आंकड़ों की परिभाषा — आंकड़ों का संकलन — प्राथमिक और द्वितीयक आंकड़े — आंकड़ों का वर्गीकरण — गुणात्मक और मात्रात्मक आंकड़े।
सांख्यिकी (Statistics) की परिभाषा:
संख्यात्मक या मात्रात्मक तथ्यों के संग्रह को आंकड़े (Data) कहते हैं।
सांख्यिकी (Statistics) वह विज्ञान है जो निम्नलिखित चरणों से संबंधित है:
ध्यान दें कि सामान्य बोलचाल के विपरीत आंकड़े और सांख्यिकी दोनों समान नहीं हैं। आंकड़े कच्चे तथ्य होते हैं, जबकि सांख्यिकी उनके वैज्ञानिक अध्ययन की विधि है।
सांख्यिकी जटिल तथ्यों को सरल बनाती है और सूचनाओं को निश्चित रूप में प्रस्तुत करती है। यह उपयुक्त नीतियां बनाने में मदद करती है, तुलना को आसान बनाती है और भविष्य के लिए सटीक पूर्वानुमान (Forecasting) लगाने में सहायता करती है।
सांख्यिकी मानव जीवन और विज्ञान के लगभग सभी क्षेत्रों में उपयोगी है। इसका उपयोग राज्य प्रशासन, उद्योग, व्यापार, अर्थशास्त्र, कृषि अनुसंधानकर्ताओं, बैंकिंग और बीमा कंपनियों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
आंकड़ों को विभिन्न प्रतिचयन विधियों (Sampling methods) या वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से एकत्र किया जाता है।
जनगणना (Censuses), सर्वेक्षणों (Surveys), दैनिक रिकॉर्ड या अन्य स्रोतों से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी को कच्चे आंकड़े (Raw data) कहते हैं। जब इन कच्चे आंकड़ों को समूहों या वर्गों में व्यवस्थित कर दिया जाता है, तो उन्हें वर्गीकृत आंकड़े (Grouped data) कहा जाता है।
आंकड़े मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
अनुसंधानकर्ता द्वारा वास्तविक अवलोकन (Observation), मापन या प्रत्यक्ष गणना द्वारा पहली बार एकत्र किए गए मौलिक आंकड़ों को प्राथमिक आंकड़े कहते हैं।
प्राथमिक आंकड़े निम्नलिखित पांच मुख्य विधियों द्वारा एकत्र किए जाते हैं:
जिन व्यक्तियों से सूचना एकत्र की जाती है, उन्हें सूचक (Informants) या उत्तरदाता (Respondents) कहते हैं। अन्वेषक स्वयं उत्तरदाता से व्यक्तिगत रूप से मिलकर आवश्यक जानकारी प्राप्त करता है।
गुण (Merits):
सीमाएं (Limitations):
यदि उत्तरदाताओं की संख्या बहुत अधिक हो और वे बड़े क्षेत्र में फैले हों, तो यह विधि बहुत खर्चीली होती है और इसमें समय भी अधिक लगता है।
इस विधि में अन्वेषक सीधे उत्तरदाता से न मिलकर संबंधित गवाहों, पड़ोसियों, मित्रों या तीसरे पक्ष से संपर्क करता है, जो आवश्यक जानकारी देने में सक्षम होते हैं।
गुण (Merits):
सीमित क्षेत्र के सर्वेक्षणों के लिए इसमें समय और लागत दोनों कम लगते हैं। कई जटिल और संवेदनशील जांचों में यही एकमात्र व्यावहारिक तरीका होता है।
सीमाएं (Limitations):
इस विधि से प्राप्त जानकारी पूरी तरह विश्वसनीय नहीं होती। गवाह या अन्वेषक द्वारा तथ्यों को तोड़े-मरोड़े जाने की आशंका बनी रहती है।
अन्वेषक विभिन्न स्थानों पर स्थानीय प्रतिनिधियों या संवाददाताओं को नियुक्त करता है, जो समय-समय पर अपने क्षेत्र की सूचनाएं संकलित करके भेजते रहते हैं।
गुण (Merits):
सीमाएं (Limitations):
संवाददाताओं की व्यक्तिगत लापरवाही या पक्षपात के कारण आंकड़ों की शुद्धता प्रभावित हो सकती है।
इस विधि में प्रश्नों की एक व्यवस्थित सूची तैयार करके डाक द्वारा सूचकों के पास भेजी जाती है। प्रश्नों की इस मुद्रित सूची को तकनीकी रूप से प्रश्नावली (Questionnaire) कहते हैं।
गुण (Merits):
सीमाएं (Limitations):
इस विधि में प्रशिक्षित प्रगणक (Enumerators) अनुसूचियां (Schedules) लेकर सूचकों के पास जाते हैं और आमने-सामने बैठकर उनसे पूछकर उत्तर भरते हैं।
गुण (Merits):
सीमाएं (Limitations):
जो आंकड़े किसी अन्य व्यक्ति, संस्था या एजेंसी द्वारा पहले ही एकत्र और दर्ज किए जा चुके हों, उन्हें द्वितीयक आंकड़े कहते हैं।
किसी अन्वेषक द्वारा अपने उपयोग के लिए जुटाए गए आंकड़े उसके लिए प्राथमिक होते हैं, परंतु जब कोई अन्य व्यक्ति उनका उपयोग करता है, तो वे द्वितीयक आंकड़े बन जाते हैं। यह विधि कम खर्चीली है, लेकिन संभव है कि इसमें वर्तमान शोध के अनुकूल सभी वांछित विवरण न मिलें।
द्वितीयक आंकड़े दो प्रकार के स्रोतों से प्राप्त होते हैं: प्रकाशित स्रोत और अप्रकाशित स्रोत।
सभी सांख्यिकीय आंकड़े प्रकाशित नहीं किए जाते। उदाहरण के लिए, ग्राम स्तर के राजस्व अधिकारी (पटवारी) फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन का आंतरिक रिकॉर्ड रखते हैं। इसी प्रकार निजी कंपनियां अपने कर्मचारियों, लाभ और बिक्री का आंतरिक ब्योरा रखती हैं। ये अप्रकाशित रिकॉर्ड भी आवश्यकता पड़ने पर द्वितीयक आंकड़ों के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
द्वितीयक आंकड़ों का उपयोग करने से पहले यह जांचना जरूरी है कि वे विश्वसनीय (Reliable), पर्याप्त (Adequate), उपयुक्त (Suitable), शुद्ध (Accurate), पूर्ण (Complete) और सुसंगत (Consistent) हों।
जैविक विज्ञान में परिवर्तनशीलता एक स्वाभाविक लक्षण है। ऐसा कोई भी मात्रात्मक या गुणात्मक लक्षण, जो एक ही समूह में एक अवलोकन से दूसरे अवलोकन में बदलता रहता है, उसे चर (Variable) कहते हैं।
जब वर्गीकरण का आधार मात्रा या संख्यात्मक परिमाण होता है, तो उन्हें मात्रात्मक आंकड़े कहते हैं। इनमें अवलोकनों को किलोग्राम, लीटर, सेंटीमीटर आदि इकाइयों में मापा जाता है। उदाहरण: बीजों का भार, पौधों की ऊंचाई।
जब अवलोकन किसी गुण या विशेषता के आधार पर दर्ज किए जाते हैं, तो उन्हें गुणात्मक आंकड़े कहते हैं। उदाहरण: फसल की किस्में, बीजों का आकार, मृदा का प्रकार। सांख्यिकी में गुणात्मक चरों को गुण (Attributes) कहते हैं।
आंकड़ों को उनकी सामान्य विशेषताओं और समानताओं के आधार पर विभिन्न समूहों या वर्गों में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को वर्गीकरण (Classification) कहते हैं।
आंकड़ों का वर्गीकरण मुख्य रूप से चार आधारों पर किया जाता है:
जब आंकड़ों को क्षेत्र, राज्य, जिले या स्थान के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।
भारत में फसल क्षेत्र के आंकड़ों का भौगोलिक वर्गीकरण नीचे तालिका में दर्शाया गया है:
| क्षेत्र (Region) | क्षेत्रफल — हेक्टेयर में (Area in hectares) |
|---|---|
| मध्य भारत (Central India) | - |
| पश्चिम (West) | - |
| उत्तर (North) | - |
| पूर्व (East) | - |
| दक्षिण (South) | - |
जब आंकड़ों को समय (वर्ष, माह, दिन) के आधार पर कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है।
भारत में विभिन्न वर्षों के खाद्यान्न उत्पादन के आंकड़े:
| वर्ष (Year) | उत्पादन — टन में (Production in tonnes) |
|---|---|
| 1990-91 | - |
| 1991-92 | - |
| 1992-93 | - |
| 1993-94 | - |
| 1994-95 | - |
जब आंकड़ों को उनके गुणों या लक्षणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। जैसे किसानों को उनकी जोत के प्रकार के अनुसार बांटना:
| किसानों का प्रकार (Type of Farmers) | किसानों की संख्या (Number of Farmers) |
|---|---|
| सीमांत (Marginal) | 907 |
| मध्यम (Medium) | 1041 |
| बड़े (Large) | 1948 |
| कुल (Total) | 3896 |
गुणात्मक वर्गीकरण दो प्रकार का होता है:
यह वर्गीकरण केवल एक ही गुण पर आधारित होता है।
उदाहरण:
कृषि योग्य भूमि: वर्षा आधारित (Rainfed) / सिंचित (Irrigated)
किसानों का शिक्षा स्तर: साक्षर (Literate) / निरक्षर (Illiterate)
यह वर्गीकरण एक साथ दो या दो से अधिक गुणों पर आधारित होता है।
उदाहरण: खेतों की संख्या का वर्गीकरण:
जब आंकड़ों को संख्यात्मक परिमाण या नाप-तौल के आधार पर वर्गों में बांटा जाता है। उदाहरण के लिए, किसी ब्लॉक में किसानों की भूमि जोत का आकार:
| भूमि जोत — हेक्टेयर में (Land Holding - Hectares) | किसानों की संख्या (Number of Farmers) |
|---|---|
| < 1 | 442 |
| 1-2 | 908 |
| 2-5 | 471 |
| >5 | 124 |
| कुल (Total) | 1945 |
| प्राथमिक आंकड़े (Primary Data) | द्वितीयक आंकड़े (Secondary Data) |
|---|---|
| 1. मौलिकता (Originality): ये मौलिक आंकड़े होते हैं क्योंकि अनुसंधानकर्ता इन्हें स्वयं पहली बार एकत्र करता है। | ये आंकड़े मौलिक नहीं होते क्योंकि ये अन्य एजेंसियों द्वारा पहले से एकत्र रिकॉर्ड से लिए जाते हैं। |
| 2. उपयुक्तता (Suitability): यदि इन्हें सावधानीपूर्वक और व्यवस्थित ढंग से एकत्र किया गया हो, तो ये वर्तमान उद्देश्य के पूर्णतः अनुकूल होते हैं। | ये वर्तमान जांच के उद्देश्य के अनुकूल हो भी सकते हैं और नहीं भी, इसलिए इनमें समायोजन की आवश्यकता होती है। |
| 3. समय और लागत (Time and Cost): इनके संकलन में अधिक धन, समय और श्रम की आवश्यकता होती है। | ये पहले से उपलब्ध होते हैं, इसलिए इनके संकलन में बहुत कम समय और धन खर्च होता है। |
| 4. सावधानी (Precaution): इनके उपयोग में विशेष सावधानी की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि अनुसंधानकर्ता इनकी प्रकृति से परिचित होता है। | इनका उपयोग करने से पहले इनकी शुद्धता और उपयुक्तता की बहुत सावधानीपूर्वक जांच करनी पड़ती है। |
एक सरल तालिका (Simple Table) में निम्नलिखित पर आंकड़े होते हैं:
a) दो विशेषताएं (Two characteristics)
b) कई विशेषताएं (Several characteristics)
c) एक विशेषता (One characteristic)
d) तीन विशेषताएं (Three characteristics)
उत्तर (Ans): c) एक विशेषता (One characteristic)
जब एकत्र आंकड़ों को समय (Time) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, तो उसे कहते हैं:
a) मात्रात्मक वर्गीकरण (Quantitative classification)
b) गुणात्मक वर्गीकरण (Qualitative classification)
c) भौगोलिक वर्गीकरण (Geographical classification)
d) कालानुक्रमिक वर्गीकरण (Chronological classification)
उत्तर (Ans): d) कालानुक्रमिक वर्गीकरण (Chronological classification)
भौगोलिक वर्गीकरण का अर्थ क्षेत्र या स्थान के अनुसार आंकड़ों का वर्गीकरण है।
उत्तर (Ans): सत्य (True)
आंकड़ों को पंक्तियों (Rows) और स्तंभों (Columns) में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया सारणीकरण (Tabulation) कहलाती है।
उत्तर (Ans): सत्य (True)
फसल की उपज (Yield) संबंधी आंकड़े एक मात्रात्मक चर (Quantitative variable) हैं।
उत्तर (Ans): सत्य (True)
गुणात्मक चरों (Qualitative variables) को सांख्यिकी में गुण (Attributes) भी कहा जाता है।
उत्तर (Ans): सत्य (True)