एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose): Colletotrichum gloeosporioides
यह रोग युवा पत्तियों, तने, पुष्पक्रम (inflorescence) और फलों पर दिखाई देता है। पत्तियों पर अंडाकार (oval) या अनियमित, भूरे-भूरे (greyish-brown) धब्बे दिखाई देते हैं जो पत्ती के बड़े क्षेत्र को कवर करने के लिए आपस में मिल (coalesce) सकते हैं। प्रभावित पत्ती के ऊतक सूख जाते हैं और फट (shred) जाते हैं। संक्रमित पेटीओल्स (petioles) पर पत्तियां झुक (droop) जाती हैं और गिर जाती हैं। युवा तने पर, भूरे-भूरे रंग के धब्बे विकसित होते हैं। ये बड़े हो जाते हैं और प्रभावित क्षेत्र की गर्डलिंग (girdling) और सूखने का कारण बनते हैं। यह रोग युवा पत्तियों, तने, पुष्पक्रम और फलों पर दिखाई देता है।
अक्सर, टहनियों (twigs) पर सिरे से नीचे की ओर काले नेक्रोटिक क्षेत्र (necrotic areas) विकसित होते हैं जिससे डाईबैक (dieback) होता है। नम मौसम (humid weather) में, पुष्प अंगों (floral organs) पर छोटे, काले बिंदु विकसित होते हैं। संक्रमित फूलों के हिस्से अंततः गिर (shed) जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप आंशिक या पूर्ण डिब्लोसमिंग (partial or complete deblossoming) होता है। फल के गुप्त संक्रमण (Latent infections) कटाई से पहले स्थापित हो जाते हैं। पकने वाले फल (ripening fruits) विशिष्ट एन्थ्रेक्नोज दिखाते हैं। प्रभावित फलों की त्वचा पर दिखाई देने वाले काले धब्बे धीरे-धीरे धँस (sunken) जाते हैं और आपस में मिल जाते हैं।
लक्षण
मायसेलियम सेप्टेट (septate) और रंगीन होता है। कोनिडिया (Conidia) एकल कोशिका वाले (Single celled), हाइलिन (hyaline), छोटे और लम्बे होते हैं।
सूखी पत्तियों, गिरे हुए (defoliated) शाखाओं, ममीकृत (mummified) फूलों और फूल ब्रैकेट (flower brackets) पर। परिवहन (transport) और भंडारण (storage) के दौरान रोगग्रस्त फलों के संपर्क (Contact) में। द्वितीयक प्रसार (secondary spread) वायुजनित (airborne) कोनिडिया के माध्यम से होता है।
25°C का तापमान और सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) 95-97%
मिट्टी की सतह पर पड़ी अलग हुई रोगग्रस्त टहनियों और पत्तियों में और पेड़ से जुड़ी रोगग्रस्त टहनियों में रोगजनक का अस्तित्व। उन्होंने पत्तियों, पेटीओल्स, तनों और फलों को टीका लगाकर (inoculating) सफलतापूर्वक बीमारी को दोहराया (reproduced)। संक्रमण के लिए इष्टतम (optimum) तापमान 25˚C पाया गया। बारिश के मौसम में यह बीमारी तेजी से फैलती है। फूल आने के दौरान बादल और धुंधला मौसम (Cloudy and misty weather) संक्रमित पुष्प भागों (floral parts) को नुकसान पहुंचाता है।
रोगजनक पत्तियों पर गंभीर धब्बे (severe leaf spotting) पैदा करता है। तने के सिरे (stem-end) पर धब्बों की अधिक सांद्रता (concentration) और कभी-कभी फलों के किनारों पर धारियों (stripes) के रूप में दिखाई देना फलों की सतह पर वर्षा जल (rain water) द्वारा बीजाणुओं के वितरण (distribution of spores) का सुझाव देता है। कवक हरे फलों के छिद्रों (pores) में प्रवेश कर सकता है। परिपक्व (mature) फलों का गुप्त संक्रमण लेंटिकल्स (lenticels) के माध्यम से हो सकता है। कवक स्पष्ट रूप से (apparently) फल को संक्रमित करता है जबकि यह हरा होता है और पकने के दौरान गूदे (flesh) में विकसित होता है।
अक्टूबर से शुरू होने वाले 3 सप्ताह के अंतराल पर फूल की शाखाओं (flower branches) पर P. fluorescens (FP 7) का 5 ग्राम/लीटर पर छिड़काव करें। फूलों और गुच्छों (bunches) पर 5-7 छिड़काव किए जाने चाहिए। भंडारण (storage) से पहले, गर्म पानी (50-55°C) से 15 मिनट के लिए उपचार (treat) करें या बेनोमाइल (Benomyl) समाधान (500ppm) या थियोबेंडाजोल (Thiobendazole) (1000ppm) में 5 मिनट के लिए डुबोएं (dip)।
पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery mildew): Oidium mangiferae (Acrosporum mangiferae)
पाउडरी मिल्ड्यू आम की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है जो लगभग सभी किस्मों को प्रभावित करती है। बीमारी का विशिष्ट (characteristic) लक्षण पत्तियों, पुष्पगुच्छों (panicles) के डंठल (stalk), फूलों और छोटे फलों पर सफेद सतही पाउडर वाली फंगल वृद्धि (superficial powdery fungal growth) है। प्रभावित फूल और फल समय से पहले (pre-maturely) गिर जाते हैं, जिससे फसल का भार (crop load) काफी कम हो जाता है या फल लगने (fruit set) से भी रोका जा सकता है। फूल आने के दौरान ठंडी रातों के साथ बारिश या धुंध (mists) बीमारी फैलने के लिए अनुकूल (congenial) हैं।
लक्षण
मायसेलियम एक्टोफाइटिक (ectophytic) है। कोनिडियोफोर्स (Conidiophores) छोटे, हाइलिन (hyaline) और कोनिडिया (conidia) एकल कोशिका वाले (single celled) - बैरल के आकार (barrel shaped) के होते हैं, जो श्रृंखला में उत्पन्न होते हैं। कवक ओडियम प्रकार (odium type) है।
प्रभावित पत्तियों में निष्क्रिय मायसेलियम (dormant mycelium) के रूप में जीवित रहता है। वायुजनित (air borne) कोनिडिया द्वारा द्वितीयक प्रसार (Secondary spread)।
संक्रमित क्षेत्रों से हवा द्वारा उड़ाए गए बीजाणु (Spores blown wind) पुष्पक्रम (inflorescence) के सिरे के पास बालों वाले (hairy), बिना खुले फूलों से आसानी से चिपक (adhere) जाते हैं और पांच से सात घंटों में अंकुरित (germinate) हो जाते हैं। भारी सुबह की धुंध (heavy morning mist) के साथ बादल वाले मौसम (cloudy weather) के दौरान कवक तेजी से बढ़ता है। गर्म, नम मौसम और रात का कम तापमान रोगजनक के प्रसार (dissemination) का पक्ष लेता है। कुल मिलाकर रोग का विकास उच्च आर्द्रता (high humidity) के पक्ष में होता है।
पौधों पर बारीक सल्फर (fine sulphur) (250-300 मेश / mesh) की 0.5 किलोग्राम/पेड़ की दर से डस्टिंग (Dusting) करें। पहला प्रयोग (application) फूल आने के तुरंत बाद हो सकता है, दूसरा 15 दिन बाद (या) वेटेबल सल्फर (Wettable sulphur) (0.2%), (या) कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) (0.1%), (या) ट्राइडेमोर्फ (Tridemorph) (0.1%), (या) कराथेन (Karathane) (0.1%) के साथ स्प्रे करें।
आम की विकृति (Mango malformation) : Fusarium moliliforme var. subglutinans
तीन प्रकार के लक्षण: बंची टॉप (bunchy top) चरण, पुष्प विकृति (floral malformation) और वानस्पतिक विकृति (vegetative malformation)। नर्सरी में बंची टॉप चरण में छोटी, मोटी टहनियों का गुच्छा (bunching of thickened small shoots) होता है, जिसमें छोटी अल्पविकसित पत्तियाँ (rudimentally leaves) होती हैं। टहनियाँ छोटी और बौनी (stunted) रहती हैं जिससे बंची टॉप उपस्थिति मिलती है। वानस्पतिक विकृति (vegetative malformation) में, अंकुरों (seedlings) में सीमित वृद्धि की अत्यधिक वानस्पतिक शाखाएँ (excessive vegetative branches)। वे विभिन्न आकार के गुच्छे बनाने वाले छोटे इंटर्नोड्स (internodes) के साथ सूजे (swollen) हुए होते हैं और अंकुरों का शीर्ष बंची टॉप उपस्थिति दिखाता है। पुष्पक्रम (inflorescens) की विकृति में, पुष्पगुच्छ (panicle) में भिन्नता (variation) दिखाई देती है। विकृत सिर (Malformed head) काले द्रव्यमान (black mass) में सूख जाता है और लंबे समय तक बना (persist) रहता है। द्वितीयक शाखाएँ (Secondary branches) कई छोटी पत्तियों में बदल जाती हैं जिससे चुड़ैलों की झाड़ू (witches broome) जैसी उपस्थिति मिलती है।
लक्षण
माइक्रो कोनिडिया (Micro conidia) एक या 2 कोशिका वाले, अंडाकार से फ्यूसीफॉर्म (oval to fusiform) होते हैं और पॉलीफियालाइड्स (polyphialides) से उत्पन्न होते हैं। मैक्रो कोनिडिया (Macro conidia) शायद ही कभी उत्पन्न होते हैं। वे 2-3 कोशिका वाले और फाल्केट (falcate) होते हैं। क्लैमाइडोस्पोर्स (Chlamydospores) उत्पन्न नहीं होते हैं।
रोगग्रस्त प्रचार सामग्री (Diseased propagatives materials)।
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रोगग्रस्त पौधों को नष्ट कर देना चाहिए। रोग मुक्त रोपण सामग्री (disease free planting material) का उपयोग करें। अक्टूबर के दौरान 100-200ppm NAA के छिड़काव से घटना (Incidence) कम हो गई। स्पष्ट रूप से स्वस्थ (apparently healthy) भागों के बेसल (basal) 15-20 सेमी के साथ रोगग्रस्त भागों की छंटाई (Pruning)। इसके बाद कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) (0.1%) या कैप्टाफोल (Captafol) (0.2%) का छिड़काव किया जाता है।
स्टेम एंड रॉट (Stem end rot): Diplodia natalensis
पेडीसेल (pedicel) के आधार के चारों ओर गहरा एपिकार्प (dark epicarp)। प्रारंभिक अवस्था में प्रभावित क्षेत्र एक गोलाकार, काले पैच (circular, black patch) बनाने के लिए बड़ा हो जाता है। नम वातावरण (humid atmosphere) के तहत तेजी से फैलता है और दो या तीन दिनों के भीतर पूरे फल को पूरी तरह से काला कर देता है। गूदा (pulp) भूरा और कुछ नरम हो जाता है। पेड़ों की मृत टहनियां और छाल, बारिश से फैलती हैं.
लक्षण
कवक भूरे से काले, ग्लोबोज़ से उप ग्लोबोज़ (globose to sub globose), पाइरिफॉर्म (pyriform), एरुम्पेंट पिक्निडिया (erumpent pycnidia) पैदा करता है जो ओस्टियोलेट (ostiolate) होते हैं। वे 120-155x370-465 माइक्रोन मीटर के होते हैं। एक पिक्निडियम (pycnidium) के भीतर दो प्रकार के कोनिडिया उत्पन्न होते हैं। एक हाइलिन, पतली दीवार वाला और एककोशिकीय (unicellular) है। दूसरा मोटी दीवार वाला और द्विकोशिकीय (bicelled) है जिसमें चार से छह अनुदैर्ध्य धारियां (longitudinal striations) हैं।
कवक संक्रमित पौधों के हिस्सों में बना रहता (persists) है जो इनोकुलम (inoculum) के स्रोत के रूप में कार्य करते हैं।
संक्रमित टहनियों की छंटाई (Prune) करें और नष्ट करें और बारिश के मौसम में पखवाड़े (fortnightly) के अंतराल (interval) पर कार्बेन्डाजिम या थियोफेनेट मिथाइल (Thiophanate Methyl) (0.1%) या क्लोराथालोनिल (Chlorathalonil) (0.2%) का छिड़काव करें।
रेड-रस्ट (Red-rust): Cephaleuros virescens
शैवाल (Algae) पत्ते (foliage) और युवा टहनियों पर हमला करते हैं। पत्तियों पर जंग लगे धब्बे (Rusty spots) दिखाई देते हैं, शुरू में गोलाकार, थोड़े ऊंचे (slightly elevated) के रूप में, जो अनियमित (irregular) धब्बे बनाने के लिए आपस में मिल जाते हैं (coalesce)। बीजाणु परिपक्व (mature) होकर गिर जाते हैं और पत्तियों की सतह पर क्रीम (cream) से लेकर सफेद मखमली (valvet texture) बनावट छोड़ देते हैं।
लक्षण
Cephaleuros virescens वानस्पतिक वृद्धि (vegetative growth) की अवधि के बाद अपनी प्रजनन संरचनाएं (reproductive structures) विकसित करता है। थैलेस (thallus) पर सीधे बनने वाले स्पोरैंगिया (Sporangia) नारंगी रंजक (orange pigments) के साथ सेसाइल (sessile) और मोटी दीवार वाले होते हैं। वे वानस्पतिक तंतुओं (vegetative filaments) पर अकेले बनते हैं। जब स्पोरैंगिया पक (riped) जाते हैं तो सामग्री ज़ूस्पोर्स (Zoospores) में परिवर्तित हो जाती है और दीवार में एक उद्घाटन (opening) के माध्यम से मुक्त (liberated) हो जाती है। ज़ूस्पोर्स नारंगी रंग के, ओवोइड (ovoid) होते हैं और सिलिया (cilia) के माध्यम से सक्रिय (actively) रूप से तैरते हैं।
बोर्डो मिश्रण (Bordeaux mixture) (0.6%) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper oxychloride) 0.25%
ग्रे ब्लाइट (Grey Blight) : Pestalotia mangiferae
पत्ती के लैमिना (leaf lamina) के किनारे और सिरे पर भूरे रंग के धब्बे विकसित होते हैं। वे आकार में बढ़ते हैं और गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं। धब्बों पर काले बिंदु दिखाई देते हैं जो कवक के एसरवुली (acervuli) हैं। एक वर्ष से अधिक समय तक आम के पत्तों पर जीवित रहें। हवा से उड़ने वाले कोनिडिया (wind borne conidia) के माध्यम से फैलता है। मानसून (monsoon) के दौरान भारी संक्रमण (Heavy infection) देखा जाता है जब तापमान 20-25˚C और उच्च आर्द्रता (high humidity) होती है।
एसरवुली (Acervuli) प्रभावित हिस्से पर सूक्ष्म काले बिंदुओं के रूप में देखा गया। मायसेलियम रंगीन और सेप्टेट (septate) होता है। कोनिडिया पांच कोशिका वाले, मध्य तीन कोशिकाएं रंगीन होती हैं और अंत कोशिकाएं (end cells) हाइलिन होती हैं। बीजाणु (spore) के शीर्ष (apex) पर पतले 3-5 उपांग (appendages) उत्पन्न होते हैं।
एक वर्ष से अधिक समय तक आम के पत्तों पर जीवित रहें। हवा से उड़ने वाले कोनिडिया के माध्यम से फैलता है।
मानसून के दौरान भारी संक्रमण देखा जाता है जब तापमान 20-25˚C और उच्च आर्द्रता होती है।
संक्रमित पौधों के हिस्सों को निकालें और नष्ट करें। कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (copper oxychloride) 0.25 मैनकोजेब (Mancozeb) 0.25% या बोर्डो मिश्रण (Bordeaux mixture) 1.0% का छिड़काव (Spraying)।
सूटी मोल्ड (Sooty mould) : Capnodium mangiferae
कवक मायसेलियम पैदा करते हैं जो सतही (superficial) और गहरा (dark) होता है। वे प्लांट हॉपर (plant hoppers) के मीठे स्राव (sugary secretions) पर उगते (row) हैं। ब्लैक एनक्रस्टेशन (Black encrustation) बनता है जो प्रकाश संश्लेषक गतिविधि (photosynthetic activity) को प्रभावित करता है। कवक जेसिड्स (jassids), एफिड्स (aphids) और स्केल कीड़ों (scale insects) द्वारा स्रावित (secreted) शर्करा वाले पदार्थों (sugary substances) पर पत्ती की सतह पर बढ़ता है।
कवक जेसिड्स, एफिड्स और स्केल कीड़ों द्वारा स्रावित शर्करा वाले पदार्थों पर पत्ती की सतह पर बढ़ता है।
कीड़ों और सूटी मोल्ड्स (sooty moulds) का प्रबंधन एक साथ किया जाना चाहिए। मोनोक्रोटोफोस (Monocrotophos) या मिथाइल डेमेटन (methyl dematon) जैसे प्रणालीगत कीटनाशकों (systemic insecticides) का छिड़काव करके कीड़ों को नियंत्रित करना। उसके बाद स्टार्च (starch) समाधान का छिड़काव करें (5 लीटर पानी में 1 किलो स्टार्च/मैदा। उबालकर 20 लीटर तक पतला करें / dilute)। स्टार्च सूख जाता है और पपड़ी (flake) बनाता है जिसे कवक के साथ हटा दिया जाता है।