पूर्ण यादृच्छिक अभिकल्पना - विवरण (Description) - लेआउट (Layout) - प्रसरण विश्लेषण (Analysis of Variance) - लाभ (Advantages) तथा हानियां (Disadvantages)
CRD सबसे बुनियादी और सरल एकल-कारक प्रायोगिक अभिकल्पना (Single Factor Experimental Design) है। इस अभिकल्पना में सभी उपचारों (Treatments) को संपूर्ण प्रायोगिक इकाइयों (Plots) पर पूर्णतः यादृच्छिक रूप से आवंटित किया जाता है, जिससे प्रत्येक प्रायोगिक इकाई को कोई भी उपचार प्राप्त होने का समान अवसर होता है।
CRD केवल तभी उपयुक्त होती है जब संपूर्ण प्रायोगिक सामग्री पूर्ण रूप से समरूप/सजातीय (Homogeneous) हो। चूँकि खुले खेतों में मृदा उर्वरता की विषमता बहुत अधिक होती है, इसलिए क्षेत्रीय प्रयोगों (Field Experiments) में CRD का उपयोग नहीं किया जाता है।
यह अभिकल्पना मुख्य रूप से प्रयोगशाला प्रयोगों (Laboratory Experiments), ग्रीनहाउस अध्ययनों (Greenhouse Studies), गमलों के परीक्षणों तथा पशु पोषण प्रयोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जहाँ प्रायोगिक वातावरण व सामग्री को समरूप बनाए रखना संभव होता है।
पूर्ण यादृच्छिक अभिकल्पना में सभी प्रायोगिक इकाइयों को बिना किसी खंड (Block) के एक ही सजातीय समूह में रखा जाता है।
विभिन्न इकाइयों को उपचार आवंटित करने की यादृच्छीकरण प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी की जाती है:
जहाँ:
| उपचार (Treatments) | \( T_1 \) | \( T_2 \) | \( \dots \) | \( T_i \) | \( \dots \) | \( T_k \) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रेक्षण (Observations) | \( y_{11} \) | \( y_{21} \) | \( \dots \) | \( y_{i1} \) | \( \dots \) | \( y_{k1} \) |
| \( y_{12} \) | \( y_{22} \) | \( \dots \) | \( y_{i2} \) | \( \dots \) | \( y_{k2} \) | |
| \( \dots \) | \( \dots \) | \( \dots \) | \( \dots \) | \( \dots \) | \( \dots \) | |
| \( y_{1r_1} \) | \( y_{2r_2} \) | \( \dots \) | \( y_{ir_i} \) | \( \dots \) | \( y_{kr_k} \) | |
| कुल योग (Total) | \( Y_1 \) | \( Y_2 \) | \( \dots \) | \( Y_i \) | \( \dots \) | \( Y_k \) |
सभी प्रेक्षणों का कुल महायोग (Grand Total) = GT
शून्य परिकल्पना (Null Hypothesis):
\( H_0: \mu_1 = \mu_2 = \dots = \mu_k \) (अर्थात् सभी उपचारों के प्रभाव समान हैं)
वैकल्पिक परिकल्पना (Alternative Hypothesis):
\( H_1: \) कम से कम दो उपचारों के प्रभाव में सार्थक अंतर है।
1. संशोधन गुणांक (Correction Factor - CF):
जहाँ \( N = \sum r_i \) (कुल प्रेक्षणों की संख्या)
2. कुल वर्गों का योग (Total Sum of Squares - TSS):
3. उपचार वर्गों का योग (Treatment Sum of Squares - TrSS):
4. प्रायोगिक त्रुटि वर्गों का योग (Error Sum of Squares - ESS):
5. CRD हेतु प्रसरण विश्लेषण (ANOVA) तालिका:
| प्रसरण के स्रोत (Sources of Variation) | स्वतंत्रता की कोटि (d.f.) | वर्गों का योग (SS) | माध्य वर्ग योग (MSS) | F-अनुपात (परिकलित) |
|---|---|---|---|---|
| उपचार (Treatments) | \( t - 1 \) | \( TrSS \) | \( TrMS = \frac{TrSS}{t - 1} \) | \( \frac{TrMS}{EMS} \) |
| प्रायोगिक त्रुटि (Error) | \( N - t \) | \( ESS \) | \( EMS = \frac{ESS}{N - t} \) | |
| कुल (Total) | \( N - 1 \) | \( TSS \) |
6. सार्थकता परीक्षण: परिकलित F-मान की तुलना \( (t-1) \) और \( (N-t) \) स्वतंत्रता की कोटि पर 5% या 1% सार्थकता स्तर के सारणीकृत F-मान से की जाती है। यदि परिकलित F-मान अधिक हो, तो शून्य परिकल्पना \( H_0 \) अस्वीकार हो जाती है।
7. यदि उपचार प्रभाव सार्थक (Significant) पाया जाता है, तो उपचार माध्यों की तुलना हेतु क्रांतिक अंतर की गणना की जाती है।
8. क्रांतिक अंतर (Critical Difference - CD / LSD):
जहाँ अंतर की मानक त्रुटि \( SE_d = \sqrt{EMS \left(\frac{1}{r_i} + \frac{1}{r_j}\right)} \)
समान पुनरावृत्ति (\( r \)) की स्थिति में: \( SE_d = \sqrt{\frac{2 \times EMS}{r}} \)
\( t_{\alpha} \) त्रुटि की स्वतंत्रता की कोटि (\( N - t \)) पर निर्दिष्ट सार्थकता स्तर (5% या 1%) पर \( t \) का सारणीकृत मान है।
CRD का उपयोग किसके साथ किया जा सकता है:
(a) समान पुनरावृत्ति (Equal Replication)
(b) असमान पुनरावृत्ति (Unequal Replication)
(c) समान और असमान दोनों पुनरावृत्ति
(d) एकल पुनरावृत्ति
उत्तर (Ans): (c) समान और असमान दोनों पुनरावृत्ति
जब 5 उपचार हों और प्रत्येक को 4 बार दोहराया (Replicated) गया हो, तो कुल प्रायोगिक प्लॉटों की संख्या क्या होगी:
(a) 5
(b) 4
(c) 9
(d) 20
उत्तर (Ans): (d) 20