पादप रोगविज्ञान का परिचय (Introduction to Plant Pathology)

पौधे (Plants) इस दुनिया में मनुष्य, जानवरों और सूक्ष्मजीवों (microorganisms) के लिए भोजन के स्रोत (sources of food) हैं। दुनिया की बढ़ती आबादी की खाद्य आवश्यकताओं (food requirements) को पूरा करने के लिए मनुष्य पौधों, विशेष रूप से फसलों (crops) को कीड़ों और सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले नुकसान या उपयोग से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन सूक्ष्मजीवों के बारे में मानव ज्ञान के विकास के साथ पादप रोगविज्ञान (plant pathology) का विज्ञान विकसित हुआ है। पादप रोगविज्ञानी (Plant pathologists) मानव चिकित्सक (human doctor) की तरह ही पौधों के डॉक्टर होते हैं। पादप रोगविज्ञानी का प्रमुख उद्देश्य (major objective) पौधों के रोगों (plant diseases) से होने वाले नुकसान (losses) को कम करना है।

पादप रोगविज्ञान का महत्व (Importance of Plant Pathology)

पौधों के रोग महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उनके कारण नुकसान होता है। नुकसान खेत (field) में या स्टोर (store) में हो सकता है। औसतन, कीड़े, खरपतवार (weeds), कृंतक (rodents) आदि जैसे विभिन्न साधनों के कारण होने वाले कुल नुकसान में से खाद्यान्न (food grain) का 1/3 हिस्सा बीमारियों के कारण होता है। कई सबूत हैं कि भारत में 10-15 साल पुराने सेब के बगीचे कॉलर रॉट (collar rot) से नष्ट हो गए, अन्यथा वे जीवित रहते और 25 से 30 साल तक भोजन का उत्पादन करते। इसी तरह नेपाल में साइट्रस डिक्लाइन (citrus decline) एक गंभीर समस्या है और 5-8 साल के संतरे के बगीचे जड़ सड़न (root rot) से पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं।

1845-49 में आयरिश अकाल (Irish Famine) आलू के लेट ब्लाइट (late blight) - फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टैन्स (Phytophthora infestans) - के कारण हुआ था। इसने आयरलैंड में आबादी (population) को 80 से घटाकर 60 लाख कर दिया। उनमें से कई भूख (hunger) से मर गए, कई को कुपोषण (malnutrition) का सामना करना पड़ा और उनमें से कुछ दूसरे देश चले गए (migrated)।

गेहूं का रस्ट (Wheat rust) एक और बीमारी रही है जो कई देशों में समय-समय पर महामारी (epiphytotic) के रूप में सामने आई है। इस बीमारी ने दुनिया के कई हिस्सों में किसानों को फसल पैटर्न (cropping pattern) बदलने के लिए मजबूर किया। 1943 में बंगाल का अकाल (Bengal Famine) चावल के भूरे धब्बे (brown spot) - हेल्मिन्थोस्पोरियम ओरिजे (Helminthosporium oryzae) - के कारण हुआ था। सीलोन (Ceylon - 1871-1893) में कॉफी के रस्ट (coffee rust) - हेमिलिया वास्टेट्रिक्स (Hemileia vastatrix) - के कारण कॉफी का निर्यात 93% कम हो गया था। उन्हें कॉफी के पौधे काटने पड़े और चाय लगानी पड़ी। यूरोप में, डाउनी मिल्ड्यू (downy mildew) ने अंगूर के पौधों (grape plants) पर हमला किया, अंगूर की उपज काफी कम हो गई, और कई अंगूर वाइन कारखाने बंद हो गए। इन सभी ने देश की अर्थव्यवस्था (economy) को प्रभावित किया।

रोगजनकों (pathogens) के कारण अप्रत्यक्ष नुकसान (indirect losses) होते हैं। कुछ कवक (fungi) जब खाद्यान्न पर हमला करते हैं तो वे मानव और पशु स्वास्थ्य (health) को प्रभावित करने वाले विष (toxin) का उत्पादन करते हैं। वे गर्भपात (abortion), पक्षाघात (paralysis), ब्रोंकाइटिस (bronchitis), पेट की परेशानी (stomach trouble) आदि का कारण बन सकते हैं।

पादप रोगविज्ञान (Plant Pathology)

पादप रोगविज्ञान कृषि (agricultural), वनस्पति (botanical) या जैविक विज्ञान (biological science) की एक शाखा है जो पौधों की बीमारियों के कारण (cause), एटियलजि (etiology), जिसके परिणामस्वरूप होने वाले नुकसान और प्रबंधन (management) से संबंधित है।
इसके चार प्रमुख उद्देश्य (objects) हैं:

  1. पौधों के रोगों के जीवित (living), निर्जीव (non-living) और पर्यावरणीय कारणों (environmental causes) का अध्ययन करना।
  2. रोगजनकों (pathogens) द्वारा रोग के विकास के तंत्र (mechanism) का अध्ययन करना।
  3. पौधे और रोगजनक के बीच बातचीत (interactions) का अध्ययन करना।
  4. बीमारी को नियंत्रित (controlling) करने और बीमारियों से होने वाले नुकसान (losses) को कम करने के तरीकों (methods) को विकसित करना।

पौधों की बीमारी (Plant disease)

रोग (Disease) एक ऐसी स्थिति है जिसमें जीव (organism) के कार्यों (functions) का ठीक से निर्वहन (discharged) नहीं होता है (वार्ड - Ward, 1901)।

पौधे की बीमारी (Plant Disease) को "सामान्य (normal) से किसी भी भिन्नता (variation) के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो शारीरिक गतिविधियों (physiological activities) की जांच (checking) या रुकावट (interruption) या संरचनात्मक परिवर्तनों (structural changes) द्वारा व्यक्त किया जाता है, जो विकास की जांच करने, असामान्य संरचनाओं (abnormal formations) का कारण बनने या पौधे के एक हिस्से या पूरे पौधे की समय से पहले मृत्यु (premature death) का कारण बनने के लिए पर्याप्त रूप से स्थायी (permanent) हैं (हेल्ड - Held, 1933)"।

बीमारी एक खराब प्रक्रिया (malfunctioning process) है जो निरंतर जलन (continuous irritation) के कारण होती है (हॉर्सफॉल और डिमोंड - Horsfall and Dimond, 1959)।

पौधों के रोगों के कारण, वर्गीकरण और सामान्य लक्षण (Causes, classification and general symptoms of plant diseases)

A. निर्जीव कारण (Inanimate - non-living - causes):

  1. मिट्टी की स्थिति (Soil conditions)
  2. वायुमंडल (Atmosphere)
  3. रासायनिक चोटें (Chemical injuries)

I. मिट्टी (Soil):

  1. मिट्टी की नमी की कमी या अधिकता (Soil moisture deficit or excess): यह पौधों की प्रकृति पर निर्भर करता है। जल जमाव (water logging) की स्थिति में मक्का (maize) पीला हो जाता है लेकिन चावल अच्छी तरह से बढ़ सकता है।
  2. मिट्टी का संघनन (Compaction of soil): टैप रूट सिस्टम (tap root system) वाले पौधे प्रभावित होंगे। जड़ें दब सकती हैं या मिट्टी में हार्ड पैन (hard pan) के कारण पौधे बीमार (sick) दिख सकते हैं।
  3. मिट्टी की पपड़ी (Soil crust): भारी मिट्टी (heavy soil) के मामले में, बारिश के बाद अगर सूखा (drought) पड़ता है तो पपड़ी (crust) बन जाती है, जिससे अंकुर (seedling) बाहर नहीं आ पाते और अंकुर बीमार दिखता है।

पोषण स्तर में कमी (Deficiency in nutritional level):

II. वायुमंडल (Atmosphere):

वायु प्रदूषक (Air pollutants):

  1. सल्फर डाइऑक्साइड (Sulphur dioxide): मुख्य स्रोत कोयला (coal) है, अन्य स्रोत तांबा, सीसा (led), जस्ता (zinc) और निकल (nickel) का शोधन (refining) हैं। आम की काली नोक (black tip) SO2 वाले ईंट भट्टों (brick kilms) से निकलने वाले धुएं (smokes) के कारण होती है।
  2. हाइड्रोजन फ्लोराइड (Hydrogen floride): यह अत्यधिक विषैला (highly toxic) होता है। यह एल्यूमीनियम (aluminium), फॉस्फेटिक उर्वरक (phosphatic fertilizer), और स्टील और पेट्रोलियम रिफाइनरी (petroleum refinery) जैसे विभिन्न उद्योगों से निकलता है।
  3. ओजोन (Ozone - O3): ओजोन के स्रोत ऊपरी वायुमंडल (upper atmosphere), विद्युत तूफान (electrical storms) और फोटोकैमिकल प्रतिक्रियाएं (photochemical reactions) हैं। यह ऑटोमोबाइल (automobiles) के कारण भी आ रहा है। अधिकांश NO2 फोटोकैमिकल रूप से O3 के साथ प्रतिक्रिया करता है और प्रदूषकों (pollutants) का कारण बनता है।

III. रासायनिक चोटें (Chemicals injuries):

B. सजीव कारण (Animate - living - causes):

  1. माइकोप्लाज्मा-जैसे जीव (Mycoplasma-like organisms)
  2. पौधों के रोगजनक बैक्टीरिया (Plant pathogenic bacteria)
  3. कवक (Fungi)
  4. शैवाल (Algae)
  5. नेमाटोड (Nematodes)
  6. फेनरोगैमिक पौधे परजीवी (Phanerogamic plant parasites)

C. वायरस (Viruses): ना तो सजीव और ना ही निर्जीव संस्थाएं (neither living nor non-living entities)

पौधों के रोगों का वर्गीकरण (Classification of plant diseases)

पौधों के रोगों के कारणों के आधार पर (On the basis of causes of plant diseases)

  1. गैर-संक्रामक रोग (Noninfectious diseases): वे संक्रमित पौधों से स्वस्थ पौधों में प्रेषित (transmitted) नहीं हो सकते क्योंकि बीमारी पैदा करने के लिए जीवित रोगजनकों (living pathogens) की कोई भागीदारी (involvement) नहीं है। उदा. कमी वाले रोग (deficiency diseases)।
  2. संक्रामक रोग (Infectious diseases): वे संक्रमित पौधे से स्वस्थ पौधों और एक खेत से दूसरे खेत में प्रेषित (transmitted) होते हैं। इसमें कवक, बैक्टीरिया, वायरस, नेमाटोड आदि जैसे रोगजनकों (pathogens) की भागीदारी होती है।

फैलने के तरीके और संक्रमण की गंभीरता के आधार पर (On the basis of mode of spread and severity of infection)

  1. छिटपुट रोग (Sporadic diseases): जब बीमारियां बहुत अनियमित अंतराल (irregular intervals) और स्थानों (locations) पर और अपेक्षाकृत कम मामलों में होती हैं, तो उन्हें छिटपुट रोग (sporadic diseases) कहा जाता है।
  2. स्थानिक रोग (Endemic diseases): जब बीमारियां किसी इलाके (locality) में साल-दर-साल लगातार हल्के से गंभीर रूप (mild to severe form) में हो रही होती हैं, तो उन्हें स्थानिक रोग (endemic diseases) कहा जाता है।
  3. महामारी या एपिफाइटोटिक रोग (Epidemic or epiphytotic diseases): जब बीमारियां समय-समय पर एक व्यापक क्षेत्र (widespread area) में गंभीर रूप से भारी नुकसान पहुंचाती हैं, तो उन्हें महामारी रोग (epidemic diseases) के रूप में जाना जाता है।
  4. महामारी रोग (Pandemic diseases): जब बीमारियाँ बहुत विस्तृत क्षेत्र (extensive region) में महामारी के अनुपात (epidemic proportions) में होती हैं जिससे कम समय में विनाशकारी क्षति (devastating damage) होती है, तो उन्हें महामारी रोग (pandemic diseases) कहा जाता है।

इनोकुलम के मुख्य स्रोत के आधार पर (On the basis of chief source of inoculum)

  1. बीज जनित रोग (Seed-borne diseases)
  2. मृदा जनित रोग (Soil-borne diseases)
  3. वायु जनित रोग (Air-borne diseases)

संक्रमित पौधों के भागों के आधार पर (On the basis of parts of the plants infected)

  1. पत्ती रोग (Foliar diseases)
  2. फलों के रोग (Fruit diseases)
  3. जड़ रोग (Root diseases)

पौधों की प्रजातियों या फसलों के आधार पर (On the basis of plant species or crops)

  1. चावल के रोग (Rice diseases)
  2. गेहूं के रोग (Wheat diseases)
  3. मक्का के रोग (Maize diseases)
  4. बाजरा के रोग (Millet diseases)
  5. सब्जी के रोग (Vegetable diseases), आदि।

सामान्य लक्षण (General symptoms):

लक्षण (Symptoms) पौधे की रूपात्मक विशेषताओं (morphological features) में परिवर्तन हैं जिन्हें दृश्य अवलोकन (visual observation) द्वारा पहचाना जा सकता है। उदा. क्लोरोसिस (chlorosis), स्टंटिंग (stunting), पत्ती के धब्बे (leaf spots), गॉल निर्माण (gall formation)।

संकेत (Signs) पौधों के रोगग्रस्त हिस्से (diseased part) पर रोगजनक (pathogen) की दृश्यमान संरचनाएं (visible structures) हैं। उदा. ढीला स्मट (loose smut), पाउडरी मिल्ड्यू (powdery mildew)।

दृश्य रोगजनकों के कारण लक्षण (Symptoms due to visible pathogens):

  1. मिल्ड्यू (Mildew): इसमें, रोगजनक को मेजबान सतह (host surface) पर सफेद, भूरे, भूरे (brownish) या बैंगनी विकास (purplish growth) के रूप में देखा जाता है।
  2. रस्ट (Rusts): वे बीजाणुओं (spores) के अपेक्षाकृत छोटे पुस्ट्यूल (small pustules) के रूप में दिखाई देते हैं, जो आमतौर पर मेजबान एपिडर्मिस (host epidermis) को तोड़ते हैं। पुस्ट्यूल पीले, भूरे या काले रंग के हो सकते हैं। गेहूं का भूरा रस्ट (Brown rust of wheat) - प्यूसिनिया रेकोंडिटा (Puccinia recondita)।
  3. स्मट्स (Smuts): वे आमतौर पर फूलों के अंगों (floral organs) पर कालिख (sooty) या चारकोल जैसे (charcoal like) पाउडर के रूप में दिखाई देते हैं। गेहूं का ढीला स्मट (Loose smut of wheat) - उस्टिलागो ट्रिटिसी (Ustilago tritici)।
  4. सफेद छाले (White blisters): वे मुख्य रूप से क्रूसिफ़र्स (crucifers) पर सफेद छाले जैसे पुस्ट्यूल (white blister-like pustules) के रूप में पाए जाते हैं, जो एपिडर्मिस को खोलते हैं और बीजाणुओं के ख़स्ता द्रव्यमान (powdery masses of spores) को उजागर करते हैं। सरसों का सफेद छाला (White blister of mustard) - अल्बुगो कैंडिडा (Albugo candida)।
  5. स्क्लेरोटिया (Sclerotia): यह एक कॉम्पैक्ट (compact), अक्सर कठोर (hard), निष्क्रिय कवक मायसेलियम (dormant fungus mycelium) का द्रव्यमान है जो काले या गहरे भूरे रंग (dark brown) का दिखता है। सब्जियों का स्क्लेरोटिया रॉट (Sclerotia rot of vegetables) - स्क्लेरोटिनिया स्क्लेरोटियोरम (Sclerotinia sclerotiorum)।
  6. स्कैब (Scab): यह खुरदरे (roughened) या क्रस्ट (crust) जैसे घावों (lesions) को संदर्भित करता है जो पपड़ीदार (scabby), गंदे (dirty) दिखते हैं। उदा. आलू का पाउडरी स्कैब (powdery scab of potato) - स्पोंगोस्पोरा सबटरेनिया (Spongospora subterranea)।

मेजबान पौधे में कुछ प्रभाव या परिवर्तन के कारण लक्षण (Symptoms due to some effect or change in the host plant):

हाइपरट्रॉफी (Hypertrophy): कोशिका (cell) के आकार में वृद्धि के कारण अंग (organ) के आकार में वृद्धि, जबकि हाइपरप्लासिया (hyperplassia): कोशिकाओं (cells) की संख्या में वृद्धि के कारण अंग (organ) के आकार में वृद्धि। वे इस प्रकार व्यक्त किए गए हैं:

  1. गॉल्स (Galls): ये विकृतियां (malformations) कमोबेश गोलाकार (globose), लम्बी (elongated) या आकार में अनियमित (irregular) होती हैं। वे मांसल (fleshy) या लकड़ी (woody) के हो सकते हैं। छोटे गॉल्स को वार्ट्स (warts) कहा जाता है और बड़े गॉल्स को नॉट (knot) कहा जाता है। धनिये का स्टेम गॉल (Stem gall of coriender) - प्रोटोमायसेस मैक्रोस्पोरस (Protomyces macrosporus)।
  2. लीफ कर्ल (Leaf curl): पत्तियों के स्थानीय क्षेत्रों (localized areas) में ऊतकों (tissues) की अधिक वृद्धि के कारण पत्तियां मुड़ी हुई (twisted), कर्ल (curled) या विकृत (distorted) हो जाती हैं। उदा. पीच लीफ कर्ल (peach leaf curl) - टफरिना डिफॉर्मन्स (Taphrina deformance)।
  3. विचेस ब्रूम (Witches' broom): एक झाड़ू (broom) की तरह दिखाई देने वाले क्लस्टर में काफी करीब से एक सीमित क्षेत्र (limited region) से कई पतली शाखाएं (slender branches) निकलती हैं। उदा. विचेस ब्रूम (Witches broom) - माइकोप्लाज्म (Mycoplasm)।

एट्रोफी (Atrophy) या हाइपोप्लासिया (hypoplassia) या बौनापन (dwarfing): विकास का निषेध (Inhibition of growth) जिसके परिणामस्वरूप पौधे का स्टंटिंग (stunting) या बौनापन (dwarfing) होता है।

नेक्रोसिस (Necrosis): यह वह स्थिति है जिसमें रोगजनकों (pathogens) की परजीवी गतिविधि (parasitic activity) के परिणामस्वरूप कोशिकाओं (cells), ऊतकों (tissues) या अंगों (organs) की मृत्यु (death) हुई है। वे इस प्रकार व्यक्त किए गए हैं:

  1. धब्बे (Spots): मेजबान पत्ती (host leaf) पर स्थानीयकृत घाव (localized lesion) हैं जिनमें मृत (dead) और ढह गई कोशिकाएं (collapsed cells) होती हैं। उदा. चौड़ी पत्ती वाली सरसों का पत्ती का धब्बा (leaf spot of broad leaf mustard) - अल्टरनेरिया ब्रैसिका (Alternaria brassicae)।
  2. एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose): पत्तियों, फूलों, फलों और तनों पर नेक्रोटिक (necrotic) और धँसा (sunken) हुआ अल्सर (ulcer) जैसे बिखरे हुए घाव (scattered lesions)। उदा. आम का एन्थ्रेक्नोज (mango anthracnose) - कोलेटोट्राइकम एसपी (Colletotrichum sp.)।
  3. कैंकर (Canker): सतह (surface) के नीचे धँसा हुआ एक स्थानीय नेक्रोटिक घाव (localized necrotic lesion) या छाल (bark) या तने (stem) के कॉर्टेक्स (cortex) में एक मृत क्षेत्र (dead area) विशेष रूप से लकड़ी के पौधे (woody plant) पर। उदा. साइट्रस कैंकर (citrus canker) - ज़ैंथोमोनास कैंपेस्ट्रिस पीवी. सिट्री (Xanthomonas campestris pv. citri)।
  4. ब्लाइट (Blight): पत्तियों, शाखाओं, टहनियों (twigs) या फूलों के अंगों (floral organs) का तेजी से जलना (rapid burning) जिसके परिणामस्वरूप उनकी मृत्यु (death) हो जाती है। उदा. आलू का लेट ब्लाइट (late blight of potato) - फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टैन्स (Phytophthora infestans)।
  5. डैम्पिंग ऑफ (Damping off): मिट्टी की सतह (soil surface) के पास के अंकुरों (seedlings) के तने सिकुड़ (constricted) जाते हैं, कमजोर (weak) हो जाते हैं, और ऊपरी हिस्से के भार (load) को सहन करने में असमर्थ (unable) होते हैं और वे गिर (topple down) जाते हैं। उदा. डैम्पिंग ऑफ (damping off of seedlings) - पाइथियम एसपीपी (Pythium spp.)।
  6. सड़न (Rots): जड़ों (roots), फलों (fruits), कंद (tubers) आदि का मैक्रेशन (maceration) और विघटन (disintegration)। जड़ सड़न (root rot) - राइजोक्टोनिया सोलानिया (Rhizoctonia solania)।

पौधे के वायरस के कारण होने वाले लक्षण (Symptoms caused by plant viruses)

  1. स्टंटिंग (Stunting): कोशिकाओं का गुणन (multiplication of cells) कम हो सकता है।
  2. स्थानीय घाव (Local lesions): वायरस के प्रवेश के बिंदु पर छोटे, आमतौर पर नेक्रोटिक घावों (necrotic lesions) का निर्माण।
  3. मोज़ेक (Mosaic): पत्तियों के हरे और पीले रंग के वैकल्पिक पैच (alternate patches)।
  4. रिंग स्पॉट (Ring spot): पत्तियों या फलों पर स्पष्ट क्लोरोटिक (chlorotic) या नेक्रोटिक के छल्ले (necrotic rings)।
  5. रोसेट (Rosette): पौधे के विकास की छोटी शाखाओं (short branching) की आदत।
  6. इनेशन (Enation): ऊतक विकृति (tissue malformation) या अतिवृद्धि (overgrowth)।
  7. स्टेम पिटिंग (Stem pitting): ट्रिस्टेजा वायरस (tristeza virus) के कारण साइट्रस (citrus) के तने (stem) पर छाल (bark) के गड्ढों (pits) के नीचे विकसित होते हैं।

कवक की परिभाषा, महत्व और सामान्य रूपात्मक विशेषताएं (Definition, importance and general morphological characters of fungi)

कवक (Fungi): यूकेरियोटिक (eukaryotic), बीजाणु (spore) वाले, क्लोरोफिल रहित (achlorophyllous) जीव हैं जो आमतौर पर यौन (sexually) और अलैंगिक (asexually) रूप से प्रजनन (reproduce) करते हैं, और जिनकी आमतौर पर फिलामेंटस (filamentous), शाखित दैहिक संरचनाएं (branched somatic structures) आमतौर पर काइटिन (chitin) या सेलूलोज़ (cellulose), या इन दोनों पदार्थों के साथ-साथ कई अन्य जटिल कार्बनिक अणुओं (complex organic molecules) वाले सेल की दीवारों (cell walls) से घिरी होती हैं।

कवक का महत्व (Importance of fungi):

लाभकारी प्रभाव (Beneficial effects):

  1. मशरूम (mushrooms) की कई किस्मों का उपयोग उनके पोषण (nutritional) और स्वादिष्ट भोजन मूल्य (delicious food value) के लिए किया जाता है।
  2. पौधों के मलबे (plant debris) के अपघटन (decomposition) के लिए कई कवक महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे सेल्यूलोज (cellulose) का उपयोग कर सकते हैं।
  3. कवक का उपयोग किण्वन (fermentation) से जुड़े कई औद्योगिक प्रक्रियाओं (industrial processes) के लिए किया जाता है उदा. ब्रेड (bread), वाइन (wines), बियर (beers), पनीर (cheeses)।
  4. इनका उपयोग कार्बनिक अम्ल (organic acids), कुछ दवाओं (drugs), विटामिन (vitamins) और एंटीबायोटिक्स (antibiotics) के उत्पादन के लिए भी किया जाता है।
  5. कवक का उपयोग आनुवंशिकीविदों (geneticists), साइटोलॉजिस्ट (cytologists) और बायोकेमिस्ट (biochemists) द्वारा महत्वपूर्ण अनुसंधान उपकरणों (research tools) के रूप में किया जाता है।

हानिकारक प्रभाव (Harmful effects):

  1. वे ज्ञात पौधों की बीमारियों (plant diseases) के अधिकांश कारण बनते हैं; वे जानवरों और मनुष्यों को कुछ बीमारियां (disease) भी पैदा करते हैं।
  2. कई कवक फंगल हमले (fungal attack) के अधीन कच्चे माल (raw material) से निर्मित भोजन, कपड़े (fabrics), चमड़े (leather) और अन्य सामानों के विनाश (destruction) के लिए जिम्मेदार हैं।

सामान्य विशेषताएं (General characteristics):

  1. कवक क्लोरोफिल (chlorophyll) रहित जीवित जीव हैं। वे एक साधारण पौधे (simple plant) की तरह दिखते हैं लेकिन उनमें तने (stems), जड़ें (roots), पत्तियां (leaves) और संवहनी प्रणाली (vascular system) नहीं होती है। वे आमतौर पर धागे (thread) की तरह, बहु-कोशिकीय (multi-cellular) होते हैं और बीजाणुओं (spores) के माध्यम से प्रजनन करते हैं।
  2. फंगल थैलस (fungal thallus) में सूक्ष्म धागे (microscopic threads) या फिलामेंट्स (filaments) होते हैं जो सभी दिशाओं में शाखा (branch) करते हैं, भोजन के लिए उपयोग किए जाने वाले सब्सट्रेटम (substratum) के ऊपर या भीतर फैलते हैं। एकल फिलामेंट (single filament) को हाइफ़ा (hypha) के रूप में जाना जाता है, जिसमें ज्यादातर नियमित अंतराल (regular interval) पर क्रॉस वॉल (cross walls) होते हैं, जिन्हें सेप्टा (septa) कहा जाता है, लेकिन जोरदार रूप से बढ़ने वाला हाइफ़ा (hypha) सीनोसाइटिक (coenocytic) होता है। सेप्टा (septa) में प्रोटोप्लाज्म (protoplasm) के माध्यम से एक केंद्रीय छिद्र (central pore) होता है जो एक कोशिका से दूसरी कोशिका में जाता है।
  3. कोशिका भित्ति (cell wall) की रासायनिक संरचना (chemical composition) सभी कवक में समान नहीं होती है लेकिन ज्यादातर इसमें प्रोटीन, लिपिड (lipids) और अन्य पदार्थों के साथ पॉलीसेकेराइड (polysaccharides) होते हैं।
  4. हाइफे (hyphae) के द्रव्यमान को मायसेलियम (mycelium) कहा जाता है। परजीवी कवक (parasitic fungi) का मायसेलियम (mycelium) मेजबान की सतह पर या तो कोशिकाओं (अंतरकोशिकीय - intercellular) के बीच फैलता है या कोशिकाओं (अंतःकोशिकीय - intracellular) में प्रवेश करता है। वे पोषक तत्व (nutrients) निकालने के लिए मेजबान कोशिका में हॉस्टोरिया (haustoria) भेजते हैं। हॉस्टोरिया (haustoria) घुंडी की तरह (knob-like), लम्बा (elongated) या शाखित (branched) हो सकता है।
  5. अधिकांश कवक 20 से 30 डिग्री सेल्सियस पर बढ़ते हैं। वे अपना भोजन जीवित जीवों को परजीवी (parasites) के रूप में संक्रमित करके या मृत कार्बनिक पदार्थों (dead organic matter) पर सैप्रोब (saprobes) के रूप में हमला करके प्राप्त करते हैं। वे संकाय परजीवी (facultative parasites) या संकाय सैप्रोफाइट्स (facultative saprophytes) या बाध्य परजीवी (obligate parasites) हो सकते हैं।
  6. कवक अलैंगिक रूप से (asexually) यानी दो नाभिकों (nuclei) के मिलन के बिना और यौन रूप से (sexually) यानी दो नाभिकों के मिलन से प्रजनन करते हैं। संपूर्ण थैलस एक या एक से अधिक प्रजनन संरचना (reproductive structure) में परिवर्तित हो सकता है, उन्हें होलोकार्पिक कवक (holocarpic fungi) के रूप में जाना जाता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में, थैलस (thallus) का केवल एक हिस्सा प्रजनन अंगों (reproductive organs) में विकसित होता है, उन्हें यूकार्पिक कवक (eucarpic fungi) के रूप में जाना जाता है।

अलैंगिक और यौन प्रजनन और फलने वाले निकायों के प्रकार (Asexual and sexual reproduction and types of fruiting bodies)

अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction):

यह विभिन्न तरीकों से होता है:

  1. विखंडन (Fragmentation): हाइफे (hyphae) अपनी घटक कोशिकाओं (component cells) में टूट जाते हैं, उन्हें आर्थ्रोस्पोर्स (arthrospores) कहा जाता है। यदि कोशिकाएं अलग होने से पहले एक मोटी दीवार (thick wall) में घिर जाती हैं, तो उन्हें क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores) के रूप में जाना जाता है।
  2. विखंडन (Fission): सिकुड़न (constriction) और कोशिका भित्ति के निर्माण द्वारा कोशिका का दो बेटी कोशिकाओं (daughters cells) में विभाजन।
  3. बडिंग (Budding): एक मूल कोशिका (parent cell) से छोटी वृद्धि (outgrowth) का उत्पादन जो बढ़ता है और अलग हो जाता है, इसे ब्लास्टोस्पोर (blastospore) कहा जाता है।
  4. बीजाणुओं का उत्पादन (Production of spores): यह सबसे आम तरीका है और कई कवकों में पाया जाता है। बीजाणु (spores) हाइलिन (hyaline) से हरे, पीले, नारंगी, लाल, भूरे और काले रंग के हो सकते हैं। उनका आकार ग्लोबोज (globose) से लेकर अंडाकार (oval), आयताकार (oblong) और सुई के आकार (needle shaped) का हो सकता है। स्पोरैंगियम (sporangium - एक थैली जैसी संरचना) में उत्पादित बीजाणुओं को स्पोरैंगियोस्पोर (sporangiospores) कहा जाता है। वे गतिशील (motile) यानी ज़ूस्पोर (zoospores) या गैर-गतिशील यानी एप्लानोस्पोर (aplanospore) हो सकते हैं। कोनिडिओफोर (conidiophores) की नोक या किनारों पर उत्पादित बीजाणुओं को कोनिडिया (conidia) कहा जाता है।

यौन प्रजनन (Sexual reproduction):

यौन प्रजनन की प्रक्रिया (process of sexual reproduction) में तीन अलग-अलग चरण (distinct phases) होते हैं।

ऐसे कई तरीके हैं जिनके द्वारा प्लास्मोगैमी (plasmogamy) की प्रक्रिया में संगत नाभिकों (compatible nuclei) को एक साथ लाया जाता है, जिन्हें अक्सर यौन प्रजनन (sexual reproduction) के तरीकों के रूप में जाना जाता है। वे हैं:

  1. प्लानोगैमेटिक मैथुन (Planogametic copulation): दो नग्न युग्मकों (naked gametes) का संलयन, जिनमें से एक या दोनों गतिशील (motile) हैं। इसमें आइसप्लानोगैमेटिक मैथुन (isoplanogametic copulation) या एनिसप्लानोगैमेटिक मैथुन (anisoplanogametic copulation) हो सकता है।
  2. गैमेटेंजियल संपर्क (Gamentagial contact): विपरीत लिंग (opposite sex) के दो गैमेटेंजिया (gametangia) संपर्क में आते हैं और या तो दीवार को भंग (dissolving) कर देते हैं या संपर्क के बिंदु पर निषेचन ट्यूब (fertilization tube) के उत्पादन द्वारा नाभिक एक कोशिका से दूसरी कोशिका (एथेरिडियम से ओगोनियम तक) में स्थानांतरित (transferred) हो जाते हैं।
  3. गैमेटेंजियल मैथुन (Gemetangial copulation): दो संपर्क गैमेटेंजिया (contacting gamentangia) की संपूर्ण सामग्री (entire content) का संलयन (Fusion)।
  4. स्पर्मेटाइजेशन (Spermatization): कुछ कवक कई, सूक्ष्म (minute), यूनीन्यूक्लियेट (uninucleate), बीजाणु (spore) जैसी पुरुष संरचनाएं धारण करते हैं जिन्हें स्पर्मेटिया (spermatia) कहा जाता है, जिन्हें महिला गैमेटेंजिया (female gamentagia) विशेष रिसेसिव हाइफे (recessive hyphae) में ले जाया जाता है जिससे वे जुड़ जाते हैं।
  5. सोमाटोगैमी (Somatogamy): दो दैहिक हाइफे (somatic hyphae) करीब आते हैं और नाभिक आदि का आदान-प्रदान (exchange of nuclei) होता है। यहां दैहिक कोशिका (somatic cell) यौन कार्य कर रही है।

फलने वाले निकायों के प्रकार (Types of fruiting bodies):

कवक विभिन्न प्रकार के फलने वाले निकाय (fruiting bodies) पैदा करते हैं जिन पर / जिनमें कवक बीजाणु (fungal spores) उत्पन्न होते हैं। वे अलैंगिक (asexual) या यौन फलने वाले निकाय (sexual fruiting bodies) हो सकते हैं।

अलैंगिक फलने वाले निकाय (Asexual fruiting bodies):

यौन फलने वाले शरीर (Sexual fruiting bodies)

कवक का वर्गीकरण और उनके नैदानिक लक्षण (Classification of fungi with their diagnostic characters)

सुपरकिंगडम (Superkingdom): यूकेरियोन्टा (Eukaryonta)
किंगडम (Kingdom): माइसेटी (Myceteae)

प्रभाग 1 (Division 1): जिम्नोमाइकोटा (Gymnomycota)
उप-प्रभाग 1 (Sub-division 1): एक्रासियोगिम्नोमाइकोटिना (Acrasiogymnomycotina)
वर्ग (Class): एक्रासिओमाइसीट्स (Acrasiomycetes)
उप-प्रभाग 2 (Sub-division 2): प्लास्मोडियोगिम्नोमाइकोटिना (Plasmodiogymnomycotina)
वर्ग (Classes):

  1. प्रोटोस्टेलियोमाइसीट्स (Protosteliomycetes)
  2. माइक्सोमाइसीट्स (Myxomycetes)

प्रभाग 2 (Division 2): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग 1 (Sub-division - 1): हैप्लोमास्टिगोमाइकोटिना (Haplomastigomycotina)
वर्ग (Classes):

  1. ट्रिडिओमाइसीट्स (Chytridiomycetes)
  2. हाइपोच्यट्रिडियोमाइसीट्स (Hypochytridiomycetes)
  3. प्लास्मोडियोफोरोमाइसीट्स (Plasmodiophoromycetes)

उप-प्रभाग 2 (Sub-division - 2): डिप्लोमास्टिमायकोटिना (Diplomastimycotina)
वर्ग (Class): ओमाइसीट्स (Oomycetes)

प्रभाग 3 (Division 3): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग 1 (Sub-division -1): जाइगोमाइकोटिना (Zycomycotina)
वर्ग (Classes):

  1. जाइगोमाइसीट्स (Zygomycetes)
  2. ट्राइकोमाइसेट्स (Trichomycetes)

उप-प्रभाग 2 (Sub-division - 2): एस्कोमाइकोटिना (Ascomycotina)
वर्ग (Class): एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes)

उप-प्रभाग 3 (Sub-division -3): बेसिडिओमाइकोटिना (Basidiomycotina)
वर्ग (Class): बेसिओमाइसीट्स (Basiomycetes)
उप-प्रभाग 4 (Sub-divisoion - 4): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)

1. एक्रासिओमाइसीट्स (Acrasiomycetes)

एक प्रजाति को छोड़कर कोई कशाभिका (flagellated cells) वाली कोशिकाएँ (cells) उत्पन्न नहीं होती हैं। लोबोज़ (lobose) या फिलोज़ स्यूडोपोडिया (filose pseudopodia) के साथ मायक्सामोएबा (myxamoebae) के एकत्रीकरण (aggregation) के बाद स्यूडोप्लास्मोडिया (pseudoplasmodia) का निर्माण होता है। सोरोकार्प (Sorocarp) आमतौर पर डंठलदार (stalked) होता है।

2. प्रोटोस्टेलियोमाइसीट्स (Protosteliomycetes)

मायक्सामोएबा (Myxamoebae) सीधे सोरोकार्प (sorocarp) बनाते हैं या प्लास्मोडिया (plasmodia) में विकसित होने के बाद। प्लास्मोडियल स्ट्रीमिंग (Plasmodial streaming) यूनिडायरेक्शनल (unidirectional) है। यौन प्रजनन (Sexual reproduction) अज्ञात (unknown) है।

3. माइक्सोमाइसीट्स (Myxomycetes)

इनमें कशाभिका (flagellated cells) वाली कोशिकाएँ होती हैं, जो ज़ाइगोट (zygote) बनाने के लिए फ़्यूज़ (fuse) हो जाती हैं और प्रतिवर्ती स्ट्रीमिंग (reversible streaming) के साथ प्लास्मोडिया (plasmodia) में विकसित होती हैं। वे विभिन्न प्रकार के स्पोरोफोर्स (sporophores) बनाते हैं。

4. ट्रिडिओमाइसीट्स (Chytridiomycetes)

जलीय (Aquatic), होलोकार्पिक (holocarpic), अलैंगिक रूप से (asexually) प्रजनन करने वाले ज़ूस्पोर (zoospores) के माध्यम से यूनीफ्लैगेलेट व्हिपलैश (uniflagellate whiplash) प्रकार के साथ पीछे की ओर स्थित होते हैं।

5. हाइपोच्यट्रिडियोमाइसीट्स (Hypochytridiomycetes)

ट्रिडिओमाइसीट्स (chytridiomycetes) के समान लेकिन कशाभिका (flagellum) टिनसेल (tinsel) प्रकार का है और पूर्वकाल (anteriorly) में स्थित है।

6. प्लास्मोडियोफोरोमाइसीट्स (Plasmodiophoromycetes)

दैहिक संरचना (somatic structure) में प्लास्मोडियम (plasmodium) होता है और अलैंगिक प्रजनन (asexual reproduction) स्पोरैंगिया (sporangia) के माध्यम से होता है, जो दो कशाभिका (flagella) वाले ज़ूस्पोर (zoospores) को मुक्त (liberating) करता है, दोनों व्हिपलैश (whiplash) प्रकार पूर्वकाल (anteriorly) में स्थित होते हैं और असमान (unequal) होते हैं।

7. ओमाइसीट्स (Oomycetes)

सुविकसित सीनोसाइटिक मायसेलियम (coenocytic mycelium), शाखित (branched), अलैंगिक प्रजनन (asexual reproduction) स्पोरैंगिया (sporangia) के माध्यम से होता है जो ज़ूस्पोर (zoospores) को मुक्त (liberating) करता है जिसमें दो कशाभिका (flagella) विपरीत दिशा में बढ़ते हैं। जिनमें से एक व्हिपलैश (whiplash) और दूसरा टिनसेल (tinsel) प्रकार का है।

8. जाइगोमाइसीट्स (Zygomycetes)

अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction) स्पोरैंगियल थैलियों (sporangial sacs) के भीतर अकेले या समूहों में पैदा होने वाले एप्लानोस्पोर्स (aplanospores) द्वारा होता है। यौन प्रजनन (Sexual reproduction) आमतौर पर समान गैमेंटेंजिया (gamentangia) का संलयन (fusion) है जिसके परिणामस्वरूप ज़ाइगोस्पोर (zygospore) युक्त ज़ाइगोस्पोरैंगियम (zygosporangium) का निर्माण होता है।

9. ट्राइकोमाइसेट्स (Trichomycetes)

वे आर्थ्रोपोड्स (arthropods) के परजीवी (parasites) हैं। अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction) अमीबा (amoeboid cells) कोशिकाओं द्वारा होता है और यौन प्रजनन जाइगोमाइसीट्स (zygomycetes) के समान है।

10. एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes)

इनमें अच्छी तरह से विकसित मायसेलियम (mycelium) होता है लेकिन कुछ एककोशिकीय (unicellular) होते हैं। अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction) मुख्य रूप से कोनिडिया (conidia) द्वारा होता है। यौन प्रजनन (Sexual reproduction) विभिन्न तरीकों से होता है। वे एस्कोकार्प्स (ascocarps) नामक थैली जैसी संरचना में एस्कोस्पोर्स (ascospores) उत्पन्न करते हैं।

11. बेसिडिओमाइसीट्स (Basidiomycetes)

इनमें एक लंबे डिकैरियोटिक चरण (dikaryotic phase) के साथ अच्छी तरह से विकसित मायसेलियम (mycelium) होता है जो विभिन्न प्रकार के स्पोरोफोर्स (sporophores) को जन्म देता है जिसमें बेसिडिओस्पोर्स (basidiospores) ले जाने वाले बेसिडिया (basidia) का उत्पादन होता है।

12. ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)

विकास (evolution) या हमारे लिए अज्ञात होने के कारण उन्होंने अपनी यौन प्रक्रिया (sexual process) या तो खो दी है। विभिन्न प्रकार के अलैंगिक बीजाणुओं (asexual spores) कोनिडिया (conidia) का उत्पादन करके प्रजनन करते हैं।

कवक के कुछ वंशों के लक्षण (Characteristics of some of the genera of fungi)

प्रभाग (Division): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): हैप्लोमास्टिगोमाइकोटिना (Haplomastigomycotina)
वर्ग (Class): ट्रिडिओमाइसीट्स (Chytridiomycetes)
आदेश (Order): ट्रिडिओलेस (Chytridiales)
परिवार (Family): सिन्काइट्रियासी (Synchytriaceae)

जीनस सिन्काइट्रियम (Genus Synchytrium):

इसमें 100 से अधिक प्रजातियाँ (species) शामिल हैं जो पौधों पर परजीवी (parasitic) हैं। कवक होलोकार्पिक (holocarpic), एंडोबायोटिक (endobiotic) और बाध्य परजीवी (obligate parasite) है जो मेजबान पौधे की अतिवृद्धि (hypertrophy) पैदा करता है। सिन्काइट्रियम एंडोबायोटिकम (Synchytrium endobioticum) आलू के ब्लैक वार्ट (black wart) का कारण बनता है। कवक एकल कशाभिका (single flagellum), व्हिपलैश प्रकार (whiplash type), पूर्वकाल (anteriorly) में स्थित के साथ ज़ूस्पोर (zoospores) पैदा करता है। ज़ूस्पोर (zoospores) जब मेजबान की सतह के संपर्क में आते हैं, तो घिर जाते हैं (encyst), अपने कशाभिका को ढीला कर देते हैं और मेजबान में प्रवेश (penetrate) करते हैं, मेजबान कोशिका में सोरस (sorus) बनाते हैं और अंकुरित (germinate) होकर पुटिका (vesicle) में ज़ूस्पोर पैदा करते हैं। ज़ूस्पोर (zoospores) ज़ाइगोट (zygote) विकसित करने के लिए फ़्यूज़ (fuse) होते हैं, जो मेजबान में भी प्रवेश कर सकते हैं और मेजबान में आराम करने वाले बीजाणु (resting spore) विकसित कर सकते हैं जो मिट्टी में निकल (released) जाते हैं। यह मिट्टी में 3-4 साल तक जीवित (survives) रहता है और जब यह अंकुरित (germinates) होता है तो यह ज़ूस्पोर (zoospores) पैदा करता है।

प्रभाग (Division): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): हैप्लोमास्टिगोमाइकोटिना (Haplomastigomycotina)
वर्ग (Classes): प्लास्मोडियोफोरोमाइसीट्स (Plasmodiophoromycetes)
आदेश (Order): प्लास्मोडियोफोरालेस (Plasmodiophorales)
परिवार (Family): प्लास्मोडियोफोरेसी (Plasmodiophoraceae)

जीनस प्लास्मोडियोफोरा (Genus Plasmodiophora):

कवक संवहनी पौधे (vascular plant) का एंडोपैरासिटिक (endoparasitic) है। यह मेजबान पौधे की अतिवृद्धि (hypertrophy) और हाइपरप्लासिया (hyperplassia) का कारण बनता है। प्लास्मोडियोफोरा ब्रैसिका (Plasmodiophora brassicae) ब्रैसिका के क्लब रूट रोग (club root diseases) का कारण बनता है। कवक शरीर (fungal body) केवल एक प्लास्मोडियम (plasmodium) है, जो ज़ूस्पोर (zoospores) उत्पन्न करने में सक्षम है, जिनमें से प्रत्येक में व्हिपलैश प्रकार (whiplash type) के दो असमान (unequal) कशाभिका (flagella) होते हैं। ज़ूस्पोर (zoospores) ब्रासिका के जड़ बालों (root hair) के साथ जुड़ जाते हैं, घिर जाते हैं (encyst), अंकुरित (germinate) होते हैं और मेजबान (host) में प्रवेश करते हैं। मेजबान और रोगज़नक़ (pathogen) की बातचीत (interaction) के परिणामस्वरूप जड़ों (roots) में सूजन (swelling) आ जाएगी जिससे क्लब के आकार की संरचना (club shaped structure) बन जाएगी। प्लास्मोडियम (plasmodium) विश्राम बीजाणुओं (resting spores) के एक द्रव्यमान में तब्दील हो जाता है, जो संक्रमित जड़ों के सड़ने (decaying) के बाद निकल (released) जाते हैं, और कई वर्षों तक मिट्टी में जीवित (survives) रहते हैं।

जीनस स्पोंगोस्पोरा (Genus Spongospora):

स्पोंगोस्पोरा (Spongospora) के अधिकांश लक्षण प्लास्मोडियोफोरा (Plasmodiophora) के समान हैं लेकिन दो मुख्य अंतर हैं i) प्राथमिक और माध्यमिक ज़ूस्पोर (primary and secondary zoospores) समान आकार के होते हैं लेकिन प्लास्मोडियोफोरा में माध्यमिक ज़ूस्पोर आकार में छोटे होते हैं और ii) बीजाणु स्पंजी गेंदें (spongy balls) बनाते हैं लेकिन वे प्लास्मोडियोफोरा (Plasmodiophora) में मुक्त (free) होते हैं। स्पोंगोस्पोरा सबटरेनिया (Spongospora subterranea) आलू के पाउडर स्कैब रोग (powdery scab of potato) का कारण बनता है। कवक अंकुरण (germination) पर एकल अमीबा (single amoeba) जैसा बनता है जो आलू की आँखों (eyes) या जड़ के बालों (root hair) के माध्यम से प्रवेश (penetrates) करता है। प्रवेश (penetration) के बाद वे ज़ूस्पोर (zoospores) या आराम करने वाले बीजाणुओं (resting spores) की गेंदों में विकसित हो सकते हैं।

प्रभाग (Division): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): डिप्लोमास्टिमायकोटिना (Diplomastimycotina)
वर्ग (Class): ओमाइसीट्स (Oomycetes)
आदेश (Order): पेरोनोस्पोरेल्स (Peronosporales)
परिवार (Family): पाइथिएसी (Pythiceae)

जीनस पाइथियम (Genus Pythium)

पाइथियम एसपीपी (Pythium spp.) मिट्टी में रहने वाले (soil-inhabitants) हैं। वे बीज के सड़ने (seed rots), डंपिंग ऑफ (damping off), जड़ सड़न (root rot) और फलों के सड़ने (fruit rots) का कारण बनते हैं। वे कई पौधों की प्रजातियों पर सैप्रोफाइट (saprophyte) या परजीवी (parasite) के रूप में रह सकते हैं। कवक पतले, सीनोसाइटिक हाइफे (coenocytic hyphae) पैदा करते हैं। वे मेजबान पौधे में अंतर (inter) और अंतःकोशिकीय (intracellularly) रूप से बढ़ते हैं। वे अलैंगिक रूप से (asexually) प्रजनन करते हैं जो पुटिका (vesicle) में स्पोरैंगिया (sporangia) और ज़ूस्पोर (zoospores) पैदा करते हैं। ज़ूस्पोर (zoospores) में दो कशाभिका (flagella) होते हैं, टिनसेल प्रकार (tinsel type) लंबे पूर्वकाल (anteriorly) में स्थित होते हैं और व्हिपलैश प्रकार (whiplash type) छोटे पीछे (posteriorly) की ओर स्थित होते हैं। मायसेलियम (mycelium) यौन प्रजनन (sexual reproduction) के लिए एथेरिडियम (antheridium) और ओगोनियम (oogonium) का उत्पादन करता है। नाभिक (nucleus) को एथेरिडियम से ओगोनियम में पारित किया जाता है, जिसे जाइगोट (zygote) बनाने के लिए जोड़ा जाता है, और ऊस्फीयर (oosphere) मोटी दीवार वाले ऊस्पोर्स (thick walled oospores) विकसित करता है।

जीनस फाइटोफ्थोरा (Genus Phytophthora)

फाइटोफ्थोरा एसपीपी (Phytophthora spp.) बड़ी संख्या में मेजबान पौधे पर बीमारी का कारण बनता है। फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टैन्स (P. infestans) आलू के लेट ब्लाइट (late blight of potato) का कारण बनता है। पाइथियम (Pythium) और फाइटोफ्थोरा के बीच मुख्य अंतर अनिश्चित स्पोरैंगियोफोर्स (indeterminate sporangiophores) और स्पोरैंगियल अंकुरण (sporangial germination) का गठन (formation) है। फाइटोफ्थोरा (Phytophthora) में कोई पुटिका (vesicle) नहीं बनती है। वे स्पोरैंगिया (sporangia) या क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores) उत्पन्न करते हैं जो सीधे जर्म ट्यूब (germ tube) द्वारा या परोक्ष रूप से ज़ूस्पोर (zoospores) का उत्पादन करके अंकुरित होने में सक्षम होते हैं। वे अपने यौन चक्र (sexual cycle) में ऊस्पोर्स (oospores) पैदा करते हैं।

प्रभाग (Division): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): डिप्लोमास्टिमायकोटिना (Diplomastimycotina)
वर्ग (Class): ओमाइसीट्स (Oomycetes)
आदेश (Order): पेरोनोस्पोरेल्स (Peronosporales)
परिवार (Family): पेरोनोस्पोरेसी (Peronosporaceae)

जीनस स्क्लेरोस्पोरा, प्लास्मोपारा और पेरोनोस्पोरा (Genus Sclerospora, Plasmopara and Peronospora)

इन्हें डाउनी मिल्ड्यू कवक (downy mildew fungi) के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि उन वंशों (genera) की प्रजातियां विभिन्न फसल के पौधों पर डाउनी मिल्ड्यू (downy mildew) रोगों का कारण बनती हैं। वे पीढ़ी (genera) मुख्य रूप से स्पोरैंगियोफोर्स (sporangiophores) के आधार पर विभेदित (differentiated) होते हैं। स्क्लेरोस्पोरा (Sclerospora) के स्पोरैंगियोफोर्स कठोर टॉट हाइफे (rigid tout hyphae) होते हैं, जो ऊपर की ओर स्पोरैंगियोस्पोर (sporangiospores) वाली युक्तियों (tips) पर शाखित होते हैं। प्लास्मोपारा (Plasmopara) में, स्पोरैंगियोफोर्स समकोण (right angle) पर शाखित (branched) होते हैं और पेरोनोस्पोरा (Perenospora) में स्पोरैंगियोफोर्स तीव्र कोण (acute angle) पर शाखित होते हैं, जो सिरे (tip) की ओर पतले होते हैं, खूबसूरती से घुमावदार (gracefully curved) होते हैं जो अपनी युक्तियों पर स्पोरैंगिया (sporangia) धारण करते हैं।

प्रभाग (Division): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): डिप्लोमास्टिमायकोटिना (Diplomastimycotina)
वर्ग (Class): ओमाइसीट्स (Oomycetes)
आदेश (Order): पेरोनोस्पोरेल्स (Peronosporales)
परिवार (Family): अल्बुगिनेसी (Albuginaceae)

जीनस अल्बुगो (Genus Albugo)

यह छोटे, क्लब के आकार (club-shaped), अनिश्चित स्पोरैंगियोफोर्स (indeterminate sporangiophores) पैदा करता है, जो अपनी युक्तियों (tips) पर ग्लोबोज स्पोरैंगिया (globose sporangia) की जंजीरों (chains) को सहन करता है। अल्बुगो (Albugo) की प्रजातियां श्वेत जंग (white rust) या सफेद छाले (white blister) रोग पैदा करने वाले बाध्य परजीवी (obligate parasite) हैं। ए. कैंडिडा (A. candida) क्रूसिफ़र के सफेद जंग (white rust of crucifers) का कारण बनता है।

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): एस्कोमाइकोटिना (Ascomycotina)
वर्ग (Class): एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes)
आदेश (Order): टैफ्रिनेल्स (Taphrinales)
परिवार (Family): टैफ्रिनेसी (Taphrinaceae)

जीनस टैफ्रिना (Genera: Taphrina)

इस कवक का मायसेलियम (mycelium) सेप्टेट हाइफे (septate hyphae) से बना है जो मेजबान में अंतरकोशिकीय (intercellularly) या सबक्यूटिक्युलर (subcuticularly) या सब एपिडर्मली (sub epidermally) बढ़ता है। एस्की (asci) मेजबान सतह पर सबक्यूटिक्युलर मायसेलियम (subcuticular mycelium) से एक परत में बनते हैं जो छल्ली (cuticle) के माध्यम से फट जाती है। प्रत्येक एस्कस (ascus) में आम तौर पर आठ एस्कोस्पोर्स (ascospores) होते हैं। टी. डिफॉर्मन्स (T. deformans) आड़ू पत्ती कर्ल (peach leaf curl) का कारण बनता है और टी. मैकुलन्स (T. maculans) हल्दी के पत्ती स्थान (leaf spot of turmeric) का कारण बनता है।

जीनस प्रोटोमायसेस (Genus Protomyces)

यह टैफ्रिना (Taphrina) के समान है लेकिन यह मेजबान (host) में बहुत आम तौर पर क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores) नामक विश्राम बीजाणु (resting spores) पैदा करता है।

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): एस्कोमाइकोटिना (Ascomycotina)
वर्ग (Class): एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes)
आदेश (Order): एरीसिफेल्स (Erysiphales)
परिवार (Family): एरीसिफेसी (Erysiphaceae)

जीनस एरीसिफे (Genus Erysiphe)

एरीसिफे (Erysiphe) की प्रजातियां बाध्य रोगजनक (obligate pathogen) हैं जो मेजबान पौधों (host plants) पर पाउडरी मिल्ड्यू (powdery mildew) रोग पैदा करती हैं। पौधे की सतह (plant surface) का सफेद स्वरूप (whitish appearance) रोगजनक के कोनिडिओफोर्स (conidiophores) और कोनिडिया (conidia) की उपस्थिति के कारण होता है। वे एस्कोकार्प (ascocarp) में उत्पन्न एस्की (asci) में एस्कोस्पोर्स (ascospores) का उत्पादन करते हुए यौन (sexually) रूप से प्रजनन करते हैं, जो पूरी तरह से बंद (क्लिस्टोथेशियम - cleistothecium) होता है। वे 40,000 से अधिक पौधों की प्रजातियों (plant species) को परजीवी बनाते हैं। ई. पॉलीगोनी (E. polygoni) को अकेले 352 मेजबान पौधों (host plants) पर दर्ज किया गया है।

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): एस्कोमाइकोटिना (Ascomycotina)
वर्ग (Class): एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes)
आदेश (Order): क्लेविसिपिटेल्स (Clavicipitales)
परिवार (Family): क्लेविसिपिटेसी (Clavicipitaceae)

जीनस क्लेविसेप्स (Genus Claviceps)

यह स्क्लेरोटिया (sclerotia) के रूप में जाना जाने वाला काला कठोर कॉम्पैक्ट शरीर (black hard compact body) पैदा करता है, जो प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों (unfavourable environmental conditions) के तहत कवक को जीवित रहने (survive) के लिए एक प्रतिरोधी संरचना (resistant structure) है। सी. पुरपुरिया (C. purpurea) राई के एर्गोट रोग (ergot disease of rye) का कारण बनता है और सी. माइक्रोसेफला (C. microcephala) बाजरा के एर्गोट (ergot of bajra) का कारण बनता है। जब स्क्लेरेरिया (scleria) अंकुरित (germinates) होता है तो वे पेरिथेशियल हेड (perithecial head) उत्पन्न करते हैं जिसमें कई पेरिथेशिया (perithecia) होते हैं। पेरिथेशिया में एस्कस (ascus) होता है जिसमें सुई के आकार (needle shaped) के एस्कोस्पोर्स (ascospores) बनते हैं।

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): बेसिडिओमाइकोटिना (Basidiomycotina)
वर्ग (Class): बेसिओमाइसीट्स (Basiomycetes)
आदेश (Order): यूरेडिनेल्स (Uredinales)
परिवार (Family): प्यूसिनिएसी (Pucciniaceae)

जीनस प्यूसिनिया (Genera: Puccinia)

प्यूसिनिया (Puccinia) की प्रजातियां फसल के पौधों (crop plants) के बाध्य परजीवी (obligate parasites) हैं। प्यूसिनिया की कई प्रजातियां मैक्रोसाइक्लिक हेटेरोसियस रस्ट (macrocyclic heteroecious rust) हैं, जिन्हें अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए एक से अधिक मेजबान (host) की आवश्यकता होती है। उनके अलग-अलग चरण (different stages) हैं।

यूरेडिनियोस्पोर्स (urediniospores) सिंगल सेल्ड (single celled), डंठल (stalked) और इचिन्युलेटेड (echinulated) होते हैं लेकिन इन कवक के टिलियोस्पोर्स (teliospores) डबल सेल्ड (double celled) और डंठल वाले होते हैं। तना रस्ट (stem rust), भूरा रस्ट (brown rust) और पीला रस्ट (yellow rust) की बीमारियाँ क्रमशः पी. ग्रैमिनिस-ट्रिटिसी (P. graminis-tritici), पी. रिकोंडिट (P. recondite) और पी. स्ट्राइफॉर्मिस (P. striiformis) के कारण होती हैं।

जीनस मेलाम्पसोरा (Genus Melampsora)

इन कवक के टिलियोस्पोर्स (teliospores) सेसाइल (sessile), सिंगल-सेल्ड (single-celled) होते हैं और परतों (layers) में बनते हैं। एम. लिनी (M. lini) सन रस्ट (flax rust) का कारण बनता है। वे ऑटोसियस रस्ट (autoecious rust) हैं जो एक ही मेजबान में अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं।

जीनस यूरोमायसेस (Genus Uromyces)

यह एटीओसियस रस्ट (aetoecious rust) भी है। यूरोमायसेस फाबे (Uromyces fabae) मटर के रस्ट (rust of pea) का कारण बनता है।

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): बेसिडिओमाइकोटिना (Basidiomycotina)
वर्ग (Class): बेसिओमाइसीट्स (Basiomycetes)
आदेश (Order): उस्टिलेजिनेल्स (Ustileginales)
परिवार (Family): उस्टिलागिनेसी (Ustilaginaceae)

जीनस उस्टिलागो (Genus Ustilago)

इसकी 300 से अधिक प्रजातियाँ हैं, उनमें से कई फसल के पौधों पर परजीवी (parasitic) हैं। उस्टिलागो मेयडिस (Ustilago maydis) - मक्का का स्मट (smut of maize), यू. ट्रिटिसी (U. tritici) - गेहूं का ढीला स्मट (loose smut of wheat), यू. होर्डाई (U. hordai) - जौ का कवर किया हुआ स्मट (covered smut of barley)। मेजबान पर बनने वाला काला पाउडर (black powdery mass) कवक का टिलियोस्पोर्स (teliospores) है। वे स्पोरिडिया (sporidia) धारण करने वाले सेप्टेट प्रोमायसेलियम (septate promycelium) का उत्पादन करके अंकुरित (germinate) होते हैं। बडिंग (budding) द्वारा माध्यमिक स्पोरिडिया (Secondary sporidia) बनते हैं।

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): बेसिडिओमाइकोटिना (Basidiomycotina)
वर्ग (Class): बेसिओमाइसीट्स (Basiomycetes)
आदेश (Order): उस्टिलेजिनेल्स (Ustileginales)
परिवार (Family): टिलटिएसी (Tilletiaceae)

जीनस टिलटिया (Genus Tilletia)

टिलटिया (Tilletis) की प्रजातियां टिलियोस्पोर्स अंकुरण (teliospores germination) की विधि में उस्टिलागो (Ustilago) की प्रजातियों से भिन्न (differ) होती हैं। प्रोमायसेलियम (promycelium) एसेप्टेड (asepted) रहता है। प्रोमायसेलियम की नोक (tip) पर आमतौर पर 8 बेसिडिओस्पोर्स (basidiospores) बनते हैं। टिलटिया कैरीज (Tilletia caries) और टी. फोएटीडा (T. foetida) गेहूं के बंट (wheat bunt) का कारण बनते हैं, टी. इंडिका (T. indica) गेहूं के करनाल बंट (karnal bunt of wheat) का कारण बनता है।

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
फॉर्म-ऑर्डर (Form-order): मेलानकोनियल्स (Melanconiales)
फॉर्म-परिवार (Form-family): मेलानकोनिएसी (Melanconiaceae)

जीनस कोलेटोट्राइकम (Genus Colletotrichum)

कोलेटोट्राइकम (Colletotrichum) की प्रजातियां संकाय परजीवी (facultative parasites) हैं, जो कई पौधों की प्रजातियों की पत्तियों, युवा टहनियों (young twigs) और फलों पर एन्थ्रेक्नोज रोगों (anthracnose diseases) का कारण बनती हैं। उनका मायसेलियम (mycelium) शाखित (branched), सेप्टेट (septate) और हाइलिन (hyaline) होता है। वे बहुत सारे सिकल (sickle) के आकार के कोनिडिया (conidia) वाले मेजबान पर एसरवुली (acervuli) नामक फलने वाले शरीर (fruiting bodies) का उत्पादन करते हैं। उनका पूर्ण चरण (perfect stage) ग्लोमेला (Glomerella) है। कुछ महत्वपूर्ण पौधे रोगजनक प्रजातियां (pathogenic species) हैं:

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
फॉर्म-ऑर्डर (Form-order): मेलानकोनियल्स (Melanconiales)
फॉर्म-परिवार (Form-family): डिमैटिसिई (Dematiceae)

जेनेरा (Genera): अल्टरनेरिया (Alternaria), हेल्मिन्थोस्पोरियम (Helminthosporium - ड्रेचस्लेरा - Drechslera, बाइपोलारिस - Bipolaris), सर्कोस्पोरा (Cercospora), प्यरीक्यूलेरिया (Pyricularia)

अल्टरनेरिया (Alternaria)

कवक आम तौर पर सड़ने वाले पौधे (decaying plant) के हिस्सों और मिट्टी में सैप्रोफाइट (saprophyte) के रूप में बढ़ता है। कुछ प्रजातियां उच्च पौधों (higher plants) पर परजीवी (parasitic) हैं। संकेंद्रित वलयों (concentric rings) वाले पत्तों के धब्बे इस कवक द्वारा फसल के पौधों पर उत्पन्न होते हैं। पौधों पर परजीवी आम प्रजातियों (common species) में से कुछ हैं:

हेल्मिन्थोस्पोरियम (Helminthosporium - ड्रेचस्लेरा या बाइपोलारिस)

वे कई फसल प्रजातियों (crop species) पर लीफ स्पॉट (leaf spot) और लीफ ब्लाइट (leaf blight) का कारण बनते हैं। उनके कोनिडिओफोर्स (conidiophores) और कोनिडिया (conidia) भूरे रंग के होते हैं। कोनिडिया में स्यूडो सेप्टा (pseudo septa) होता है। मायसेलियम (mycelium) को जन्म देने वाली अंत कोशिकाएँ (end cells) अंकुरित होंगी। उनके पूर्ण चरण (perfect stage) को कोक्लिओबोलस (Cochliobolus) के रूप में जाना जाता है। कुछ सामान्य प्रजातियाँ (common species) हैं:

सर्कोस्पोरा (Cercospora)

इस जीनस में लगभग 700 प्रजातियाँ (species) शामिल हैं, जो पौधों पर परजीवी (parasitic) हैं जो लीफ स्पॉट (leaf spot) या लीफ ब्लोच (leaf blotch) का कारण बनती हैं। उनके पूर्ण चरण (perfect stage) को मायकोस्पेरेला (Mycospherella) के रूप में जाना जाता है। सर्कोस्पोरा (Cercospora) के कोनिडिया हाइलिन (hyaline) और सेप्टेट (septate) होते हैं। कुछ महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं:

प्यरीक्यूलेरिया (Pyricularia)

पी. ओरीजे (P. oryzae) चावल के झुलसने (blast of rice) का कारण बनता है। इसका पूर्ण चरण (perfect stage) मैग्नापोर्थे ग्रिसिया (Magnaporthe grisea) है। प्यरीक्यूलेरिया (Pyricularia) बेसल पैपिला (basal papilla) के साथ हाइलिन (hyaline), पाइरिफॉर्म (pyriform) दो सेप्टेड कोनिडिया (septed conidia) पैदा करता है।

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
फॉर्म-ऑर्डर (Form-order): मेलानकोनियल्स (Melanconiales)
फॉर्म-परिवार (Form-family): ट्यूबेरेलेसी (Tuberellaceae)

फ्यूसेरियम (Fusarium)

फ्यूसेरियम (Fusarium) प्रजाति मिट्टी में सैप्रोफाइट (saphrophytically) के रूप में रह सकती है। वे कमजोर परजीवी (weak parasites) हैं जो उपयुक्त परिस्थितियों में कई फसल के पौधों में विल्ट (wilt) जैसी बीमारी पैदा करते हैं। वे मैक्रो (macro) और माइक्रो (micro) कोनिडिया (conidia) और क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores) का उत्पादन कर सकते हैं। कुछ महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं:

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
फॉर्म-ऑर्डर (Form-order): एगोनोमाइसीटेल्स (Agonomycetales)

जीनस स्क्लेरोटियम (Genus Sclerotium)

स्क्लेरोटियम रॉल्फसी (Sclerotium rolfsii) मसूर (lentil), चने (chickpea) का विल्ट (wilt) और मूंगफली (ground nut) का कॉलर रॉट (collar rot) का कारण बनता है। उनका मायसेलियम (mycelium) चमकता हुआ सिल्वर सफेद (silvery white) है। वे भूरे, गोलाकार, सरसों के बीज (mustard seed) जैसे स्क्लेरोटिया (sclerotia) पैदा करते हैं। फसल के पौधों के ऑफ-सीजन (off-season) के दौरान स्क्लेरोटिया मिट्टी में जीवित (survive) रह सकता है।

जीनस स्क्लेरोटिनिया (Genus Sclerotinia)

कवक सफेद सूती (cottony white) होता है जो मेजबान की सतह (host surface) पर बढ़ता है। बाद के चरणों में वे मिट्टी में अपने जीवित रहने (survival) के लिए काले स्क्लेरोटिया (black sclerotia) का उत्पादन करते हैं या फसल के पौधों के बीजों (seeds) के साथ मिश्रित (mixed) रहते हैं। स्क्लेरोटिनिया स्क्लेरोटियोरम (Sclerotinia sclerotiorum) सरसों, बैंगन, मिर्च और कई अन्य फसल के पौधों के सफेद तुषार (white blight) का कारण बनता है।

जीनस राइजोक्टोनिया (Genus Rhizoctonia)

इस कवक का मायसेलियम (mycelium) भूरा होता है और शाखाओं के पास इनमें थोड़ी सिकुड़न (constriction) और सेप्टेशन (septation) होता है। वे भूरे रंग के स्क्लेरोटिया (brown sclerotia) उत्पन्न करते हैं, जो संरचनात्मक (structural) उत्तरजीविता है। संक्रमण (infection) पैदा करने के लिए स्क्लेरोटिया अंकुरित (germinate) हो सकता है। राइजोक्टोनिया सोलानी (Rhizoctonia solani) में असीमित मेजबान पौधे (host plants) होते हैं।

प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
फॉर्म-ऑर्डर (Form-order): मेलानकोनियल्स (Melanconiales)
फॉर्म-परिवार (Form –family): मोनिलिसी (Moniliceae)

जीनस एस्परगिलस और पेनिसिलियम (Genus Aspergillus and Penicillium)

वे ज्यादातर सैप्रोफाइटिक कवक (saprophytic fungi) हैं जो नम स्थानों (dampy places) पर रखी लकड़ी, चमड़े, ब्रेड आदि पर उगते हैं। एस्परगिलस (Aspergillus) पीले, हरे, भूरे, काले रंग का हो सकता है जबकि पेनिसिलियम (Penicillium) या तो हरे या नीले रंग का होता है। उनके पूर्ण चरण (perfect stages) एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes) समूह से संबंधित यूरोटियम (Eurotium) और तालारोमायसेस (Talaromyces) हैं। इनका उपयोग विभिन्न औद्योगिक उत्पादों (industrial products) के लिए किया जाता है। इनसे विभिन्न अम्ल (acids), एंटीबायोटिक्स (antibiotics) निर्मित होते हैं।

बैक्टीरिया (Bacteria)

बैक्टीरिया (Bacteria) प्रोकैरियोटिक (prokaryotic), एककोशिकीय जीव (unicellular organisms) हैं, जो बाइनरी विखंडन (binary fission) द्वारा गुणा (multiply) करते हैं। आनुवंशिक सामग्री (genetic materials) एक कोशिका से दूसरे जीवाणु में संयुग्मन (conjugation), परिवर्तन (transformation) और पारगमन (transduction) द्वारा स्थानांतरित (transferred) की जाती है।

बैक्टीरियोफेज (Bacteriophages) उन वायरस का समूह है जो विशिष्ट बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं, आमतौर पर उन्हें मार देते हैं। रूपात्मक (Morphologically) रूप से, वे तीन प्रकार के होते हैं जैसे टैडपोल के आकार (tadpole-shaped), गोलाकार (spherical) और फिलामेंटस (filamentous)।

बैक्टीरिया की कोशिकाएं मुख्य रूप से तीन आकृतियों (shapes), गोलाकार (spherical), रॉड (rod) और सर्पिल (spiral) की होती हैं, जिन्हें क्रमशः कोकस (coccus - Pl. cocci), बेसिलस (bacillus - bacilli) और स्पिरिलम (spirillum - spirilla) भी कहा जाता है। अधिकांश रोगजनक बैक्टीरिया रॉड (rod) के आकार के होते हैं।

एक विशिष्ट जीवाणु कोशिका (bacterial cell) में निम्न शामिल हैं: कोशिका भित्ति (cell wall), स्लाइम परत (slime layer), प्रोटोप्लाज्म (protoplasm), क्रोमोसोम (chromosome), मेसोसोम (mesosome), प्लास्मिड (plasmid), राइबोसोम (ribosome), वैक्यूल (vacuole) और फ्लैगेलम (flagellum)।

बैक्टीरिया कशाभिका (flagella) की मदद से चलते हैं। कशाभिका की संख्या और व्यवस्था (arrangement) के आधार पर बैक्टीरिया को चार समूहों में बांटा जा सकता है।

  1. मोनोट्रिचस (Monotrichous): कोशिका के एक छोर पर एक कशाभिका (flagellum)।
  2. लोफोट्रिचस (Lophotrichous): कोशिका के एक या दोनों सिरों पर दो या दो से अधिक कशाभिका।
  3. एम्फीट्रिचस (Amphitrichous): प्रत्येक छोर पर एक कशाभिका।
  4. पेरिट्रिचस (Peritrichous): कोशिका के चारों ओर बड़ी संख्या में कशाभिका।

पादप रोगजनक बैक्टीरिया का वर्गीकरण और लक्षण (Classification and characters of Plant Pathogenic bacteria)

समय-समय पर वर्गीकरण (classifications) के कई तरीकों की कोशिश की गई है। जैसे पारंपरिक वर्गीकरण (conventional taxonomy), संख्यात्मक वर्गीकरण (numerical taxonomy) और आणविक वर्गीकरण (molecular taxonomy)।

किंगडम (Kingdom): प्रोकैरियोटे (Prokarytae)
क्लास (Class): प्रोटियोबैक्टीरिया (Proteobacteria)

फर्मिबैक्टीरिया (Firmibacteria) / थैलोबैक्टीरिया (Thallobacteria)
जीनस (Genus):
एर्विनिया (Erwinia)
बेसिलस (Bacillus)
स्ट्रेप्टोमाइसेस (Streptomyces)
स्यूडोमोनास (Pseudomonas)
क्लोस्ट्रीडियम (Clostridium)
ज़ैंथोमोनास (Xanthomonas)
ज़ाइलेला (Xylella)

ज़ैंथोमोनास के लक्षण (Characters of Xanthomonas)

0.1 - 0.7 x 0.7 - 1.8 उम की सीधी छड़ (Straight rods), एक ध्रुवीय कशाभिका (polar flagellum) के साथ गतिशील (motile), ग्राम नकारात्मक (gram -ve), अनिवार्य रूप से एरोबिक (obligately aerobic), और चयापचय (metabolism) के सख्त श्वसन प्रकार (strictly respiratory type)।

स्यूडोमोनास के लक्षण (Characters of Pseudomonas)

वे सीधे या थोड़े घुमावदार छड़ (curved rods) हैं, 0.5 - 1.0 x 1.5 - 5.0 उम, ग्राम नकारात्मक (gram -ve), एक से कई ध्रुवीय कशाभिका (polar flagella) के साथ गतिशील और एरोबिक (aerobic)। कड़ाई से श्वसन प्रकार (strictly respiratory type) का चयापचय (metabolism)।

एर्विनिया के लक्षण (Characters of Erwinia)

सीधी छड़ (Straight rods), 0.5 -1.0 x 1.0 - 3.0 उम, ग्राम नकारात्मक (gram -ve), ई. स्टीवर्टी (E. stewartii) को छोड़कर पेरिट्रिचस कशाभिका (peritrichous flagella) के साथ गतिशील, संकाय अवायवीय (facultative anaerobic), ऑक्सीडेस नकारात्मक (oxidase negative) और उत्प्रेरित सकारात्मक (catalase positive)।

एग्रोबैक्टीरियम के लक्षण (Characters of Agrobacterium)

ग्राम नकारात्मक (Gram negative) छड़, 0.6 - 1.0 x 1.5 - 3.0 उम, 1-6 पेरिट्रिचस कशाभिका (peritrichous flagella) द्वारा गतिशील, एरोबिक (aerobic)।

स्ट्रेप्टोमाइसेस के लक्षण (Characters of Streptomyces)

व्यापक रूप से शाखित वानस्पतिक हाइफे (Extensively branched vegetative hyphae), व्यास में 0.5 - 2.0 उम, बीजाणुओं की श्रृंखला (chains of spores) बनाते हैं, एरोबिक (aerobic), अत्यधिक ऑक्सीडेटिव (highly oxidative)।

कुछ पादप रोगजनक बैक्टीरिया और उनके कारण होने वाले रोग हैं:

तेज़ संवहनी बैक्टीरिया (Fastidious Vascular Bacteria)

फास्टिडियस फ्लोएम-सीमित (Fastidious phloem-limited) बैक्टीरिया पहली बार 1972 में तिपतिया घास (clover) के फ्लोएम (phloem) में और बाद में हरियाली रोग (greening disease) से प्रभावित साइट्रस पौधे में देखे गए थे। 1973 में पियर्स रोग (pierce’s disease) से प्रभावित अंगूर (grape) में तेज़ जाइलम-सीमित (xylem-limited) बैक्टीरिया देखे गए थे。

बैक्टीरिया (Bacteria), कवक (Fungi) और शैवाल (Algae) के बीच अंतर

बैक्टीरिया (Bacteria) कवक (Fungi) शैवाल (Algae)
ज्यादातर गैर-फिलामेंटस (non-filamentous) एककोशिकीय जीव (unicellular organisms)। ज्यादातर फिलामेंटस बहुकोशिकीय जीव (filamentus multi-cellular organisms)। ज्यादातर बहुकोशिकीय जीव (multicellular organism)।
ज्यादातर क्लोरोफिल (chlorophyll) या अन्य वर्णक (pigments) की कमी होती है। हमेशा क्लोरोफिल (chlorophyll) या अन्य रंजक (pigments) की कमी होती है। ज्यादातर क्लोरोफिल (chlorophyll) या अन्य वर्णक (pigments) रखते हैं।
कोशिका भित्ति (Cell wall) उपस्थित (present)। कोशिका भित्ति (Cell wall) सच्चे कवक (true fungi) में मौजूद है, स्लाइम मोल्ड (slime mold) में अनुपस्थित है। कोशिका भित्ति (Cell wall) हमेशा मौजूद होती है।
नाभिक (Nucleus) अनुपस्थित (absent)। नाभिक हमेशा मौजूद (present) रहता है। नाभिक हमेशा मौजूद (present) रहता है।
बाइनरी विखंडन (binary fission) द्वारा गुणन (Multiplication)। अलैंगिक या यौन बीजाणुओं (asexual or sexual spores) के विभाजन (division) या नवोदित (budding) या उत्पादन (production) द्वारा गुणा (Multiplication)। अलैंगिक (asexual) या यौन (sexual) विधियों द्वारा गुणा (Multiplication)।

माइकोप्लाज्मा-जैसे जीव (Mycoplasma-like organisms):

माइकोप्लाज्मा (Mycoplasmas) के निम्नलिखित मुख्य लक्षण हैं:

  1. वे बहुत छोटे, एककोशिकीय (unicellular), आमतौर पर गैर-गतिशील (non-motile), प्रोकैरियोटिक जीव (prokaryotic organisms) हैं।
  2. उन्हें विशिष्ट 'तले हुए अंडे' ('fried egg') के आकार की कॉलोनियां बनाने वाले सेल-मुक्त मीडिया (cell-free media) में उगाया जा सकता है।
  3. वे छोटे कोकोइड निकायों (coccoid bodies), अंगूठी के रूपों (ring forms), और ठीक फिलामेंट्स (fine filaments), जो शाखित हो सकते हैं, दिखाते हुए अत्यधिक प्लियोमोर्फिक (pleomorphic - विभिन्न आकार और आकार) हैं।
  4. वे एक कठोर सेल दीवार (rigid cell wall) के बिना एक ट्रिपल लेयर यूनिट झिल्ली (triple layer unit membrane) से बंधे होते हैं और सेल दीवार सामग्री (cell wall material) को संश्लेषित (synthesize) करने की क्षमता (ability) का अभाव (lack) होता है।
  5. वे जीवाणु फिल्टर (bacterial filters) के माध्यम से फ़िल्टर करने योग्य (filterable) हैं।
  6. वे पेनिसिलिन (penicillin) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी (highly resistant) या असंवेदनशील (insensitive) हैं लेकिन टेट्रासाइक्लिन (tetracyclines) द्वारा बाधित (inhibited) हैं।
  7. वे विशिष्ट एंटीबॉडी (specific antibody) द्वारा बाधित (inhibited) होते हैं।
  8. उन्हें आमतौर पर विकास (growth) के लिए स्टेरोल (sterol) की आवश्यकता होती है।

वे एस्टर येलो (aster yellows), शहतूत बौना (mulberry dwarf), आलू विचेस ब्रूम (potato witches' broom), बैंगन की छोटी पत्ती (little leaf of brinjal), कपास की छोटी पत्ती, गन्ने की घास की शूटिंग (grassy shoot of sugarcane), चावल के पीले बौने (rice yellow dwarf), कबूतर मटर की बाँझपन (pigeon pea sterility) आदि जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं। वे लीफहॉपर्स (leafhoppers) द्वारा प्रेषित (transmitted) होते हैं। फाइटोप्लास्मास (Phytoplasmas - MLOs) - नाशपाती की गिरावट (pear decline)।

स्पाइरोप्लाज़्मा जैसे जीव (Spiroplasma-like organisms):

यह संयुक्त राज्य अमेरिका से खट्टे जिद्दी (citrus stubborn - स्टंटिंग, अक्षीय कलियों का अत्यधिक प्रसार, गुच्छेदार ऊपर की ओर विकास, सूजन और पत्तियों का मटमैलापन, भारी फूल, अत्यधिक फल गिरना और फलों का कड़वा स्वाद - Stunting, excessive proliferation of axillary buds, bunchy up-right growth, swelling and mottling of leaves, heavy flowering, excessive fruit drop and bitter flavor of fruits) से रिपोर्ट किया गया था।

स्पाइरोप्लाज्म (Spiroplasms) MLO के समान हैं लेकिन दीवार (wall) की चौड़ाई लगभग 20nm (MLO में केवल 10nm) है। वे आकार में पेचदार (helical), सर्पिल (spiral), गोलाकार (spherical) या अंडाकार (ovoid) हो सकते हैं। वे अस्थायी (temporarily) रूप से पेनिसिलिन (penicillin) द्वारा जाँच (checked) किए जाते हैं। स्पाइरोप्लाज़्मा सिट्री (Spiroplasma citri) - साइट्रस (citrus) का जिद्दी।

रिकेट्सिया-जैसे जीव (Rickettsia-like organisms):

वे कुछ आर्थ्रोपोड्स (arthropods) में बिना कोई बीमारी पैदा किए बाध्य इंट्रासेल्युलर परजीवी (obligate intracellular parasites) हैं, लेकिन वे पौधों में कई बीमारियां पैदा करते हैं। उन्हें सेल मुक्त माध्यम (cell free medium) में नहीं उगाया जा सकता है। टैक्सोनॉमिक (Taxonomically) रूप से वे बैक्टीरिया के बहुत करीब हैं। पौधों की बीमारियां जिनके कारण होने का संदेह (suspected) है, वे हैं: जाइलम-सीमित (Xylem-limited) समूह - पियर्स रोग अंगूर (Pierce's disease of grape), अल्फाल्फा बौना (alfalfa dwarf), बादाम पत्ती झुलसना (almond leaf scorch) और बेर पत्ती पपड़ी (plum leaf scald)। फ्लोएम-सीमित (Phloem-limited) समूह - रगोस लीफ कर्ल क्लोवर (rugose leaf curl of clover), साइट्रस ग्रीनिंग (citrus greening), और आलू लीफलेट स्टंट (potato leaflet stunt)। गैर-ऊतक प्रतिबंधित (Non-tissue restricted) - सेब और गाजर का प्रसार (apple and carrot proliferations)।

वायरस (Virus)

इसमें जीवित और निर्जीव (living and non-living) दोनों वर्ण हैं जैसे गुणन (multiplication), संक्रामकता (infectiveness), उत्परिवर्तन (mutations) जीवित चरित्र हैं और कण (particle), और वर्षा (precipitation) निर्जीव चरित्र (non-living characters) हैं।
डब्ल्यू. एम. स्टेनली (W. M. Stanley - 1938) को टीएमवी (TMV) का क्रिस्टल रूप (crystals form) मिल सकता था, जो अभी भी संक्रामक (infectious) है। Lwoff (1957) ने वायरस को "कड़ाई से इंट्रासेल्युलर (strictly intracellular), संभावित रूप से रोगजनक संस्थाओं (potentially pathogenic entities) के रूप में परिभाषित किया है जो एक संक्रामक चरण (infectious phase) के साथ है और केवल एक प्रकार का न्यूक्लिक एसिड (nucleic acid) या तो आरएनए (RNA) या डीएनए (DNA) के अधिकारी हैं, प्रोटीन कोट (protein coat) से घिरे हैं, और केवल उनके न्यूक्लिक एसिड (nucleic acid) के रूप में गुणा करते हैं और बढ़ने या बाइनरी विखंडन (binary fission) से गुजरने में असमर्थ हैं"。

वायरस मेजबान राइबोसोम (host ribosome) का उपयोग करके प्रतिकृति (replication) या दोहराव (duplication) द्वारा गुणा (multiplies) करता है। पौधों के लगभग 600 वायरस रोगों की सूचना मिली है। फूलगोभी मोज़ेक वायरस (cauliflower mosaic virus) और डहेलिया मोज़ेक वायरस (dahlia mosaic virus) को छोड़कर उन सभी पौधे के वायरस में आरएनए (RNA) होने की सूचना मिली थी। वे डीएनए वायरस (DNA virus) हैं। वायरस के कण का आकार कठोर रॉड (rigid rod - TMV), लचीली रॉड (flexible rod - काउपी मोज़ेक वायरस - Cowpea mosaic virus), गोलाकार (spherical - स्क्वैश मोज़ेक - Squash mosaic), पॉलीहेड्रल (polyhedral - ट्यूलिप पीला मोज़ेक - Tulip yellow mosaic) का हो सकता है। वायरोइड (Viroid) प्रोटीन कोट के बिना आरएनए (RNA) का एक अंश (fragment) मात्र है। वायरोइड कम आणविक भार (low molecular weight) का एकल फंसे (single stranded) सहसंयोजक बंद परिपत्र (covalently closed circular) आरएनए है जो पौधे की कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है, दोहरा सकता है और बीमारी पैदा कर सकता है।

पौधों के वायरस का संचरण (Transmission of plant viruses):

प्राकृतिक परिस्थितियों (natural conditions) में वायरस सैप (sap), ग्राफ्ट्स (grafts), वैक्टर (vectors), डोडर्स (dodders) आदि द्वारा प्रेषित (transmitted) होते हैं।

  1. यांत्रिक संचरण (Mechanical transmission): यह मूल रूप से सब लेथल वाउंडिंग (sub lethal wounding) या घर्षण (abrasion) द्वारा जीवित कोशिकाओं में उपयुक्त स्थानों (suitable sites) पर जैविक रूप से सक्रिय वायरस (biologically active virus) का मैन्युअल स्थानांतरण (manual transfer) और जमाव (deposition) है। संक्रमित पौधे के नमूने को फॉस्फेट बफर (phosphate buffer) के साथ पीसा जाता है और अर्क (extract) को कारबोरंडम पाउडर (carborundum powder) के साथ मिलाया जाता है और सूती झाड़ू (cotton swab) की मदद से अर्क को अवशोषित (absorbed) किया जाता है और अतिसंवेदनशील मेजबान (susceptible host) की पत्ती की सतह (leaf surface) पर धीरे से रगड़ा जाता है, फिर धोने की बोतल (wash bottle) के माध्यम से पानी गिराकर पत्ती को आसुत जल (distilled water) से धोया जाता है।
  2. ग्राफ्ट संचरण (Graft transmission): ग्राफ्टिंग स्टॉक (grafting stock) और सायन (scion) के माध्यम से कुछ वायरस प्रेषित (transmitted) होते हैं। स्वस्थ साथी (healthy partner) में वायरस को स्थापित (established) होने के लिए आवश्यक समय जड़ी-बूटियों वाले पौधों (herbaceous plants) में कई दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक भिन्न हो सकता है, जबकि लकड़ी के पौधों (woody plants) में लक्षण (symptoms) व्यक्त करने में कई महीने लग सकते हैं। कुछ वायरस, जो ग्राफ्ट (graft) के माध्यम से प्रेषित नहीं होते हैं, डोडर (dodder) के माध्यम से प्रेषित होते हैं।
  3. बीज संचरण (Seed transmission): बीजों के विभिन्न भाग विभिन्न प्रकार के वायरस ले जा सकते हैं लेकिन भ्रूण (embryo) में ले जाने वाले सबसे कुशल (efficient) होते हैं और उन्हें वास्तविक बीज संचरण (true seed transmission) माना जाता है। बीज से संचरित होने वाले कुछ वायरस पराग (pollen) के माध्यम से भी संचरित (transmitted) होते हैं। उदा. बीन कॉमन मोज़ेक (bean common mosaic), स्क्वैश मोज़ेक (squash mosaic), खीरा मोज़ेक (cucumber mosaic), सोयाबीन मोज़ेक (soybean mosaic) आदि।
  4. वेक्टर संचरण (Vector transmission): वायरस संचारित (transmitting viruses) करने वाले विभिन्न वैक्टर (vectors) हैं, हालांकि कीट वैक्टर (insect vectors) सबसे कुशल (efficient) हैं। एफिड्स (Aphids), सबसे कुशल मायज़स पर्सिका (Myzus persicae) अकेले 100 से अधिक विभिन्न प्रकार के वायरस संचारित कर सकता है। सफेद मक्खियाँ (White flies) बेमिसिया टैबासी (Bemisia tabaci) काफी सामान्य वेक्टर है जो कम से कम 25 विभिन्न वायरस संचारित (transmit) कर सकती है। माइलबग्स (Mealybugs), लीफहॉपर्स (Leafhoppers), प्लांट हॉपर (plant hoppers), थ्रिप्स (thrips), भृंग (beetles), माइट्स (mites) भी वायरस संचारित करते हैं। नेमाटोड (nematodes - Xiphinema, Longidorus and Trichodorus) और कवक (fungi - Olpidium brassicae, Polymyxa graminis and Spongospora subterranea) जैसे अन्य वैक्टर भी हैं।

पौधे के परजीवी नेमाटोड का जीवन चक्र (Life cycle):

पौधे के परजीवी नेमाटोड (plant parasitic nematode) का जीवन चक्र आमतौर पर पांच अलग-अलग चरणों (five distinct stages) के साथ बहुत सरल होता है। मादा नेमाटोड (female nematodes) अंडे देती हैं, जो कोशिका विभाजनों (cell divisions) की एक श्रृंखला से गुजरते हैं, जिससे पहले चरण का लार्वा (first stage larvae) बनता है। पहला पिघलाव (molt) अंडे में होता है, और दूसरे चरण का लार्वा अंडे से निकलता है।

वे भोजन के लिए उचित मेजबान (proper host) खोजने की कोशिश करेंगे। जब वे भोजन करना शुरू करते हैं, तो वे तीन अतिरिक्त पिघलनों (additional molts) से गुजरते हैं। तीसरे और चौथे पिघलाव (molt) के बीच, यौन अंग (sexual organs) विकसित होने लगते हैं। चौथे पिघलाव के बाद नर (males) मेजबान पर भोजन नहीं करते हैं बल्कि वे मिट्टी में स्वतंत्र रूप से (free living) रहते हैं लेकिन मादा (female) भोजन करना जारी रखती है और अंडे देने के लिए वयस्क (adult) हो जाती है।

एंगुना (Anguna), हेटेरोडेरा (Heterodera), मेलोइडोगाइन (Meloidogyne) और हिर्शमेनिएला (Hirshmaniella) के लक्षण

एंगुना एसपीपी (Anguna, spp.) पौधों के सभी भूमिगत (above ground) भागों पर हमला करते पाए जाते हैं। ये कभी जड़ों में नहीं पाए जाते। दूसरे चरण का लार्वा बीज (seed) में निष्क्रिय अवस्था (dormant stage) में रहता है। ए. ट्रिटिसी (A. tritici) व्हीट गॉल (whaet gall) या इयर कॉकल (ear cockle) रोग का कारण बनता है। वयस्क नेमाटोड की लंबाई 1.5 - 4 मिमी होती है। उनके पास बेसल बल्ब (basal bulb) के साथ स्टाइलेट (stylet) होता है।

हेटेरोडेरा एसपीपी (Heterodera, spp.) को सिस्ट नेमाटोड (cyst nematodes) के रूप में जाना जाता है। वे चुकंदर (sugarbeet), जई (oats), तिपतिया घास (clover), सोयाबीन (soybean) आदि जैसे कई पौधों पर परजीवी (parasitic) हैं। एच. एवेना (H. avenae) जौ (barley) और गेहूं के मोल्या रोग (molya disease) का कारण बनता है। मादा नेमाटोड (female nematodes) मेजबान पौधे के अंदर अपना सिर (head) डालकर मेजबान से जुड़ी पाई जाती हैं और शरीर बाहर रहता है लेकिन नर (males) और पुटी (cyst) मिट्टी में पाए जाते हैं। नर (Males) पतले 1-2 मिमी लंबे होते हैं, मादा (female) नींबू (lemon) के आकार की लंबाई में 0.5 - 0.8 मिमी और चौड़ाई में 0.5 मिमी होती है। सिस्ट (Cysts) गहरे भूरे (dark brown) और नींबू के आकार (lemon shaped) के होते हैं。

मेलोइडोगाइन एसपीपी (Meloidogyne spp.) को रूट नॉट नेमाटोड (root knot nematodes) कहा जाता है। वे टमाटर, बैंगन, भिंडी (lady’s finger), पपीता आदि जैसे कई पौधों पर परजीवी (parasitic) हैं, जो जड़ गाँठ रोग (root knot disease) का कारण बनते हैं। मादा (Females) और तीसरे या चौथे चरण के लार्वा कई पौधों पर गतिहीन परजीवी (sedentary parasites) हैं। नर (Males) और दूसरे चरण के लार्वा प्रवासी (migratory) हैं और मिट्टी में पाए जाते हैं। नर (Males) बेलनाकार (cylindrical) 1 -2 मिमी लंबे होते हैं लेकिन मादा (females) थैली (saccate) या गोलाकार (spherical) 0.8 मिमी लंबी और 0.5 मिमी चौड़ाई की होती हैं।

हिर्शमेनिएला एसपी (Hirshmaniellia sp.) यह काफी बड़ा नेमाटोड (large nematode) है जिसकी लंबाई 1 -4 मिमी होती है। इसमें बेसल बल्ब (basal bulb) के साथ स्टाइलेट (stylet) होता है और पूंछ आम तौर पर नुकीली (pointed) होती है। एच. ओरीजे (H. oryzae) चावल में जड़ सड़न (root rot) का कारण बनता है। ये मिट्टी में भी पाए जाते हैं।

फेनरोगैमिक पादप परजीवी (Phanerogamic Plant Parasites):

कई फूल वाले पौधे (flowering plants) आर्थिक पौधों (economic plants) पर परजीवी (parasitic) होते हैं और काफी नुकसान पहुंचाते हैं। परजीवी प्रकृति (parasitic nature) के आधार पर उन्हें इस प्रकार समूहीकृत (grouped) किया जा सकता है:

  1. तना परजीवी (Stem parasites):
    1. पूरी तरह से आश्रित (holoparasite - holoparasite) उदा. तिपतिया घास (clover), अल्फाल्फा (alfalfa), सन (flax), चुकंदर (sugarbeet) और प्याज (onion) पर कस्कुटा (Cuscuta)।
    2. आंशिक रूप से आश्रित (semiparasite - semiparasite) उदा. आम, अंजीर (fig) और साइट्रस (citrus) पर लोरेन्थस (Loranthus)।
  2. रूट परजीवी (Root parasites):
    1. पूरी तरह से आश्रित उदा. तंबाकू (tobacco), सरसों (mustard), चौड़ी पत्ती वाली सरसों (broad leaf mustard) आदि में ओरोबांचे (Orobanche)।
    2. आंशिक रूप से आश्रित उदा. मक्का, गन्ना (sugarcane), अनाज (cereals), तंबाकू (tobacco) आदि में स्ट्रिगा (Striga)।

पादप रोगविज्ञान के सिद्धांत (Principles of Plant Pathology)

सैप्रोफाइट्स (Saprophytes): वे जीव हैं, जो पौधों या जानवरों के मृत (dead) या क्षय (decaying) ऊतकों (tissues) पर बढ़ते हैं। उदा. सैप्रोफाइटिक कवक (saprophytic fungi), सैप्रोफाइटिक बैक्टीरिया (saprophytic bacteria)।

परजीवी (Parasites): वे जीव हैं, जो अपने विकास और अस्तित्व (existence) के लिए अन्य जीवित जीवों पर निर्भर (dependent) हैं। उदा. परजीवी कवक (parasitic fungi) और बैक्टीरिया (bacteria)।

बाध्य परजीवी (Obligate parasites): वे जीव हैं, जो अपने विकास (growth) और विकास (development) के लिए अन्य जीवित जीवों पर पूरी तरह (strictly) से निर्भर हैं। उदा. एरीसिफे (Erysiphe), प्यूसिनिया (Puccinia), उस्टिलागो (Ustilago)।

ऐच्छिक परजीवी (Facultative parasites): वे जीव हैं जो आम तौर पर सैप्रोफाइट्स (saprophytes) के रूप में रहते हैं लेकिन कभी-कभी वे परजीवी (parasites) के रूप में रह सकते हैं। उदा., फ्यूसेरियम (Fusarium), राइजोक्टोनिया (Rhizoctonia), स्क्लेरोटियम (Scerotium)।

ऐच्छिक सैप्रोफाइट्स (Facultative saprophytes): वे जीव हैं जो मुख्य रूप से परजीवी (parasites) के रूप में रह रहे हैं लेकिन कभी-कभी वे सैप्रोफाइट्स (saprophytes) के रूप में रहते हैं। उदा. फाइटोफ्थोरा (Phytophthora), अल्टरनेरिया (Alternaria), हेल्मिन्थोस्पोरियम (Helminthosporium)।

रोगजनक (Pathogen): एक जीव है, जो एक विशेष मेजबान (particular host) या मेजबान (hosts) की एक सीमा (range) में बीमारी का कारण बनता है।

रोगजनकता (Pathogenicity): एक विशेष मेजबान (host) या मेजबान की एक सीमा (range) में बीमारी पैदा करने के लिए रोगज़नक़ (pathogen) की क्षमता (ability) या क्षमता (capacity) है। इसे एक जीव के सामान्य जमाव (general deposition) के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है जो संक्रमण (infection) पैदा करने और मेजबान/मेजबानों (host/hosts) पर बीमारी के लक्षण (symptom) पैदा करने के लिए पर्याप्त (sufficient) है।

1876 में बैक्टीरियोलॉजिस्ट लुई पाश्चर (Louis Pasteur) और रॉबर्ट कोच (Robert Koch) ने साबित (proved) किया था कि मवेशियों (cattle) का एंथ्रेक्स रोग (anthrax disease) एक विशिष्ट जीवाणु (specific bacterium) के कारण होता था। इसके तुरंत बाद, 1878 में टी.जे. बुरिल (T.J. Burill) ने पहली बार साबित किया कि सेब और नाशपाती का फायर ब्लाइट (fire blight) एक जीवाणु के कारण होता था।
रोगजनकता (Pathogenicity) साबित करने के लिए कोच (Koch) के सिद्धांत (postulate) का पालन किया जाता है। यह भी शामिल है;

  1. रोगग्रस्त मेजबान (diseased host) के साथ जीव (organism) का लगातार जुड़ाव (Constant association)।
  2. रोगग्रस्त मेजबान से संदिग्ध रोगज़नक़ (suspected pathogen) का अलगाव (Isolation) और शुद्ध संस्कृति (pure culture) में रोगज़नक़ (pathogen) की स्थापना।
  3. रोगज़नक़ के परिणामस्वरूप प्रजनन (reproduction) के साथ, संदिग्ध रोगज़नक़ (suspected pathogen) की शुद्ध संस्कृति (pure culture) के साथ रोग मुक्त मेजबान (disease free host) का टीकाकरण (Inoculation)।
  4. मूल रोगग्रस्त मेजबान (original diseased host) से अलग की गई मूल संस्कृति (original culture) के साथ मिलान (matching) करने वाले टीका लगाए गए पौधे (inoculated plant) से शुद्ध संस्कृति (pure culture) में रोगज़नक़ का पुन: अलगाव (Reisolation)।

रोगजनन (Pathogenesis)

जब कोई रोगजनक पौधे पर हमला (attacks) करता है, तो रोग (disease) का विकास (development) कोई अचानक (sudden) होने वाला प्रभाव (effect) नहीं है। किसी भी बीमारी का कारण बनने के लिए घटनाओं (events) की श्रृंखला जिम्मेदार होती है। ये चरण (stages), प्रतिक्रियाएं (reactions) और अंतःक्रियाएं (interactions) क्रम में व्यवस्थित होती हैं, जिससे रोग का विकास (disease development) होता है। रोग के विकास की ओर ले जाने वाली घटनाओं (events) की पूरी श्रृंखला को रोगजनन (pathogenesis) या रोग चक्र (disease cycle) के रूप में जाना जाता है। इसलिए, रोगजनन में रोगज़नक़ का टीकाकरण (inoculation), प्रवेश (penetration), संक्रमण (infection), ऊष्मायन अवधि (incubation period), आक्रमण (invasion), प्रजनन (reproduction), प्रसार (dissemination) और ओवर विंटरिंग (over wintering) या ओवर समरिंग (over summering) शामिल हैं।

  1. टीकाकरण (Inoculation): वह प्रक्रिया (process) है जिसके द्वारा रोगजनकों (pathogens) या उनकी प्रजनन इकाइयों (reproductive units) को पौधों के संपर्क (contact) में लाया जाता है।
  2. प्रवेश (Penetration): मेजबान (host) में रोगज़नक़ का प्रवेश (entrance) है। इसमें अकेले छल्ली (cuticle) का प्रवेश (penetration) शामिल हो सकता है उदा. सेब की पपड़ी (Apple scab); केवल एपिडर्मल कोशिकाओं (epidermal cells) में प्रवेश उदा. ख़स्ता फफूंदी (Powdery mildew); अधिकांश रोगजनकों में प्रवेश (penetration) एपिडर्मल कोशिकाओं या अंतरकोशिकीय स्थानों (intercellular spaces) में गहराई तक जाता है और पौधों की आंतरिक कोशिकाओं (inner cells) और ऊतक (tissue) में आगे बढ़ता है।
  3. संक्रमण (Infection): वह प्रक्रिया (process) है जिसके द्वारा रोगजनक मेजबान (host) की अतिसंवेदनशील (susceptible) कोशिकाओं या ऊतकों (tissues) के साथ संपर्क (contact) स्थापित करता है और उनसे उनके पोषक तत्व (nutrients) प्राप्त करता है। संक्रमण होने के लिए, रोगज़नक़ विषैला (virulent) होना चाहिए, मेजबान अतिसंवेदनशील (susceptible) होना चाहिए, और पर्यावरण (environment) अनुकूल (favorable) होना चाहिए।
  4. ऊष्मायन अवधि (Incubation period): पौधे के संक्रमण (infection) और पौधे पर रोग के लक्षणों (disease symptoms) के पहली बार प्रकट (first appearance) होने के बीच का समय अंतराल (time interval) है। ऊष्मायन अवधि की लंबाई रोगज़नक़ के प्रकार और पर्यावरणीय स्थितियों (environmental conditions) के साथ कुछ दिनों से लेकर हफ्तों, महीनों या वर्षों तक भिन्न होती है।
  5. आक्रमण (Invasion): संक्रमण (infection) के बाद के चरणों (later stages) को संदर्भित करता है जिसके दौरान रोगजनक मेजबान के ऊतक (tissue) में कम या ज्यादा बड़े पैमाने (extensively) पर फैलता (spreads) है। आक्रमण संक्रमण की स्थापना का अनुसरण (follows) करता है। इसे कभी-कभी उपनिवेशीकरण (colonization) भी कहा जाता है।
  6. प्रजनन (Reproduction): एक बार रोगज़नक़ मेजबान (host) के साथ अच्छी तरह से स्थापित हो जाने के बाद, वे बड़ी संख्या में बहुत तेज़ी से (very fast) प्रजनन (reproduce) करते हैं। बैक्टीरिया 20-30 मिनट में प्रजनन करते हैं और 10 घंटे के भीतर लाखों का उत्पादन करते हैं। वायरस प्रतिकृति (replication) या दोहराव (duplication) से गुणा (multiplies) करता है, जो बैक्टीरिया से भी तेज है। कवक (Fungi) अलैंगिक (asexual) और यौन बीजाणुओं (sexual spores) द्वारा गुणा करते हैं। वे बहुत विपुल (prolific) भी हैं, एक स्मुटेड गेहूं (smutted wheat) के बीज में लगभग 10 मिलियन बीजाणु (spores) होते हैं।
  7. प्रसार (Dissemination): कुछ रोगजनकों में स्वायत्त गति (autonomous movement) होती है, जो कुछ मिलीमीटर (millimeters) से लेकर कुछ मीटर (meters) तक भिन्न हो सकती है। वे हवा, पानी, कीट, मानव और अन्य जानवरों द्वारा निष्क्रिय रूप से (passively) प्रसारित (disseminated) होते हैं।
  8. ओवर विंटरिंग (Over wintering) या ओवर समरिंग (over summering): रोगज़नक़ आमतौर पर मेजबान (host) में वानस्पतिक रूप (vegetative form) में जीवित (survives) रहता है। फसल के मेजबान (crop host) की अनुपस्थिति में, वे खरपतवार (weed) या अन्य संपार्श्विक मेजबानों (collateral hosts) में जीवित रहते हैं। उनमें से कुछ ऊस्पोर्स (oospores), स्क्लेरोटिया (sclerotia) जैसे आराम करने वाले बीजाणु (resting spores) उत्पन्न करते हैं और अपने मेजबानों (hosts) की अनुपस्थिति में गर्मी (summer) या सर्दी (winter) के दौरान जीवित रहते हैं।

रोग पूर्वानुमान (Disease forecasting) और रोग प्रबंधन के सिद्धांत (Principles of disease management)

पादप रोगजनकों का अस्तित्व (Survival) और प्रसार (dissemination)

अपने खेती किए गए मेजबान (cultivated host) की अनुपस्थिति में, सजीव रोगज़नक़ (animate pathogen) को अपने अस्तित्व (survival) का कुछ वैकल्पिक स्रोत (alternate source) खोजना होगा। जीवित रहने (survival) के स्रोतों को इस प्रकार समूहीकृत (grouped) किया जा सकता है।

  1. इनोकुलम (inoculum) के जलाशय (reservoir) के रूप में संक्रमित मेजबान (Infected host)।
  2. मेजबान (host) के बाहर सैप्रोफाइटिक بقा (Saprophytic survival)।
  3. मेजबान में या उसके बाहर निष्क्रिय बीजाणु (Dormant spores) और अन्य संरचनाएं (structures)।

I. प्राथमिक इनोकुलम के जलाशय के रूप में संक्रमित मेजबान (Infected host as reservoir of primary inoculum):

उन्हें तीन समूहों में माना जा सकता है;

  1. खेती किया गया मेजबान (the cultivated host),
  2. एक ही परिवार के जंगली मेजबान (wild hosts) (संपार्श्विक मेजबान - collateral hosts)
  3. विभिन्न परिवार के जंगली मेजबान (alternate hosts)

फलदार पौधे बारहमासी (perennial) होने के कारण उन्हें संक्रमित (infecting) करने वाला रोगजनक (pathogen) साल-दर-साल सक्रिय रूप (active form) में जीवित रह सकता है। उदा. साइट्रस कैंकर (citrus canker - ज़ैंथोमोनास कैंपेस्ट्रिस - Xanthomonas campestris)। कोलेटोट्राइकम फाल्केटम (Colletotrichum falcatum) के कारण गन्ने के लाल सड़न (red rot of sugarcane) में संक्रमित गन्ने के सेट (infected sugarcane sets) पर जीवित रहता है। चावल (पाइरिकुलरिया ग्रिसिया - Pyricularia grisea) के ब्लैट (blat) के मामले में, रोगजनक ग्रैमिने (Graminae) परिवार के खरपतवारों (weeds) में जीवित रहता है। गेहूं के रस्ट (wheat rust - प्यूसिनिया ग्रैमिनिस ट्रिटिसी - Puccinia graminis tritici) के मामले में रोगजनक बारबेरी के पौधे (barbery plant) में जीवित (survives) रहता है।

II. मेजबान के बाहर सैप्रोफाइटिक بقा (Saprophytic survival outside the host):

ऐच्छिक परजीवी (facultative parasites) फसल मेजबान (crop host) की अनुपस्थिति में सैप्रोफाइट (saprophyte) के रूप में जीवित रहने में सक्षम हैं। पाइथियम (Pythium), राइजोक्टोनिया (Rhizoctonia) और स्क्लेरोटियम (Sclerotium) की प्रजातियां मिट्टी में और पौधे के मलबे (plant debris) में जीवित रहती हैं। रोगज़नक़ (pathogen) के प्रकार के आधार पर सैप्रोफाइटिक अस्तित्व (saprophytic survival) भिन्न हो सकता है। उनमें से कुछ छोटी अवधि (short period) के लिए जीवित (survive) रहते हैं उदा. फ्यूसेरियम (Fusarium), वर्टिसिलियम (Verticillium), अन्य लंबे समय (long time) तक जीवित रह सकते हैं।

III. जीवित रहने के स्रोत के रूप में रोगज़नक़ के सुप्त अंग (Dormant organs of pathogen as source of survival):

पौधे के वायरस (Plant virus) और बैक्टीरिया (bacteria) आराम करने की अवस्था (resting stage) उत्पन्न नहीं करते हैं इसलिए उनके निष्क्रिय अंग (dormant organs) नहीं होते हैं। कवक (fungi), नेमाटोड (nematode) और फेनेरोगैम्स (phanerogams) अपनी निष्क्रिय (dormant) या आराम (resting) संरचनाओं के माध्यम से जीवित रहते हैं। फेनेरोगेम (Phanerogams) बीज (seeds) पैदा करते हैं उदा ओरोबांचे (orobanche), स्ट्रिगा (striga)। नेमाटोड (Nematodes) अंडे, सिस्ट (cysts) और गॉल (galls) जैसी अपनी निष्क्रिय संरचनाओं (dormant structures) के माध्यम से जीवित रह सकते हैं। कवक (fungi) के मामले में, वे अपने अस्तित्व (survival) के लिए अलग-अलग निष्क्रिय अंगों (dormant organs) या संरचनाओं (structures) का उत्पादन करते हैं और इनोकुलम (inoculum) का प्राथमिक स्रोत (primary source) बन जाते हैं। उनमें से कुछ कोनिडिया (conidia), क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores), ऊस्पोर्स (oospores), स्क्लेरोटिया (sclerotia) पैदा करते हैं जो मिट्टी में जीवित (survive) रह सकते हैं। कुछ बीज जनित कवकों (seed borne fungi) में, निष्क्रिय मायसेलियम (dormant mycelium) बीज के भ्रूण (embryo) में जीवित रहता है और कुछ निष्क्रिय बीजाणु (dormant spores) बीज कोट (seed coat) पर या उसके अंदर जीवित रहते हैं।

प्रसार (Dissemination) - अर्थ (meaning) और प्रसार का तरीका (mode of dissemination)

लंबी या छोटी दूरी (long or short distance) के लिए इनोकुलम (inoculum) का फैलाव (Dispersal) प्रसार (dissemination) कहलाता है। यह न केवल पौधों की बीमारियों के प्रसार (spread) के लिए बल्कि रोगजनकों (pathogens) के जीवन चक्र (life cycle) की निरंतरता (continuity) के लिए भी महत्वपूर्ण है। पादप रोगजनकों (plant pathogens) का फैलाव (dispersal) निम्न रूप में हो सकता है;

प्रत्यक्ष या सक्रिय या स्वायत्त फैलाव (Direct or active or autonomous dispersal):

कवक (fungi), बैक्टीरिया (bacteria), वायरस (viruses) और नेमाटोड (nematodes) का स्वायत्त फैलाव (autonomous dispersal) विभिन्न कृषि कार्यों (agronomic operations) के दौरान मिट्टी (soil), बीज (seed) और पौधों के अंगों (plant organs) की एजेंसी (agency) के माध्यम से पूरा किया जाता है।
स्वायत्त फैलाव के साधन (means) के रूप में मिट्टी (Soil) - मृदा जनित संकाय परजीवी (soil-borne facultative parasites) मिट्टी में कुछ दूरी (distance) तक बढ़ सकते हैं। उदा. राइजोक्टोनिया सोलानी (Rhizoctonia solani), स्क्लेरोटियम रॉल्फसी (Sclerotium rolfsii)। उनमें से कुछ ज़ूस्पोर (zoospores) उत्पन्न कर सकते हैं, जो मिट्टी के पानी (soil water) की फिल्म में कुछ दूरी तक यात्रा कर सकते हैं उदा. पाइथियम (Pythium), फाइटोफ्थोरा (Phytophthora)। यह संक्रमण (infection) के लिए मेजबान (host) को खोजने में उनकी मदद कर सकता है। कृषि उपकरणों (farm equipment) के साथ-साथ संक्रमित मिट्टी (infested soil) के माध्यम से भी रोगजनक (pathogens) फैल सकते हैं।
बीज रोगजनकों के स्वायत्त फैलाव के लिए भी काम करते हैं। रोगजनक (pathogens) बाहरी (externally) या आंतरिक रूप से (internally) बीज जनित (seed-borne) हो सकते हैं और उन्हें बीज के साथ ले जाया जाता है। कुछ रोगजनकों में सहवर्ती संदूषण (concomitant contamination) हो सकता है और बीज के साथ फैल सकता है। उदा. ओरोबांचे (orobanche), स्ट्रिगा (striga), स्क्लेरोटिया (sclerotia) आदि के बीज। वानस्पतिक रूप से (vegetatively) प्रचारित पौधे (propagated plant) के अंग रोगज़नक़ ले जा सकते हैं। वायरस, बैक्टीरिया और कवक पौधे के अंगों के साथ ले जाए जाते हैं और फैल (disseminated) जाते हैं।

अप्रत्यक्ष या निष्क्रिय फैलाव (Indirect or Passive dispersal):

पादप रोगजनकों (plant pathogens) का निष्क्रिय फैलाव (passive dispersal) जानवरों के साम्राज्य (animal kingdom - मनुष्य, जानवर, कीड़े, नेमाटोड आदि), हवा (air) और पानी (water) की एजेंसी के माध्यम से पूरा किया जाता है।
दुनिया में सीमित (limited) दूरी से लेकर दूर (far distance) तक रोगजनकों (pathogens) के प्रसार (dispersal) के लिए मनुष्य (human beings) सबसे महत्वपूर्ण साधन (means) हैं। फलों, सजावटी पौधों (ormentals), गन्ना, आलू आदि का वानस्पतिक प्रसार (Vegetative propagation) रोगजनकों के प्रसार (dispersal) में मदद करता है। एक राज्य से दूसरे राज्य, एक देश से दूसरे देश में बीज या अन्य रोपण सामग्री (planting material) का निर्यात (Export) और आयात (import) पादप रोगजनकों (plant pathogens) के प्रसार (dissemination) में मदद करता है। विशेष रूप से वायरस और बैक्टीरिया को फैलाने (disseminating) में कीड़े (Insects) बहुत कुशल (efficient) होते हैं। सेब का फायर ब्लाइट (fire blight of apple - इरविनिया एमाइलोवोरा - Erwinia amylovora) मधुमक्खियों (honeybees) द्वारा फैलता है। मुख्य रूप से रस चूसने वाले कीड़े (sucking insects) जैसे एफिड्स (aphids) और हॉपर (hoppers) वायरस रोगों (virus diseases) को प्रसारित (transmitting) करने के लिए जिम्मेदार हैं। नेमाटोड (Nematodes) जाइफिनेमा (Xiphinema), लोंगिडोरस (Longidorus) और ट्राइकोडोरस (Trichodorus) वायरस (virus) संचारित (transmit) करते हैं। नेमाटोड प्रसारित वायरस (nematode transmitted viruses) को उनके कण आकार (particle shape) के आधार पर दो समूहों (groups) में विभाजित किया गया है। i) नेपो वायरस (Nepo virus) - पॉलीहेड्रल कण (polyhedral particles) हैं उदा. तंबाकू (tobacco) और टमाटर के छल्ले (tomato ring spot)। वे ज़िफीनेमा (Xiphinema) और लोंगिडोरस (Longidorus) द्वारा प्रेषित होते हैं। ii) नेटु वायरस (Netu virus) - ट्यूबलर कण (tubular particles) हैं उदा. मटर का जल्दी भूरा होना (pea early browning) और तंबाकू खड़खड़ (tobacco rattle)। वे ट्राइकोडोरस (Trichodorus) द्वारा प्रेषित होते हैं।

हवा के माध्यम से फैलाव (Dispersal through air):

बैक्टीरिया (bacteria) और वायरस (virus) को मेजबान (host) के संक्रमित ऊतकों (infected tissues) के साथ वायु प्रवाह (air current) द्वारा ले जाया जाता है। कई कवकों के बीजाणु (Spores) हवा द्वारा ले जाए जाते हैं। इन बीजाणुओं द्वारा तय की गई दूरी हवा के वेग (velocity of the wind) और बीजाणुओं द्वारा भाग ली गई ऊंचाई (height) पर निर्भर करती है। प्यूसिनिया ग्रैमिनिस ट्रिटिसी (Puccinia graminis tritici) के यूरेडोस्पोर्स (uredospores) दक्षिण अमेरिका (South America) से उत्तरी अमेरिका (North America) ले जाए गए।

पानी के माध्यम से फैलाव (Dispersal through water):

बीजाणु (spores) स्थानीय क्षेत्रों में बारिश के छींटे (rain splash) द्वारा प्रसारित (disseminated) होते हैं। उदा. सेब का फायर ब्लाइट (Fire blight of apple)। फेनेरोगैम्स के बीज (seeds of phenerogams), नेमाटोड सिस्ट (nematode cysts), फंगल मायसेलियम (fungal mycelium), बीजाणु (spores) और अन्य प्रतिरोधी संरचनाएं (resistant structures) पानी के प्रवाह (water current) द्वारा लंबी दूरी (longer distance) तक ले जाए जाते हैं।

महामारी विज्ञान अध्ययन (Epidemiological studies)

महामारी विज्ञान (Epidemology) - अवधारणा (concept), विश्लेषण (analysis) और उपयोग (use)

महामारी विज्ञान (Epidemology) मुख्य रूप से रोग के प्रसार (spread of the disease) से संबंधित है। महामारी (epidemic) या एपिफाइटिक रूप (epiphytic form) में बीमारी को स्थापित करने के लिए, i) अतिसंवेदनशील चरण (susceptible stage) में मेजबान पौधे (host plant), ii) पौरुष रोगज़नक़ (virulence pathogen) की उपस्थिति (presence), और iii) रोगज़नक़ के लिए उपयुक्त वातावरण (suitable environment) की उपस्थिति होनी चाहिए।

मेजबान पौधा (Host plant): मेजबान पौधे की संवेदनशीलता (susceptibility) इस पर निर्भर करती है;

  1. पौधे की आयु (Age of the plant): रोगज़नक़ (pathogen) के प्रकार के आधार पर, पौधे की संवेदनशील आयु (susceptible age) भिन्न होती है। उदा. ब्लास्ट (blast - पाइरिकुलेरिया ओरीजे - Pyricularia oryzae) के लिए चावल का अतिसंवेदनशील चरण (susceptible stage) लगभग 21 दिनों का अंकुर (seedlings) और टिलरिंग चरण (tillering stage) में होता है। पत्ती के धब्बे (leaf blotch - बाइपोलरिस सोरोकिनियाना - Bipolaris sorokiniana) के लिए गेहूं का अतिसंवेदनशील चरण (susceptible stage) दूध (milk) से आटा चरण (dough stage) है। इसी तरह, सलाद (lettuce), मटर (pea), कद्दू (cucurbits) जैसे पौधों की उम्र (age) बढ़ने के साथ ख़स्ता फफूंदी (powdery mildew) की संवेदनशीलता (susceptibility) बढ़ जाती है।
  2. रोगज़नक़ की विषाक्तता (Virulence of the pathogen): रोगज़नक़ (pathogen) में पौरुष आनुवंशिक चरित्र (virulent genetic character) होना चाहिए। अन्य वर्ण (characters), जो रोगज़नक़ को विषैला (virulent) बनने में मदद करते हैं, वे हैं उच्च स्पोरुलेशन (high sporulation), सक्रिय मुक्ति (active liberation), छोटा जीवन चक्र (short life cycle) आदि।
  3. उपयुक्त पर्यावरण (Suitable environment): तापमान (Temperature) और नमी (moisture) एपिफाइटिक स्थिति (epiphytic condition) में रोग के विकास (development) के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदा. आलू का लेट ब्लाइट (Late blight of potato) एपिफाइटिक अनुपात (epiphytic proportion) में विकसित होता है जब रात का तापमान (night temperature) 100C, दिन का तापमान (day temperature) 18-200C होता है, हल्की वर्षा (light rainfall) के बाद बादल छाए रहते हैं (cloudy weather)। गंभीर सर्दी (Severe winter) यानी। अस्थायी। 10-120C और लंबे समय तक बादल छाए रहने (cloudy weather) से सफेद तने के तुषार (white stem blight - Sclerotinia sclerotiorum) के विकास को सब्जियों और रेपसीड (rape seed) और सरसों (mustard) पर एपिफाइटिक स्थिति (epiphytic condition) में विकसित होने में मदद मिलेगी। सामान्य तौर पर, रोग के विकास (development) के लिए 90% से ऊपर उच्च आर्द्रता (high humidity) की आवश्यकता होती है। एरीसिफे पॉलीगोनी (Erysiphe polygoni) बीजाणु (spores) 0% आर्द्रता (humidity) पर भी अंकुरित (germinate) हो सकते हैं जबकि ई. ग्रैमिनिस (E. graminis) को बीजाणुओं (spores) के अंकुरण (germination) के लिए 100% आर्द्रता (humidity) की आवश्यकता होती है। खनिज पोषण (Mineral nutrition) एपिफाइटिक स्थिति (epiphytic condition) में विकसित होने के लिए रोगज़नक़ (pathogen) को भी प्रभावित करता है। उच्च नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक (High nitrogenous fertilizer) ब्लास्ट रोग (blast disease) के विकास का समर्थन करता है और कम नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक (low nitrogenous fertilizer) चावल के भूरे रंग के धब्बे (brown spot of rice) का पक्ष लेता है।

रोगों के नियंत्रण (control of diseases) में महामारी विज्ञान (epidemology) का उपयोग:

यौगिक ब्याज (compound interest) प्रकार की बीमारी निम्न समीकरण (equation) द्वारा व्यक्त की जाती है।

x = X0ert
जहाँ, x = किसी दिए गए समय पर रोग की मात्रा (the amount of disease at a given time),
X0 = प्रारंभिक इनोकुलम (the initial inoculum),
r = औसत संक्रमण दर (the average infection rate),
t = समय जिसके दौरान संक्रमण (infection) हुआ है, और
e = प्राकृतिक लॉग (natural log - मान 2.7182818)।

उपरोक्त समीकरण (above equation) के आधार पर नियंत्रण उपायों (control measures) को लक्षित (targeted) किया जाना चाहिए;

रोगजनक (pathogen) का गुणन (multiplication) रोगजनक द्वारा बीजाणु उत्पादन (spore production) पर अधिकतम तक पहुंच जाता है और उसके बाद श्वसन (respiration) कम हो जाता है। प्रतिरोधी किस्म (resistant variety) में, श्वसन अधिक तेजी से बढ़ा लेकिन थोड़े समय के लिए और अतिसंवेदनशील किस्म (susceptible variety) में, श्वसन धीरे-धीरे उच्च स्तर तक बढ़ गया और लंबे समय तक उच्च स्तर पर बना रहा।

जिन तंत्रों (mechanisms) द्वारा रोगग्रस्त पौधों (diseased plants) में श्वसन बढ़ता है, वे मुख्य रूप से दो हैं।

  1. ऑक्सीडेटिव फॉस्फोराइलेशन (oxidative phosphorilation) का अनकप्लिंग (Uncoupling): ADP का फॉस्फोराइलेशन (Phosphorilation) नहीं हो सकता है। यह देखा गया है कि 2,4 डिनिट्रोफेनोल (dinitrophenol - DNP) जैसे कुछ पदार्थ ADP के फॉस्फोराइलेशन (phosphorilation) को ATP में रोकते हैं जो श्वसन (respiration) को उत्तेजित (stimulate) करेंगे। इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा उत्पादन (energy output) कम हो जाता है।
  2. चयापचय की उत्तेजना (Stimulation of metabolism): वृद्धि की उत्तेजना (growth stimulation), प्रोटोप्लास्मिक स्ट्रीमिंग (protoplasmic streaming) और अनुवाद (translocation) जैसे चयापचय (metabolism) में वृद्धि के कारण श्वसन में वृद्धि होती है और रोगग्रस्त क्षेत्र (diseased area) में सामग्री के संचय (accumulation) से अधिक ATP का उपयोग होगा जिसके परिणामस्वरूप अधिक ADP और अकार्बनिक फॉस्फेट (inorganic phosphate) होगा जो श्वसन (respiration) को और उत्तेजित (stimulate) करेगा।

रोगों की भविष्यवाणी (Forecasting of diseases) और रोग की घटनाओं (disease incidence) का अनुमान लगाना

पूर्वानुमान (Forecasting) को किसी निश्चित बीमारी की अनुकूल परिस्थितियों (favorable conditions) के बारे में किसी वस्तु के उत्पादकों को सुनिश्चित करने और अधिसूचना (notification) के रूप में परिभाषित किया जा सकता है ताकि आर्थिक रिटर्न (economic return) के लिए नियंत्रण उपायों (control measures) को लागू किया जा सके।
निम्नलिखित शर्तों के मामले में पूर्वानुमान का व्यावहारिक मूल्य (practical value) होगा।

  1. रोग गुणवत्ता और मात्रा (quality and quantity) के मामले में आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण क्षति (significant damage) का कारण बनता है।
  2. बीमारी के प्रकट होने का समय, इसका विकास और महामारी (epidemic) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मौसम की स्थिति (weather conditions) पर निर्भर करती है।
  3. मौसम-रोग संबंधों (weather-disease relationships) की जानकारी पूरी तरह से ज्ञात है।
  4. व्यावहारिक (Practical), प्रभावी (effective) और किफायती (economical) नियंत्रण उपाय (control measures) उपलब्ध हैं, और
  5. किसी वस्तु (commodity) के सभी उत्पादक पूर्वानुमान सेवा (forecasting service) और संबंधित देश की सरकार द्वारा सुझाई गई कार्रवाई (act) करने के लिए तैयार हैं।

पूर्वानुमान लगाने के तरीके (Methods of forecasting)

सामान्य तौर पर, बीमारी के साथ निश्चित पर्यावरणीय संबंध (environmental relationships) प्रयोगशाला (laboratory) के प्रयोगों से पाए जाते हैं। फिर इसे विभिन्न क्षेत्रों में वास्तविक क्षेत्र डेटा (actual field data) के साथ सत्यापित (verified) किया जाता है। बीमारी की मात्रा (amount of disease) निर्धारित करने वाले प्रमुख और महत्वपूर्ण मौसम कारकों (weather factors) की पहचान की जाती है। एक अस्थायी मॉडल (tentative model) विकसित किया गया है और क्षेत्र मैक्रोक्लाइमेट (macroclimate) और माइक्रोक्लाइमेट डेटा (microclimate data) और रोग पैटर्न (disease pattern) के साथ सत्यापित किया गया है और फिर इसका उपयोग पूर्वानुमान (forecasting) के लिए किया जाता है। हालांकि, किसी बीमारी के पूर्वानुमान की वास्तविक विधियां रोग चक्र (disease cycle) के प्रकार पर निर्भर करती हैं जो जगह-जगह या देश-देश में भिन्न (differs) हो सकती हैं।

सरल जैव-जलवायु मॉडल (Simple bio-climatic models)

हॉलैंड (Holland) में, एवरडिंगन (Everdingen - 1926) ने आलू के लेट ब्लाइट (late blight) का पूर्वानुमान लगाने के लिए डच नियम (Duch rules) बनाए।

  1. कम से कम 4 घंटे के लिए ओस बिंदु (dew point) से नीचे रात का तापमान (night temperature),
  2. न्यूनतम तापमान (minimum temperature) 10°C या उससे अधिक,
  3. अगले दिन बादल छाए रहना (cloudiness), और
  4. बाद के 24 घंटों के दौरान कम से कम 0.1 मिमी बारिश (rain)।

इंग्लैंड (England) में, ब्यूमोंट (Beaumont - 1947) ने मामूली संशोधनों (modifications) के साथ समान नियम दिए। कम से कम 46 घंटों के लिए आरएच (RH) 75% से नीचे और तापमान 10°C से नीचे नहीं आना चाहिए। 2-3 सप्ताह के बाद तुषार (Blight) होने की उम्मीद है। स्मिथ (Smith - 1956) ने आगे संशोधित (modified) किया कि तापमान 10°C से नीचे नहीं होना चाहिए और आरएच (RH) प्रत्येक दिन कम से कम 11 घंटों के लिए 90% या उससे अधिक होना चाहिए। इन सरल मॉडलों (simple models) को विस्तृत (elaborated) और सुधारित (improved) किया गया है।

  1. यांत्रिक मॉडल और शून्य तिथि (Mechanical model and zero date): शून्य तिथियों (zero dates) पर विचार करते हुए सरल यांत्रिक मॉडल (Simple mechanical models) का उपयोग किया जाता है। शून्य तिथि (Zero date) का अर्थ वह तिथि है जिससे पहले मौसम की स्थिति (weather conditions) उपयुक्त (suitable) होने पर भी बीमारी की उम्मीद नहीं की जा सकती है। यह मेजबान के अतिसंवेदनशील चरण (susceptible stage) में नहीं होने के कारण हो सकता है या रोगज़नक़ (pathogen) पर्याप्त रूप से गुणा (multiplied) नहीं किया जा सकता है।
  2. सिनोप्टिक वेदर चार्ट (Synoptic weather chart): इसका उपयोग पहली बार 1952 में आयरलैंड में किया गया था और इसे जारी रखा गया है। एक बार जब किसी पौधे की बीमारी और कुछ सिनोप्टिक वेदर पैटर्न (synoptic weather pattern) के बीच एक लिंक स्थापित हो जाता है, तो बीमारी का पूर्वानुमान (forecast) लगाना अधिक सरल हो जाता है।
  3. नकारात्मक पूर्वानुमान (Negative forecast): इसमें मौसम की स्थिति का अंकगणितीय वजन (arithmetical weighing) शामिल है यदि वे पौधे की बीमारी का पक्ष लेते हैं या बाधा डालते हैं (hinder)। एक संचयी रेटिंग (cumulative rating) बनाए रखी जाती है जो स्वचालित रूप से (automatically) इंगित करती है कि प्रकोप (outbreak) कब संभव है।
  4. पौधों की बीमारी का अनुकरण करने के लिए कंप्यूटर प्रोग्रामिंग (Computer programming to simulate plant disease): अंकगणितीय कार्यों (arithmetical work) को सुविधाजनक बनाने के लिए कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग मॉडल (Computer programming moders) विकसित किए गए हैं। उदा. टमाटर के अल्टरनेरिया ब्लाइट (Alternaria blight) के लिए एपिडेम (EPIDEM), मक्का के दक्षिणी लीफ स्पॉट (southrn leaf spot) के लिए एपिमे (EPIMAY), गेहूं में सेप्टोरिया (Septoria) के लिए एपिसेप्ट (EPISEPT), गुलदाउदी (Chrysanthemum) के एस्कोचाइटा ब्लाइट (Aschochyta blight) के लिए माइकोस (MYCOS), और लेट ब्लाइट के लिए ब्लाइटकास्ट (BLIGHTCAST) आदि।
  5. मध्यम और लंबी दूरी की रणनीतिक चेतावनियाँ (Medium and long-range strategical warnings): किसी विशेष देश के मौसम के पैटर्न (weather pattern) और किसी बीमारी के लिए मौसम की आवश्यकता (weather requirement) का अध्ययन करके इसकी भविष्यवाणी (predicted) की जाती है। नए क्षेत्र या देश में बीमारी के संभावित खतरे (potential danger) को बताते हुए इसे देश में प्रवेश (enter) न करने की चेतावनी दी जाती है।

पादप रोग नियंत्रण के सिद्धांत (Principles of plant disease control)

पादप रोग नियंत्रण के सिद्धांतों में शामिल हैं

I) रोगनिरोध (Prophylaxis)

  1. बहिष्करण (Exclusion) - संगरोध और अन्य विधायी उपाय (Quarantine and other legislative measures)
  2. उन्मूलन (Eradication) - सांस्कृतिक उन्मूलन और रासायनिक उन्मूलन (Cultural eradication and chemical eradication)
  3. संरक्षण (Protection) - सांस्कृतिक हेरफेर, शारीरिक और रासायनिक सुरक्षा (Cultural manipulation, Physical and chemical protections)

II) टीकाकरण (Immunization)

  1. आनुवंशिक प्रतिरोध (Genetic resistance)
  2. चिकित्सा (Therapy) - शारीरिक चिकित्सा और रासायनिक चिकित्सा (Physical therapy and chemical therapy)
  1. रोगज़नक़ से बचाव (Avoidance of pathogen): प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों (unfavorable environmental conditions) के कारण इनोकुलम (inoculum) अनुपस्थित (absent) या अप्रभावी (ineffective) होने के समय या स्थान पर रोपण करके बीमारी (disease) से बचना।
  2. इनोकुलम का बहिष्करण (Exclusion of inoculum): इनोकुलम (inoculum) को उस खेत या क्षेत्र में प्रवेश करने या स्थापित होने से रोकना जहाँ वह मौजूद (exist) नहीं है।
  3. उन्मूलन (Eradication): किसी क्षेत्र (region) से या किसी व्यक्तिगत पौधे से जिसमें यह पहले से ही स्थापित (established) है, स्रोत पर इनोकुलम को कम करना, निष्क्रिय करना, समाप्त करना या नष्ट करना (destroying inoculum)।
  4. संरक्षण (Protection): पौधे और रोगज़नक़ (pathogen) के बीच एक रासायनिक विषैला अवरोध (chemical toxic barrier) बनाकर संक्रमण (infection) को रोकना।
  5. रोग प्रतिरोध (Disease resistance): पौधे में प्रतिरोधी जीन (resistant genes) के चयन या परिचय द्वारा रोगज़नक़ (pathogen) की प्रभावशीलता (effectiveness) को बदलना।
  6. चिकित्सा (Therapy): संक्रमित व्यक्ति (infected individual) में बीमारी की गंभीरता (severity) को कम करना।

रोग नियंत्रण के तरीके (Methods of disease control)

सांस्कृतिक तरीके (Cultural methods):

भौतिक तरीके (Physical methods):

शुष्क गर्मी उपचार (Dry heat treatment), गर्म पानी का उपचार (hot water treatment), और फायरिंग (firing) मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्मजीवों (microorganisms) को अंधाधुंध (indiscriminately) मार देंगे। वे हानिकारक (harmful) या उपयोगी (useful) हो सकते हैं। इसका उपयोग कई फसलों में जड़ सड़न (root rot) पैदा करने वाले स्क्लेरोटियम रॉल्फसी (Sclerotium rolfsii) को नियंत्रित (controlled) करने के लिए किया जाता है।

नियामक विधि (Regulatory method)

पादप संगरोध (Plant quarantine) देशों, राज्यों और समुदायों के बीच पौधों या पादप उत्पादों (plant products) की आवाजाही (movement) या विनिमय (interchange) पर कानूनी प्रतिबंध (legal restriction) है, जो पौधों के रोगजनकों (plant pathogens) को रोकने (preventing) या उनकी शुरूआत और स्थापना (establishment) के उद्देश्य से है जहां वे मौजूद नहीं हैं। घरेलू संगरोध (domestic quarantine) और अंतरराष्ट्रीय संगरोध (international quarantine) स्थापित हैं।
पादप संगरोध कार्यों (Plant quarantine actions) को 5 प्रमुख समूहों में बांटा गया है;

  1. प्रतिबंध (Embargo): एक संगरोध क्षेत्र (quarantined area) से एक संरक्षित क्षेत्र (protected area) में संक्रमित सामग्री (infected materials) की आवाजाही (movement) पर पूर्ण प्रतिबंध (Absolute prohibition)।
  2. हिरासत (Detention): उस अवधि से रिहाई (release) में देरी (delay) जब पौधों की सामग्री (plant material) को सावधानीपूर्वक अवलोकन (careful observation) के तहत रखा जाता है जब तक कि परजीवी से स्वतंत्रता का आश्वासन नहीं दिया जाता है या जीव (organism) को समाप्त नहीं कर दिया जाता है।
  3. निरीक्षण (Inspection): पौधे की सामग्री (Plant material) की जांच या तो उपज के स्रोत (source of produce) पर या प्रवेश के बिंदु (point of entrance) पर की जाती है।
  4. कीटाणुशोधन (Disinfection): यदि सामग्री रोगग्रस्त (diseased) पाई जाती है, तो या तो बीज उपचार (seed treatment) या गर्म हवा (hot air) या छंटाई (sorting) की जाती है।
  5. अप्रतिबंधित प्रवेश (Unrestricted entry): जब यह माना जाता है कि कोई हानिकारक बीमारी (harmful disease) नहीं है तो इसे हर जगह प्रवेश (enter) करने की अनुमति (allowed) है।

जैविक विधि (Biological method):

अधिक हानिकारक या रोगजनक जीवों (pathogenic organisms) की जांच करने के लिए कम हानिकारक या सैप्रोफाइटिक सूक्ष्मजीवों (saprophytic microorganisms) का परिचय (Introduction) या निष्क्रियता (inactivation) जैविक नियंत्रण विधि (biological control method) के रूप में जानी जाती है। ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) और ग्लियोक्लाडियम (Gliocladium) कवक (fungi) का उपयोग राइजोक्टोनिया (Rhizoctonia), स्क्लेरोटियम (Sclerotium), स्क्लेरोटिनिया (Sclerotinia) और फ्यूसेरियम (Fusarium) जैसे मृदा जनित रोगजनकों (soil-borne pathogens) को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इसी तरह, फंगल या बैक्टीरियल बीमारी को नियंत्रित करने के लिए सैप्रोफाइटिक बैक्टीरिया (saprophytic bacteria) का उपयोग किया जाता है。

रोग नियंत्रण (disease control) में प्रयुक्त रसायनों (chemicals) का वर्गीकरण और निर्माण (formulation)

कवकनाशी (Fungicide) का अर्थ है एक रसायन (chemical), जो कवक को मारने (kill the fungi) में सक्षम (able) हैं। हालांकि, सभी कवकनाशी (fungicides) कवक को नहीं मारते हैं, वे अस्थायी रूप से (temporarily) कवक के विकास (growth) को रोक सकते हैं या वे फंगल बीजाणुओं (fungal spores) के अंकुरण (germination) को रोक सकते हैं। इसलिए, उन्हें i) रक्षक (Protectants) और ii) चिकित्सक (Therapeutants) के रूप में वर्गीकृत (classified) किया जा सकता है।

रक्षक (Protectants) वे कवकनाशी (fungicides) हैं, जिनका उपयोग पौधों को रोगजनकों (pathogens) के हमले से बचाने (protect) के लिए किया जाता है। उन्हें संक्रमण (infection) से पहले लगाया जाना चाहिए। उदा. ज़िनेब (Zineb), मानेब (Maneb), सल्फर (Sulfur) आदि।

चिकित्सक (Therapeutants) वे रसायन (chemicals) हैं, जो संक्रमण (infection) पैदा करने के बाद भी रोगज़नक़ (pathogen) को मिटाने (eradicating) में सक्षम हैं। उदा. विटावैक्स (vitavax), हिनोसन (hinosan), एंटीबायोटिक्स (antibiotics) आदि।

कार्रवाई के तरीके (mode of action) के आधार पर उन्हें i) प्रणालीगत (Systemic) और ii) गैर-प्रणालीगत (Nonsystemic) के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है।
प्रणालीगत कवकनाशी (Systemic fungicides) वे हैं, जो पौधों की प्रणाली (system of the plants) में प्रवेश करके कार्य करते हैं। वे चिकित्सक (therapeutants) हैं।
गैर-प्रणालीगत कवकनाशी (Nonsystemic fungicides) वे हैं, जो पौधों की प्रणाली में प्रवेश नहीं कर सकते हैं लेकिन पौधों की सतह (surface of the plants) पर कार्य करते हैं। वे आम तौर पर रक्षक (protectants) हैं।

सामान्य उपयोग (general use) के आधार पर कवकनाशी (fungicides) को इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है:

रासायनिक प्रकृति (chemical nature) के आधार पर कवकनाशी (fungicides) को इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है:

कवकनाशी का निर्माण (Formulation of fungicides):

एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management - IPM)

आईपीएम (IPM) एक नया वैचारिक दृष्टिकोण (conceptual approach) है, जो पारिस्थितिक सिद्धांतों (ecological principles) पर आधारित है और एग्रोइकोसिस्टम प्रबंधन रणनीतियों (agroecosystem management strategies) में बहु-विषयक पद्धतियों (multidisciplinary methodologies) को एकीकृत (integrates) करता है जो व्यावहारिक (practical), प्रभावी (effective), किफायती (economical) और सार्वजनिक स्वास्थ्य (public health) और पर्यावरण (environment) दोनों के लिए सुरक्षात्मक (protective) हैं। आईपीएम (IPM) में शामिल किए जा सकने वाले विभिन्न नियंत्रण उपायों (control measures) में रसायनों का विवेकपूर्ण उपयोग (Judicious use of chemicals) अधिमानतः वनस्पति कीटनाशक (botanical pesticides), जैविक नियंत्रण (Biological control), पादप संगरोध (Plant Quarantine), बीज प्रमाणीकरण (Seed certification), प्रतिरोधी किस्में (Resistant cultivars), जेनेटिक इंजीनियरिंग (Genetic engineering) शामिल हैं।

रोगों में पादप जैव प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग (Application of Plant Bio-technology to Disease)

यौगिक (Compound) वायरस (Viruses) मेजबान (Host)
रिबाविरिन (Ribovirin) PVy, PVx, PVs, PVm आलू (potato)
मॉटल्ड क्रिंकल वायरस (Mottled Crinkle virus) बैंगन (eggplant)
मैलाकाइट ग्रीन (Malachite green) PVx आलू (potato)
एक्टिनोमाइसिन-डी (Actinomycin-D) TMV चीनी गोभी (Chinese cabbage)
मेजबान (Host) रोगजनक (Pathogen) ऊतक स्रोत (Tissue source)
आलू (Potato) अल्टरनेरिया सोलन (Alternaria solani) मेसोफिल (Mesophyll), प्रोटोप्लास्ट (protoplast)
फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टैन्स (Phytophthora infestans) मेसोफिल (Mesophyll)
टमाटर (Tomato) फ्यूसेरियम ऑक्सीस्पोरम एफ.एसपी. लाइकोपर्सिसी रेस 2 (Fusarium oxysporum f.sp. lycopersici Race 2) कॉटिलेडॉन (cotyledon) और प्रोटोप्लास्ट (protoplast) से कैलस (Callus)

रोगज़नक़ विष (pathogen toxin) के खिलाफ आलू का चयन (Selection) रोगज़नक़ के खिलाफ वंशानुगत प्रतिरोध (heritable resistance) के परिणामस्वरूप होता है उदा. टमाटर की कोशिकाओं को फ्यूरासिक एसिड (furasic acid) में उजागर करना और फ्यूसेरियम ऑक्सीस्पोरम एफ. एसपी. लाइकोपर्सिसी रेस 2 (Fusarium oxysporum f. sp. lycopersici Race 2) के लिए प्रतिरोध (resistance) प्राप्त करने के लिए चयन किया गया। इसी तरह ब्रैसिका नेपस (Brassica napus) को फोमा लिंगुम (Phoma lingum) के संस्कृति छानने (culture filtrate) के लिए उजागर (exposed) किया गया।

अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।

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