बैक्टीरियल विल्ट (Bacterial Wilt): Pseudomonas solanacearum
लक्षण
पत्ती की सतह पर जीवाणु के मुरझाने (Bacterial wilt) के लक्षण। मुरझाना (Wilting), स्टंटिंग (stunting), पर्णसमूह का पीलापन (yellowing of the foliage) और अंत में पूरे पौधे का पतन (collapse) रोग के विशिष्ट लक्षण (characteristic symptoms) हैं। मुरझाने से पहले निचली पत्तियां (Lower leaves) लटक (droop) सकती हैं। संवहनी प्रणाली (vascular system) भूरी हो जाती है। प्रभावित हिस्सों से बैक्टीरियल ऊज़ (Bacterial ooze) निकलता है। पौधे दोपहर (noontime) में मुरझाने के लक्षण दिखाते हैं, रात में ठीक (recover) हो जाते हैं, लेकिन जल्द ही मर जाते हैं।
जीवाणु (bacterium) नॉन एसिड फास्ट (non acid fast), नॉन स्पोर फॉर्मिंग (non spore forming), नॉन कैप्सुलेटेड (non capsulated) और पोलर फ्लैगेलम (polar flagellum) द्वारा गतिशील (motile) है। जीवाणु डेक्सट्रोज (dextrose), सुक्रोज (sucrose), लैक्टोज (lactose) और ग्लिसरॉल (glycerol) में एसिड (acid) पैदा करता है लेकिन कोई गैस नहीं। जिलेटिन (gelatin) के हल्के द्रवीकरण (slight liquefaction) के साथ स्टार्च हाइड्रोलाइज्ड (Starch hydrolyzed)।
जीवाणु केला (banana), मिर्च (chillies), सौंफ (fennel), अदरक (ginger), आलू (potato), मूली (radish), टमाटर आदि को संक्रमित करता है। जीवाणु (bacterium) एक गैर बीजाणु (non spore) बनाने वाला (former) होने के बावजूद प्रयोगशाला की स्थिति (laboratory conditions) में 16 महीने से अधिक समय तक जीवित (alive) और व्यवहार्य (viable) पाया जाता है। रोगजनक (pathogen) लगभग 10 महीनों तक संक्रमित पौधे के मलबे (infected plant debris) में जीवित पाया जाता है। रूट नॉट नेमाटोड (root knot nematode), Meloidogyne javanica की उपस्थिति (Presence) से विल्ट की घटना (wilt incidence) बढ़ जाती है।
प्रतिरोधी किस्म (resistant variety) का प्रयोग करें। फूलगोभी (cauliflower) जैसी क्रूसिफेरस सब्जियों (cruciferous vegetables) के साथ फसल चक्र (Crop rotation) रोग की घटनाओं को कम करने में मदद करता है। खेतों को साफ रखा जाना चाहिए और प्रभावित हिस्सों (effected parts) को इकट्ठा करके जला दिया जाना चाहिए। रोग को नियंत्रित करने के लिए कॉपर कवकनाशी (Copper fungicides) का छिड़काव करें (2% बोर्डो मिश्रण / Bordeaux mixture)। रूट नॉट नेमाटोड (root knot Nematodes) की उपस्थिति में यह रोग अधिक प्रचलित (more prevalent) है, इसलिए इन नेमाटोड के नियंत्रण से रोग के प्रसार (disease spread) को रोका (suppress) जा सकेगा।
सर्कोस्पोरा लीफ स्पॉट (Cercospora Leaf Spot) :Cercospora solani-melongenae, C. solani
लीफ स्पॉट (leaf spots) क्लोरोटिक घावों (chlorotic lesions) द्वारा विशेषता (characterized) हैं, आकार में कोणीय (angular) से अनियमित (irregular), बाद में भूरे-भूरे (grayish-brown) रंग में बदल जाते हैं, जिसमें स्पॉट के केंद्र में प्रचुर मात्रा में स्पोरुलेशन (profuse sporulation) होता है। गंभीर रूप से (Severely) संक्रमित पत्तियां समय से पहले गिर (drop off prematurely) जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप फलों की उपज (fruit yield) कम हो जाती है।
कवक (fungus) स्ट्रोमाटा (stromata) पैदा करता है जो गोलाकार (globular) होते हैं। द्रव्यमान (mass) में कोनिडियोफोर्स (Conidiophores) मध्यम गहरे (medium dark) और हल्के जैतून के भूरे (slightly olivaceous brown) रंग के होते हैं और नोक (tip) की ओर पीले (paler) होते हैं। कोनिडिया (Conidia) सब हाइलिन (sub hyaline) से पीला जैतून (pale olivaceous) हैं।
यह रोग वायु जनित (air borne) कोनिडिया से फैलता है।
पंत सम्राट (Pant Samrat) किस्म दोनों लीफ स्पॉट के प्रति प्रतिरोधी (resistant) है। प्रतिरोधी किस्में उगाकर बीमारियों का प्रबंधन किया जा सकता है। प्रति लीटर पानी में 1 प्रतिशत बोर्डो मिश्रण (Bordeaux mixture) या 2 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper oxychloride) या 2.5 ग्राम ज़िनेब (Zineb) का छिड़काव लीफ स्पॉट को प्रभावी ढंग से नियंत्रित (effectively controls) करता है।
अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट (Alternaria leaf Spot) :Alternaria melongenae, A. solani
लक्षण
लीफ स्पॉट (leaf spot) में दरारें (Cracks) दिखाई दे रही हैं। अल्टरनेरिया (Alternaria) की दो प्रजातियां (species) आमतौर पर पाई जाती हैं, जिससे गाढ़े छल्ले (concentric rings) के साथ विशिष्ट (characteristic) लीफ स्पॉट (leaf spots) होते हैं। धब्बे ज्यादातर अनियमित (irregular) होते हैं, 4-8 मिमी व्यास (diameter) के होते हैं और पत्ती के ब्लेड (leaf blade) के बड़े क्षेत्रों (large areas) को कवर करने के लिए मिल (coalesce) सकते हैं। गंभीर रूप से प्रभावित पत्तियां गिर (drop off) सकती हैं। A. melongenae फलों को भी संक्रमित करता है जिससे बड़े गहरे धब्बे (deep-seated spots) हो जाते हैं। संक्रमित फल पीले हो जाते हैं और समय से पहले गिर (drop off prematurely) जाते हैं।
मायसेलियम सेप्टेट (septate), शाखित (branched), हल्के भूरे (light brown) से गहरे भूरे (dark brown) रंग का होता है। यह अंतर (inter) और इंट्रा सेलुलर (intra cellular) है। कोनिडियोफोर (Conidiophores) रंध्र (stomata) के माध्यम से निकलते (emerge) हैं और गहरे रंग (dark colored) के होते हैं। कोनिडिया (Conidia) एकल कोशिका (single celled), मुरीफॉर्म (muriform), चोंच वाले (beaked) और श्रृंखलाओं (chains) में उत्पन्न होते हैं। कोनिडिया 5-10 अनुप्रस्थ सेप्टा (transverse septa) और कुछ अनुदैर्ध्य (longitudinal) या तिरछे सेप्टा (oblique septa) के साथ हैं।
यह रोग हवा (wind) से उड़ने वाले कोनिडिया से फैलता है।
प्रति लीटर पानी में 1 प्रतिशत बोर्डो मिश्रण (Bordeaux mixture) या 2 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper oxychloride) या 2.5 ग्राम ज़िनेब (Zineb) का छिड़काव लीफ स्पॉट को प्रभावी ढंग से (effectively) नियंत्रित करता है।
लिटिल लीफ ऑफ ब्रिंजल (Little Leaf of Brinjal)
बैंगन की यह बीमारी भारत (India) से 1938 में बताई गई थी और जहां तक पता है कि यह केवल भारत और श्रीलंका (Sri Lanka) में होती है। देश के लगभग (almost) सभी राज्यों में यह बैंगन की खेती के सामने एक गंभीर समस्या (serious problem) बन गई है। रोगग्रस्त पौधों (diseased plants) में उपज की हानि (yield loss) सौ प्रतिशत होती है।
लक्षण
पत्तियों का छोटा (smallness) होना एक विशिष्ट लक्षण (characteristic symptom) है। पेटीओल (petioles) इतने छोटे होते हैं और पत्तियाँ तने से चिपकी (sticking) हुई प्रतीत होती हैं। ऐसी पत्तियाँ संकरी (narrow), मुलायम (soft), चिकनी (smooth) और पीली (yellow) होती हैं। नई बनी (Newly formed) पत्तियां बहुत अधिक छोटी (shorter) होती हैं। तने के पोर (internodes) भी छोटे (shortened) हो जाते हैं। कक्षीय कलिकाएं (Axillary buds) बड़ी हो जाती हैं लेकिन उनके पेटीओल्स और पत्तियां छोटी रहती हैं। इससे पौधे को एक झाड़ीदार उपस्थिति (bushy appearance) मिलती है। अधिकतर (Mostly), कोई फूल (flowering) नहीं होता है, लेकिन यदि फूल बनते हैं तो वे हरे (green) रहते हैं। फलन (Fruiting) दुर्लभ (rare) है।
लिटिल लीफ (Little leaf) को पहले वायरस (virus) के कारण होने वाली बीमारी माना जाता था। 1969 में इसे एस्टर-येलो (aster-yellows) और कर्ली टॉप (curly top) से निकटता से संबंधित एक माइकोप्लाज्मा-जैसे जीव (mycoplasma-like organism) के लिए जिम्मेदार (attributed) ठहराया गया था। यह एक सैप (sap) संक्रामक रोग (transmissible disease) है। यह जीव धतूरा (Datura), टमाटर (tomato) और तंबाकू (tobacco) में प्रेषित (transmitted) किया गया है। यह प्रकृति में Datura fastuosa और Vinca rosea पर होता है। प्राकृतिक संचरण (Natural transmission) एक वेक्टर, Cestius phycytis (Eutettix phycytis) के माध्यम से होता है, जबकि Empoasca devastans एक कम प्रभावी वेक्टर (less effective vector) है। जीव का पेरेनेशन (Perennation) इसके खरपतवार (weed) मेजबानों के माध्यम से होता है।
यह बीमारी लीफ हॉपर (leaf hoppers), Hishimonas phycitis और Empoasca devastans और ग्राफ्टिंग (grafting) द्वारा फैलती है। E. devastans कम प्रभावी वेक्टर है। वायरस का पेरेनेशन (Perennation) खरपतवार (weed) मेजबान के माध्यम से होता है। इस बीमारी की बहुत व्यापक मेजबान सीमा (host range) है।
प्रभावित पौधों के विनाश (destruction) और कीटनाशकों के छिड़काव से रोग की गंभीरता (severity) को कम किया जा सकता है। नई फसल तभी लगानी चाहिए जब खेत और उसके आस-पड़ोस (neighbourhood) के रोगग्रस्त पौधों (diseased plants) को हटा दिया गया हो।
मेथिलडेमेटन (Methyldemeton) 25 EC - 2 मिली / लीटर
डाइमेथोएट (Dimethoate) 30 EC - 2 मिली/ लीटर
मैलाथियान (Malathion) 50 EC - 2 मिली/लीटर
वेक्टर नियंत्रण के लिए अनुशंसित (recommended) किया गया है।
हालांकि माइकोप्लाज़्मा (mycoplasmas) को टेट्रासाइक्लिन (tetracyclines) द्वारा दबाए (suppressed) जाने की सूचना है, लेकिन इस पद्धति (method) के क्षेत्र अनुप्रयोग (field application) की अभी तक सिफारिश नहीं की गई है। किस्म प्रतिरोध (Varietal resistance) का व्यवस्थित (systematically) रूप से अध्ययन (studied) नहीं किया गया है। पूसा पर्पल क्लस्टर (Pusa Purple Cluster), अर्का शील (Arka Sheel), औशी (Aushy), मंजरी गोटा (Manjari Gota) और बनारस जाइंट (Banaras Giant) जैसी किस्में खेत में मध्यम प्रतिरोध (moderate resistance) दिखाती हैं। बीमारी के प्रति सहिष्णु (tolerant) पाए जाने वाले अन्य कल्टीवेटर (cultivars) ब्लैक ब्यूटी (Black Beauty), ब्रिंजल राउंड (Brinjal Round) और सुरती (Surati) हैं.
डैम्पिंग ऑफ (Damping off): Pythium aphanidermatum, Pythium indicum, Phytophthora parasitica, Rhizoctonia solani और Sclerotium rolfsii.
सीड बेड (seed bed) में सीड लिंग्स (seed lings) का अचानक ढहना (Sudden collapsing) होता है। पौधों पर कॉलर क्षेत्र (collar region) में हमला किया जाता है और हमला किए गए पौधों को नीचे गिरा (toppled down) दिया जाता है। यह रोग मिट्टी में मौजूद कवक (fungi) के माध्यम से फैलता है। यह रोग मिट्टी में मौजूद कवक के माध्यम से फैलता है।
एग्रोसन (agrosan) या सेरेसिन (ceresin) @ 2 ग्राम/किग्रा बीज के साथ बीज उपचार (seed treatment) करके रोग को नियंत्रित (controlled) किया जा सकता है।
टोबैको मोज़ेक वायरस (Tobacco mosaic virus - TMV)
पत्तियों की मोज़ेक मोटलिंग (Mosaic mottling) और पौधों का बौनापन (stunting) आलू वायरस (potato virus) Y के विशिष्ट लक्षण (characteristic symptoms) हैं। प्रारंभिक अवस्था (early stages) में मोज़ेक लक्षण हल्के (mild) होते हैं लेकिन बाद में गंभीर (severe) हो जाते हैं। संक्रमित पत्तियां विकृत (deformed), छोटी और चमड़े जैसी (leathery) होती हैं। संक्रमित पौधों पर बहुत कम फल (few fruits) पैदा होते हैं। तंबाकू मोज़ेक वायरस (tobacco mosaic virus) द्वारा निर्मित महत्वपूर्ण लक्षण (important symptom) पत्तियों का विशिष्ट धब्बेदार (conspicuous mottling) होना है। उन्नत (advanced) मामलों में पत्तियां फफोले (blisters) भी विकसित (develop) करती हैं। गंभीर रूप से (Severely) संक्रमित पत्तियां छोटी और बेडौल (misshapen) हो जाती हैं। जल्दी संक्रमित होने वाले पौधे अविकसित (stunted) रहते हैं। PVY आसानी से रस प्रेषित (sap transmitted) है।
यह क्षेत्र में एफिड्स (aphids), Aphis gossypii और Myzus persicae के माध्यम से फैलता है और Solanum nigrum और S.xanthocarpum जैसे खरपतवार मेजबानों (weed hosts) पर कायम रहता है (perpetuates)। TMV सैप (sap), दूषित उपकरणों (contaminated implements) और कपड़ों, मिट्टी के मलबे और मजदूरों के हाथों से फैलता है। यह कुकुरबिट्स (cucurbits), फलियां (legumes), काली मिर्च (pepper), तंबाकू (tobacco), टमाटर (tomato) और खरपतवार मेजबानों जैसे कई खेती वाले पौधों (cultivated plants) पर कायम (perpetuate) रह सकता है। वायरस मिट्टी में पौधों के मलबे (plant debris) में जीवित रहता है।
सभी खरपतवारों को नष्ट (Destroy) करें और बैंगन के बीज की क्यारियों (brinjal seed beds) और खेत के पास ककड़ी (cucumber), काली मिर्च, तंबाकू, टमाटर लगाने से बचें। बीज क्यारियों में काम करने से पहले हाथ साबुन और पानी से धो लें। बैंगन की पौध संभालने वालों को धूम्रपान (smoking) या तंबाकू चबाने (chewing of tobacco) पर रोक (Prohibit) लगाएं। कीट वैक्टर (insect vectors) को नियंत्रित करने के लिए डाइमेथोएट (Dimethoate) 2 मिली/लीटर या मेटासिस्टॉक्स (Metasystox) 1 मिली/लीटर पानी जैसे कीटनाशकों (insecticides) का छिड़काव (Spray) करें।
कॉलर रॉट (Collar rot) :Sclerotium rolfsii
बीमारी कभी-कभी (occasionally) गंभीर रूप (serious form) में होती है। तने का निचला हिस्सा (lower portion) मिट्टी जनित इनोकुलम (soil borne inoculum - स्क्लेरोटिया / sclerotia) से प्रभावित होता है। छाल-उतारना (Decortications) मुख्य लक्षण है। अंतर्निहित ऊतकों (underlying tissues) के संपर्क (Exposure) और नेक्रोसिस (necrosis) से पौधे का पतन (collapse) हो सकता है। तने पर जमीन की सतह (ground surface) के पास माइसेलिया (mycelia) और स्क्लेरोटिया (sclerotia) को देखा जा सकता है। पौधे के ओज (vigour) की कमी, तने के चारों ओर पानी का जमा होना (accumulation of water), और यांत्रिक चोटें (mechanical injuries) इस बीमारी के विकास (development) में मदद करती हैं।
4 ग्राम Trichoderma viride फॉर्मूलेशन प्रति किलोग्राम बीज के साथ बीज उपचार (Seed treatment) बीमारी को कम करने में मदद करेगा। मैनकोजेब (Mancozeb) @ 2 ग्राम/लीटर पानी का छिड़काव। रोगग्रस्त (diseased) हिस्सों (parts) और पौधे के हिस्सों का संग्रह (Collection) और विनाश (destruction)।
फ्रूट रॉट (Fruit rot) :Phomopsis vexans
भूमि (ground) के पौधे के सभी भागों (plant parts) के ऊपर प्रभावित (Affects) करता है। आमतौर पर सबसे पहले पौधे (seedling) के तनों या पत्तियों पर धब्बे दिखाई देते हैं। पौधे के तने (seedling stems) को जकड़ (Girdle) लें और पौधों को मार डालें। पत्तियों के धब्बे (Leaf spots) स्पष्ट रूप से (clearly) परिभाषित (defined), गोलाकार (circular), व्यास (diameter) में लगभग 1 इंच (inch) तक, और एक संकीर्ण गहरे भूरे रंग के मार्जिन (narrow dark brown margin) के साथ भूरे (brown) से भूरे (gray) रंग के होते हैं। फलों के धब्बे (Fruit spots) बहुत बड़े होते हैं, प्रभावित फल पहले नरम (soft) और पानी वाले (watery) होते हैं लेकिन बाद में काले (black) और ममीफाइड (mummified) हो सकते हैं। धब्बे का केंद्र भूरा (gray) हो जाता है, और काले पिक्निडिया (black pycnidia) विकसित होते हैं।
चोंच (beak) के साथ या बिना पिक्निडिया (Pycnidia) प्रभावित ऊतक में पाए जाते हैं। वे गोलाकार (globose) या अनियमित (irregular) होते हैं। पिक्निडियम में कोनिडियोफोर (Conidiophores) हाइलिन (hyaline), सरल या शाखित होते हैं। कोनिडिया हाइलिन, एक कोशिका (one celled) और उप बेलनाकार (sub cylindrical) हैं। एस्कोस्पोर्स (Ascospores) हाइलिन, संकीर्ण दीर्घवृत्ताकार (narrowly ellipsoid) से कुंद फ़्यूज़ोइड (bluntly fusoid) एक सेप्टम (one septum) के साथ हैं।
कवक (fungus) मिट्टी में संक्रमित (infected) पौधे के मलबे में रहता है। यह बीज जनित (seed borne) है। बीजाणु बारिश की बूंदों (rain splashes) से फैलते हैं। यह फफूंद औजारों (implements) और कीड़ों के माध्यम से फैलती है।
बीज को 30 मिनट के लिए 50˚C पर गर्म पानी में डुबोना चाहिए। नर्सरी (nursery) और खेत में 7 - 10 दिनों के अंतराल (interval) पर डिफोलेशन (difolation) 0.2% या कैप्टान (captan) 0.2% के छिड़काव से बीमारी को नियंत्रित (controls) किया जा सकता है। गहरी गर्मियों की जुताई (Deep summer ploughing), तीन साल की फसल रोटेशन (crop roation) और रोगग्रस्त पौधों (diseased plant) के मलबे का संग्रह (collection) और विनाश (destruction) कुछ अन्य नियंत्रण के तरीके (control methods) हैं। फोमोप्सिस ब्लाइट (Phomopsis blight) को नियंत्रित करने में ज़िनेब 0.2% या बोर्डो मिश्रण 0.8% के साथ खेत में फसल पर छिड़काव (Spraying) प्रभावी (effective) है।