प्वासों और प्रसामान्य वितरण (Poisson and Normal Distributions)
व्याख्यान 7 (Lecture 7)
प्वासों वितरण (Poisson Distribution) - गुणधर्म (Properties), प्रसामान्य वितरण (Normal Distribution) - गुणधर्म (Properties)
सैद्धांतिक प्रायिकता वितरण (Theoretical Probability Distributions)
सांख्यिकी में प्रमुख सैद्धांतिक प्रायिकता वितरण निम्नलिखित हैं:
- द्विपद वितरण (Binomial Distribution): असतत प्रायिकता वितरण (Discrete Probability Distribution)
- प्वासों वितरण (Poisson Distribution): असतत प्रायिकता वितरण (Discrete Probability Distribution)
- प्रसामान्य वितरण (Normal Distribution): सतत प्रायिकता वितरण (Continuous Probability Distribution)
बर्नौली वितरण (Bernoulli Distribution)
जब कोई यादृच्छिक चर (Random Variable) \( X \) केवल दो मान 0 और 1 ग्रहण करता है, जिनकी प्रायिकताएं क्रमशः \( q \) और \( p \) होती हैं, अर्थात् \( P(X = 1) = p \) और \( P(X = 0) = q \) (जहाँ \( q = 1 - p \)), तो इसे बर्नौली विचर (Bernoulli Variate) तथा इसके प्रायिकता वितरण को बर्नौली वितरण (Bernoulli Distribution) कहते हैं। यहाँ \( p \) सफलता (Success) की तथा \( q \) विफलता (Failure) की प्रायिकता है। इस वितरण का प्रतिपादन स्विस गणितज्ञ जेम्स बर्नौली (1654–1705) ने किया था।
उदाहरण:
- सिक्का उछालना — चित (Head) आना सफलता या पट (Tail) आना विफलता।
- बीज का अंकुरण — बीज का अंकुरित होना या अंकुरित न होना।
द्विपद वितरण (Binomial Distribution)
द्विपद वितरण की खोज जेम्स बर्नौली (1654–1705) द्वारा की गई थी। मान लीजिए कि कोई यादृच्छिक प्रयोग \( n \) स्वतंत्र परीक्षणों (Independent Trials) तक बार-बार दोहराया जाता है (जहाँ \( n \) परिमित है)। प्रत्येक परीक्षण में सफलता की प्रायिकता \( p \) स्थिर (Constant) रहती है तथा विफलता की प्रायिकता \( q = 1 - p \) होती है।
इन \( n \) स्वतंत्र परीक्षणों में से ठीक \( x \) सफलताएं और \( n - x \) विफलताएं प्राप्त होने के कुल संयोजन \( ^nC_x \) तरीकों से बन सकते हैं। प्रत्येक तरीके की प्रायिकता \( p^x q^{n-x} \) होती है:
$$ P(sss\dots ff\dots) = p(s)p(s)\dots p(f)p(f)\dots $$
$$ = (p \cdot p \dots p)(q \cdot q \dots q) \quad \text{($x$ बार सफलता, $n-x$ बार विफलता)} $$
अतः \( n \) परीक्षणों में ठीक \( x \) सफलताएं प्राप्त करने की कुल प्रायिकता निम्नलिखित सूत्र द्वारा दी जाती है:
$$ P(X = x) = ^nC_x p^x q^{n-x} $$
परिभाषा (Definition)
एक असतत यादृच्छिक चर \( X \) द्विपद वितरण का पालन करता है यदि वह अऋणात्मक पूर्णांक मान ग्रहण करता है और इसका प्रायिकता द्रव्यमान फलन (Probability Mass Function, PMF) इस प्रकार हो:
$$ P(X = x) = p(x) = ^nC_x p^x q^{n-x}, \quad x = 0, 1, 2, \dots, n $$
$$ \text{जहाँ } q = 1 - p $$
इस वितरण के दो स्वतंत्र प्राचल (Parameters) \( n \) और \( p \) होते हैं। इसे संकेत रूप में \( X \sim B(n, p) \) लिखा जाता है।
द्विपद वितरण की अनिवार्य शर्तें (Conditions for Binomial Distribution)
- परीक्षणों की संख्या \( n \) परिमित (Finite) और निश्चित होनी चाहिए।
- सभी परीक्षण परस्पर स्वतंत्र (Independent) होने चाहिए।
- प्रत्येक परीक्षण में सफलता की प्रायिकता \( p \) सदैव स्थिर (Constant) रहनी चाहिए।
- प्रत्येक परीक्षण के केवल दो ही परस्पर अपवर्जी परिणाम होने चाहिए — सफलता या विफलता।
द्विपद वितरण के गुणधर्म (Properties)
- यदि \( p = q = 0.5 \) हो, तो द्विपद वितरण पूरी तरह सममित (Symmetrical) होता है। यदि \( p \ne q \) हो, तो यह विषम (Skewed) होता है।
- माध्य (Mean): \( E(X) = \mu = np \)
- प्रसरण (Variance): \( V(X) = \sigma^2 = npq \)
- मानक विचलन (Standard Deviation): \( \sigma = \sqrt{npq} \)
- द्विपद वितरण में माध्य सदैव प्रसरण से बड़ा होता है (अर्थात् \( np > npq \), क्योंकि \( q < 1 \))।
व्यावहारिक अनुप्रयोग (Applications)
- कृषि एवं उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control): उत्पादों के दोषपूर्ण (Defective) या गैर-दोषपूर्ण होने का परीक्षण करने में।
- कृषि अनुसंधान: बीजों के अंकुरण या पादप रोगों के प्रभाव के आकलन में।
- चिकित्सा विज्ञान: किसी औषधि से रोग के उपचार की सफलता या विफलता की दर ज्ञात करने में।
उदाहरण 1: आठ सिक्के एक साथ उछाले जाते हैं। कम से कम छह चित (Heads) आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल (Solution):
यहाँ कुल परीक्षण \( n = 8 \)
चित आने की प्रायिकता \( p = 1/2 \), चित न आने की प्रायिकता \( q = 1 - 1/2 = 1/2 \)
द्विपद वितरण का सूत्र: \( P(X = x) = ^8C_x (1/2)^x (1/2)^{8-x} = ^8C_x (1/2)^8 \)
कम से कम छह चित (\( x \ge 6 \)) आने की प्रायिकता:
$$ P(X \ge 6) = P(X = 6) + P(X = 7) + P(X = 8) $$
$$ = ^8C_6 \left(\frac{1}{2}\right)^8 + ^8C_7 \left(\frac{1}{2}\right)^8 + ^8C_8 \left(\frac{1}{2}\right)^8 $$
$$ = 28 \left(\frac{1}{256}\right) + 8 \left(\frac{1}{256}\right) + 1 \left(\frac{1}{256}\right) = \frac{37}{256} $$
उदाहरण 2: दस सिक्के एक साथ उछाले जाते हैं। प्रायिकता ज्ञात कीजिए: (i) कम से कम सात चित (ii) ठीक सात चित (iii) अधिकतम सात चित।
हल (Solution):
यहाँ \( n = 10, p = 1/2, q = 1/2 \)
\( P(X = x) = ^{10}C_x (1/2)^{10} \)
(i) कम से कम 7 चित (At least 7 heads):
\( P(X \ge 7) = P(X = 7) + P(X = 8) + P(X = 9) + P(X = 10) \)
$$ = [^{10}C_7 + ^{10}C_8 + ^{10}C_9 + ^{10}C_{10}] \left(\frac{1}{2}\right)^{10} = [120 + 45 + 10 + 1] \frac{1}{1024} = \frac{176}{1024} $$
(ii) ठीक 7 चित (Exactly 7 heads):
$$ P(X = 7) = ^{10}C_7 \left(\frac{1}{2}\right)^{10} = \frac{120}{1024} $$
(iii) अधिकतम 7 चित (At most 7 heads):
$$ P(X \le 7) = 1 - P(X > 7) = 1 - [P(X = 8) + P(X = 9) + P(X = 10)] $$
$$ = 1 - \left[ \frac{45 + 10 + 1}{1024} \right] = 1 - \frac{56}{1024} = \frac{968}{1024} $$
प्वासों वितरण (Poisson Distribution)
प्वासों वितरण का प्रतिपादन फ्रांसीसी गणितज्ञ साइमन डेनिस प्वासों (Simeon Denis Poisson, 1781–1840) ने किया था। यह एक असतत प्रायिकता वितरण (Discrete Probability Distribution) है। यह उन यादृच्छिक घटनाओं के वितरण को दर्शाता है जो किसी निश्चित समयांतराल या क्षेत्र में बहुत दुर्लभ (Rare) रूप से घटित होती हैं।
द्विपद वितरण में हम सफलताओं और विफलताओं की निश्चित संख्या गिनते हैं, जबकि प्वासों वितरण में किसी दिए गए समय, लंबाई, क्षेत्रफल या आयतन में घटनाओं की औसत संख्या (Average Rate of Occurrence) मापी जाती है।
परिभाषा (Definition)
किसी यादृच्छिक चर \( X \) का प्वासों प्रायिकता द्रव्यमान फलन (PMF) इस प्रकार होता है:
$$ P(X = x) = \frac{e^{-\lambda} \lambda^x}{x!}, \quad x = 0, 1, 2, 3, \dots $$
जहाँ \( \lambda \) प्रति इकाई समय या क्षेत्र में घटनाओं की औसत दर (माध्य) है, तथा \( e \approx 2.71828 \) प्राकृतिक लघुगणक का आधार है। यहाँ \( \lambda = np \) होता है।
प्वासों वितरण की शर्तें (Conditions for Poisson Distribution)
प्वासों वितरण वस्तुतः द्विपद वितरण का एक सीमांत रूप (Limiting Form) है, जब:
- परीक्षणों की संख्या \( n \) अत्यंत विशाल हो (\( n \to \infty \))।
- प्रत्येक परीक्षण में सफलता की प्रायिकता \( p \) अत्यंत सूक्ष्म हो (\( p \to 0 \))।
- सफलताओं की औसत संख्या \( np = \lambda \) एक परिमित धनात्मक स्थिरांक हो।
प्वासों वितरण के गुणधर्म (Properties)
- प्वासों वितरण एक-प्राचलिक (Single-parameter) वितरण है, जिसका एकमात्र प्राचल \( \lambda \) है।
- माध्य (Mean): \( E(X) = \lambda \)
- प्रसरण (Variance): \( V(X) = \lambda \)
- मानक विचलन (Standard Deviation): \( \sigma = \sqrt{\lambda} \)
- अद्वितीय विशेषता: प्वासों वितरण में माध्य और प्रसरण दोनों परस्पर बराबर होते हैं (\( \text{माध्य} = \text{प्रसरण} = \lambda \))।
व्यावहारिक अनुप्रयोग (Applications)
- कृषि अनुसंधान में खेत के किसी भूखंड में विशेष खरपतवारों (Weeds) की संख्या गिनने में।
- फसलों में कीटों के आक्रमण या किसी दुर्लभ पादप रोग से संक्रमित पौधों की संख्या का अध्ययन करने में।
- सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology) में स्लाइड पर बैक्टीरिया की कॉलोनियों की संख्या ज्ञात करने में।
- मुद्रण में प्रति पृष्ठ मुद्रण त्रुटियों (Typographical Errors) की संख्या के विश्लेषण में।
उदाहरण 3: मान लीजिए किसी जिले में औसतन 1000 में से 1 घर में वर्ष के दौरान आग लगती है। यदि उस जिले में 2000 घर हैं, तो इसकी क्या प्रायिकता है कि वर्ष के दौरान ठीक 5 घरों में आग लगेगी? [दिया है: \( e^{-2} = 0.13534 \)]
हल (Solution):
यहाँ कुल घर \( n = 2000 \), आग लगने की प्रायिकता \( p = 1/1000 \)
माध्य \( \lambda = np = 2000 \times \frac{1}{1000} = 2 \)
प्वासों सूत्र से ठीक 5 घरों में आग लगने की प्रायिकता:
$$ P(X = 5) = \frac{e^{-2} \cdot 2^5}{5!} = \frac{0.13534 \times 32}{120} = \frac{4.33088}{120} \approx 0.036 $$
प्रसामान्य वितरण (Normal Distribution)
प्रसामान्य वितरण (Normal Distribution) सांख्यिकी का सबसे महत्वपूर्ण सतत प्रायिकता वितरण (Continuous Probability Distribution) है। इसे त्रुटि का नियम (Law of Errors), लाप्लास-गाउस वितरण (Laplace-Gaussian Distribution) या गाउसीय वितरण (Gaussian Distribution) भी कहते हैं। कई महत्वपूर्ण प्रतिचयन वितरण (Sampling Distributions) जैसे स्टूडेंट-टी (Student's t), एफ-वितरण (F-distribution) तथा काई-वर्ग (\( \chi^2 \)) वितरण इससे सीधे संबंधित हैं।
परिभाषा (Definition)
एक सतत यादृच्छिक चर \( X \) प्रसामान्य वितरण का अनुसरण करता है, यदि इसका प्रायिकता घनत्व फलन (Probability Density Function, PDF) इस प्रकार हो:
$$ f(x) = \frac{1}{\sigma \sqrt{2\pi}} e^{-\frac{1}{2} \left( \frac{x-\mu}{\sigma} \right)^2} ; \quad -\infty < x < \infty, \ -\infty < \mu < \infty, \ \sigma > 0 $$
जहाँ \( \mu \) समष्टि माध्य (Mean) तथा \( \sigma \) मानक विचलन (Standard Deviation) है। प्रसामान्य वितरण को संकेत रूप में \( X \sim N(\mu, \sigma^2) \) व्यक्त किया जाता है।
प्रसामान्य वितरण की शर्तें (Conditions)
- यह द्विपद वितरण का सीमांत रूप है जब परीक्षणों की संख्या \( n \to \infty \) हो तथा \( p \) व \( q \) में से कोई भी अत्यंत छोटा न हो।
- यह प्वासों वितरण का भी सीमांत रूप है जब इसका प्राचल \( \lambda \to \infty \) हो जाए।
- प्रसामान्य वितरण के स्थिरांक: माध्य = \( \mu \), प्रसरण = \( \sigma^2 \), मानक विचलन = \( \sigma \)।
प्रसामान्य प्रायिकता वक्र (Normal Probability Curve)
प्रसामान्य वितरण का आलेखीय निरूपण करने वाला वक्र प्रसामान्य प्रायिकता वक्र कहलाता है। यह वक्र माध्य (\( \mu \)) के परितः पूर्णतः सममित (Symmetric) तथा घंटी के आकार (Bell-shaped) का होता है। इसके दोनों सिरे (Tails) दोनों दिशाओं में अनंत (\( \pm \infty \)) तक फैले होते हैं तथा कभी भी क्षैतिज अक्ष को स्पर्श नहीं करते (Asymptotic)।
प्रसामान्य वितरण के प्रमुख गुणधर्म (Properties of Normal Distribution)
- सममितता और घंटी का आकार: प्रसामान्य वक्र \( X = \mu \) के परितः पूर्णतः सममित और घंटी के आकार का होता है।
- केंद्रीय प्रवृत्तियों की संपाती प्रकृति: इस वितरण में माध्य, माध्यिका और बहुलक तीनों परस्पर बराबर और संपाती होते हैं (\( \text{माध्य} = \text{माध्यिका} = \text{बहुलक} = \mu \))।
- एकबहुलकीय (Unimodal): यह वक्र \( X = \mu \) पर केवल एक शिखर (Peak) रखता है।
- नति परिवर्तन बिंदु (Points of Inflection): वक्र के वक्रता बदलने के बिंदु \( X = \mu \pm \sigma \) पर स्थित होते हैं।
- अधिकतम कोटि (Maximum Ordinate): \( X = \mu \) पर वक्र की अधिकतम ऊंचाई \( \frac{1}{\sigma \sqrt{2\pi}} \) होती है।
- कुल क्षेत्रफल: प्रसामान्य वक्र के नीचे का कुल क्षेत्रफल सदैव 1 (या 100%) होता है।
- क्षेत्रफल गुणधर्म (Area Properties):
- \( P(\mu - \sigma < X < \mu + \sigma) = 0.6826 \) (माध्य के दोनों ओर \( \pm 1\sigma \) में 68.26% क्षेत्रफल आता है)
- \( P(\mu - 2\sigma < X < \mu + 2\sigma) = 0.9544 \) (माध्य के दोनों ओर \( \pm 2\sigma \) में 95.44% क्षेत्रफल आता है)
- \( P(\mu - 3\sigma < X < \mu + 3\sigma) = 0.9973 \) (माध्य के दोनों ओर \( \pm 3\sigma \) में 99.73% क्षेत्रफल आता है)
मानक प्रसामान्य वितरण (Standard Normal Distribution)
यदि \( X \sim N(\mu, \sigma^2) \) हो, तो मानक प्रसामान्य विचर (Standard Normal Variate, \( Z \)) को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है:
$$ Z = \frac{X - \mu}{\sigma} $$
यह चर माध्य 0 तथा मानक विचलन 1 वाले मानक प्रसामान्य वितरण का पालन करता है, अर्थात् \( Z \sim N(0, 1) \)। इसका प्रायिकता घनत्व फलन निम्नलिखित है:
$$ f(z) = \frac{1}{\sqrt{2\pi}} e^{-\frac{1}{2} z^2} ; \quad -\infty < z < \infty $$
मानक प्रसामान्य वितरण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें कोई अज्ञात प्राचल नहीं होता, जिससे मानक प्रसामान्य तालिका (Z-table) की सहायता से किसी भी प्रसामान्य वक्र का क्षेत्रफल आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।
उदाहरण 4: किसी प्रसामान्य वितरण का माध्य 12 और मानक विचलन 2 है। \( X = 9.6 \) से \( X = 13.8 \) के अंतराल के लिए प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल (Solution):
दिया है: \( \mu = 12, \sigma = 2 \)
जब \( X = 9.6 \) हो: \( Z_1 = \frac{9.6 - 12}{2} = -1.2 \)
जब \( X = 13.8 \) हो: \( Z_2 = \frac{13.8 - 12}{2} = 0.9 \)
$$ P(9.6 \le X \le 13.8) = P(-1.2 \le Z \le 0.9) $$
$$ = P(-1.2 \le Z \le 0) + P(0 \le Z \le 0.9) $$
$$ = P(0 \le Z \le 1.2) + P(0 \le Z \le 0.9) \quad \text{[सममित गुणधर्म से]} $$
$$ = 0.3849 + 0.3159 = 0.7008 $$
अर्थात् लगभग 70.08% प्रेक्षण 9.6 से 13.8 के मध्य स्थित हैं।
उदाहरण 5: माध्य 2 और मानक विचलन 3 वाले प्रसामान्य वितरण में चर का वह मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए माध्य से उस मान तक की प्रायिकता 0.4115 हो।
हल (Solution):
दिया है: \( \mu = 2, \sigma = 3 \)
हमे \( X_1 \) ज्ञात करना है जिसके लिए \( P(2 \le X \le X_1) = 0.4115 \) हो।
\( Z \)-रूप में बदलने पर: \( P(0 \le Z \le Z_1) = 0.4115 \), जहाँ \( Z_1 = \frac{X_1 - 2}{3} \)
प्रसामान्य तालिका से 0.4115 क्षेत्रफल के संगत \( Z_1 = 1.35 \) प्राप्त होता है।
$$ \frac{X_1 - 2}{3} = 1.35 \quad \Rightarrow \quad X_1 - 2 = 4.05 \quad \Rightarrow \quad X_1 = 6.05 $$
अर्थात् 41.15% प्रेक्षण 2 और 6.05 के मध्य केंद्रित हैं।
अभ्यास प्रश्न (Questions)
-
प्वासों वितरण (Poisson distribution) के लिए कौन सा संबंध सही है?
a) माध्य > प्रसरण
b) माध्य = प्रसरण (Mean = Variance)
c) माध्य < प्रसरण
d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: b) माध्य = प्रसरण (Mean = Variance)
-
प्रसामान्य वितरण (Normal distribution) में विषमता (Skewness) का मान होता है:
a) एक (1)
b) शून्य (0)
c) एक से अधिक
d) ऋणात्मक
उत्तर: b) शून्य (0)
-
प्वासों वितरण अत्यंत दुर्लभ घटनाओं (Rare events) के लिए प्रयुक्त होता है।
उत्तर: सत्य (True)
-
प्रसामान्य प्रायिकता वक्र के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल एक (1) होता है।
उत्तर: सत्य (True)
-
प्वासों वितरण एक सतत चर (Continuous variable) के लिए वितरण है।
उत्तर: असत्य (False) (प्वासों वितरण असतत प्रायिकता वितरण है)
-
एक सममित प्रसामान्य वक्र में माध्य, माध्यिका और बहुलक संपाती (Coincide) होते हैं।
उत्तर: सत्य (True)
- कृषि विज्ञान में प्वासों वितरण के कोई दो उदाहरण दीजिए।
- यदि किसी प्वासों वितरण का प्रसरण 0.5 है, तो \( P(X = 3) \) का मान ज्ञात कीजिए। [दिया है: \( e^{-0.5} = 0.6065 \)]
- प्रसामान्य वितरण के प्रमुख गुणधर्मों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल
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