विल्ट (Wilt) - Fusarium oxysporum f.sp. chrysanthemi
लक्षण
प्रारंभिक लक्षण (Initial symptoms) पत्तियों के पीले और भूरे होने (browning) के रूप में होते हैं। प्रभावित पत्तियां पौधे के आधार (base) से ऊपर की ओर मर जाती हैं। संक्रमित पौधे अविकसित (stunted) होते हैं और अक्सर फूल पैदा करने में विफल रहते हैं। मुरझाने (Wilting) से जड़ (root) या तने के आधार (base of the stem) में सड़न (rotting) हो सकती है।
कवक मिट्टी जनित (soil borne) है। यह बीमारी कटिंग (cuttings) से फैलती है।
मिट्टी को कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) 0.1% के साथ ड्रेंच (Drenching) करना प्रभावी है। रोपण (planting) से पहले जड़ वाली कटिंग (rooted cuttings) को थिरम (Thiram) @ 1.5 ग्राम / लीटर पानी के घोल में डुबाना (dipping)। चूंकि यह बीमारी ज्यादातर कटिंग के माध्यम से फैलती है, इसलिए रोग मुक्त (disease free) रोपण सामग्री (planting material) का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। सख्त स्वच्छता (strict sanitation) का पालन करके; आवधिक निगरानी (periodical monitoring); फसल चक्रण (crop rotation) और संक्रमित पौधों की छंटाई (roguing) करके बीमारी को और कम किया जा सकता है।
रस्ट (Rust) - Puccinia chrysanthemi
लक्षण
रोग के लक्षण भूरे रंग के छाले (brown blister) जैसी सूजन (swellings) के रूप में होते हैं, जो पत्तियों के नीचे (undersides) दिखाई देते हैं। ये फट जाते हैं जिससे भूरे, पाउडर बीजाणुओं (powdery spores) का द्रव्यमान निकलता है। गंभीर रूप से संक्रमित पौधे बहुत कमजोर (very weak) हो जाते हैं और ठीक से खिलने (bloom properly) में विफल रहते हैं।
संक्रमित पत्तियों / पौधों को जल्दी हटाने से बीमारी को और फैलने (further spread) से रोकने में मदद मिलती है। पौधों पर कराथेन (Karathane) @ 0.025% या वेटेबल सल्फर (Wettable Sulphur) @ 0.3% का छिड़काव रोग को नियंत्रित करने में प्रभावी है।
सेप्टोरिया लीफ स्पॉट (Septoria Leaf Spot) - Sepotria chrysanthemella
लक्षण
बारिश के मौसम (rainy season) में ठंडे-गीले (cool-wet) अवधि (periods) के दौरान पत्ती के धब्बे (Leaf spots) होते हैं। चूंकि रोगजनक बारिश की बूंदों (rain splashes) के माध्यम से फैलते हैं, इसलिए सबसे निचली पत्तियां सबसे पहले संक्रमित हो जाती हैं। गंभीर संक्रमण के परिणामस्वरूप पत्तियों का समय से पहले मुरझाना (premature withering) हो सकता है; मृत पत्तियां कुछ समय के लिए तने पर लटकी रहती हैं। जब फूल आना (flowering) शुरू होता है तो संक्रमण फूलों की कलियों (flower buds) पर होता है, जो पूरी तरह से सड़ (rot) जाते हैं।
पिक्निडिया (Pycnidia) कई, एम्फिजेनस (amphigenous), सब एपिडर्मल (sub epidermal), ग्लोबोज़ (globose) या लेंस के आकार (lens shaped) के होते हैं। कोनिडिया हाइलिन (hyaline), धागेनुमा (filiform), सीधे (straight) या लचीले (flexuous) होते हैं जो अक्सर घुमावदार (curved) या कृमि जैसे (worm like) होते हैं।
मिट्टी में संक्रमित मलबा (Infected debris) संक्रमण का प्राथमिक स्रोत (primary source) या चूसक (suckers) के माध्यम से किया जाने वाला प्रणालीगत संक्रमण (systemic infection) प्रतीत होता है। कवक परिवार कम्पोजिटे (family compositae) के अन्य सदस्यों को संक्रमित नहीं करते हैं और केवल गुलदाउदी की किस्मों (chrysanthemum cultivars) के लिए विशिष्ट (specific) हैं।
जुलाई के अंत से 15 दिनों के अंतराल पर छह बार कार्बेन्डाजिम 0.1% का छिड़काव करके या बेनोमिल (Benomyl) (0.1%) के बाद कैप्टाफोल (Captafol) (0.2%) का छिड़काव करके इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। रोग मलबे (disease debris) को नष्ट करने और अत्यधिक सिंचाई (excessive irrigation) से बचने की सिफारिश की जाती है।
पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery Mildew) - Oidium chrysanthemi
लक्षण
नम परिस्थितियों (humid conditions) में पुराने पौधों में संक्रमण अधिक गंभीर होता है। पत्तियों पर कवक की वृद्धि (growth) पाउडर कोटिंग (powdery coating) के रूप में दिखाई देती है। संक्रमित पत्तियां पीली हो जाती हैं और सूख (dry out) जाती हैं। संक्रमित पौधे अविकसित (stunted) रहते हैं और फूल (flower) आने में विफल रहते हैं।
रोग को सल्फर कवकनाशी (Sulphur fungicides) या कैप्टान (Captan) (0.2%) से प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। हवा के मुक्त संचलन (free circulation of air) के लिए अच्छे वेंटिलेशन (ventilation) और उचित रिक्ति (proper spacing) की सिफारिश की जाती है।