व्याख्यान 22 - गुलाब के रोग (Diseases of Rose)

ब्लैक स्पॉट (Black spot)- Diplocarbon rosae

आर्थिक महत्व (Economic Importance)

गुलाब का ब्लैक स्पॉट समशीतोष्ण क्षेत्रों (temperate regions) की ठंडी और ठंडी जलवायु में एक गंभीर समस्या है। यह बीमारी फूलों के आकार और संख्या में उल्लेखनीय कमी (marked reduction) का कारण बनती है।

लक्षण (Symptoms)

लक्षण

पत्तियों पर पीले ऊतक से घिरे पंखदार मार्जिन (feathery margins) वाले काले घाव (Black lesions) पाए जाते हैं। संक्रमित पत्तियां समय से पहले गिर जाती हैं। पहले साल के डिब्बे (first year canes) पर बैंगनी / लाल ऊबड़-खाबड़ (purple/red bumpy) क्षेत्र स्पष्ट हो सकते हैं। पत्तियों के झड़ने (defoliation) के कारण पौधे कमजोर हो सकते हैं और फूल का उत्पादन कम हो सकता है।

रोगजनक (Pathogen)

कवक के वानस्पतिक शरीर (vegetative body) में दो भाग होते हैं, अर्थात सबकुटिकुलर मायसेलियम (subcuticular mycelium) और आंतरिक मायसेलियम (internal mycelium)। कवक छाले (blister) जैसे अनुमानों (projections) के रूप में टार स्पॉट के मध्य भाग पर एसर्वुली (acervuli) का उत्पादन करता है। एस्की (Asci) डिस्कोइड (discoid), सब एपिडर्मल (sub epidermal), स्फोटक (erumpent) और व्यास (diameter) में 84 से 224 माइक्रोन मीटर होते हैं। स्ट्रोमा (Stroma) पतला है। कोनिडियोफोर हाइलिन छोटे और बेलनाकार (cylindrical) होते हैं। कोनिडिया हाइलिन (hyaline), दो सेल (two celled) वाले, फ्यूसीफॉर्म (fusiform) या एलेंटोइड (allantoid) से ओबक्लावेट (obclavate), ऊपरी छोर (upper end) गोल, आधार संकीर्ण (base narrow), गुट्टुलेट (guttulate), 18 - 25 x 5 - 6 माइक्रोन मीटर होते हैं।

प्रसार और अस्तित्व का तरीका (Mode of spread and survival)

फंगल बीजाणु मुख्य रूप से बारिश या पानी के छींटे (splashing) से फैलते हैं। बीजाणुओं का अंकुरण (Germination) और संक्रमण तब होता है जब मुक्त पानी पत्ती की सतह पर 6 घंटे या उससे अधिक समय तक रहता है। पत्ती के धब्बे (Leaf spots) 5 से 10 दिनों के भीतर विकसित होते हैं।

रोग चक्र (Disease Cycle)

प्रबंधन (Management)

सांस्कृतिक (Cultural) - गुलाब को वहां लगाया जाना चाहिए जहां सूरज रात की ओस (night's dew) को जल्दी सुखा सके। अच्छे वायु परिसंचरण (air circulation) के लिए गुलाबों को एक दूसरे से काफी दूर रखें। ओवरहेड पानी देने (overhead watering) से बचें और पर्णसमूह को यथासंभव सूखा रखें। संक्रमित डिब्बे (infected canes) को हटा दें और रोगग्रस्त पत्तियों को जला दें। मैनकोजेब (या) क्लोरोथालोनिल 0.2% (या) बेनोमिल 0.1% या कॉपर डस्ट (copper dust) के साथ छिड़काव।

पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery mildew) – Sphaerotheca pannosa

आर्थिक महत्व (Economic Importance)

यह गुलाब की व्यापक रूप से वितरित (widely distributed) बीमारी में से एक है। दक्षिण भारत में अक्टूबर-जनवरी और उत्तर भारत में दिसंबर-फरवरी के दौरान पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery mildew) प्रचलित (prevalent) है।

लक्षण (Symptoms)

लक्षण

यह लक्षण युवा पत्तियों, प्ररोहों (shoots) और कलियों (buds) की सतहों पर भूरे-सफेद पाउडर (grayish-white powdery) पदार्थ के रूप में प्रकट होता है। संक्रमित पत्तियां विकृत (distorted) हो सकती हैं, और कुछ पत्तियां गिर सकती हैं। फूलों की कलियां (Flower buds) खुलने में विफल हो सकती हैं, और जो खुलती हैं वे खराब गुणवत्ता (poor-quality) वाले फूल पैदा कर सकती हैं। यह बढ़ते मौसम के दौरान लगभग किसी भी समय हो सकता है जब तापमान हल्का (70 - 80 ° F) होता है और सापेक्ष आर्द्रता (relative humidity) रात में उच्च और दिन के दौरान कम होती है। यह छायादार (shady) क्षेत्रों में और ठंडी अवधि के दौरान सबसे गंभीर है।

रोगजनक (Pathogen)

मायसेलियम (Mycelium) सफेद, सेप्टेट, एक्टोफाइटिक (ectophytic) होता है और मेजबान (host) की एपिडर्मल कोशिकाओं (epidermal cells) में ग्लोबोज़ हॉस्टोरिया (globose haustoria) भेजता है। कोनिडियोफोर्स छोटे और सीधे (erect) होते हैं। कोनिडिया एक कोशिका वाले (one celled), आयताकार (oblong), कई बड़े वसा ग्लोब्यूल्स (fat globules) के साथ सूक्ष्म रूप से वेरुकोस (minutely verrucose) और 22.5 - 29.0 x 12.9 से 14.5 माइक्रोन मीटर होते हैं। क्लिस्टोथेशिया (Cleistothecia) मौसम के अंत में पत्तियों, पंखुड़ियों (petals), तनों और कांटों (thorns) पर बनते हैं। क्लिस्टोथेशिया सरल मायसेलॉयड उपांगों (simple myceloid appendages) के साथ होते हैं। प्रत्येक एस्कस (ascus) में आठ एस्कोस्पोर्स होते हैं।

रोग चक्र (Disease Cycle)

प्रसार और अस्तित्व का तरीका (Mode of spread and survival)

कवक सुप्त कलियों (dormant buds) और प्ररोहों (shoots) में मायसेलियम के रूप में सर्दियां (over winters) गुजारता है जो पूरी तरह से मारे नहीं जाते हैं। या तो कोनिडिया या एस्कोस्पोर्स प्राथमिक इनोकुलम (primary inoculum) के रूप में काम करते हैं। द्वितीयक प्रसार पवन जनित (wind borne) कोनिडिया के माध्यम से होता है।

प्रबंधन (Management)

गिरे हुए पत्तों को इकट्ठा करना और जलाना। वेटेबल सल्फर 0.3% (या) डायनोकैप 0.07% (या) कार्बेन्डाजिम 0.1% के साथ 15 दिनों के अंतराल पर 2-3 स्प्रे प्रभावी है। 25 किग्रा / हेक्टेयर पर सल्फर डस्ट (Sulphur dust)। उच्च तापमान की स्थिति में सल्फर का उपयोग फाइटोटॉक्सिक (phytotoxic) होगा।

डाई बैक (Die back) – Diplodia rosarum

आर्थिक महत्व (Economic Importance)

भारत में यह पहली बार 1961 में दिल्ली से रिपोर्ट किया गया था। अब यह सभी गुलाब उगाने वाले क्षेत्रों में होता है।

लक्षण (Symptoms)

लक्षण

टहनियों (twigs) का सिरे से नीचे की ओर सूखना। टहनियों (twigs) का काला पड़ना (Blackening)। बीमारी जड़ तक फैलती है और पौधों को पूरी तरह से मार देती है।

रोगजनक (Pathogen)

कवक गोल, काले पिक्निडिया (pycnidia) पैदा करता है जो बीजाणुओं (spores) को सहन करते हैं। पिक्निडिओस्पोर्स (pycnidiospores) गहरे रंग के और दो कोशिका वाले (two celled) होते हैं। पेरीथेसिया (Perithecia) मेजबान ऊतक में डूबे (immersed) हुए हैं और एक स्यूडोस्ट्रोमा (pseudostroma) से घिरे हुए हैं। एस्कोस्पोर्स (Ascospores) दीर्घवृत्ताकार (ellipsoidal) या फ्यूसॉइड (fusoid), हाइलिन, दो कोशिका वाले होते हैं जिनके मध्य (middle) में या उसके पास सेप्टम (septum) होता है।

प्रसार और अस्तित्व का तरीका (Mode of spread and survival)

कवक मृत टहनियों और मुरझाए हुए खिले फूलों के डंठल (stalks of the withered blooms) में बना रहता है।

प्रबंधन (Management)

छंटाई (Pruning) की जानी चाहिए ताकि युवा प्ररोहों पर घावों को समाप्त किया जा सके। छंटे हुए (pruned) क्षेत्र में चौबटिया पेस्ट (chaubatia pastic) लगाएं। COC 0.2% (या) डिफोलाटन (Difolatan) 0.2% (या) क्लोरोथालोनिल 0.2% (या) मैनकोजेब 0.2% के साथ छिड़काव करें

रस्ट (Rust) – Phragmidum mucronatum

आर्थिक महत्व (Economic Importance)

गुलाब का रस्ट अधिक ऊंचाई (higher altitudes) तक ही सीमित है। यह जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में होता है। राजस्थान के उदयपुर जिले में चैती गुलाब (Chaiti Gulab) किस्म में रस्ट रोग (rust disease) के प्रकोप (Outbreaks) की सूचना मिली थी।

लक्षण (Symptoms)

लक्षण

पत्तियों और तनों की निचली सतह पर नींबू के पीले रंग के दाने (lemon yellow pustules) दिखाई देते हैं। फिर रंग बदलकर काला लाल (blackish red) हो जाता है। प्रभावित पत्तियाँ पीली होकर विकृत (deformed) हो जाती हैं और समय से पहले गिर जाती हैं। पौधे के कमजोर होने के कारण डाई बैक (Die back) के लक्षण भी दिखाई देते हैं।

रोगजनक (Pathogen)

rosa sp. पर Phragmidum mucronatum। एसिडिओस्पोर्स (Aecidiospores) वेरुकोस (verrucose), नारंगी पीले, 24 - 25 x 18- 21 माइक्रोन मीटर होते हैं। वे क्लब के आकार (club shapped) के पैराफिस (paraphyses) द्वारा एशियम (aecidium) में घिरे हुए हैं। यूरेडोस्पोर्स (Uredospores) दीर्घवृत्ताकार (ellipsoid) या ओवेट (ovate), इचिनुलेट (echinulate), नारंगी पीले और 21 - 28 x 14 -20 माइक्रोन मीटर होते हैं। यूरेडोस्पोर्स छोटे पेडिकल्स (short pedicels) पर पैदा होते हैं और पैराफिस से घिरे होते हैं। टेलीयूटोस्पोर्स (Teleutospores) गहरे रंग के, बेलनाकार, 6- 8 कोशिका वाले होते हैं, जिनमें एक नुकीला (pointed) पैपिला और 65 - 120 x 30 - 40 माइक्रोन मीटर होता है।

प्रबंधन (Management)

गिरे हुए पत्तों को इकट्ठा करना और जलाना। कार्बोक्सिन (Carboxin) 0.1% या वेटेबल सल्फर (Wettable sulphur) 0.25% या कैप्टान (Captan) 0.2% के साथ छिड़काव करें

अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।

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