आंकड़े (Data)

व्याख्यान 1 (Lecture 1)

आंकड़ों की परिभाषा — आंकड़ों का संकलन — प्राथमिक और द्वितीयक आंकड़े — आंकड़ों का वर्गीकरण — गुणात्मक और मात्रात्मक आंकड़े।

मूल अवधारणाएं (Basic Concepts)

सांख्यिकी (Statistics) की परिभाषा:

संख्यात्मक या मात्रात्मक तथ्यों के संग्रह को आंकड़े (Data) कहते हैं।

सांख्यिकी (Statistics) वह विज्ञान है जो निम्नलिखित चरणों से संबंधित है:

  1. आंकड़ों का संकलन (Collection of data)
  2. आंकड़ों का संगठन (Organization) या वर्गीकरण (Classification)
  3. आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण (Presentation of data)
  4. आंकड़ों का विश्लेषण (Analysis of data)
  5. आंकड़ों की व्याख्या या निर्वचन (Interpretation of data)

ध्यान दें कि सामान्य बोलचाल के विपरीत आंकड़े और सांख्यिकी दोनों समान नहीं हैं। आंकड़े कच्चे तथ्य होते हैं, जबकि सांख्यिकी उनके वैज्ञानिक अध्ययन की विधि है।

आंकड़ों के उदाहरण (Examples of Data)

  1. किसी ब्लॉक (Block) में कुल किसानों की संख्या।
  2. किसी निश्चित समयावधि में दर्ज की गई वर्षा।
  3. किसी राज्य में धान की फसल के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल।

सांख्यिकी के कार्य (Functions of Statistics)

सांख्यिकी जटिल तथ्यों को सरल बनाती है और सूचनाओं को निश्चित रूप में प्रस्तुत करती है। यह उपयुक्त नीतियां बनाने में मदद करती है, तुलना को आसान बनाती है और भविष्य के लिए सटीक पूर्वानुमान (Forecasting) लगाने में सहायता करती है।

सांख्यिकी के उपयोग (Uses of Statistics)

सांख्यिकी मानव जीवन और विज्ञान के लगभग सभी क्षेत्रों में उपयोगी है। इसका उपयोग राज्य प्रशासन, उद्योग, व्यापार, अर्थशास्त्र, कृषि अनुसंधानकर्ताओं, बैंकिंग और बीमा कंपनियों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

सांख्यिकी की सीमाएं (Limitations of Statistics)

  1. सांख्यिकीय सिद्धांतों को केवल तभी लागू किया जा सकता है जब अध्ययन सामग्री में परिवर्तनशीलता (Variability) मौजूद हो।
  2. सांख्यिकी केवल समूहों या समग्र (Aggregates) का अध्ययन करती है, किसी एकल या व्यक्तिगत इकाई का नहीं।
  3. सांख्यिकीय निष्कर्ष पूर्णतः यथार्थ (Exact) नहीं होते, बल्कि वे औसत या संभावनाओं पर आधारित होते हैं।
  4. सांख्यिकी का दुरुपयोग (Misuse) भी संभव है यदि इसे सही तरीके से न समझा जाए।

आंकड़ों का संकलन (Collection of Data)

आंकड़ों को विभिन्न प्रतिचयन विधियों (Sampling methods) या वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से एकत्र किया जाता है।

आंकड़े (Data)

जनगणना (Censuses), सर्वेक्षणों (Surveys), दैनिक रिकॉर्ड या अन्य स्रोतों से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी को कच्चे आंकड़े (Raw data) कहते हैं। जब इन कच्चे आंकड़ों को समूहों या वर्गों में व्यवस्थित कर दिया जाता है, तो उन्हें वर्गीकृत आंकड़े (Grouped data) कहा जाता है।

आंकड़े मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:

  1. प्राथमिक आंकड़े (Primary data)
  2. द्वितीयक आंकड़े (Secondary data)

प्राथमिक आंकड़े (Primary Data)

अनुसंधानकर्ता द्वारा वास्तविक अवलोकन (Observation), मापन या प्रत्यक्ष गणना द्वारा पहली बार एकत्र किए गए मौलिक आंकड़ों को प्राथमिक आंकड़े कहते हैं।

प्राथमिक आंकड़े एकत्र करने की विधियां (Methods of Collection of Primary Data)

प्राथमिक आंकड़े निम्नलिखित पांच मुख्य विधियों द्वारा एकत्र किए जाते हैं:

  1. प्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार (Direct personal interviews)
  2. अप्रत्यक्ष मौखिक साक्षात्कार (Indirect oral interviews)
  3. स्थानीय संवाददाताओं से सूचना (Information from correspondents)
  4. डाक द्वारा प्रश्नावली विधि (Mailed questionnaire method)
  5. प्रगणकों द्वारा अनुसूचियां भरना (Schedules sent through enumerators)

1. प्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार (Direct Personal Interviews)

जिन व्यक्तियों से सूचना एकत्र की जाती है, उन्हें सूचक (Informants) या उत्तरदाता (Respondents) कहते हैं। अन्वेषक स्वयं उत्तरदाता से व्यक्तिगत रूप से मिलकर आवश्यक जानकारी प्राप्त करता है।

गुण (Merits):

  1. एकत्रित जानकारी अत्यधिक शुद्ध और एकरूप होती है। अन्वेषक मौके पर ही सूचकों के सभी संशयों को दूर कर सकता है।
  2. व्यक्तिगत संपर्क के कारण लोग स्वेच्छा से जानकारी देते हैं। इस विधि में उत्तर मिलने की दर अन्य सभी विधियों से अधिक रहती है।

सीमाएं (Limitations):

यदि उत्तरदाताओं की संख्या बहुत अधिक हो और वे बड़े क्षेत्र में फैले हों, तो यह विधि बहुत खर्चीली होती है और इसमें समय भी अधिक लगता है।

2. अप्रत्यक्ष मौखिक साक्षात्कार (Indirect Oral Interviews)

इस विधि में अन्वेषक सीधे उत्तरदाता से न मिलकर संबंधित गवाहों, पड़ोसियों, मित्रों या तीसरे पक्ष से संपर्क करता है, जो आवश्यक जानकारी देने में सक्षम होते हैं।

गुण (Merits):

सीमित क्षेत्र के सर्वेक्षणों के लिए इसमें समय और लागत दोनों कम लगते हैं। कई जटिल और संवेदनशील जांचों में यही एकमात्र व्यावहारिक तरीका होता है।

सीमाएं (Limitations):

इस विधि से प्राप्त जानकारी पूरी तरह विश्वसनीय नहीं होती। गवाह या अन्वेषक द्वारा तथ्यों को तोड़े-मरोड़े जाने की आशंका बनी रहती है।

3. स्थानीय संवाददाताओं से सूचना (Information from Correspondents)

अन्वेषक विभिन्न स्थानों पर स्थानीय प्रतिनिधियों या संवाददाताओं को नियुक्त करता है, जो समय-समय पर अपने क्षेत्र की सूचनाएं संकलित करके भेजते रहते हैं।

गुण (Merits):

सीमाएं (Limitations):

संवाददाताओं की व्यक्तिगत लापरवाही या पक्षपात के कारण आंकड़ों की शुद्धता प्रभावित हो सकती है।

4. डाक द्वारा प्रश्नावली विधि (Mailed Questionnaire Method)

इस विधि में प्रश्नों की एक व्यवस्थित सूची तैयार करके डाक द्वारा सूचकों के पास भेजी जाती है। प्रश्नों की इस मुद्रित सूची को तकनीकी रूप से प्रश्नावली (Questionnaire) कहते हैं।

गुण (Merits):

  1. यह अपेक्षाकृत काफी सस्ती और सरल विधि है।
  2. विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में फैले उत्तरदाताओं के लिए यह सर्वोत्तम विधि है।
  3. यदि उत्तरदाता समय पर उत्तर भेज दें, तो कार्य तेजी से पूरा हो जाता है।

सीमाएं (Limitations):

  1. यह विधि केवल साक्षर व्यक्तियों के लिए उपयोगी है; अशिक्षित सूचकों पर इसे लागू नहीं किया जा सकता।
  2. अक्सर कई उत्तरदाता प्रश्नावली भरकर वापस नहीं भेजते। इसे अनुत्तर (Non-response) कहते हैं।

5. प्रगणकों द्वारा अनुसूचियां भरना (Schedules Sent through Enumerators)

इस विधि में प्रशिक्षित प्रगणक (Enumerators) अनुसूचियां (Schedules) लेकर सूचकों के पास जाते हैं और आमने-सामने बैठकर उनसे पूछकर उत्तर भरते हैं।

गुण (Merits):

  1. अशिक्षित और ग्रामीण सूचकों से भी सरलता से आंकड़े एकत्र किए जा सकते हैं।
  2. प्रगणक स्वयं उपस्थित रहते हैं, इसलिए अनुत्तर (Non-response) की समस्या लगभग शून्य होती है।
  3. प्राप्त जानकारी अत्यधिक शुद्ध और विश्वसनीय होती है क्योंकि प्रगणक इसके लिए प्रशिक्षित होते हैं।

सीमाएं (Limitations):

  1. यह प्राथमिक आंकड़े एकत्र करने की सबसे महंगी और श्रमसाध्य विधि है।
  2. एकरूप और सही आंकड़े जुटाने के लिए प्रगणकों को व्यापक प्रशिक्षण देना आवश्यक होता है।

द्वितीयक आंकड़े (Secondary Data)

जो आंकड़े किसी अन्य व्यक्ति, संस्था या एजेंसी द्वारा पहले ही एकत्र और दर्ज किए जा चुके हों, उन्हें द्वितीयक आंकड़े कहते हैं।

किसी अन्वेषक द्वारा अपने उपयोग के लिए जुटाए गए आंकड़े उसके लिए प्राथमिक होते हैं, परंतु जब कोई अन्य व्यक्ति उनका उपयोग करता है, तो वे द्वितीयक आंकड़े बन जाते हैं। यह विधि कम खर्चीली है, लेकिन संभव है कि इसमें वर्तमान शोध के अनुकूल सभी वांछित विवरण न मिलें।

द्वितीयक आंकड़े दो प्रकार के स्रोतों से प्राप्त होते हैं: प्रकाशित स्रोत और अप्रकाशित स्रोत।

प्रकाशित आंकड़ों के स्रोत (Sources of Published Data)

  1. केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों के आधिकारिक सांख्यिकीय प्रकाशन।
  2. सरकारी समितियों और जांच आयोगों की रिपोर्ट।
  3. शोध संस्थानों और शैक्षिक संगठनों द्वारा प्रकाशित शोध-पत्रिकाएं।
  4. व्यापारिक एवं तकनीकी पत्रिकाएं।
  5. वाणिज्य मंडलों (Chambers of Commerce), व्यापार संघों और बैंकों की वार्षिक रिपोर्ट।
  6. विदेशी सरकारों तथा अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO), यूनेस्को (UNESCO) आदि के आधिकारिक प्रकाशन।

अप्रकाशित आंकड़ों के स्रोत (Sources of Unpublished Data)

सभी सांख्यिकीय आंकड़े प्रकाशित नहीं किए जाते। उदाहरण के लिए, ग्राम स्तर के राजस्व अधिकारी (पटवारी) फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन का आंतरिक रिकॉर्ड रखते हैं। इसी प्रकार निजी कंपनियां अपने कर्मचारियों, लाभ और बिक्री का आंतरिक ब्योरा रखती हैं। ये अप्रकाशित रिकॉर्ड भी आवश्यकता पड़ने पर द्वितीयक आंकड़ों के रूप में उपयोग किए जाते हैं।

द्वितीयक आंकड़ों की आवश्यक विशेषताएं (Characteristics of Secondary Data)

द्वितीयक आंकड़ों का उपयोग करने से पहले यह जांचना जरूरी है कि वे विश्वसनीय (Reliable), पर्याप्त (Adequate), उपयुक्त (Suitable), शुद्ध (Accurate), पूर्ण (Complete) और सुसंगत (Consistent) हों।

चर (Variables)

जैविक विज्ञान में परिवर्तनशीलता एक स्वाभाविक लक्षण है। ऐसा कोई भी मात्रात्मक या गुणात्मक लक्षण, जो एक ही समूह में एक अवलोकन से दूसरे अवलोकन में बदलता रहता है, उसे चर (Variable) कहते हैं।

मात्रात्मक आंकड़े (Quantitative Data)

जब वर्गीकरण का आधार मात्रा या संख्यात्मक परिमाण होता है, तो उन्हें मात्रात्मक आंकड़े कहते हैं। इनमें अवलोकनों को किलोग्राम, लीटर, सेंटीमीटर आदि इकाइयों में मापा जाता है। उदाहरण: बीजों का भार, पौधों की ऊंचाई।

गुणात्मक आंकड़े (Qualitative Data)

जब अवलोकन किसी गुण या विशेषता के आधार पर दर्ज किए जाते हैं, तो उन्हें गुणात्मक आंकड़े कहते हैं। उदाहरण: फसल की किस्में, बीजों का आकार, मृदा का प्रकार। सांख्यिकी में गुणात्मक चरों को गुण (Attributes) कहते हैं।

आंकड़ों का वर्गीकरण (Classification of Data)

आंकड़ों को उनकी सामान्य विशेषताओं और समानताओं के आधार पर विभिन्न समूहों या वर्गों में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को वर्गीकरण (Classification) कहते हैं।

आंकड़ों का वर्गीकरण मुख्य रूप से चार आधारों पर किया जाता है:

  1. भौगोलिक आधार (Geographical)
  2. कालानुक्रमिक आधार (Chronological)
  3. गुणात्मक आधार (Qualitative)
  4. मात्रात्मक आधार (Quantitative)

1. भौगोलिक या स्थानिक वर्गीकरण (Geographical / Spatial Classification)

जब आंकड़ों को क्षेत्र, राज्य, जिले या स्थान के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।

भारत में फसल क्षेत्र के आंकड़ों का भौगोलिक वर्गीकरण नीचे तालिका में दर्शाया गया है:

क्षेत्र (Region) क्षेत्रफल — हेक्टेयर में (Area in hectares)
मध्य भारत (Central India) -
पश्चिम (West) -
उत्तर (North) -
पूर्व (East) -
दक्षिण (South) -

2. कालानुक्रमिक या सामयिक वर्गीकरण (Chronological / Temporal Classification)

जब आंकड़ों को समय (वर्ष, माह, दिन) के आधार पर कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है।

भारत में विभिन्न वर्षों के खाद्यान्न उत्पादन के आंकड़े:

वर्ष (Year) उत्पादन — टन में (Production in tonnes)
1990-91 -
1991-92 -
1992-93 -
1993-94 -
1994-95 -

3. गुणात्मक वर्गीकरण (Qualitative Classification)

जब आंकड़ों को उनके गुणों या लक्षणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। जैसे किसानों को उनकी जोत के प्रकार के अनुसार बांटना:

किसानों का प्रकार (Type of Farmers) किसानों की संख्या (Number of Farmers)
सीमांत (Marginal) 907
मध्यम (Medium) 1041
बड़े (Large) 1948
कुल (Total) 3896

गुणात्मक वर्गीकरण दो प्रकार का होता है:

  1. सरल वर्गीकरण (Simple classification)
  2. बहुविध वर्गीकरण (Manifold classification)
(i) सरल वर्गीकरण (Simple Classification)

यह वर्गीकरण केवल एक ही गुण पर आधारित होता है।

उदाहरण:

कृषि योग्य भूमि: वर्षा आधारित (Rainfed) / सिंचित (Irrigated)

किसानों का शिक्षा स्तर: साक्षर (Literate) / निरक्षर (Illiterate)

(ii) बहुविध वर्गीकरण (Manifold Classification)

यह वर्गीकरण एक साथ दो या दो से अधिक गुणों पर आधारित होता है।

उदाहरण: खेतों की संख्या का वर्गीकरण:

खेतों की कुल संख्या (No. of Farms)
वर्षा आधारित (Rainfed) | सिंचित (Irrigated)
खाद्य फसलें एवं सब्जियां/अन्य | खाद्य फसलें एवं सब्जियां/अन्य

4. मात्रात्मक वर्गीकरण (Quantitative Classification)

जब आंकड़ों को संख्यात्मक परिमाण या नाप-तौल के आधार पर वर्गों में बांटा जाता है। उदाहरण के लिए, किसी ब्लॉक में किसानों की भूमि जोत का आकार:

भूमि जोत — हेक्टेयर में (Land Holding - Hectares) किसानों की संख्या (Number of Farmers)
< 1 442
1-2 908
2-5 471
>5 124
कुल (Total) 1945

प्राथमिक और द्वितीयक आंकड़ों में अंतर (Difference between Primary and Secondary Data)

प्राथमिक आंकड़े (Primary Data) द्वितीयक आंकड़े (Secondary Data)
1. मौलिकता (Originality): ये मौलिक आंकड़े होते हैं क्योंकि अनुसंधानकर्ता इन्हें स्वयं पहली बार एकत्र करता है। ये आंकड़े मौलिक नहीं होते क्योंकि ये अन्य एजेंसियों द्वारा पहले से एकत्र रिकॉर्ड से लिए जाते हैं।
2. उपयुक्तता (Suitability): यदि इन्हें सावधानीपूर्वक और व्यवस्थित ढंग से एकत्र किया गया हो, तो ये वर्तमान उद्देश्य के पूर्णतः अनुकूल होते हैं। ये वर्तमान जांच के उद्देश्य के अनुकूल हो भी सकते हैं और नहीं भी, इसलिए इनमें समायोजन की आवश्यकता होती है।
3. समय और लागत (Time and Cost): इनके संकलन में अधिक धन, समय और श्रम की आवश्यकता होती है। ये पहले से उपलब्ध होते हैं, इसलिए इनके संकलन में बहुत कम समय और धन खर्च होता है।
4. सावधानी (Precaution): इनके उपयोग में विशेष सावधानी की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि अनुसंधानकर्ता इनकी प्रकृति से परिचित होता है। इनका उपयोग करने से पहले इनकी शुद्धता और उपयुक्तता की बहुत सावधानीपूर्वक जांच करनी पड़ती है।

अभ्यास प्रश्न (Questions)

  1. एक सरल तालिका (Simple Table) में निम्नलिखित पर आंकड़े होते हैं:

    a) दो विशेषताएं (Two characteristics)
    b) कई विशेषताएं (Several characteristics)
    c) एक विशेषता (One characteristic)
    d) तीन विशेषताएं (Three characteristics)

    उत्तर (Ans): c) एक विशेषता (One characteristic)

  2. जब एकत्र आंकड़ों को समय (Time) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, तो उसे कहते हैं:

    a) मात्रात्मक वर्गीकरण (Quantitative classification)
    b) गुणात्मक वर्गीकरण (Qualitative classification)
    c) भौगोलिक वर्गीकरण (Geographical classification)
    d) कालानुक्रमिक वर्गीकरण (Chronological classification)

    उत्तर (Ans): d) कालानुक्रमिक वर्गीकरण (Chronological classification)

  3. भौगोलिक वर्गीकरण का अर्थ क्षेत्र या स्थान के अनुसार आंकड़ों का वर्गीकरण है।

    उत्तर (Ans): सत्य (True)

  4. आंकड़ों को पंक्तियों (Rows) और स्तंभों (Columns) में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया सारणीकरण (Tabulation) कहलाती है।

    उत्तर (Ans): सत्य (True)

  5. फसल की उपज (Yield) संबंधी आंकड़े एक मात्रात्मक चर (Quantitative variable) हैं।

    उत्तर (Ans): सत्य (True)

  6. गुणात्मक चरों (Qualitative variables) को सांख्यिकी में गुण (Attributes) भी कहा जाता है।

    उत्तर (Ans): सत्य (True)

  7. प्राथमिक आंकड़े (Primary data) और द्वितीयक आंकड़े (Secondary data) को परिभाषित कीजिए।
  8. सारणीकरण (Tabulation) के मुख्य लाभ बताइए।
  9. आंकड़ों के वर्गीकरण के विभिन्न प्रकारों पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  10. एक अच्छी सांख्यिकीय तालिका (Good table) की आवश्यक विशेषताएं क्या हैं?
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।

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