48. कीटनाशक योग: वर्गीकरण, धूल (Dusts) एवं इसके गुण (PESTICIDES FORMULATION: CLASSIFICATION, DUSTS & PROPERTIES)
कीटनाशक योग (Pesticide Formulations)
कीटनाशकों को खेत की परिस्थितियों (field conditions) में उनके अनुप्रयोग (application) को आसान बनाने और उनकी प्रभावशीलता में सुधार करने के लिए तैयार किया जाता है। फॉर्मूलेशन (योग) उनके गुणों, भंडारण (storage), प्रबंधन (handling) और सुरक्षा में भी सुधार करते हैं।
फॉर्मूलेशन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा सक्रिय तत्व (active ingredients - a.i.) को व्यावसायिक उत्पाद बनाने के लिए तरल (liquid) या सूखे मंदक (dry diluents) के साथ पीसकर या पायसीकारी (emulsifiers), स्टेबलाइजर्स (stabilizers) और अन्य फॉर्मूलेशन सहायक (adjuvant) के अतिरिक्त मिश्रण द्वारा उपयोग के लिए तैयार किया जाता है।
फॉर्मूलेशन का वर्गीकरण (Classification of Formulations)
- a) सूखे फॉर्मूलेशन (Dry formulations):
धूल (Dusts), वेटेबल पाउडर (Wettable Powders), कणिकाएं (Granules), बीज कीटाणुनाशक (Seed disinfections), अन्य।
- b) तरल फॉर्मूलेशन (Liquid Formulations):
1. पायस सांद्रण (Emulsion concentrates)
2. तेल सांद्रण (Oil concentrates)
3. अन्य
- c) अन्य (Others)
A) धूल (DUSTS)
धूल (Dusts) में सक्रिय अवयवों (active ingredients) का एक अक्रिय मंदक (inert diluent) के साथ या उसके बिना एक यांत्रिक मिश्रण (mechanical mixture) होता है जिसे 3 से 30 माइक्रोन (µ) के कण आकार में चूर्ण (pulverized) किया जाता है। धूल को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:
- अमिश्रित जहरीला एजेंट (Undiluted toxic agent): जैसे- सोडियम फ्लोराइड (sodium fluoride)।
- सक्रिय मंदक के साथ जहरीला एजेंट (Toxic agent with an active diluent): जैसे- सल्फर के साथ रोटेनोन (rotenone with sulphur)।
- अक्रिय मंदक के साथ जहरीला एजेंट (Toxic agent with an inert diluent): जैसे- पाइरोफिलाइट (pyrophyllite) के साथ डीडीटी (DDT)।
- अक्रिय धूल (Inert dusts): जैसे- सिलिका (silica)।
कैल्शियम आर्सेनेट (calcium arsenate), सोडियम फ्लोराइड और पिसे हुए पाइरेथ्रम (pyrethrum) फूलों जैसे कीटनाशकों को मंदक (diluent) के साथ धूल के रूप में लगाया जा सकता है। रोटेनोन जैसे अन्य को सल्फर जैसे कीटनाशकों के साथ मिलाया जा सकता है और लगाया जा सकता है। अधिक क्षेत्र को कवर करने के लिए और रसायन की फाइटोटॉक्सिसिटी (phytotoxicity - पादप विषाक्तता) को कम करने के लिए या रासायनिक/भौतिक गुणों में सुधार करने के लिए टैलक (talc) जैसी अक्रिय सामग्री के साथ अन्य को पतला (dilute) किया जा सकता है।
जब सिलिका, लकड़ी का बुरादा (saw dust), राख (ash) जैसी अक्रिय सामग्री का उपयोग किया जाता है, तो वे कीट की सतह पर घर्षण (abrasions) पैदा कर सकते हैं या नमी को अवशोषित करके उन्हें सुखा (desiccate) सकते हैं।
निर्माण की विधि (Method of Manufacture)
धूल निर्माण के लिए दो विधियाँ कार्यरत हैं:
1. बॉल मिल विधि (Ball Mill Method)
इस विधि में सामग्री जैसे सक्रिय तत्व (active ingredients) और फिलर्स (fillers) जैसे सोप स्टोन, टैलक या पाइरोफिलाइट को बॉल मिल में बारीकी से पीसा (ground) जाता है और एक यांत्रिक मिश्रण के सम्मिश्रण (blending) संचालन द्वारा एक साथ मिलाया जाता है। पीसने की प्रक्रिया में, ऊष्मा विकसित होती है और तापमान बढ़ता है, जो कीटनाशक को पिघला देता है और इस प्रकार अक्रिय सामग्री (inert material) पर एक बारीक कोटिंग (coating) देता है। पीसने की प्रक्रिया में कीटनाशक कण मंदक (diluents) के बीच वितरित हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप अलग-अलग पीसने और बाद में मिलाने की तुलना में सक्रिय अवयव को मंदक के साथ पीसने से अधिक कुशल (efficient) फॉर्मूलेशन मिलता है। पिसाई जितनी बारीक होगी धूल उतनी ही प्रभावी होगी। हालांकि इस प्रक्रिया में गांठें (lumps) बन सकती हैं और इन गांठों को हवा के एक शक्तिशाली जेट के माध्यम से महीन कणों में तोड़ दिया जाता है। केवल एक निश्चित आकार के कणों को हवा के जेट द्वारा ऊपर की ओर ले जाया जाता है और निर्धारित सीमा से भारी कण फिर से पीसने के लिए बॉल मिल में वापस गिर जाते हैं।
2. सॉल्वेंट मिक्स विधि / विषाक्त स्प्रे विधि (Solvent Mix Method / Toxicant Spray method)
सम्मिश्रण (blending) प्रक्रिया के दौरान धूल के मिश्रण में एक तरल के रूप में विषाक्त (toxicant) पदार्थ का छिड़काव किया जाता है। विलायक (solvent) को वाष्पित (evaporate) होने दिया जा सकता है या यह पेट्रोलियम अंश (petroleum fraction) का उच्च उबलने वाला विलायक (higher boiling solvent) हो सकता है.
धूल के गुण (Properties of Dusts)
- 3. थोक घनत्व (Bulk Density): यह कण के आकार, आकृति और वास्तविक घनत्व पर निर्भर करता है। यह हल्केपन (fluffiness) का संकेत है। एक अच्छा मंदक (diluent) वह है जिसका वजन 300-450 किग्रा/घन मीटर (0.3 g/cc) होता है। हल्की सामग्री में ले जाने की क्षमता (carrying power) कम होती है और वे अधिक समय तक हवा में रहती हैं। भारी सामग्री तेजी से गिरती है।
- 4. कण घनत्व (Particle Density): कण घनत्व ठोस पदार्थों का वास्तविक घनत्व है, मानो उनके बीच कोई वायु स्थान (air spaces) न हो। यह डस्टर (duster) में फीडिंग (feeding) को प्रभावित करता है। वहन क्षमता (Carrying power), अलगाव (segregation) और धूल का बसना (settling) कण घनत्व पर निर्भर करता है।
- 5. इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्ज (Electrostatic Charge): यह कणों और डस्टिंग उपकरण के बीच घर्षण (friction) के कारण उत्पन्न होता है। उच्च सिलिका वाले पदार्थ ब्लोअर (blower) को एक प्रकार का चार्ज देते हैं और डस्ट स्टीम को रिचार्ज करते हैं। कणों पर इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्ज पौधों की सतहों और धूल के वितरण पर धूल के आकर्षण (attraction) को प्रभावित करते हैं।
- 6. प्रवाह क्षमता (Flowability): यह डस्टिंग उपकरण की फीड दर (feed rate) को इंगित करता है। ढलान का कोण (angle of slope) जो प्रवाह क्षमता का एक उपाय है, उसे एक फ़नल के माध्यम से धूल को डिस्क पर गिराकर मापा जाता है। कोण जितना बड़ा होगा (Greater the angle), प्रवाह क्षमता उतनी ही खराब होगी (poorer is the flowability)। रेशेदार (fibrous) या सुई के आकार (needle shaped) के कणों वाली धूल में गोलाकार कणों वाली धूल की तुलना में धीमी फीड दर होती है।
- 7. अन्य गुण (Other Properties):
a) कठोरता (Hardness): उपकरण के घर्षण (abrasion) का कारण बनती है।
b) अवशोषण (Absorption): केकिंग (caking / जमना) को प्रभावित करता है।
c) अधिशोषण (Adsorption): गांठ (lumps) बनने की प्रवृत्ति को बढ़ाता है।
हालांकि छिड़काव (spraying) की तुलना में डस्टिंग (dusting) कम प्रभावी है, लेकिन पानी की कमी वाले क्षेत्रों में यह उपयुक्त है। आमतौर पर 10-50 किलोग्राम डस्ट लगाई जाती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल
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