17. बंगाल चना (चना) के रोग (Diseases of Bengal gram)

एस्कोचाइटा ब्लाइट (Ascochyta blight) - Ascochyta rabiei

लक्षण (Symptoms)

पौधे के जमीन के ऊपर के सभी हिस्से संक्रमित हो जाते हैं। पत्ती पर, घाव गोल या लम्बे (elongated) होते हैं, जिनमें अनियमित रूप से दबे हुए (depressed) भूरे रंग के धब्बे होते हैं और भूरे लाल किनारे (brownish red margin) से घिरे होते हैं। तने और फलियों पर भी इसी तरह के धब्बे दिखाई दे सकते हैं। तने और फलियों पर धब्बों में संकेंद्रित वृत्तों (concentric circles) में पिक्निडिया (pycnidia) सूक्ष्म काले बिंदुओं (minute block dots) के रूप में व्यवस्थित (arranged) होते हैं। जब घाव तने को घेर लेते हैं (girdle), तो हमले के बिंदु के ऊपर का हिस्सा तेजी से मर जाता है। यदि कॉलर क्षेत्र (collar region) में मुख्य तने को घेर लिया जाता है, तो पूरा पौधा मर जाता है।

लक्षण

रोगजनक (Pathogen)

कवक हाइलिन से भूरे और सेप्टेट (septate) मायसेलियम पैदा करता है। पिक्निडिया (Pycnidia) एक प्रमुख ओस्टियोल (prominent ostiole) के साथ गोलाकार (spherical) से उप-ग्लोबोज़ (sub-globose) होते हैं। पिक्निडियोस्पोर्स (Pycnidiospores) हाइलिन, अंडाकार से आयताकार (oval to oblong), सीधे या थोड़े घुमावदार (slightly curved) और एकल कोशिका वाले, कभी-कभी द्विकोशिकीय (bicelled) होते हैं।

अनुकूल परिस्थितियां (Favourable conditions)

रोग चक्र (Disease cycle)

कवक संक्रमित पौधों के मलबे में पिक्निडिया के रूप में जीवित रहता है। रोगजनक बाहरी और आंतरिक (externally and internally) रूप से बीज जनित (seed-borne) भी है। प्राथमिक प्रसार मिट्टी में बीज जनित पिक्निडिया और पौधों के मलबे से होता है। द्वितीयक प्रसार (secondary spreads) मुख्य रूप से वायुजनित (air-borne) पिक्निडियोपोर (कोनिडिया) के माध्यम से होता है। बारिश के छींटे भी बीमारी को फैलाने में मदद करते हैं।

प्रबंधन (Management)

जंग (Rust) - Uromyces ciceris-arietini

लक्षण (Symptoms)

संक्रमण दोनों सतहों पर, विशेष रूप से पत्ती की निचली सतह पर छोटे अंडाकार, भूरे, पाउडर जैसे घावों के रूप में प्रकट होता है। घाव, जो यूरेडोसोरी (uredosori) हैं, पूरी पत्ती की सतह को कवर करते हैं। मौसम के अंत में पत्तियों पर गहरे टेलिओसोरी (teliosori) दिखाई देते हैं। जंग के दाने (rust pustules) पेटीओल्स, तने और फलियों पर दिखाई दे सकते हैं। पिक्नियल (pycnial) और एसियल (aecial) चरण अज्ञात हैं।

रोगजनक (Pathogen)

यूरेडोस्पोर्स (uredospores) गोलाकार, भूरे पीले रंग के होते हैं, जो 4-8 रोगाणु छिद्रों (germ pores) के साथ ढीले रूप से इचिनुलेट (loosey echinulated) होते हैं। टेलिओस्पोर्स (Teliospores) गोल से अंडाकार, भूरे, बिना मोटे शीर्ष (unthickened apex) के साथ एकल कोशिका वाले होते हैं और दीवारें खुरदरी, भूरे और वार्टी (warty) होती हैं।

प्रसार और अस्तित्व का तरीका (Mode of Spread and Survival)

कवक गर्मियों के महीनों के दौरान फली खरपतवार (legume weed) Trigonella polycerata में यूरेडोस्पोर्स के रूप में जीवित रहता है और संक्रमण के प्राथमिक स्रोत के रूप में कार्य करता है। प्रसार हवा से उड़ने वाले यूरेडोस्पोर्स के माध्यम से होता है।

प्रबंधन (Management)

विल्ट (Wilt) - Fusarium oxysporum f.sp. ciceris

लक्षण (Symptoms)

बीमारी फसल के विकास के दो चरणों में होती है, अंकुर चरण (seedling stage) और फूल आने का चरण (flowering stage)। अंकुरों पर मुख्य लक्षण पत्तियों का पीला होना और सूखना, पेटीओल्स और रचिस (rachis) का झुकना (drooping), पौधों का मुरझाना (withering) है। वयस्क (adult) पौधों के मामले में शुरू में पौधे के ऊपरी हिस्से में पत्तियों का झुकना देखा जाता है, और जल्द ही पूरे पौधे में देखा जाता है। तने और जड़ के हिस्से पर संवहनी भूरापन (Vascular browning) स्पष्ट रूप से (conspicuously) देखा जाता है।

लक्षण

रोगजनक (Pathogen)

कवक हाइलिन से हल्के भूरे रंग के, सेप्टेट और प्रचुर मात्रा में (profusely) शाखित हाइफे (branched hyphae) पैदा करता है। माइक्रोकोनिडिया (Microconidia) अंडाकार से बेलनाकार, हाइलिन, एकल कोशिका वाले होते हैं, आमतौर पर छोटे कोनिडियोफोर्स पर उत्पन्न होते हैं। मैक्रोकोनिडिया (Macroconidia) जो शाखित कोनिडियोफोर्स पर पैदा होते हैं, पतली दीवार वाले, 3 से 5 सेप्टेट, फ्यूज़ॉइड (fusoid) और दोनों सिरों पर नुकीले (pointed) होते हैं। क्लैमाइडोस्पोर्स (Chlamydospores) खुरदरी दीवार वाले (roughwalled) या चिकने (smooth), टर्मिनल या इंटरकेलरी (intercalary) होते हैं, अकेले या श्रृंखलाओं (chains) में बन सकते हैं।

अनुकूल परिस्थितियां (Favourable conditions)

रोग चक्र (Disease cycle)

यह बीमारी बीज और मिट्टी जनित है। प्राथमिक संक्रमण मिट्टी में क्लैमाइडोस्पोर्स के माध्यम से होता है, जो अगले फसल मौसम तक व्यवहार्य (viable) रहता है। द्वितीयक प्रसार सिंचाई के पानी, कृषि कार्यों (cultural operations) और उपकरणों के माध्यम से होता है।

प्रबंधन (Management)

स्टंट रोग (Stunt disease) - वायरस (Virus)

लक्षण (Symptoms)

प्रभावित पौधे बौने (stunted) और छोटे इंटर्नोड्स (internodes) के साथ झाड़ीदार (bushy) होते हैं। पीले, नारंगी या भूरे रंग के मलिनकिरण (discoloration) के साथ पत्रक (leaflets) छोटे होते हैं। तने में भूरा मलिनकिरण भी दिखाई देता है। पौधे समय से पहले (prematurely) सूख जाते हैं। यदि वे जीवित रहते हैं, तो बहुत कम छोटी फलियां (pods) बनती हैं। कॉलर क्षेत्र (collar region) में फ्लोएम (Phloem) का भूरा होना स्टंट (stunt) का सबसे विशिष्ट लक्षण है, जो जाइलम (xylem) को सामान्य छोड़ देता है।

लक्षण

रोग चक्र (Disease cycle)

वायरस Aphis craccivora द्वारा प्रेषित (transmitted) होता है।

प्रबंधन (Management)

कॉलर रॉट (Collar rot) - Sclerotium rolfsii

लक्षण (Symptoms)

यह शुरुआती चरणों (early stages) में आता है यानी बुवाई से छह सप्ताह तक। खेत में बिखरे हुए ऐसे पौधे सूखना (Drying) जिनके पत्ते मरने से पहले थोड़े पीले हो जाते हैं, बीमारी का संकेत (indication) है। अंकुर (Seedlings) क्लोरोटिक (chlorotic) हो जाते हैं। तने और जड़ का जोड़ नरम हो जाता है, थोड़ा सिकुड़ता (contracts) है और सड़ने (decay) लगता है। संक्रमित हिस्से भूरे सफेद (brown white) हो जाते हैं। आकार में सरसों (mustard) जैसे काले बिंदु जिन्हें स्क्लेरोटिया (sclerotia) कहा जाता है, सफेद संक्रमित पौधे के हिस्सों पर दिखाई देते हैं।

लक्षण

अनुकूल परिस्थितियां (Favorable conditions)

प्रबंधन (Management)

मामूली बीमारियाँ (Minor diseases)

फुट रॉट (Foot rot) - Operculella padwickii
सड़न (Rotting) कॉलर क्षेत्र (collar region) से आगे तक स्पष्ट है। सड़े हुए हिस्से के ऊपर (केवल छाल / bark के हिस्से पर) आंतरिक भूरापन दिखाई देता है।

स्टेमरॉट (Stemrot) - Sclerotinia sclerotiorum
यह बीमारी ज्यादातर वयस्क पौधों के तनों के सड़ने (stems rot) पर तने के ऊपरी हिस्सों पर पानी से लथपथ घाव (water soaked lesion) के रूप में दिखाई देती है। प्रभावित हिस्सा सफेद सूती (cottony) वृद्धि और काले स्क्लेरोटियल निकायों (sclerotial bodies) से ढका होता है।

बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (Bacterial leaf blight) - Xanthomonas campestris pv. cassiae
क्लोरोटिक हेलो (chlorotic haloes) के साथ पत्तियों पर छोटे पानी से लथपथ घाव विकसित होते हैं जो बाद में गहरे भूरे रंग के धब्बों (dark brown spots) में बदल जाते हैं। अंकुरण के बाद अंकुर सड़न (Post emergence seedling rot) भी आम है।

बीन कॉमन मोज़ेक (Bean Common Mosaic) - वायरस (Virus)

मोज़ेक मोटलिंग (mosaic mottling) के साथ पौधे का बौना (Stunted), झाड़ीदार (bushy) रूप। वेक्टर (Vector) : Aphis gossypii और A. craccivora

अस्वीकरण (Disclaimer):
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