प्रायोगिक अभिकल्पना - मूल अवधारणाएं (Basic Concepts) - उपचार (Treatment) - प्रायोगिक इकाई (Experimental Unit) - प्रायोगिक त्रुटि (Experimental Error) - मूल सिद्धांत (Basic Principles) - पुनरावृत्ति (Replication), यादृच्छीकरण (Randomization) तथा स्थानीय नियंत्रण (Local Control)
उपचारों (Treatments) का चयन, प्रायोगिक इकाइयों (Experimental Units/Plots) को उपचार आवंटित करने की विधि तथा विभिन्न विन्यासों में प्रायोगिक इकाइयों की व्यवस्था को प्रायोगिक अभिकल्पना (Design of Experiments) कहा जाता है। इसमें हम एक चर में परिवर्तन का दूसरे चर पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन करते हैं। उदाहरण के लिए, उर्वरक (Fertilizer) की विभिन्न खुराकों का प्रयोग अनाज की उपज को किस प्रकार प्रभावित करता है।
वह चर जिसके परिवर्तन या प्रभाव का हम अध्ययन करना चाहते हैं, उसे प्रतिक्रिया चर (Response Variable) या आश्रित चर कहा जाता है। जिस चर का प्रभाव हम प्रतिक्रिया चर पर देखना चाहते हैं, उसे कारक (Factor) या स्वतंत्र चर कहा जाता है।
उपचार (Treatment): किसी प्रयोग में परस्पर तुलना की जाने वाली विभिन्न वस्तुओं, विधियों या प्रक्रियाओं को उपचार कहा जाता है।
उदाहरण: किसी परीक्षण में परखी जाने वाली फसल की विभिन्न किस्में (Varieties), रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक दवाएं या सिंचाई की विभिन्न विधियां।
प्रायोगिक इकाई / प्लॉट (Experimental Unit / Plot): वह मूल भौतिक सामग्री या खेत का वह भू-भाग जिस पर कोई उपचार लागू किया जाता है, उसे प्रायोगिक इकाई या प्लॉट कहते हैं।
उदाहरण: खेत का एक निश्चित प्लॉट (Plot), एक गमला, एक पशु, या पौधों का एक समूह।
प्रायोगिक त्रुटि (Experimental Error): समान परिस्थितियों में एक ही उपचार प्राप्त करने वाली सभी प्रायोगिक इकाइयों की प्रतिक्रिया (उपज) बिल्कुल समान नहीं होती। प्रेक्षणों में यह अंतर कई बाह्य कारकों (Extraneous Factors) के कारण होता है। जैसे: मृदा की विषमता (Soil Heterogeneity), सूक्ष्म जलवायु अंतर (Micro-climatic Variations) तथा पौधों में स्वाभाविक आनुवंशिक भिन्नता (Genetic Differences)।
अज्ञात व अनियंत्रित बाह्य कारकों के कारण प्रेक्षणों में आने वाली इस अंतर्निहित भिन्नता को प्रायोगिक त्रुटि (Experimental Error) कहा जाता है। प्रायोगिक अभिकल्पना का मुख्य उद्देश्य इसी प्रायोगिक त्रुटि को न्यूनतम (Minimize) करना होता है।
प्रायोगिक त्रुटि को नियंत्रित करने तथा परिणामों की सांख्यिकीय वैधता सुनिश्चित करने के लिए सर रोनाल्ड ए. फिशर (R.A. Fisher) ने प्रायोगिक अभिकल्पना के तीन मूलभूत सिद्धांत प्रतिपादित किए:
किसी उपचार को एक से अधिक प्रायोगिक इकाइयों (प्लॉटों) पर दोहराने की प्रक्रिया को पुनरावृत्ति (Replication) कहते हैं।
यदि किसी उपचार को केवल एक ही प्लॉट पर लागू किया जाए, तो उपचार के प्रभाव और प्रायोगिक त्रुटि के प्रभाव को अलग-अलग ज्ञात करना असंभव होता है। जब किसी उपचार को कई बार दोहराया जाता है, तभी प्रायोगिक त्रुटि का एक मान्य अनुमान (Valid Estimate) प्राप्त होता है।
पुनरावृत्ति की सहायता से हम यह निर्धारित कर सकते हैं कि विभिन्न उपचार माध्यों के बीच प्राप्त अंतर वास्तविक है या केवल संयोगवश (त्रुटि के कारण) है। पुनरावृत्तियों की संख्या बढ़ाने से प्रायोगिक त्रुटि घटती है तथा प्रयोग की परिशुद्धता (Precision) बढ़ती है।
जब प्रयोग के सभी उपचारों को विभिन्न प्रायोगिक इकाइयों पर इस प्रकार आवंटित किया जाए कि प्रत्येक उपचार को किसी भी प्लॉट पर जाने का समान अवसर (Equal Chance) मिले, तो इसे यादृच्छीकरण (Randomization) कहते हैं।
सांख्यिकीय निष्कर्षों को वैध बनाने के लिए आवश्यक है कि उपचार प्रभावों का अनुमान किसी भी व्यक्तिगत पूर्वाग्रह (Bias) से पूर्णतः मुक्त हो। यादृच्छीकरण यह सुनिश्चित करता है कि प्रायोगिक त्रुटियां स्वतंत्र (Independent) और निष्पक्ष (Unbiased) हों।
प्रायोगिक त्रुटि मुख्य रूप से एक प्रायोगिक इकाई से दूसरी इकाई के बीच की प्राकृतिक भिन्नता (मृदा विषमता) पर निर्भर करती है। यदि हम संपूर्ण प्रायोगिक क्षेत्र को सजातीय उप-समूहों में विभाजित कर लें, जिन्हें खंड (Blocks) कहा जाता है, तो प्रायोगिक त्रुटि काफी कम हो जाती है।
समरूप प्रायोगिक इकाइयों को खंडों में समूहित करने की इस प्रक्रिया को स्थानीय नियंत्रण (Local Control) कहा जाता है। इससे खंडों के बीच की भिन्नता को प्रसरण विश्लेषण में अलग कर दिया जाता है, जिससे शुद्ध प्रायोगिक त्रुटि न्यूनतम रह जाती है।
वैध निष्कर्ष (Valid Conclusions) प्राप्त करने के लिए हमारे पास होना चाहिए:
(a) निष्पक्ष अनुमान (Unbiased Estimate)
(b) पक्षपातपूर्ण अनुमान (Biased Estimate)
(c) यादृच्छिक अनुमान (Random Estimate)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (Ans): (a) निष्पक्ष अनुमान (Unbiased Estimate)
प्रतिक्रिया चर (Response Variable) को यह भी कहा जाता है:
(a) स्वतंत्र चर (Independent Variable)
(b) आश्रित चर (Dependent Variable)
(c) उपचार (Treatment)
(d) त्रुटि (Error)
उत्तर (Ans): (b) आश्रित चर (Dependent Variable)