौधों को नष्ट करें। रोग मुक्त चूसक (suckers) का उपयोग करें। प्रणालीगत कीटनाशक (systemic insecticide) 0.1% का छिड़काव करके वेक्टर को नियंत्रित करें।