कृषि में रासायनिक उर्वरकों के निरंतर और अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण के विभिन्न घटकों (जल, मृदा, वायु) पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मुख्य पर्यावरणीय चिंताओं को निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है:
यूट्रोफिकेशन (सुपोषण): जब खेतों से उर्वरक ($NO_3^-$) और विशेष रूप से फॉस्फोरस ($PO_4^{3-}$) बहकर जल निकायों (झीलों, नदियों, तालाबों) में पहुंच जाते हैं, तो यह जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में पोषक तत्वों की अधिकता का कारण बनता है। इसके परिणामस्वरूप शैवाल प्रस्फुटन (Algal Bloom) होता है। शैवाल पानी की सतह को पूरी तरह से ढक लेते हैं, जिससे सूरज की रोशनी पानी के नीचे नहीं पहुंच पाती। जब यह शैवाल मरते हैं, तो उनके उर्वरक के लिए बैक्टीरिया पानी में घुली हुई ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen - DO) का अत्यधिक उपयोग करते हैं। इससे पानी में ऑक्सीजन की भारी न्यूनी हो जाती है (BOD - Biological Oxygen Demand बढ़ जाती है), जिसके कारण मछलियां और अन्य जलीय जीव दम घुटने से मर जाते हैं।
नाइट्रेट निक्षालन: उर्वरक उर्वरकों (जैसे यूरिया, अमोनियम सल्फेट) के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी में नाइट्रेट ($NO_3^-$) की मात्रा बढ़ जाती है। नाइट्रेट आयन मिट्टी के कणों (जो नकारात्मक रूप से आवेश होते हैं) द्वारा धारण नहीं किए जाते हैं और इसलिए सिंचाई या बारिश के पानी के साथ आसानी से रिसकर भूजल में मिल जाते हैं।
ब्लू बेबी सिंड्रोम: जब पीने के पानी में नाइट्रेट का स्तर सुरक्षित सीमा (विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के अनुसार 10 mg/L $NO_3-N$ या 45 mg/L $NO_3^-$) से अधिक हो जाता है, तो यह मानव स्वास्थ्य, विशेष रूप से शिशुओं के लिए घातक होता है। शिशु के पेट में बैक्टीरिया नाइट्रेट को नाइट्राइट ($NO_2^-$) में परिवर्तित देते हैं। यह नाइट्राइट रक्त में हीमोग्लोबिन के साथ प्रतिक्रिया करके मेथेमोग्लोबिन बनाता है, जो ऑक्सीजन ले जाने में अक्षम होता है। इसके कारण शिशु का शरीर नीला पड़ने लगता है और ऑक्सीजन की न्यूनी से दम घुटने (Asphyxia) का खतरा होता है।
अमोनिया वाष्पीकरण (Ammonia Volatilization): क्षारीय मृदाओं में या सतह पर यूरिया के प्रयोग से अमोनिया गैस ($NH_3$) के रूप में उर्वरक का भारी नुकसान होता है। यह अमोनिया वायुमंडल में जाकर एसिड रेन (Acid rain) का कारण बन सकती है और वायु गुणवत्ता को खराब करती है।
नाइट्रस ऑक्साइड ($N_2O$) उत्सर्जन: जलमग्न या अवायवीय परिस्थितियों में, विनाइट्रीकरण (Denitrification) प्रक्रिया द्वारा नाइट्रेट उर्वरक गैस ($N_2$) और नाइट्रस ऑक्साइड ($N_2O$) में परिवर्तित जाता है। $N_2O$ एक अत्यंत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है (कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में इसकी ग्लोबल वार्मिंग क्षमता 300 गुना अधिक है)। इसके अलावा, वायुमंडल के समताप मंडल में पहुंचकर $N_2O$ ओजोन परत के क्षरण का मुख्य कारण बनता है।
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