यादृच्छिक खंड अभिकल्पना - विवरण (Description) - लेआउट (Layout) - प्रसरण विश्लेषण (Analysis of Variance) - लाभ (Advantages) तथा हानियां (Disadvantages)
जब प्रायोगिक सामग्री (खेत की मिट्टी) विषम (Heterogeneous) होती है, तो प्रायोगिक क्षेत्र को सजातीय उप-समूहों में विभाजित किया जाता है जिन्हें खंड (Blocks) कहा जाता है। चूँकि प्रत्येक खंड में सभी उपचारों का पूरा सेट शामिल होता है, इसलिए एक खंड वास्तव में एक पूर्ण पुनरावृत्ति (Replication) का कार्य करता है।
यदि खेत में मृदा उर्वरता प्रवणता (Fertility Gradient) किसी एक दिशा में (जैसे उत्तर से दक्षिण या पूर्व से पश्चिम) हो, तो खंड हमेशा उर्वरता प्रवणता की दिशा के लंबवत (Opposite/Perpendicular Direction) बनाए जाते हैं। विषम प्रायोगिक इकाइयों को सजातीय खंडों में विभाजित करने तथा प्रत्येक खंड के भीतर उपचारों का स्वतंत्र रूप से यादृच्छीकरण करने की इस व्यवस्था को यादृच्छिक खंड अभिकल्पना (RBD) कहते हैं।
प्रत्येक खंड में उतनी ही प्रायोगिक इकाइयाँ (प्लॉट) होती हैं जितनी उपचारों (Treatments) की संख्या होती है। प्रत्येक खंड के भीतर सभी उपचारों को यादृच्छिक रूप से आवंटित किया जाता है ताकि प्रत्येक उपचार एक खंड में केवल एक बार आए। खंडों की संख्या उपचारों की पुनरावृत्तियों की संख्या के बराबर रखी जाती है। कृषि क्षेत्रीय प्रयोगों में RBD सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाली अभिकल्पना है।
जहाँ:
RBD के आंकड़ों को पुनरावृत्ति (खंड) और उपचारों के आधार पर द्वि-मार्गी सारणी (Two-Way Table) में व्यवस्थित किया जाता है।
प्रयोग में कुल \( r \times t \) प्रेक्षण होते हैं, जहाँ \( r \) पुनरावृत्तियों (खंडों) की संख्या तथा \( t \) उपचारों की संख्या है।
| उपचार (Treatments) | पुनरावृत्ति / खंड (Replications / Blocks) | उपचार योग (Total) | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 2 | 3 | \( \dots \) | \( r \) | ||
| 1 | \( y_{11} \) | \( y_{12} \) | \( y_{13} \) | \( \dots \) | \( y_{1r} \) | \( T_1 \) |
| 2 | \( y_{21} \) | \( y_{22} \) | \( y_{23} \) | \( \dots \) | \( y_{2r} \) | \( T_2 \) |
| 3 | \( y_{31} \) | \( y_{32} \) | \( y_{33} \) | \( \dots \) | \( y_{3r} \) | \( T_3 \) |
| \( \dots \) | \( \dots \) | \( \dots \) | \( \dots \) | \( \dots \) | \( \dots \) | \( \dots \) |
| \( t \) | \( y_{t1} \) | \( y_{t2} \) | \( y_{t3} \) | \( \dots \) | \( y_{tr} \) | \( T_t \) |
| खंड योग (Total) | \( R_1 \) | \( R_2 \) | \( R_3 \) | \( \dots \) | \( R_r \) | GT (Grand Total) |
इस अभिकल्पना में कुल प्रसरण को भिन्नता के तीन घटकों में विभाजित किया जाता है: पुनरावृत्तियों (खंडों) के बीच, उपचारों के बीच तथा प्रायोगिक त्रुटि।
1. संशोधन गुणांक (Correction Factor - CF):
2. कुल वर्गों का योग (Total Sum of Squares - TSS):
3. पुनरावृत्ति / खंड वर्गों का योग (Replication Sum of Squares - RSS):
4. उपचार वर्गों का योग (Treatment Sum of Squares - TrSS):
5. प्रायोगिक त्रुटि वर्गों का योग (Error Sum of Squares - ESS):
| प्रसरण के स्रोत (Sources of Variation) | स्वतंत्रता की कोटि (d.f.) | वर्गों का योग (SS) | माध्य वर्ग योग (MSS) | F-अनुपात (परिकलित) |
|---|---|---|---|---|
| पुनरावृत्ति / खंड (Replication) | \( r - 1 \) | \( RSS \) | \( RMS = \frac{RSS}{r - 1} \) | \( \frac{RMS}{EMS} \) |
| उपचार (Treatments) | \( t - 1 \) | \( TrSS \) | \( TrMS = \frac{TrSS}{t - 1} \) | \( \frac{TrMS}{EMS} \) |
| प्रायोगिक त्रुटि (Error) | \( (r - 1)(t - 1) \) | \( ESS \) | \( EMS = \frac{ESS}{(r - 1)(t - 1)} \) | |
| कुल (Total) | \( rt - 1 \) | \( TSS \) |
क्रांतिक अंतर (Critical Difference - CD / LSD) की गणना:
जहाँ दो उपचार माध्यों के अंतर की मानक त्रुटि \( SE_d = \sqrt{\frac{2 \times EMS}{r}} \)
\( t_{\alpha} = \) त्रुटि की स्वतंत्रता की कोटि \( (r-1)(t-1) \) पर निर्दिष्ट सार्थकता स्तर (5% या 1%) पर \( t \) का सारणीकृत मान।
CD मान के आधार पर विभिन्न उपचार माध्यों की तुलना की जाती है तथा बार चार्ट (Bar Chart) बनाकर श्रेष्ठ उपचार का निष्कर्ष प्राप्त किया जाता है।
RBD का उपयोग किसके साथ किया जाता है:
(a) समान पुनरावृत्ति (Equal Replication)
(b) असमान पुनरावृत्ति (Unequal Replication)
(c) समान और असमान दोनों पुनरावृत्ति
(d) एकल पुनरावृत्ति
उत्तर (Ans): (a) समान पुनरावृत्ति (Equal Replication)
जब 5 उपचार हों और प्रत्येक को 4 बार दोहराया गया हो, तो प्रायोगिक प्लॉटों की कुल संख्या होगी:
(a) 5
(b) 4
(c) 9
(d) 20
उत्तर (Ans): (d) 20