प्रतिगमन - परिभाषा - सरल रैखिक प्रतिगमन समीकरण की फिटिंग (Fitting of Simple Linear Regression Equation) - प्रतिगमन गुणांक की सार्थकता का परीक्षण (Testing the Significance of Regression Coefficient)
प्रतिगमन दो चरों के बीच एक कार्यात्मक संबंध (Functional Relationship) को व्यक्त करता है। इसमें एक चर कारण (Cause) तथा दूसरा चर प्रभाव (Effect) को दर्शाता है। कारण को दर्शाने वाले चर को स्वतंत्र चर (Independent Variable) कहा जाता है और इसे \( X \) द्वारा दर्शाया जाता है। चर \( X \) को पूर्वानुमानक चर (Predictor Variable) या रिप्रेसर भी कहते हैं। प्रभाव को दर्शाने वाले चर को आश्रित चर (Dependent Variable) कहा जाता है और इसे \( Y \) द्वारा दर्शाया जाता है। \( Y \) को पूर्वानुमानित चर (Predicted Variable) भी कहा जाता है।
आश्रित और स्वतंत्र चर के बीच के संबंध को गणितीय फलन के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। ऐसे कार्यात्मक संबंध को प्रतिगमन कहते हैं। जब अध्ययन में केवल दो चर शामिल होते हैं, तो इसे सरल प्रतिगमन (Simple Regression) कहा जाता है। यदि दोनों चरों के बीच का संबंध एक सीधी रेखा में हो, तो इसे सरल रैखिक प्रतिगमन (Simple Linear Regression) कहते हैं। जब दो से अधिक चर हों और एक चर अन्य चरों पर निर्भर हो, तो इस संबंध को बहु-प्रतिगमन (Multiple Regression) कहा जाता है।
सरल रैखिक प्रतिगमन रेखा का मानक रूप \( y = a + bx \) होता है। यहाँ \( a \) एक स्थिरांक या अंतःखंड (Intercept) है, तथा \( b \) प्रतिगमन गुणांक (Regression Coefficient) या रेखा का ढलान (Slope) है। न्यूनतम वर्ग विधि (Method of Least Squares) का उपयोग करके \( a \) और \( b \) के मानों की गणना की जाती है।
\( x \) पर \( y \) का प्रतिगमन समीकरण इस प्रकार है:
\( x \) पर \( y \) का प्रतिगमन गुणांक \( b \) ज्ञात करने का सूत्र:
तथा अंतःखंड \( a \) ज्ञात करने का सूत्र:
प्रतिगमन रेखा स्वतंत्र चर \( X \) के किसी दिए गए विशेष मान के लिए आश्रित चर \( Y \) के औसत मान को दर्शाती है।
प्रतिगमन गुणांक की सार्थकता की जांच करने के लिए हम t-परीक्षण या प्रसरण विश्लेषण (ANOVA / F-परीक्षण) का उपयोग कर सकते हैं।
प्रतिगमन गुणांक के परीक्षण हेतु प्रसरण विश्लेषण (ANOVA) तालिका:
| प्रसरण के स्रोत (Sources of Variation) | स्वतंत्रता की कोटि (d.f.) | वर्गों का योग (SS) | माध्य वर्ग योग (MSS) | F-अनुपात (F-ratio) |
|---|---|---|---|---|
| प्रतिगमन के कारण (Due to Regression) | \( 1 \) | \( SS(b) \) | \( S_b^2 = \frac{SS(b)}{1} \) | \( \frac{S_b^2}{S_e^2} \) |
| प्रतिगमन से विचलन / त्रुटि (Deviation from Regression / Error) | \( n - 2 \) | \( SS(Y) - SS(b) \) | \( S_e^2 = \frac{SS(Y) - SS(b)}{n - 2} \) | |
| कुल (Total) | \( n - 1 \) | \( SS(Y) \) |
t-परीक्षण के उपयोग की स्थिति में परीक्षण सांख्यिकी (Test Statistic) का सूत्र निम्नलिखित है:
प्रतिगमन विश्लेषण का मुख्य उपयोग किसी स्वतंत्र चर के ज्ञात मान के आधार पर आश्रित चर के मान का सटीक पूर्वानुमान (Predicting) लगाना है। यह विधि तब अत्यंत उपयोगी होती है जब आश्रित चर \( Y \) को सीधे मापना कठिन, समय लेने वाला या महंगा हो। प्रतिगमन का दूसरा प्रमुख उपयोग चरों के बीच कारण-प्रभाव संबंध (Causal Relationship) की पुष्टि करना है। यदि हम स्वतंत्र चर \( X \) में नियंत्रित बदलाव करते हैं और \( X \) पर \( Y \) का सार्थक प्रतिगमन प्राप्त होता है, तो यह सिद्ध होता है कि दोनों चरों में वास्तविक कारण-प्रभाव संबंध है। उदाहरण के लिए, मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा और पौधे की वृद्धि दर, या कीटनाशक की मात्रा और कीट मृत्यु दर के बीच संबंध इसी विधि से स्थापित किया जाता है।
धान के एक खेत से यादृच्छिक रूप से 36 पौधों (\( n = 36 \)) का प्रतिदर्श चुना गया। चयनित पौधों के पुष्पगुच्छों (Panicles) की लंबाई \( X \) (सेमी में) और प्रति पुष्पगुच्छ दानों की संख्या (\( Y \)) दर्ज की गई। \( x \) पर \( y \) की प्रतिगमन रेखा फिट कीजिए तथा प्रतिगमन गुणांक की सार्थकता का परीक्षण कीजिए।
आंकड़ों का सारांश (Summary of Data):
\( n = 36 \)
\( \sum X = 822.9 \)
\( \sum Y = 4174 \)
\( \sum X^2 = 18876.83 \)
\( \sum Y^2 = 496258 \)
\( \sum XY = 96183.4 \)
हल (Solution):
शून्य परिकल्पना (\( H_0 \)): प्रतिगमन गुणांक सार्थक नहीं है (\( \beta = 0 \))।
वैकल्पिक परिकल्पना (\( H_1 \)): प्रतिगमन गुणांक सार्थक है (\( \beta \neq 0 \))।
\( X \) के वर्गों का योग (Sum of Squares of X):
\( Y \) के वर्गों का योग (Sum of Squares of Y):
\( X \) और \( Y \) के गुणनफलों का योग (Sum of Products of X and Y):
प्रतिगमन गुणांक \( b \):
समांतर माध्य (Means):
अंतःखंड \( a \):
अतः अभीष्ट प्रतिगमन रेखा का समीकरण है:
प्रसरण विश्लेषण (ANOVA) और सार्थकता परीक्षण:
प्रतिगमन के कारण वर्गों का योग (SS due to Regression):
प्रायोगिक त्रुटि के कारण वर्गों का योग (SS Error):
| प्रसरण के स्रोत | स्वतंत्रता की कोटि (d.f.) | वर्गों का योग (SS) | माध्य वर्ग योग (MSS) | F-अनुपात (परिकलित) |
|---|---|---|---|---|
| प्रतिगमन | 1 | 8950.88 | 8950.88 | \( \frac{8950.88}{98.67} = 90.71 \) |
| त्रुटि | 36 - 2 = 34 | 3355.01 | 98.67 | |
| कुल | 35 | 12305.89 |
t-परीक्षण द्वारा जांच:
5% सार्थकता स्तर पर 34 स्वतंत्रता की कोटि के लिए \( t \) का सारणीकृत मान (Table Value) \( t_{\text{tab}} = 2.032 \) है।
निष्कर्ष: चूँकि परिकलित \( t > t_{\text{tab}} \), इसलिए हम शून्य परिकल्पना \( H_0 \) को अस्वीकार करते हैं। अतः प्रतिगमन गुणांक सांख्यिकीय रूप से सार्थक (Significant) है।
जब सहसंबंध गुणांक \( r = +1 \) हो, तो दोनों प्रतिगमन रेखाएं:
(a) एक-दूसरे के लंबवत (Perpendicular) होती हैं
(b) संपाती (Coincide) होती हैं
(c) एक-दूसरे के समानांतर (Parallel) होती हैं
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (Ans): (b) संपाती (Coincide) होती हैं
यदि एक प्रतिगमन गुणांक इकाई से अधिक है, तो दूसरा प्रतिगमन गुणांक होना चाहिए:
(a) इकाई से अधिक
(b) इकाई के बराबर
(c) इकाई से कम (Less than Unity)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (Ans): (c) इकाई से कम