पौधे (Plants) इस दुनिया में मनुष्य, जानवरों और सूक्ष्मजीवों (microorganisms) के लिए भोजन के स्रोत (sources of food) हैं। दुनिया की बढ़ती आबादी की खाद्य आवश्यकताओं (food requirements) को पूरा करने के लिए मनुष्य पौधों, विशेष रूप से फसलों (crops) को कीड़ों और सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले नुकसान या उपयोग से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन सूक्ष्मजीवों के बारे में मानव ज्ञान के विकास के साथ पादप रोगविज्ञान (plant pathology) का विज्ञान विकसित हुआ है। पादप रोगविज्ञानी (Plant pathologists) मानव चिकित्सक (human doctor) की तरह ही पौधों के डॉक्टर होते हैं। पादप रोगविज्ञानी का प्रमुख उद्देश्य (major objective) पौधों के रोगों (plant diseases) से होने वाले नुकसान (losses) को कम करना है।
पौधों के रोग महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उनके कारण नुकसान होता है। नुकसान खेत (field) में या स्टोर (store) में हो सकता है। औसतन, कीड़े, खरपतवार (weeds), कृंतक (rodents) आदि जैसे विभिन्न साधनों के कारण होने वाले कुल नुकसान में से खाद्यान्न (food grain) का 1/3 हिस्सा बीमारियों के कारण होता है। कई सबूत हैं कि भारत में 10-15 साल पुराने सेब के बगीचे कॉलर रॉट (collar rot) से नष्ट हो गए, अन्यथा वे जीवित रहते और 25 से 30 साल तक भोजन का उत्पादन करते। इसी तरह नेपाल में साइट्रस डिक्लाइन (citrus decline) एक गंभीर समस्या है और 5-8 साल के संतरे के बगीचे जड़ सड़न (root rot) से पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं।
1845-49 में आयरिश अकाल (Irish Famine) आलू के लेट ब्लाइट (late blight) - फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टैन्स (Phytophthora infestans) - के कारण हुआ था। इसने आयरलैंड में आबादी (population) को 80 से घटाकर 60 लाख कर दिया। उनमें से कई भूख (hunger) से मर गए, कई को कुपोषण (malnutrition) का सामना करना पड़ा और उनमें से कुछ दूसरे देश चले गए (migrated)।
गेहूं का रस्ट (Wheat rust) एक और बीमारी रही है जो कई देशों में समय-समय पर महामारी (epiphytotic) के रूप में सामने आई है। इस बीमारी ने दुनिया के कई हिस्सों में किसानों को फसल पैटर्न (cropping pattern) बदलने के लिए मजबूर किया। 1943 में बंगाल का अकाल (Bengal Famine) चावल के भूरे धब्बे (brown spot) - हेल्मिन्थोस्पोरियम ओरिजे (Helminthosporium oryzae) - के कारण हुआ था। सीलोन (Ceylon - 1871-1893) में कॉफी के रस्ट (coffee rust) - हेमिलिया वास्टेट्रिक्स (Hemileia vastatrix) - के कारण कॉफी का निर्यात 93% कम हो गया था। उन्हें कॉफी के पौधे काटने पड़े और चाय लगानी पड़ी। यूरोप में, डाउनी मिल्ड्यू (downy mildew) ने अंगूर के पौधों (grape plants) पर हमला किया, अंगूर की उपज काफी कम हो गई, और कई अंगूर वाइन कारखाने बंद हो गए। इन सभी ने देश की अर्थव्यवस्था (economy) को प्रभावित किया।
रोगजनकों (pathogens) के कारण अप्रत्यक्ष नुकसान (indirect losses) होते हैं। कुछ कवक (fungi) जब खाद्यान्न पर हमला करते हैं तो वे मानव और पशु स्वास्थ्य (health) को प्रभावित करने वाले विष (toxin) का उत्पादन करते हैं। वे गर्भपात (abortion), पक्षाघात (paralysis), ब्रोंकाइटिस (bronchitis), पेट की परेशानी (stomach trouble) आदि का कारण बन सकते हैं।
पादप रोगविज्ञान कृषि (agricultural), वनस्पति (botanical) या जैविक विज्ञान (biological science) की एक शाखा है जो पौधों की बीमारियों के कारण (cause), एटियलजि (etiology), जिसके परिणामस्वरूप होने वाले नुकसान और प्रबंधन (management) से संबंधित है।
इसके चार प्रमुख उद्देश्य (objects) हैं:
रोग (Disease) एक ऐसी स्थिति है जिसमें जीव (organism) के कार्यों (functions) का ठीक से निर्वहन (discharged) नहीं होता है (वार्ड - Ward, 1901)।
पौधे की बीमारी (Plant Disease) को "सामान्य (normal) से किसी भी भिन्नता (variation) के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो शारीरिक गतिविधियों (physiological activities) की जांच (checking) या रुकावट (interruption) या संरचनात्मक परिवर्तनों (structural changes) द्वारा व्यक्त किया जाता है, जो विकास की जांच करने, असामान्य संरचनाओं (abnormal formations) का कारण बनने या पौधे के एक हिस्से या पूरे पौधे की समय से पहले मृत्यु (premature death) का कारण बनने के लिए पर्याप्त रूप से स्थायी (permanent) हैं (हेल्ड - Held, 1933)"।
बीमारी एक खराब प्रक्रिया (malfunctioning process) है जो निरंतर जलन (continuous irritation) के कारण होती है (हॉर्सफॉल और डिमोंड - Horsfall and Dimond, 1959)।
पोषण स्तर में कमी (Deficiency in nutritional level):
वायु प्रदूषक (Air pollutants):
लक्षण (Symptoms) पौधे की रूपात्मक विशेषताओं (morphological features) में परिवर्तन हैं जिन्हें दृश्य अवलोकन (visual observation) द्वारा पहचाना जा सकता है। उदा. क्लोरोसिस (chlorosis), स्टंटिंग (stunting), पत्ती के धब्बे (leaf spots), गॉल निर्माण (gall formation)।
संकेत (Signs) पौधों के रोगग्रस्त हिस्से (diseased part) पर रोगजनक (pathogen) की दृश्यमान संरचनाएं (visible structures) हैं। उदा. ढीला स्मट (loose smut), पाउडरी मिल्ड्यू (powdery mildew)।
हाइपरट्रॉफी (Hypertrophy): कोशिका (cell) के आकार में वृद्धि के कारण अंग (organ) के आकार में वृद्धि, जबकि हाइपरप्लासिया (hyperplassia): कोशिकाओं (cells) की संख्या में वृद्धि के कारण अंग (organ) के आकार में वृद्धि। वे इस प्रकार व्यक्त किए गए हैं:
एट्रोफी (Atrophy) या हाइपोप्लासिया (hypoplassia) या बौनापन (dwarfing): विकास का निषेध (Inhibition of growth) जिसके परिणामस्वरूप पौधे का स्टंटिंग (stunting) या बौनापन (dwarfing) होता है।
नेक्रोसिस (Necrosis): यह वह स्थिति है जिसमें रोगजनकों (pathogens) की परजीवी गतिविधि (parasitic activity) के परिणामस्वरूप कोशिकाओं (cells), ऊतकों (tissues) या अंगों (organs) की मृत्यु (death) हुई है। वे इस प्रकार व्यक्त किए गए हैं:
कवक (Fungi): यूकेरियोटिक (eukaryotic), बीजाणु (spore) वाले, क्लोरोफिल रहित (achlorophyllous) जीव हैं जो आमतौर पर यौन (sexually) और अलैंगिक (asexually) रूप से प्रजनन (reproduce) करते हैं, और जिनकी आमतौर पर फिलामेंटस (filamentous), शाखित दैहिक संरचनाएं (branched somatic structures) आमतौर पर काइटिन (chitin) या सेलूलोज़ (cellulose), या इन दोनों पदार्थों के साथ-साथ कई अन्य जटिल कार्बनिक अणुओं (complex organic molecules) वाले सेल की दीवारों (cell walls) से घिरी होती हैं।
यह विभिन्न तरीकों से होता है:
यौन प्रजनन की प्रक्रिया (process of sexual reproduction) में तीन अलग-अलग चरण (distinct phases) होते हैं।
ऐसे कई तरीके हैं जिनके द्वारा प्लास्मोगैमी (plasmogamy) की प्रक्रिया में संगत नाभिकों (compatible nuclei) को एक साथ लाया जाता है, जिन्हें अक्सर यौन प्रजनन (sexual reproduction) के तरीकों के रूप में जाना जाता है। वे हैं:
कवक विभिन्न प्रकार के फलने वाले निकाय (fruiting bodies) पैदा करते हैं जिन पर / जिनमें कवक बीजाणु (fungal spores) उत्पन्न होते हैं। वे अलैंगिक (asexual) या यौन फलने वाले निकाय (sexual fruiting bodies) हो सकते हैं।
सुपरकिंगडम (Superkingdom): यूकेरियोन्टा (Eukaryonta)
किंगडम (Kingdom): माइसेटी (Myceteae)
प्रभाग 1 (Division 1): जिम्नोमाइकोटा (Gymnomycota)
उप-प्रभाग 1 (Sub-division 1): एक्रासियोगिम्नोमाइकोटिना (Acrasiogymnomycotina)
वर्ग (Class): एक्रासिओमाइसीट्स (Acrasiomycetes)
उप-प्रभाग 2 (Sub-division 2): प्लास्मोडियोगिम्नोमाइकोटिना (Plasmodiogymnomycotina)
वर्ग (Classes):
प्रभाग 2 (Division 2): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग 1 (Sub-division - 1): हैप्लोमास्टिगोमाइकोटिना (Haplomastigomycotina)
वर्ग (Classes):
उप-प्रभाग 2 (Sub-division - 2): डिप्लोमास्टिमायकोटिना (Diplomastimycotina)
वर्ग (Class): ओमाइसीट्स (Oomycetes)
प्रभाग 3 (Division 3): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग 1 (Sub-division -1): जाइगोमाइकोटिना (Zycomycotina)
वर्ग (Classes):
उप-प्रभाग 2 (Sub-division - 2): एस्कोमाइकोटिना (Ascomycotina)
वर्ग (Class): एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes)
उप-प्रभाग 3 (Sub-division -3): बेसिडिओमाइकोटिना (Basidiomycotina)
वर्ग (Class): बेसिओमाइसीट्स (Basiomycetes)
उप-प्रभाग 4 (Sub-divisoion - 4): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
एक प्रजाति को छोड़कर कोई कशाभिका (flagellated cells) वाली कोशिकाएँ (cells) उत्पन्न नहीं होती हैं। लोबोज़ (lobose) या फिलोज़ स्यूडोपोडिया (filose pseudopodia) के साथ मायक्सामोएबा (myxamoebae) के एकत्रीकरण (aggregation) के बाद स्यूडोप्लास्मोडिया (pseudoplasmodia) का निर्माण होता है। सोरोकार्प (Sorocarp) आमतौर पर डंठलदार (stalked) होता है।
मायक्सामोएबा (Myxamoebae) सीधे सोरोकार्प (sorocarp) बनाते हैं या प्लास्मोडिया (plasmodia) में विकसित होने के बाद। प्लास्मोडियल स्ट्रीमिंग (Plasmodial streaming) यूनिडायरेक्शनल (unidirectional) है। यौन प्रजनन (Sexual reproduction) अज्ञात (unknown) है।
इनमें कशाभिका (flagellated cells) वाली कोशिकाएँ होती हैं, जो ज़ाइगोट (zygote) बनाने के लिए फ़्यूज़ (fuse) हो जाती हैं और प्रतिवर्ती स्ट्रीमिंग (reversible streaming) के साथ प्लास्मोडिया (plasmodia) में विकसित होती हैं। वे विभिन्न प्रकार के स्पोरोफोर्स (sporophores) बनाते हैं。
जलीय (Aquatic), होलोकार्पिक (holocarpic), अलैंगिक रूप से (asexually) प्रजनन करने वाले ज़ूस्पोर (zoospores) के माध्यम से यूनीफ्लैगेलेट व्हिपलैश (uniflagellate whiplash) प्रकार के साथ पीछे की ओर स्थित होते हैं।
ट्रिडिओमाइसीट्स (chytridiomycetes) के समान लेकिन कशाभिका (flagellum) टिनसेल (tinsel) प्रकार का है और पूर्वकाल (anteriorly) में स्थित है।
दैहिक संरचना (somatic structure) में प्लास्मोडियम (plasmodium) होता है और अलैंगिक प्रजनन (asexual reproduction) स्पोरैंगिया (sporangia) के माध्यम से होता है, जो दो कशाभिका (flagella) वाले ज़ूस्पोर (zoospores) को मुक्त (liberating) करता है, दोनों व्हिपलैश (whiplash) प्रकार पूर्वकाल (anteriorly) में स्थित होते हैं और असमान (unequal) होते हैं।
सुविकसित सीनोसाइटिक मायसेलियम (coenocytic mycelium), शाखित (branched), अलैंगिक प्रजनन (asexual reproduction) स्पोरैंगिया (sporangia) के माध्यम से होता है जो ज़ूस्पोर (zoospores) को मुक्त (liberating) करता है जिसमें दो कशाभिका (flagella) विपरीत दिशा में बढ़ते हैं। जिनमें से एक व्हिपलैश (whiplash) और दूसरा टिनसेल (tinsel) प्रकार का है।
अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction) स्पोरैंगियल थैलियों (sporangial sacs) के भीतर अकेले या समूहों में पैदा होने वाले एप्लानोस्पोर्स (aplanospores) द्वारा होता है। यौन प्रजनन (Sexual reproduction) आमतौर पर समान गैमेंटेंजिया (gamentangia) का संलयन (fusion) है जिसके परिणामस्वरूप ज़ाइगोस्पोर (zygospore) युक्त ज़ाइगोस्पोरैंगियम (zygosporangium) का निर्माण होता है।
वे आर्थ्रोपोड्स (arthropods) के परजीवी (parasites) हैं। अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction) अमीबा (amoeboid cells) कोशिकाओं द्वारा होता है और यौन प्रजनन जाइगोमाइसीट्स (zygomycetes) के समान है।
इनमें अच्छी तरह से विकसित मायसेलियम (mycelium) होता है लेकिन कुछ एककोशिकीय (unicellular) होते हैं। अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction) मुख्य रूप से कोनिडिया (conidia) द्वारा होता है। यौन प्रजनन (Sexual reproduction) विभिन्न तरीकों से होता है। वे एस्कोकार्प्स (ascocarps) नामक थैली जैसी संरचना में एस्कोस्पोर्स (ascospores) उत्पन्न करते हैं।
इनमें एक लंबे डिकैरियोटिक चरण (dikaryotic phase) के साथ अच्छी तरह से विकसित मायसेलियम (mycelium) होता है जो विभिन्न प्रकार के स्पोरोफोर्स (sporophores) को जन्म देता है जिसमें बेसिडिओस्पोर्स (basidiospores) ले जाने वाले बेसिडिया (basidia) का उत्पादन होता है।
विकास (evolution) या हमारे लिए अज्ञात होने के कारण उन्होंने अपनी यौन प्रक्रिया (sexual process) या तो खो दी है। विभिन्न प्रकार के अलैंगिक बीजाणुओं (asexual spores) कोनिडिया (conidia) का उत्पादन करके प्रजनन करते हैं।
प्रभाग (Division): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): हैप्लोमास्टिगोमाइकोटिना (Haplomastigomycotina)
वर्ग (Class): ट्रिडिओमाइसीट्स (Chytridiomycetes)
आदेश (Order): ट्रिडिओलेस (Chytridiales)
परिवार (Family): सिन्काइट्रियासी (Synchytriaceae)
इसमें 100 से अधिक प्रजातियाँ (species) शामिल हैं जो पौधों पर परजीवी (parasitic) हैं। कवक होलोकार्पिक (holocarpic), एंडोबायोटिक (endobiotic) और बाध्य परजीवी (obligate parasite) है जो मेजबान पौधे की अतिवृद्धि (hypertrophy) पैदा करता है। सिन्काइट्रियम एंडोबायोटिकम (Synchytrium endobioticum) आलू के ब्लैक वार्ट (black wart) का कारण बनता है। कवक एकल कशाभिका (single flagellum), व्हिपलैश प्रकार (whiplash type), पूर्वकाल (anteriorly) में स्थित के साथ ज़ूस्पोर (zoospores) पैदा करता है। ज़ूस्पोर (zoospores) जब मेजबान की सतह के संपर्क में आते हैं, तो घिर जाते हैं (encyst), अपने कशाभिका को ढीला कर देते हैं और मेजबान में प्रवेश (penetrate) करते हैं, मेजबान कोशिका में सोरस (sorus) बनाते हैं और अंकुरित (germinate) होकर पुटिका (vesicle) में ज़ूस्पोर पैदा करते हैं। ज़ूस्पोर (zoospores) ज़ाइगोट (zygote) विकसित करने के लिए फ़्यूज़ (fuse) होते हैं, जो मेजबान में भी प्रवेश कर सकते हैं और मेजबान में आराम करने वाले बीजाणु (resting spore) विकसित कर सकते हैं जो मिट्टी में निकल (released) जाते हैं। यह मिट्टी में 3-4 साल तक जीवित (survives) रहता है और जब यह अंकुरित (germinates) होता है तो यह ज़ूस्पोर (zoospores) पैदा करता है।
प्रभाग (Division): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): हैप्लोमास्टिगोमाइकोटिना (Haplomastigomycotina)
वर्ग (Classes): प्लास्मोडियोफोरोमाइसीट्स (Plasmodiophoromycetes)
आदेश (Order): प्लास्मोडियोफोरालेस (Plasmodiophorales)
परिवार (Family): प्लास्मोडियोफोरेसी (Plasmodiophoraceae)
कवक संवहनी पौधे (vascular plant) का एंडोपैरासिटिक (endoparasitic) है। यह मेजबान पौधे की अतिवृद्धि (hypertrophy) और हाइपरप्लासिया (hyperplassia) का कारण बनता है। प्लास्मोडियोफोरा ब्रैसिका (Plasmodiophora brassicae) ब्रैसिका के क्लब रूट रोग (club root diseases) का कारण बनता है। कवक शरीर (fungal body) केवल एक प्लास्मोडियम (plasmodium) है, जो ज़ूस्पोर (zoospores) उत्पन्न करने में सक्षम है, जिनमें से प्रत्येक में व्हिपलैश प्रकार (whiplash type) के दो असमान (unequal) कशाभिका (flagella) होते हैं। ज़ूस्पोर (zoospores) ब्रासिका के जड़ बालों (root hair) के साथ जुड़ जाते हैं, घिर जाते हैं (encyst), अंकुरित (germinate) होते हैं और मेजबान (host) में प्रवेश करते हैं। मेजबान और रोगज़नक़ (pathogen) की बातचीत (interaction) के परिणामस्वरूप जड़ों (roots) में सूजन (swelling) आ जाएगी जिससे क्लब के आकार की संरचना (club shaped structure) बन जाएगी। प्लास्मोडियम (plasmodium) विश्राम बीजाणुओं (resting spores) के एक द्रव्यमान में तब्दील हो जाता है, जो संक्रमित जड़ों के सड़ने (decaying) के बाद निकल (released) जाते हैं, और कई वर्षों तक मिट्टी में जीवित (survives) रहते हैं।
स्पोंगोस्पोरा (Spongospora) के अधिकांश लक्षण प्लास्मोडियोफोरा (Plasmodiophora) के समान हैं लेकिन दो मुख्य अंतर हैं i) प्राथमिक और माध्यमिक ज़ूस्पोर (primary and secondary zoospores) समान आकार के होते हैं लेकिन प्लास्मोडियोफोरा में माध्यमिक ज़ूस्पोर आकार में छोटे होते हैं और ii) बीजाणु स्पंजी गेंदें (spongy balls) बनाते हैं लेकिन वे प्लास्मोडियोफोरा (Plasmodiophora) में मुक्त (free) होते हैं। स्पोंगोस्पोरा सबटरेनिया (Spongospora subterranea) आलू के पाउडर स्कैब रोग (powdery scab of potato) का कारण बनता है। कवक अंकुरण (germination) पर एकल अमीबा (single amoeba) जैसा बनता है जो आलू की आँखों (eyes) या जड़ के बालों (root hair) के माध्यम से प्रवेश (penetrates) करता है। प्रवेश (penetration) के बाद वे ज़ूस्पोर (zoospores) या आराम करने वाले बीजाणुओं (resting spores) की गेंदों में विकसित हो सकते हैं।
प्रभाग (Division): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): डिप्लोमास्टिमायकोटिना (Diplomastimycotina)
वर्ग (Class): ओमाइसीट्स (Oomycetes)
आदेश (Order): पेरोनोस्पोरेल्स (Peronosporales)
परिवार (Family): पाइथिएसी (Pythiceae)
पाइथियम एसपीपी (Pythium spp.) मिट्टी में रहने वाले (soil-inhabitants) हैं। वे बीज के सड़ने (seed rots), डंपिंग ऑफ (damping off), जड़ सड़न (root rot) और फलों के सड़ने (fruit rots) का कारण बनते हैं। वे कई पौधों की प्रजातियों पर सैप्रोफाइट (saprophyte) या परजीवी (parasite) के रूप में रह सकते हैं। कवक पतले, सीनोसाइटिक हाइफे (coenocytic hyphae) पैदा करते हैं। वे मेजबान पौधे में अंतर (inter) और अंतःकोशिकीय (intracellularly) रूप से बढ़ते हैं। वे अलैंगिक रूप से (asexually) प्रजनन करते हैं जो पुटिका (vesicle) में स्पोरैंगिया (sporangia) और ज़ूस्पोर (zoospores) पैदा करते हैं। ज़ूस्पोर (zoospores) में दो कशाभिका (flagella) होते हैं, टिनसेल प्रकार (tinsel type) लंबे पूर्वकाल (anteriorly) में स्थित होते हैं और व्हिपलैश प्रकार (whiplash type) छोटे पीछे (posteriorly) की ओर स्थित होते हैं। मायसेलियम (mycelium) यौन प्रजनन (sexual reproduction) के लिए एथेरिडियम (antheridium) और ओगोनियम (oogonium) का उत्पादन करता है। नाभिक (nucleus) को एथेरिडियम से ओगोनियम में पारित किया जाता है, जिसे जाइगोट (zygote) बनाने के लिए जोड़ा जाता है, और ऊस्फीयर (oosphere) मोटी दीवार वाले ऊस्पोर्स (thick walled oospores) विकसित करता है।
फाइटोफ्थोरा एसपीपी (Phytophthora spp.) बड़ी संख्या में मेजबान पौधे पर बीमारी का कारण बनता है। फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टैन्स (P. infestans) आलू के लेट ब्लाइट (late blight of potato) का कारण बनता है। पाइथियम (Pythium) और फाइटोफ्थोरा के बीच मुख्य अंतर अनिश्चित स्पोरैंगियोफोर्स (indeterminate sporangiophores) और स्पोरैंगियल अंकुरण (sporangial germination) का गठन (formation) है। फाइटोफ्थोरा (Phytophthora) में कोई पुटिका (vesicle) नहीं बनती है। वे स्पोरैंगिया (sporangia) या क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores) उत्पन्न करते हैं जो सीधे जर्म ट्यूब (germ tube) द्वारा या परोक्ष रूप से ज़ूस्पोर (zoospores) का उत्पादन करके अंकुरित होने में सक्षम होते हैं। वे अपने यौन चक्र (sexual cycle) में ऊस्पोर्स (oospores) पैदा करते हैं।
प्रभाग (Division): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): डिप्लोमास्टिमायकोटिना (Diplomastimycotina)
वर्ग (Class): ओमाइसीट्स (Oomycetes)
आदेश (Order): पेरोनोस्पोरेल्स (Peronosporales)
परिवार (Family): पेरोनोस्पोरेसी (Peronosporaceae)
इन्हें डाउनी मिल्ड्यू कवक (downy mildew fungi) के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि उन वंशों (genera) की प्रजातियां विभिन्न फसल के पौधों पर डाउनी मिल्ड्यू (downy mildew) रोगों का कारण बनती हैं। वे पीढ़ी (genera) मुख्य रूप से स्पोरैंगियोफोर्स (sporangiophores) के आधार पर विभेदित (differentiated) होते हैं। स्क्लेरोस्पोरा (Sclerospora) के स्पोरैंगियोफोर्स कठोर टॉट हाइफे (rigid tout hyphae) होते हैं, जो ऊपर की ओर स्पोरैंगियोस्पोर (sporangiospores) वाली युक्तियों (tips) पर शाखित होते हैं। प्लास्मोपारा (Plasmopara) में, स्पोरैंगियोफोर्स समकोण (right angle) पर शाखित (branched) होते हैं और पेरोनोस्पोरा (Perenospora) में स्पोरैंगियोफोर्स तीव्र कोण (acute angle) पर शाखित होते हैं, जो सिरे (tip) की ओर पतले होते हैं, खूबसूरती से घुमावदार (gracefully curved) होते हैं जो अपनी युक्तियों पर स्पोरैंगिया (sporangia) धारण करते हैं।
प्रभाग (Division): मास्टिगोमाइकोटा (Mastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): डिप्लोमास्टिमायकोटिना (Diplomastimycotina)
वर्ग (Class): ओमाइसीट्स (Oomycetes)
आदेश (Order): पेरोनोस्पोरेल्स (Peronosporales)
परिवार (Family): अल्बुगिनेसी (Albuginaceae)
यह छोटे, क्लब के आकार (club-shaped), अनिश्चित स्पोरैंगियोफोर्स (indeterminate sporangiophores) पैदा करता है, जो अपनी युक्तियों (tips) पर ग्लोबोज स्पोरैंगिया (globose sporangia) की जंजीरों (chains) को सहन करता है। अल्बुगो (Albugo) की प्रजातियां श्वेत जंग (white rust) या सफेद छाले (white blister) रोग पैदा करने वाले बाध्य परजीवी (obligate parasite) हैं। ए. कैंडिडा (A. candida) क्रूसिफ़र के सफेद जंग (white rust of crucifers) का कारण बनता है।
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): एस्कोमाइकोटिना (Ascomycotina)
वर्ग (Class): एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes)
आदेश (Order): टैफ्रिनेल्स (Taphrinales)
परिवार (Family): टैफ्रिनेसी (Taphrinaceae)
इस कवक का मायसेलियम (mycelium) सेप्टेट हाइफे (septate hyphae) से बना है जो मेजबान में अंतरकोशिकीय (intercellularly) या सबक्यूटिक्युलर (subcuticularly) या सब एपिडर्मली (sub epidermally) बढ़ता है। एस्की (asci) मेजबान सतह पर सबक्यूटिक्युलर मायसेलियम (subcuticular mycelium) से एक परत में बनते हैं जो छल्ली (cuticle) के माध्यम से फट जाती है। प्रत्येक एस्कस (ascus) में आम तौर पर आठ एस्कोस्पोर्स (ascospores) होते हैं। टी. डिफॉर्मन्स (T. deformans) आड़ू पत्ती कर्ल (peach leaf curl) का कारण बनता है और टी. मैकुलन्स (T. maculans) हल्दी के पत्ती स्थान (leaf spot of turmeric) का कारण बनता है।
यह टैफ्रिना (Taphrina) के समान है लेकिन यह मेजबान (host) में बहुत आम तौर पर क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores) नामक विश्राम बीजाणु (resting spores) पैदा करता है।
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): एस्कोमाइकोटिना (Ascomycotina)
वर्ग (Class): एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes)
आदेश (Order): एरीसिफेल्स (Erysiphales)
परिवार (Family): एरीसिफेसी (Erysiphaceae)
एरीसिफे (Erysiphe) की प्रजातियां बाध्य रोगजनक (obligate pathogen) हैं जो मेजबान पौधों (host plants) पर पाउडरी मिल्ड्यू (powdery mildew) रोग पैदा करती हैं। पौधे की सतह (plant surface) का सफेद स्वरूप (whitish appearance) रोगजनक के कोनिडिओफोर्स (conidiophores) और कोनिडिया (conidia) की उपस्थिति के कारण होता है। वे एस्कोकार्प (ascocarp) में उत्पन्न एस्की (asci) में एस्कोस्पोर्स (ascospores) का उत्पादन करते हुए यौन (sexually) रूप से प्रजनन करते हैं, जो पूरी तरह से बंद (क्लिस्टोथेशियम - cleistothecium) होता है। वे 40,000 से अधिक पौधों की प्रजातियों (plant species) को परजीवी बनाते हैं। ई. पॉलीगोनी (E. polygoni) को अकेले 352 मेजबान पौधों (host plants) पर दर्ज किया गया है।
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): एस्कोमाइकोटिना (Ascomycotina)
वर्ग (Class): एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes)
आदेश (Order): क्लेविसिपिटेल्स (Clavicipitales)
परिवार (Family): क्लेविसिपिटेसी (Clavicipitaceae)
यह स्क्लेरोटिया (sclerotia) के रूप में जाना जाने वाला काला कठोर कॉम्पैक्ट शरीर (black hard compact body) पैदा करता है, जो प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों (unfavourable environmental conditions) के तहत कवक को जीवित रहने (survive) के लिए एक प्रतिरोधी संरचना (resistant structure) है। सी. पुरपुरिया (C. purpurea) राई के एर्गोट रोग (ergot disease of rye) का कारण बनता है और सी. माइक्रोसेफला (C. microcephala) बाजरा के एर्गोट (ergot of bajra) का कारण बनता है। जब स्क्लेरेरिया (scleria) अंकुरित (germinates) होता है तो वे पेरिथेशियल हेड (perithecial head) उत्पन्न करते हैं जिसमें कई पेरिथेशिया (perithecia) होते हैं। पेरिथेशिया में एस्कस (ascus) होता है जिसमें सुई के आकार (needle shaped) के एस्कोस्पोर्स (ascospores) बनते हैं।
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): बेसिडिओमाइकोटिना (Basidiomycotina)
वर्ग (Class): बेसिओमाइसीट्स (Basiomycetes)
आदेश (Order): यूरेडिनेल्स (Uredinales)
परिवार (Family): प्यूसिनिएसी (Pucciniaceae)
प्यूसिनिया (Puccinia) की प्रजातियां फसल के पौधों (crop plants) के बाध्य परजीवी (obligate parasites) हैं। प्यूसिनिया की कई प्रजातियां मैक्रोसाइक्लिक हेटेरोसियस रस्ट (macrocyclic heteroecious rust) हैं, जिन्हें अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए एक से अधिक मेजबान (host) की आवश्यकता होती है। उनके अलग-अलग चरण (different stages) हैं।
यूरेडिनियोस्पोर्स (urediniospores) सिंगल सेल्ड (single celled), डंठल (stalked) और इचिन्युलेटेड (echinulated) होते हैं लेकिन इन कवक के टिलियोस्पोर्स (teliospores) डबल सेल्ड (double celled) और डंठल वाले होते हैं। तना रस्ट (stem rust), भूरा रस्ट (brown rust) और पीला रस्ट (yellow rust) की बीमारियाँ क्रमशः पी. ग्रैमिनिस-ट्रिटिसी (P. graminis-tritici), पी. रिकोंडिट (P. recondite) और पी. स्ट्राइफॉर्मिस (P. striiformis) के कारण होती हैं।
इन कवक के टिलियोस्पोर्स (teliospores) सेसाइल (sessile), सिंगल-सेल्ड (single-celled) होते हैं और परतों (layers) में बनते हैं। एम. लिनी (M. lini) सन रस्ट (flax rust) का कारण बनता है। वे ऑटोसियस रस्ट (autoecious rust) हैं जो एक ही मेजबान में अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं।
यह एटीओसियस रस्ट (aetoecious rust) भी है। यूरोमायसेस फाबे (Uromyces fabae) मटर के रस्ट (rust of pea) का कारण बनता है।
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): बेसिडिओमाइकोटिना (Basidiomycotina)
वर्ग (Class): बेसिओमाइसीट्स (Basiomycetes)
आदेश (Order): उस्टिलेजिनेल्स (Ustileginales)
परिवार (Family): उस्टिलागिनेसी (Ustilaginaceae)
इसकी 300 से अधिक प्रजातियाँ हैं, उनमें से कई फसल के पौधों पर परजीवी (parasitic) हैं। उस्टिलागो मेयडिस (Ustilago maydis) - मक्का का स्मट (smut of maize), यू. ट्रिटिसी (U. tritici) - गेहूं का ढीला स्मट (loose smut of wheat), यू. होर्डाई (U. hordai) - जौ का कवर किया हुआ स्मट (covered smut of barley)। मेजबान पर बनने वाला काला पाउडर (black powdery mass) कवक का टिलियोस्पोर्स (teliospores) है। वे स्पोरिडिया (sporidia) धारण करने वाले सेप्टेट प्रोमायसेलियम (septate promycelium) का उत्पादन करके अंकुरित (germinate) होते हैं। बडिंग (budding) द्वारा माध्यमिक स्पोरिडिया (Secondary sporidia) बनते हैं।
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): बेसिडिओमाइकोटिना (Basidiomycotina)
वर्ग (Class): बेसिओमाइसीट्स (Basiomycetes)
आदेश (Order): उस्टिलेजिनेल्स (Ustileginales)
परिवार (Family): टिलटिएसी (Tilletiaceae)
टिलटिया (Tilletis) की प्रजातियां टिलियोस्पोर्स अंकुरण (teliospores germination) की विधि में उस्टिलागो (Ustilago) की प्रजातियों से भिन्न (differ) होती हैं। प्रोमायसेलियम (promycelium) एसेप्टेड (asepted) रहता है। प्रोमायसेलियम की नोक (tip) पर आमतौर पर 8 बेसिडिओस्पोर्स (basidiospores) बनते हैं। टिलटिया कैरीज (Tilletia caries) और टी. फोएटीडा (T. foetida) गेहूं के बंट (wheat bunt) का कारण बनते हैं, टी. इंडिका (T. indica) गेहूं के करनाल बंट (karnal bunt of wheat) का कारण बनता है।
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
फॉर्म-ऑर्डर (Form-order): मेलानकोनियल्स (Melanconiales)
फॉर्म-परिवार (Form-family): मेलानकोनिएसी (Melanconiaceae)
कोलेटोट्राइकम (Colletotrichum) की प्रजातियां संकाय परजीवी (facultative parasites) हैं, जो कई पौधों की प्रजातियों की पत्तियों, युवा टहनियों (young twigs) और फलों पर एन्थ्रेक्नोज रोगों (anthracnose diseases) का कारण बनती हैं। उनका मायसेलियम (mycelium) शाखित (branched), सेप्टेट (septate) और हाइलिन (hyaline) होता है। वे बहुत सारे सिकल (sickle) के आकार के कोनिडिया (conidia) वाले मेजबान पर एसरवुली (acervuli) नामक फलने वाले शरीर (fruiting bodies) का उत्पादन करते हैं। उनका पूर्ण चरण (perfect stage) ग्लोमेला (Glomerella) है। कुछ महत्वपूर्ण पौधे रोगजनक प्रजातियां (pathogenic species) हैं:
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
फॉर्म-ऑर्डर (Form-order): मेलानकोनियल्स (Melanconiales)
फॉर्म-परिवार (Form-family): डिमैटिसिई (Dematiceae)
जेनेरा (Genera): अल्टरनेरिया (Alternaria), हेल्मिन्थोस्पोरियम (Helminthosporium - ड्रेचस्लेरा - Drechslera, बाइपोलारिस - Bipolaris), सर्कोस्पोरा (Cercospora), प्यरीक्यूलेरिया (Pyricularia)
कवक आम तौर पर सड़ने वाले पौधे (decaying plant) के हिस्सों और मिट्टी में सैप्रोफाइट (saprophyte) के रूप में बढ़ता है। कुछ प्रजातियां उच्च पौधों (higher plants) पर परजीवी (parasitic) हैं। संकेंद्रित वलयों (concentric rings) वाले पत्तों के धब्बे इस कवक द्वारा फसल के पौधों पर उत्पन्न होते हैं। पौधों पर परजीवी आम प्रजातियों (common species) में से कुछ हैं:
वे कई फसल प्रजातियों (crop species) पर लीफ स्पॉट (leaf spot) और लीफ ब्लाइट (leaf blight) का कारण बनते हैं। उनके कोनिडिओफोर्स (conidiophores) और कोनिडिया (conidia) भूरे रंग के होते हैं। कोनिडिया में स्यूडो सेप्टा (pseudo septa) होता है। मायसेलियम (mycelium) को जन्म देने वाली अंत कोशिकाएँ (end cells) अंकुरित होंगी। उनके पूर्ण चरण (perfect stage) को कोक्लिओबोलस (Cochliobolus) के रूप में जाना जाता है। कुछ सामान्य प्रजातियाँ (common species) हैं:
इस जीनस में लगभग 700 प्रजातियाँ (species) शामिल हैं, जो पौधों पर परजीवी (parasitic) हैं जो लीफ स्पॉट (leaf spot) या लीफ ब्लोच (leaf blotch) का कारण बनती हैं। उनके पूर्ण चरण (perfect stage) को मायकोस्पेरेला (Mycospherella) के रूप में जाना जाता है। सर्कोस्पोरा (Cercospora) के कोनिडिया हाइलिन (hyaline) और सेप्टेट (septate) होते हैं। कुछ महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं:
पी. ओरीजे (P. oryzae) चावल के झुलसने (blast of rice) का कारण बनता है। इसका पूर्ण चरण (perfect stage) मैग्नापोर्थे ग्रिसिया (Magnaporthe grisea) है। प्यरीक्यूलेरिया (Pyricularia) बेसल पैपिला (basal papilla) के साथ हाइलिन (hyaline), पाइरिफॉर्म (pyriform) दो सेप्टेड कोनिडिया (septed conidia) पैदा करता है।
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
फॉर्म-ऑर्डर (Form-order): मेलानकोनियल्स (Melanconiales)
फॉर्म-परिवार (Form-family): ट्यूबेरेलेसी (Tuberellaceae)
फ्यूसेरियम (Fusarium) प्रजाति मिट्टी में सैप्रोफाइट (saphrophytically) के रूप में रह सकती है। वे कमजोर परजीवी (weak parasites) हैं जो उपयुक्त परिस्थितियों में कई फसल के पौधों में विल्ट (wilt) जैसी बीमारी पैदा करते हैं। वे मैक्रो (macro) और माइक्रो (micro) कोनिडिया (conidia) और क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores) का उत्पादन कर सकते हैं। कुछ महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं:
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
फॉर्म-ऑर्डर (Form-order): एगोनोमाइसीटेल्स (Agonomycetales)
स्क्लेरोटियम रॉल्फसी (Sclerotium rolfsii) मसूर (lentil), चने (chickpea) का विल्ट (wilt) और मूंगफली (ground nut) का कॉलर रॉट (collar rot) का कारण बनता है। उनका मायसेलियम (mycelium) चमकता हुआ सिल्वर सफेद (silvery white) है। वे भूरे, गोलाकार, सरसों के बीज (mustard seed) जैसे स्क्लेरोटिया (sclerotia) पैदा करते हैं। फसल के पौधों के ऑफ-सीजन (off-season) के दौरान स्क्लेरोटिया मिट्टी में जीवित (survive) रह सकता है।
कवक सफेद सूती (cottony white) होता है जो मेजबान की सतह (host surface) पर बढ़ता है। बाद के चरणों में वे मिट्टी में अपने जीवित रहने (survival) के लिए काले स्क्लेरोटिया (black sclerotia) का उत्पादन करते हैं या फसल के पौधों के बीजों (seeds) के साथ मिश्रित (mixed) रहते हैं। स्क्लेरोटिनिया स्क्लेरोटियोरम (Sclerotinia sclerotiorum) सरसों, बैंगन, मिर्च और कई अन्य फसल के पौधों के सफेद तुषार (white blight) का कारण बनता है।
इस कवक का मायसेलियम (mycelium) भूरा होता है और शाखाओं के पास इनमें थोड़ी सिकुड़न (constriction) और सेप्टेशन (septation) होता है। वे भूरे रंग के स्क्लेरोटिया (brown sclerotia) उत्पन्न करते हैं, जो संरचनात्मक (structural) उत्तरजीविता है। संक्रमण (infection) पैदा करने के लिए स्क्लेरोटिया अंकुरित (germinate) हो सकता है। राइजोक्टोनिया सोलानी (Rhizoctonia solani) में असीमित मेजबान पौधे (host plants) होते हैं।
प्रभाग (Division): एमास्टिगोमाइकोटा (Amastigomycota)
उप-प्रभाग (Sub-division): ड्यूटरोमाइकोटिना (Deuteromycotina)
फॉर्म-क्लास (Form-class): ड्यूटरोमाइसीट्स (Deuteromycetes)
फॉर्म-ऑर्डर (Form-order): मेलानकोनियल्स (Melanconiales)
फॉर्म-परिवार (Form –family): मोनिलिसी (Moniliceae)
वे ज्यादातर सैप्रोफाइटिक कवक (saprophytic fungi) हैं जो नम स्थानों (dampy places) पर रखी लकड़ी, चमड़े, ब्रेड आदि पर उगते हैं। एस्परगिलस (Aspergillus) पीले, हरे, भूरे, काले रंग का हो सकता है जबकि पेनिसिलियम (Penicillium) या तो हरे या नीले रंग का होता है। उनके पूर्ण चरण (perfect stages) एस्कोमाइसीट्स (Ascomycetes) समूह से संबंधित यूरोटियम (Eurotium) और तालारोमायसेस (Talaromyces) हैं। इनका उपयोग विभिन्न औद्योगिक उत्पादों (industrial products) के लिए किया जाता है। इनसे विभिन्न अम्ल (acids), एंटीबायोटिक्स (antibiotics) निर्मित होते हैं।
बैक्टीरिया (Bacteria) प्रोकैरियोटिक (prokaryotic), एककोशिकीय जीव (unicellular organisms) हैं, जो बाइनरी विखंडन (binary fission) द्वारा गुणा (multiply) करते हैं। आनुवंशिक सामग्री (genetic materials) एक कोशिका से दूसरे जीवाणु में संयुग्मन (conjugation), परिवर्तन (transformation) और पारगमन (transduction) द्वारा स्थानांतरित (transferred) की जाती है।
बैक्टीरियोफेज (Bacteriophages) उन वायरस का समूह है जो विशिष्ट बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं, आमतौर पर उन्हें मार देते हैं। रूपात्मक (Morphologically) रूप से, वे तीन प्रकार के होते हैं जैसे टैडपोल के आकार (tadpole-shaped), गोलाकार (spherical) और फिलामेंटस (filamentous)।
बैक्टीरिया की कोशिकाएं मुख्य रूप से तीन आकृतियों (shapes), गोलाकार (spherical), रॉड (rod) और सर्पिल (spiral) की होती हैं, जिन्हें क्रमशः कोकस (coccus - Pl. cocci), बेसिलस (bacillus - bacilli) और स्पिरिलम (spirillum - spirilla) भी कहा जाता है। अधिकांश रोगजनक बैक्टीरिया रॉड (rod) के आकार के होते हैं।
एक विशिष्ट जीवाणु कोशिका (bacterial cell) में निम्न शामिल हैं: कोशिका भित्ति (cell wall), स्लाइम परत (slime layer), प्रोटोप्लाज्म (protoplasm), क्रोमोसोम (chromosome), मेसोसोम (mesosome), प्लास्मिड (plasmid), राइबोसोम (ribosome), वैक्यूल (vacuole) और फ्लैगेलम (flagellum)।
बैक्टीरिया कशाभिका (flagella) की मदद से चलते हैं। कशाभिका की संख्या और व्यवस्था (arrangement) के आधार पर बैक्टीरिया को चार समूहों में बांटा जा सकता है।
समय-समय पर वर्गीकरण (classifications) के कई तरीकों की कोशिश की गई है। जैसे पारंपरिक वर्गीकरण (conventional taxonomy), संख्यात्मक वर्गीकरण (numerical taxonomy) और आणविक वर्गीकरण (molecular taxonomy)।
किंगडम (Kingdom): प्रोकैरियोटे (Prokarytae)
क्लास (Class): प्रोटियोबैक्टीरिया (Proteobacteria)
फर्मिबैक्टीरिया (Firmibacteria) / थैलोबैक्टीरिया (Thallobacteria)
जीनस (Genus):
एर्विनिया (Erwinia)
बेसिलस (Bacillus)
स्ट्रेप्टोमाइसेस (Streptomyces)
स्यूडोमोनास (Pseudomonas)
क्लोस्ट्रीडियम (Clostridium)
ज़ैंथोमोनास (Xanthomonas)
ज़ाइलेला (Xylella)
0.1 - 0.7 x 0.7 - 1.8 उम की सीधी छड़ (Straight rods), एक ध्रुवीय कशाभिका (polar flagellum) के साथ गतिशील (motile), ग्राम नकारात्मक (gram -ve), अनिवार्य रूप से एरोबिक (obligately aerobic), और चयापचय (metabolism) के सख्त श्वसन प्रकार (strictly respiratory type)।
वे सीधे या थोड़े घुमावदार छड़ (curved rods) हैं, 0.5 - 1.0 x 1.5 - 5.0 उम, ग्राम नकारात्मक (gram -ve), एक से कई ध्रुवीय कशाभिका (polar flagella) के साथ गतिशील और एरोबिक (aerobic)। कड़ाई से श्वसन प्रकार (strictly respiratory type) का चयापचय (metabolism)।
सीधी छड़ (Straight rods), 0.5 -1.0 x 1.0 - 3.0 उम, ग्राम नकारात्मक (gram -ve), ई. स्टीवर्टी (E. stewartii) को छोड़कर पेरिट्रिचस कशाभिका (peritrichous flagella) के साथ गतिशील, संकाय अवायवीय (facultative anaerobic), ऑक्सीडेस नकारात्मक (oxidase negative) और उत्प्रेरित सकारात्मक (catalase positive)।
ग्राम नकारात्मक (Gram negative) छड़, 0.6 - 1.0 x 1.5 - 3.0 उम, 1-6 पेरिट्रिचस कशाभिका (peritrichous flagella) द्वारा गतिशील, एरोबिक (aerobic)।
व्यापक रूप से शाखित वानस्पतिक हाइफे (Extensively branched vegetative hyphae), व्यास में 0.5 - 2.0 उम, बीजाणुओं की श्रृंखला (chains of spores) बनाते हैं, एरोबिक (aerobic), अत्यधिक ऑक्सीडेटिव (highly oxidative)।
फास्टिडियस फ्लोएम-सीमित (Fastidious phloem-limited) बैक्टीरिया पहली बार 1972 में तिपतिया घास (clover) के फ्लोएम (phloem) में और बाद में हरियाली रोग (greening disease) से प्रभावित साइट्रस पौधे में देखे गए थे। 1973 में पियर्स रोग (pierce’s disease) से प्रभावित अंगूर (grape) में तेज़ जाइलम-सीमित (xylem-limited) बैक्टीरिया देखे गए थे。
| बैक्टीरिया (Bacteria) | कवक (Fungi) | शैवाल (Algae) |
|---|---|---|
| ज्यादातर गैर-फिलामेंटस (non-filamentous) एककोशिकीय जीव (unicellular organisms)। | ज्यादातर फिलामेंटस बहुकोशिकीय जीव (filamentus multi-cellular organisms)। | ज्यादातर बहुकोशिकीय जीव (multicellular organism)। |
| ज्यादातर क्लोरोफिल (chlorophyll) या अन्य वर्णक (pigments) की कमी होती है। | हमेशा क्लोरोफिल (chlorophyll) या अन्य रंजक (pigments) की कमी होती है। | ज्यादातर क्लोरोफिल (chlorophyll) या अन्य वर्णक (pigments) रखते हैं। |
| कोशिका भित्ति (Cell wall) उपस्थित (present)। | कोशिका भित्ति (Cell wall) सच्चे कवक (true fungi) में मौजूद है, स्लाइम मोल्ड (slime mold) में अनुपस्थित है। | कोशिका भित्ति (Cell wall) हमेशा मौजूद होती है। |
| नाभिक (Nucleus) अनुपस्थित (absent)। | नाभिक हमेशा मौजूद (present) रहता है। | नाभिक हमेशा मौजूद (present) रहता है। |
| बाइनरी विखंडन (binary fission) द्वारा गुणन (Multiplication)। | अलैंगिक या यौन बीजाणुओं (asexual or sexual spores) के विभाजन (division) या नवोदित (budding) या उत्पादन (production) द्वारा गुणा (Multiplication)। | अलैंगिक (asexual) या यौन (sexual) विधियों द्वारा गुणा (Multiplication)। |
माइकोप्लाज्मा (Mycoplasmas) के निम्नलिखित मुख्य लक्षण हैं:
वे एस्टर येलो (aster yellows), शहतूत बौना (mulberry dwarf), आलू विचेस ब्रूम (potato witches' broom), बैंगन की छोटी पत्ती (little leaf of brinjal), कपास की छोटी पत्ती, गन्ने की घास की शूटिंग (grassy shoot of sugarcane), चावल के पीले बौने (rice yellow dwarf), कबूतर मटर की बाँझपन (pigeon pea sterility) आदि जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं। वे लीफहॉपर्स (leafhoppers) द्वारा प्रेषित (transmitted) होते हैं। फाइटोप्लास्मास (Phytoplasmas - MLOs) - नाशपाती की गिरावट (pear decline)।
यह संयुक्त राज्य अमेरिका से खट्टे जिद्दी (citrus stubborn - स्टंटिंग, अक्षीय कलियों का अत्यधिक प्रसार, गुच्छेदार ऊपर की ओर विकास, सूजन और पत्तियों का मटमैलापन, भारी फूल, अत्यधिक फल गिरना और फलों का कड़वा स्वाद - Stunting, excessive proliferation of axillary buds, bunchy up-right growth, swelling and mottling of leaves, heavy flowering, excessive fruit drop and bitter flavor of fruits) से रिपोर्ट किया गया था।
स्पाइरोप्लाज्म (Spiroplasms) MLO के समान हैं लेकिन दीवार (wall) की चौड़ाई लगभग 20nm (MLO में केवल 10nm) है। वे आकार में पेचदार (helical), सर्पिल (spiral), गोलाकार (spherical) या अंडाकार (ovoid) हो सकते हैं। वे अस्थायी (temporarily) रूप से पेनिसिलिन (penicillin) द्वारा जाँच (checked) किए जाते हैं। स्पाइरोप्लाज़्मा सिट्री (Spiroplasma citri) - साइट्रस (citrus) का जिद्दी।
वे कुछ आर्थ्रोपोड्स (arthropods) में बिना कोई बीमारी पैदा किए बाध्य इंट्रासेल्युलर परजीवी (obligate intracellular parasites) हैं, लेकिन वे पौधों में कई बीमारियां पैदा करते हैं। उन्हें सेल मुक्त माध्यम (cell free medium) में नहीं उगाया जा सकता है। टैक्सोनॉमिक (Taxonomically) रूप से वे बैक्टीरिया के बहुत करीब हैं। पौधों की बीमारियां जिनके कारण होने का संदेह (suspected) है, वे हैं: जाइलम-सीमित (Xylem-limited) समूह - पियर्स रोग अंगूर (Pierce's disease of grape), अल्फाल्फा बौना (alfalfa dwarf), बादाम पत्ती झुलसना (almond leaf scorch) और बेर पत्ती पपड़ी (plum leaf scald)। फ्लोएम-सीमित (Phloem-limited) समूह - रगोस लीफ कर्ल क्लोवर (rugose leaf curl of clover), साइट्रस ग्रीनिंग (citrus greening), और आलू लीफलेट स्टंट (potato leaflet stunt)। गैर-ऊतक प्रतिबंधित (Non-tissue restricted) - सेब और गाजर का प्रसार (apple and carrot proliferations)।
इसमें जीवित और निर्जीव (living and non-living) दोनों वर्ण हैं जैसे गुणन (multiplication), संक्रामकता (infectiveness), उत्परिवर्तन (mutations) जीवित चरित्र हैं और कण (particle), और वर्षा (precipitation) निर्जीव चरित्र (non-living characters) हैं।
डब्ल्यू. एम. स्टेनली (W. M. Stanley - 1938) को टीएमवी (TMV) का क्रिस्टल रूप (crystals form) मिल सकता था, जो अभी भी संक्रामक (infectious) है। Lwoff (1957) ने वायरस को "कड़ाई से इंट्रासेल्युलर (strictly intracellular), संभावित रूप से रोगजनक संस्थाओं (potentially pathogenic entities) के रूप में परिभाषित किया है जो एक संक्रामक चरण (infectious phase) के साथ है और केवल एक प्रकार का न्यूक्लिक एसिड (nucleic acid) या तो आरएनए (RNA) या डीएनए (DNA) के अधिकारी हैं, प्रोटीन कोट (protein coat) से घिरे हैं, और केवल उनके न्यूक्लिक एसिड (nucleic acid) के रूप में गुणा करते हैं और बढ़ने या बाइनरी विखंडन (binary fission) से गुजरने में असमर्थ हैं"。
वायरस मेजबान राइबोसोम (host ribosome) का उपयोग करके प्रतिकृति (replication) या दोहराव (duplication) द्वारा गुणा (multiplies) करता है। पौधों के लगभग 600 वायरस रोगों की सूचना मिली है। फूलगोभी मोज़ेक वायरस (cauliflower mosaic virus) और डहेलिया मोज़ेक वायरस (dahlia mosaic virus) को छोड़कर उन सभी पौधे के वायरस में आरएनए (RNA) होने की सूचना मिली थी। वे डीएनए वायरस (DNA virus) हैं। वायरस के कण का आकार कठोर रॉड (rigid rod - TMV), लचीली रॉड (flexible rod - काउपी मोज़ेक वायरस - Cowpea mosaic virus), गोलाकार (spherical - स्क्वैश मोज़ेक - Squash mosaic), पॉलीहेड्रल (polyhedral - ट्यूलिप पीला मोज़ेक - Tulip yellow mosaic) का हो सकता है। वायरोइड (Viroid) प्रोटीन कोट के बिना आरएनए (RNA) का एक अंश (fragment) मात्र है। वायरोइड कम आणविक भार (low molecular weight) का एकल फंसे (single stranded) सहसंयोजक बंद परिपत्र (covalently closed circular) आरएनए है जो पौधे की कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है, दोहरा सकता है और बीमारी पैदा कर सकता है।
प्राकृतिक परिस्थितियों (natural conditions) में वायरस सैप (sap), ग्राफ्ट्स (grafts), वैक्टर (vectors), डोडर्स (dodders) आदि द्वारा प्रेषित (transmitted) होते हैं।
पौधे के परजीवी नेमाटोड (plant parasitic nematode) का जीवन चक्र आमतौर पर पांच अलग-अलग चरणों (five distinct stages) के साथ बहुत सरल होता है। मादा नेमाटोड (female nematodes) अंडे देती हैं, जो कोशिका विभाजनों (cell divisions) की एक श्रृंखला से गुजरते हैं, जिससे पहले चरण का लार्वा (first stage larvae) बनता है। पहला पिघलाव (molt) अंडे में होता है, और दूसरे चरण का लार्वा अंडे से निकलता है।
वे भोजन के लिए उचित मेजबान (proper host) खोजने की कोशिश करेंगे। जब वे भोजन करना शुरू करते हैं, तो वे तीन अतिरिक्त पिघलनों (additional molts) से गुजरते हैं। तीसरे और चौथे पिघलाव (molt) के बीच, यौन अंग (sexual organs) विकसित होने लगते हैं। चौथे पिघलाव के बाद नर (males) मेजबान पर भोजन नहीं करते हैं बल्कि वे मिट्टी में स्वतंत्र रूप से (free living) रहते हैं लेकिन मादा (female) भोजन करना जारी रखती है और अंडे देने के लिए वयस्क (adult) हो जाती है।
एंगुना एसपीपी (Anguna, spp.) पौधों के सभी भूमिगत (above ground) भागों पर हमला करते पाए जाते हैं। ये कभी जड़ों में नहीं पाए जाते। दूसरे चरण का लार्वा बीज (seed) में निष्क्रिय अवस्था (dormant stage) में रहता है। ए. ट्रिटिसी (A. tritici) व्हीट गॉल (whaet gall) या इयर कॉकल (ear cockle) रोग का कारण बनता है। वयस्क नेमाटोड की लंबाई 1.5 - 4 मिमी होती है। उनके पास बेसल बल्ब (basal bulb) के साथ स्टाइलेट (stylet) होता है।
हेटेरोडेरा एसपीपी (Heterodera, spp.) को सिस्ट नेमाटोड (cyst nematodes) के रूप में जाना जाता है। वे चुकंदर (sugarbeet), जई (oats), तिपतिया घास (clover), सोयाबीन (soybean) आदि जैसे कई पौधों पर परजीवी (parasitic) हैं। एच. एवेना (H. avenae) जौ (barley) और गेहूं के मोल्या रोग (molya disease) का कारण बनता है। मादा नेमाटोड (female nematodes) मेजबान पौधे के अंदर अपना सिर (head) डालकर मेजबान से जुड़ी पाई जाती हैं और शरीर बाहर रहता है लेकिन नर (males) और पुटी (cyst) मिट्टी में पाए जाते हैं। नर (Males) पतले 1-2 मिमी लंबे होते हैं, मादा (female) नींबू (lemon) के आकार की लंबाई में 0.5 - 0.8 मिमी और चौड़ाई में 0.5 मिमी होती है। सिस्ट (Cysts) गहरे भूरे (dark brown) और नींबू के आकार (lemon shaped) के होते हैं。
मेलोइडोगाइन एसपीपी (Meloidogyne spp.) को रूट नॉट नेमाटोड (root knot nematodes) कहा जाता है। वे टमाटर, बैंगन, भिंडी (lady’s finger), पपीता आदि जैसे कई पौधों पर परजीवी (parasitic) हैं, जो जड़ गाँठ रोग (root knot disease) का कारण बनते हैं। मादा (Females) और तीसरे या चौथे चरण के लार्वा कई पौधों पर गतिहीन परजीवी (sedentary parasites) हैं। नर (Males) और दूसरे चरण के लार्वा प्रवासी (migratory) हैं और मिट्टी में पाए जाते हैं। नर (Males) बेलनाकार (cylindrical) 1 -2 मिमी लंबे होते हैं लेकिन मादा (females) थैली (saccate) या गोलाकार (spherical) 0.8 मिमी लंबी और 0.5 मिमी चौड़ाई की होती हैं।
हिर्शमेनिएला एसपी (Hirshmaniellia sp.) यह काफी बड़ा नेमाटोड (large nematode) है जिसकी लंबाई 1 -4 मिमी होती है। इसमें बेसल बल्ब (basal bulb) के साथ स्टाइलेट (stylet) होता है और पूंछ आम तौर पर नुकीली (pointed) होती है। एच. ओरीजे (H. oryzae) चावल में जड़ सड़न (root rot) का कारण बनता है। ये मिट्टी में भी पाए जाते हैं।
कई फूल वाले पौधे (flowering plants) आर्थिक पौधों (economic plants) पर परजीवी (parasitic) होते हैं और काफी नुकसान पहुंचाते हैं। परजीवी प्रकृति (parasitic nature) के आधार पर उन्हें इस प्रकार समूहीकृत (grouped) किया जा सकता है:
सैप्रोफाइट्स (Saprophytes): वे जीव हैं, जो पौधों या जानवरों के मृत (dead) या क्षय (decaying) ऊतकों (tissues) पर बढ़ते हैं। उदा. सैप्रोफाइटिक कवक (saprophytic fungi), सैप्रोफाइटिक बैक्टीरिया (saprophytic bacteria)।
परजीवी (Parasites): वे जीव हैं, जो अपने विकास और अस्तित्व (existence) के लिए अन्य जीवित जीवों पर निर्भर (dependent) हैं। उदा. परजीवी कवक (parasitic fungi) और बैक्टीरिया (bacteria)।
बाध्य परजीवी (Obligate parasites): वे जीव हैं, जो अपने विकास (growth) और विकास (development) के लिए अन्य जीवित जीवों पर पूरी तरह (strictly) से निर्भर हैं। उदा. एरीसिफे (Erysiphe), प्यूसिनिया (Puccinia), उस्टिलागो (Ustilago)।
ऐच्छिक परजीवी (Facultative parasites): वे जीव हैं जो आम तौर पर सैप्रोफाइट्स (saprophytes) के रूप में रहते हैं लेकिन कभी-कभी वे परजीवी (parasites) के रूप में रह सकते हैं। उदा., फ्यूसेरियम (Fusarium), राइजोक्टोनिया (Rhizoctonia), स्क्लेरोटियम (Scerotium)।
ऐच्छिक सैप्रोफाइट्स (Facultative saprophytes): वे जीव हैं जो मुख्य रूप से परजीवी (parasites) के रूप में रह रहे हैं लेकिन कभी-कभी वे सैप्रोफाइट्स (saprophytes) के रूप में रहते हैं। उदा. फाइटोफ्थोरा (Phytophthora), अल्टरनेरिया (Alternaria), हेल्मिन्थोस्पोरियम (Helminthosporium)।
रोगजनक (Pathogen): एक जीव है, जो एक विशेष मेजबान (particular host) या मेजबान (hosts) की एक सीमा (range) में बीमारी का कारण बनता है।
रोगजनकता (Pathogenicity): एक विशेष मेजबान (host) या मेजबान की एक सीमा (range) में बीमारी पैदा करने के लिए रोगज़नक़ (pathogen) की क्षमता (ability) या क्षमता (capacity) है। इसे एक जीव के सामान्य जमाव (general deposition) के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है जो संक्रमण (infection) पैदा करने और मेजबान/मेजबानों (host/hosts) पर बीमारी के लक्षण (symptom) पैदा करने के लिए पर्याप्त (sufficient) है।
1876 में बैक्टीरियोलॉजिस्ट लुई पाश्चर (Louis Pasteur) और रॉबर्ट कोच (Robert Koch) ने साबित (proved) किया था कि मवेशियों (cattle) का एंथ्रेक्स रोग (anthrax disease) एक विशिष्ट जीवाणु (specific bacterium) के कारण होता था। इसके तुरंत बाद, 1878 में टी.जे. बुरिल (T.J. Burill) ने पहली बार साबित किया कि सेब और नाशपाती का फायर ब्लाइट (fire blight) एक जीवाणु के कारण होता था।
रोगजनकता (Pathogenicity) साबित करने के लिए कोच (Koch) के सिद्धांत (postulate) का पालन किया जाता है। यह भी शामिल है;
जब कोई रोगजनक पौधे पर हमला (attacks) करता है, तो रोग (disease) का विकास (development) कोई अचानक (sudden) होने वाला प्रभाव (effect) नहीं है। किसी भी बीमारी का कारण बनने के लिए घटनाओं (events) की श्रृंखला जिम्मेदार होती है। ये चरण (stages), प्रतिक्रियाएं (reactions) और अंतःक्रियाएं (interactions) क्रम में व्यवस्थित होती हैं, जिससे रोग का विकास (disease development) होता है। रोग के विकास की ओर ले जाने वाली घटनाओं (events) की पूरी श्रृंखला को रोगजनन (pathogenesis) या रोग चक्र (disease cycle) के रूप में जाना जाता है। इसलिए, रोगजनन में रोगज़नक़ का टीकाकरण (inoculation), प्रवेश (penetration), संक्रमण (infection), ऊष्मायन अवधि (incubation period), आक्रमण (invasion), प्रजनन (reproduction), प्रसार (dissemination) और ओवर विंटरिंग (over wintering) या ओवर समरिंग (over summering) शामिल हैं।
अपने खेती किए गए मेजबान (cultivated host) की अनुपस्थिति में, सजीव रोगज़नक़ (animate pathogen) को अपने अस्तित्व (survival) का कुछ वैकल्पिक स्रोत (alternate source) खोजना होगा। जीवित रहने (survival) के स्रोतों को इस प्रकार समूहीकृत (grouped) किया जा सकता है।
उन्हें तीन समूहों में माना जा सकता है;
फलदार पौधे बारहमासी (perennial) होने के कारण उन्हें संक्रमित (infecting) करने वाला रोगजनक (pathogen) साल-दर-साल सक्रिय रूप (active form) में जीवित रह सकता है। उदा. साइट्रस कैंकर (citrus canker - ज़ैंथोमोनास कैंपेस्ट्रिस - Xanthomonas campestris)। कोलेटोट्राइकम फाल्केटम (Colletotrichum falcatum) के कारण गन्ने के लाल सड़न (red rot of sugarcane) में संक्रमित गन्ने के सेट (infected sugarcane sets) पर जीवित रहता है। चावल (पाइरिकुलरिया ग्रिसिया - Pyricularia grisea) के ब्लैट (blat) के मामले में, रोगजनक ग्रैमिने (Graminae) परिवार के खरपतवारों (weeds) में जीवित रहता है। गेहूं के रस्ट (wheat rust - प्यूसिनिया ग्रैमिनिस ट्रिटिसी - Puccinia graminis tritici) के मामले में रोगजनक बारबेरी के पौधे (barbery plant) में जीवित (survives) रहता है।
ऐच्छिक परजीवी (facultative parasites) फसल मेजबान (crop host) की अनुपस्थिति में सैप्रोफाइट (saprophyte) के रूप में जीवित रहने में सक्षम हैं। पाइथियम (Pythium), राइजोक्टोनिया (Rhizoctonia) और स्क्लेरोटियम (Sclerotium) की प्रजातियां मिट्टी में और पौधे के मलबे (plant debris) में जीवित रहती हैं। रोगज़नक़ (pathogen) के प्रकार के आधार पर सैप्रोफाइटिक अस्तित्व (saprophytic survival) भिन्न हो सकता है। उनमें से कुछ छोटी अवधि (short period) के लिए जीवित (survive) रहते हैं उदा. फ्यूसेरियम (Fusarium), वर्टिसिलियम (Verticillium), अन्य लंबे समय (long time) तक जीवित रह सकते हैं।
पौधे के वायरस (Plant virus) और बैक्टीरिया (bacteria) आराम करने की अवस्था (resting stage) उत्पन्न नहीं करते हैं इसलिए उनके निष्क्रिय अंग (dormant organs) नहीं होते हैं। कवक (fungi), नेमाटोड (nematode) और फेनेरोगैम्स (phanerogams) अपनी निष्क्रिय (dormant) या आराम (resting) संरचनाओं के माध्यम से जीवित रहते हैं। फेनेरोगेम (Phanerogams) बीज (seeds) पैदा करते हैं उदा ओरोबांचे (orobanche), स्ट्रिगा (striga)। नेमाटोड (Nematodes) अंडे, सिस्ट (cysts) और गॉल (galls) जैसी अपनी निष्क्रिय संरचनाओं (dormant structures) के माध्यम से जीवित रह सकते हैं। कवक (fungi) के मामले में, वे अपने अस्तित्व (survival) के लिए अलग-अलग निष्क्रिय अंगों (dormant organs) या संरचनाओं (structures) का उत्पादन करते हैं और इनोकुलम (inoculum) का प्राथमिक स्रोत (primary source) बन जाते हैं। उनमें से कुछ कोनिडिया (conidia), क्लैमाइडोस्पोर्स (chlamydospores), ऊस्पोर्स (oospores), स्क्लेरोटिया (sclerotia) पैदा करते हैं जो मिट्टी में जीवित (survive) रह सकते हैं। कुछ बीज जनित कवकों (seed borne fungi) में, निष्क्रिय मायसेलियम (dormant mycelium) बीज के भ्रूण (embryo) में जीवित रहता है और कुछ निष्क्रिय बीजाणु (dormant spores) बीज कोट (seed coat) पर या उसके अंदर जीवित रहते हैं।
लंबी या छोटी दूरी (long or short distance) के लिए इनोकुलम (inoculum) का फैलाव (Dispersal) प्रसार (dissemination) कहलाता है। यह न केवल पौधों की बीमारियों के प्रसार (spread) के लिए बल्कि रोगजनकों (pathogens) के जीवन चक्र (life cycle) की निरंतरता (continuity) के लिए भी महत्वपूर्ण है। पादप रोगजनकों (plant pathogens) का फैलाव (dispersal) निम्न रूप में हो सकता है;
कवक (fungi), बैक्टीरिया (bacteria), वायरस (viruses) और नेमाटोड (nematodes) का स्वायत्त फैलाव (autonomous dispersal) विभिन्न कृषि कार्यों (agronomic operations) के दौरान मिट्टी (soil), बीज (seed) और पौधों के अंगों (plant organs) की एजेंसी (agency) के माध्यम से पूरा किया जाता है।
स्वायत्त फैलाव के साधन (means) के रूप में मिट्टी (Soil) - मृदा जनित संकाय परजीवी (soil-borne facultative parasites) मिट्टी में कुछ दूरी (distance) तक बढ़ सकते हैं। उदा. राइजोक्टोनिया सोलानी (Rhizoctonia solani), स्क्लेरोटियम रॉल्फसी (Sclerotium rolfsii)। उनमें से कुछ ज़ूस्पोर (zoospores) उत्पन्न कर सकते हैं, जो मिट्टी के पानी (soil water) की फिल्म में कुछ दूरी तक यात्रा कर सकते हैं उदा. पाइथियम (Pythium), फाइटोफ्थोरा (Phytophthora)। यह संक्रमण (infection) के लिए मेजबान (host) को खोजने में उनकी मदद कर सकता है। कृषि उपकरणों (farm equipment) के साथ-साथ संक्रमित मिट्टी (infested soil) के माध्यम से भी रोगजनक (pathogens) फैल सकते हैं।
बीज रोगजनकों के स्वायत्त फैलाव के लिए भी काम करते हैं। रोगजनक (pathogens) बाहरी (externally) या आंतरिक रूप से (internally) बीज जनित (seed-borne) हो सकते हैं और उन्हें बीज के साथ ले जाया जाता है। कुछ रोगजनकों में सहवर्ती संदूषण (concomitant contamination) हो सकता है और बीज के साथ फैल सकता है। उदा. ओरोबांचे (orobanche), स्ट्रिगा (striga), स्क्लेरोटिया (sclerotia) आदि के बीज। वानस्पतिक रूप से (vegetatively) प्रचारित पौधे (propagated plant) के अंग रोगज़नक़ ले जा सकते हैं। वायरस, बैक्टीरिया और कवक पौधे के अंगों के साथ ले जाए जाते हैं और फैल (disseminated) जाते हैं।
पादप रोगजनकों (plant pathogens) का निष्क्रिय फैलाव (passive dispersal) जानवरों के साम्राज्य (animal kingdom - मनुष्य, जानवर, कीड़े, नेमाटोड आदि), हवा (air) और पानी (water) की एजेंसी के माध्यम से पूरा किया जाता है।
दुनिया में सीमित (limited) दूरी से लेकर दूर (far distance) तक रोगजनकों (pathogens) के प्रसार (dispersal) के लिए मनुष्य (human beings) सबसे महत्वपूर्ण साधन (means) हैं। फलों, सजावटी पौधों (ormentals), गन्ना, आलू आदि का वानस्पतिक प्रसार (Vegetative propagation) रोगजनकों के प्रसार (dispersal) में मदद करता है। एक राज्य से दूसरे राज्य, एक देश से दूसरे देश में बीज या अन्य रोपण सामग्री (planting material) का निर्यात (Export) और आयात (import) पादप रोगजनकों (plant pathogens) के प्रसार (dissemination) में मदद करता है। विशेष रूप से वायरस और बैक्टीरिया को फैलाने (disseminating) में कीड़े (Insects) बहुत कुशल (efficient) होते हैं। सेब का फायर ब्लाइट (fire blight of apple - इरविनिया एमाइलोवोरा - Erwinia amylovora) मधुमक्खियों (honeybees) द्वारा फैलता है। मुख्य रूप से रस चूसने वाले कीड़े (sucking insects) जैसे एफिड्स (aphids) और हॉपर (hoppers) वायरस रोगों (virus diseases) को प्रसारित (transmitting) करने के लिए जिम्मेदार हैं। नेमाटोड (Nematodes) जाइफिनेमा (Xiphinema), लोंगिडोरस (Longidorus) और ट्राइकोडोरस (Trichodorus) वायरस (virus) संचारित (transmit) करते हैं। नेमाटोड प्रसारित वायरस (nematode transmitted viruses) को उनके कण आकार (particle shape) के आधार पर दो समूहों (groups) में विभाजित किया गया है। i) नेपो वायरस (Nepo virus) - पॉलीहेड्रल कण (polyhedral particles) हैं उदा. तंबाकू (tobacco) और टमाटर के छल्ले (tomato ring spot)। वे ज़िफीनेमा (Xiphinema) और लोंगिडोरस (Longidorus) द्वारा प्रेषित होते हैं। ii) नेटु वायरस (Netu virus) - ट्यूबलर कण (tubular particles) हैं उदा. मटर का जल्दी भूरा होना (pea early browning) और तंबाकू खड़खड़ (tobacco rattle)। वे ट्राइकोडोरस (Trichodorus) द्वारा प्रेषित होते हैं।
बैक्टीरिया (bacteria) और वायरस (virus) को मेजबान (host) के संक्रमित ऊतकों (infected tissues) के साथ वायु प्रवाह (air current) द्वारा ले जाया जाता है। कई कवकों के बीजाणु (Spores) हवा द्वारा ले जाए जाते हैं। इन बीजाणुओं द्वारा तय की गई दूरी हवा के वेग (velocity of the wind) और बीजाणुओं द्वारा भाग ली गई ऊंचाई (height) पर निर्भर करती है। प्यूसिनिया ग्रैमिनिस ट्रिटिसी (Puccinia graminis tritici) के यूरेडोस्पोर्स (uredospores) दक्षिण अमेरिका (South America) से उत्तरी अमेरिका (North America) ले जाए गए।
बीजाणु (spores) स्थानीय क्षेत्रों में बारिश के छींटे (rain splash) द्वारा प्रसारित (disseminated) होते हैं। उदा. सेब का फायर ब्लाइट (Fire blight of apple)। फेनेरोगैम्स के बीज (seeds of phenerogams), नेमाटोड सिस्ट (nematode cysts), फंगल मायसेलियम (fungal mycelium), बीजाणु (spores) और अन्य प्रतिरोधी संरचनाएं (resistant structures) पानी के प्रवाह (water current) द्वारा लंबी दूरी (longer distance) तक ले जाए जाते हैं।
महामारी विज्ञान (Epidemology) मुख्य रूप से रोग के प्रसार (spread of the disease) से संबंधित है। महामारी (epidemic) या एपिफाइटिक रूप (epiphytic form) में बीमारी को स्थापित करने के लिए, i) अतिसंवेदनशील चरण (susceptible stage) में मेजबान पौधे (host plant), ii) पौरुष रोगज़नक़ (virulence pathogen) की उपस्थिति (presence), और iii) रोगज़नक़ के लिए उपयुक्त वातावरण (suitable environment) की उपस्थिति होनी चाहिए।
मेजबान पौधा (Host plant): मेजबान पौधे की संवेदनशीलता (susceptibility) इस पर निर्भर करती है;
यौगिक ब्याज (compound interest) प्रकार की बीमारी निम्न समीकरण (equation) द्वारा व्यक्त की जाती है।
x = X0ert
जहाँ, x = किसी दिए गए समय पर रोग की मात्रा (the amount of disease at a given time),
X0 = प्रारंभिक इनोकुलम (the initial inoculum),
r = औसत संक्रमण दर (the average infection rate),
t = समय जिसके दौरान संक्रमण (infection) हुआ है, और
e = प्राकृतिक लॉग (natural log - मान 2.7182818)।
उपरोक्त समीकरण (above equation) के आधार पर नियंत्रण उपायों (control measures) को लक्षित (targeted) किया जाना चाहिए;
रोगजनक (pathogen) का गुणन (multiplication) रोगजनक द्वारा बीजाणु उत्पादन (spore production) पर अधिकतम तक पहुंच जाता है और उसके बाद श्वसन (respiration) कम हो जाता है। प्रतिरोधी किस्म (resistant variety) में, श्वसन अधिक तेजी से बढ़ा लेकिन थोड़े समय के लिए और अतिसंवेदनशील किस्म (susceptible variety) में, श्वसन धीरे-धीरे उच्च स्तर तक बढ़ गया और लंबे समय तक उच्च स्तर पर बना रहा।
जिन तंत्रों (mechanisms) द्वारा रोगग्रस्त पौधों (diseased plants) में श्वसन बढ़ता है, वे मुख्य रूप से दो हैं।
पूर्वानुमान (Forecasting) को किसी निश्चित बीमारी की अनुकूल परिस्थितियों (favorable conditions) के बारे में किसी वस्तु के उत्पादकों को सुनिश्चित करने और अधिसूचना (notification) के रूप में परिभाषित किया जा सकता है ताकि आर्थिक रिटर्न (economic return) के लिए नियंत्रण उपायों (control measures) को लागू किया जा सके।
निम्नलिखित शर्तों के मामले में पूर्वानुमान का व्यावहारिक मूल्य (practical value) होगा।
सामान्य तौर पर, बीमारी के साथ निश्चित पर्यावरणीय संबंध (environmental relationships) प्रयोगशाला (laboratory) के प्रयोगों से पाए जाते हैं। फिर इसे विभिन्न क्षेत्रों में वास्तविक क्षेत्र डेटा (actual field data) के साथ सत्यापित (verified) किया जाता है। बीमारी की मात्रा (amount of disease) निर्धारित करने वाले प्रमुख और महत्वपूर्ण मौसम कारकों (weather factors) की पहचान की जाती है। एक अस्थायी मॉडल (tentative model) विकसित किया गया है और क्षेत्र मैक्रोक्लाइमेट (macroclimate) और माइक्रोक्लाइमेट डेटा (microclimate data) और रोग पैटर्न (disease pattern) के साथ सत्यापित किया गया है और फिर इसका उपयोग पूर्वानुमान (forecasting) के लिए किया जाता है। हालांकि, किसी बीमारी के पूर्वानुमान की वास्तविक विधियां रोग चक्र (disease cycle) के प्रकार पर निर्भर करती हैं जो जगह-जगह या देश-देश में भिन्न (differs) हो सकती हैं।
हॉलैंड (Holland) में, एवरडिंगन (Everdingen - 1926) ने आलू के लेट ब्लाइट (late blight) का पूर्वानुमान लगाने के लिए डच नियम (Duch rules) बनाए।
इंग्लैंड (England) में, ब्यूमोंट (Beaumont - 1947) ने मामूली संशोधनों (modifications) के साथ समान नियम दिए। कम से कम 46 घंटों के लिए आरएच (RH) 75% से नीचे और तापमान 10°C से नीचे नहीं आना चाहिए। 2-3 सप्ताह के बाद तुषार (Blight) होने की उम्मीद है। स्मिथ (Smith - 1956) ने आगे संशोधित (modified) किया कि तापमान 10°C से नीचे नहीं होना चाहिए और आरएच (RH) प्रत्येक दिन कम से कम 11 घंटों के लिए 90% या उससे अधिक होना चाहिए। इन सरल मॉडलों (simple models) को विस्तृत (elaborated) और सुधारित (improved) किया गया है।
पादप रोग नियंत्रण के सिद्धांतों में शामिल हैं
I) रोगनिरोध (Prophylaxis)
II) टीकाकरण (Immunization)
शुष्क गर्मी उपचार (Dry heat treatment), गर्म पानी का उपचार (hot water treatment), और फायरिंग (firing) मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्मजीवों (microorganisms) को अंधाधुंध (indiscriminately) मार देंगे। वे हानिकारक (harmful) या उपयोगी (useful) हो सकते हैं। इसका उपयोग कई फसलों में जड़ सड़न (root rot) पैदा करने वाले स्क्लेरोटियम रॉल्फसी (Sclerotium rolfsii) को नियंत्रित (controlled) करने के लिए किया जाता है।
पादप संगरोध (Plant quarantine) देशों, राज्यों और समुदायों के बीच पौधों या पादप उत्पादों (plant products) की आवाजाही (movement) या विनिमय (interchange) पर कानूनी प्रतिबंध (legal restriction) है, जो पौधों के रोगजनकों (plant pathogens) को रोकने (preventing) या उनकी शुरूआत और स्थापना (establishment) के उद्देश्य से है जहां वे मौजूद नहीं हैं। घरेलू संगरोध (domestic quarantine) और अंतरराष्ट्रीय संगरोध (international quarantine) स्थापित हैं।
पादप संगरोध कार्यों (Plant quarantine actions) को 5 प्रमुख समूहों में बांटा गया है;
अधिक हानिकारक या रोगजनक जीवों (pathogenic organisms) की जांच करने के लिए कम हानिकारक या सैप्रोफाइटिक सूक्ष्मजीवों (saprophytic microorganisms) का परिचय (Introduction) या निष्क्रियता (inactivation) जैविक नियंत्रण विधि (biological control method) के रूप में जानी जाती है। ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) और ग्लियोक्लाडियम (Gliocladium) कवक (fungi) का उपयोग राइजोक्टोनिया (Rhizoctonia), स्क्लेरोटियम (Sclerotium), स्क्लेरोटिनिया (Sclerotinia) और फ्यूसेरियम (Fusarium) जैसे मृदा जनित रोगजनकों (soil-borne pathogens) को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इसी तरह, फंगल या बैक्टीरियल बीमारी को नियंत्रित करने के लिए सैप्रोफाइटिक बैक्टीरिया (saprophytic bacteria) का उपयोग किया जाता है。
कवकनाशी (Fungicide) का अर्थ है एक रसायन (chemical), जो कवक को मारने (kill the fungi) में सक्षम (able) हैं। हालांकि, सभी कवकनाशी (fungicides) कवक को नहीं मारते हैं, वे अस्थायी रूप से (temporarily) कवक के विकास (growth) को रोक सकते हैं या वे फंगल बीजाणुओं (fungal spores) के अंकुरण (germination) को रोक सकते हैं। इसलिए, उन्हें i) रक्षक (Protectants) और ii) चिकित्सक (Therapeutants) के रूप में वर्गीकृत (classified) किया जा सकता है।
रक्षक (Protectants) वे कवकनाशी (fungicides) हैं, जिनका उपयोग पौधों को रोगजनकों (pathogens) के हमले से बचाने (protect) के लिए किया जाता है। उन्हें संक्रमण (infection) से पहले लगाया जाना चाहिए। उदा. ज़िनेब (Zineb), मानेब (Maneb), सल्फर (Sulfur) आदि।
चिकित्सक (Therapeutants) वे रसायन (chemicals) हैं, जो संक्रमण (infection) पैदा करने के बाद भी रोगज़नक़ (pathogen) को मिटाने (eradicating) में सक्षम हैं। उदा. विटावैक्स (vitavax), हिनोसन (hinosan), एंटीबायोटिक्स (antibiotics) आदि।
कार्रवाई के तरीके (mode of action) के आधार पर उन्हें i) प्रणालीगत (Systemic) और ii) गैर-प्रणालीगत (Nonsystemic) के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है।
प्रणालीगत कवकनाशी (Systemic fungicides) वे हैं, जो पौधों की प्रणाली (system of the plants) में प्रवेश करके कार्य करते हैं। वे चिकित्सक (therapeutants) हैं।
गैर-प्रणालीगत कवकनाशी (Nonsystemic fungicides) वे हैं, जो पौधों की प्रणाली में प्रवेश नहीं कर सकते हैं लेकिन पौधों की सतह (surface of the plants) पर कार्य करते हैं। वे आम तौर पर रक्षक (protectants) हैं।
सामान्य उपयोग (general use) के आधार पर कवकनाशी (fungicides) को इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है:
रासायनिक प्रकृति (chemical nature) के आधार पर कवकनाशी (fungicides) को इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है:
आईपीएम (IPM) एक नया वैचारिक दृष्टिकोण (conceptual approach) है, जो पारिस्थितिक सिद्धांतों (ecological principles) पर आधारित है और एग्रोइकोसिस्टम प्रबंधन रणनीतियों (agroecosystem management strategies) में बहु-विषयक पद्धतियों (multidisciplinary methodologies) को एकीकृत (integrates) करता है जो व्यावहारिक (practical), प्रभावी (effective), किफायती (economical) और सार्वजनिक स्वास्थ्य (public health) और पर्यावरण (environment) दोनों के लिए सुरक्षात्मक (protective) हैं। आईपीएम (IPM) में शामिल किए जा सकने वाले विभिन्न नियंत्रण उपायों (control measures) में रसायनों का विवेकपूर्ण उपयोग (Judicious use of chemicals) अधिमानतः वनस्पति कीटनाशक (botanical pesticides), जैविक नियंत्रण (Biological control), पादप संगरोध (Plant Quarantine), बीज प्रमाणीकरण (Seed certification), प्रतिरोधी किस्में (Resistant cultivars), जेनेटिक इंजीनियरिंग (Genetic engineering) शामिल हैं।
| यौगिक (Compound) | वायरस (Viruses) | मेजबान (Host) |
|---|---|---|
| रिबाविरिन (Ribovirin) | PVy, PVx, PVs, PVm | आलू (potato) |
| मॉटल्ड क्रिंकल वायरस (Mottled Crinkle virus) | बैंगन (eggplant) | |
| मैलाकाइट ग्रीन (Malachite green) | PVx | आलू (potato) |
| एक्टिनोमाइसिन-डी (Actinomycin-D) | TMV | चीनी गोभी (Chinese cabbage) |
| मेजबान (Host) | रोगजनक (Pathogen) | ऊतक स्रोत (Tissue source) |
|---|---|---|
| आलू (Potato) | अल्टरनेरिया सोलन (Alternaria solani) | मेसोफिल (Mesophyll), प्रोटोप्लास्ट (protoplast) |
| फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टैन्स (Phytophthora infestans) | मेसोफिल (Mesophyll) | |
| टमाटर (Tomato) | फ्यूसेरियम ऑक्सीस्पोरम एफ.एसपी. लाइकोपर्सिसी रेस 2 (Fusarium oxysporum f.sp. lycopersici Race 2) | कॉटिलेडॉन (cotyledon) और प्रोटोप्लास्ट (protoplast) से कैलस (Callus) |
रोगज़नक़ विष (pathogen toxin) के खिलाफ आलू का चयन (Selection) रोगज़नक़ के खिलाफ वंशानुगत प्रतिरोध (heritable resistance) के परिणामस्वरूप होता है उदा. टमाटर की कोशिकाओं को फ्यूरासिक एसिड (furasic acid) में उजागर करना और फ्यूसेरियम ऑक्सीस्पोरम एफ. एसपी. लाइकोपर्सिसी रेस 2 (Fusarium oxysporum f. sp. lycopersici Race 2) के लिए प्रतिरोध (resistance) प्राप्त करने के लिए चयन किया गया। इसी तरह ब्रैसिका नेपस (Brassica napus) को फोमा लिंगुम (Phoma lingum) के संस्कृति छानने (culture filtrate) के लिए उजागर (exposed) किया गया।