स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना (Split Plot Design)
व्याख्यान 21 (Lecture 21)
स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना (विभाजित प्लॉट अभिकल्पना) - लेआउट, प्रसरण विश्लेषण और दो त्रुटि पद (Layout, Analysis of Variance and Two Error Terms)
1. स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना की अवधारणा एवं आवश्यकता (Concept & Need)
कृषि क्षेत्र प्रयोगों (Field Experiments) में अक्सर ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं जहां विभिन्न कारकों को प्रयोगात्मक भूखंडों (Experimental Plots) के अलग-अलग आकारों की आवश्यकता होती है:
- बड़े भूखंडों की आवश्यकता वाले कारक: जुताई विधियां (Tillage), सिंचाई स्तर (Irrigation Levels), बुवाई की दिशा या यांत्रिक कटाई की विधियां—इनमें भारी कृषि मशीनरी और जल नियंत्रण के कारण बड़े भूखंड आवश्यक होते हैं।
- छोटे भूखंडों पर परीक्षण योग्य कारक: उर्वरक मात्रा (Fertilizer Doses), फसल की किस्में (Crop Varieties), खरपतवारनाशी (Weedicides) या कीटनाशक उपचार।
यदि इन दोनों प्रकार के कारकों को एक ही प्रयोग में शामिल करना हो, तो सामान्य RBD की तुलना में स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना (Split Plot Design) सर्वाधिक उपयुक्त और प्रभावी अभिकल्पना है।
सटीकता का पदानुक्रम (Hierarchy of Precision):
- इस अभिकल्पना में उप-प्लॉट कारक (Sub-plot Factor) और अंतर्क्रिया प्रभाव (Interaction Effect) का परीक्षण अधिक सटीकता (Higher Precision) के साथ किया जाता है।
- मुख्य प्लॉट कारक (Main-plot Factor) का परीक्षण तुलनात्मक रूप से कम सटीकता के साथ होता है।
- अतः जिस कारक के प्रभाव में अनुसंधानकर्ता की अधिक रुचि हो या जिसे अधिक सटीकता की आवश्यकता हो, उसे उप-प्लॉटों में रखा जाता है।
2. मुख्य प्लॉट और उप-प्लॉट (Main Plot vs. Sub Plot)
- मुख्य प्लॉट (Main Plot):
प्रत्येक ब्लॉक को बड़े भूखंडों में विभाजित किया जाता है जिन्हें मुख्य प्लॉट कहते हैं। इन पर मुख्य प्लॉट कारक (कारक A) के \(m\) स्तर आवंटित किए जाते हैं।
- उप-प्लॉट (Sub Plot):
प्रत्येक मुख्य प्लॉट को आगे छोटे-छोटे उप-भूखंडों में विभाजित किया जाता है जिन्हें उप-प्लॉट कहते हैं। इन पर उप-प्लॉट कारक (कारक B) के \(s\) स्तर आवंटित किए जाते हैं।
3. दो-चरणीय यादृच्छिकीकरण एवं लेआउट (Two-Stage Randomization & Layout)
स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना में यादृच्छिकीकरण (Randomization) दो चरणों में किया जाता है:
- प्रथम चरण (First Stage): प्रत्येक ब्लॉक (पुनरावृत्ति) में मुख्य प्लॉट कारक A के \(m\) स्तरों को मुख्य प्लॉटों में यादृच्छिक रूप से आवंटित किया जाता है।
- द्वितीय चरण (Second Stage): प्रत्येक मुख्य प्लॉट के भीतर उप-प्लॉट कारक B के \(s\) स्तरों को उप-प्लॉटों में स्वतंत्र रूप से यादृच्छिक रूप से आवंटित किया जाता है।
- यदि \(r\) पुनरावृत्तियां हों, तो कुल मुख्य प्लॉटों की संख्या \(r \times m\) और कुल उप-प्लॉटों (प्रयोगात्मक इकाइयों) की संख्या \(N = r \times m \times s\) होगी।
लेआउट का संरचनात्मक स्वरूप (Structural Layout for \(r = 2, m = 2, s = 3\)):
| पुनरावृत्ति I (Replication I) |
पुनरावृत्ति II (Replication II) |
| मुख्य प्लॉट 1 (\(A_2\)) |
मुख्य प्लॉट 2 (\(A_1\)) |
मुख्य प्लॉट 1 (\(A_1\)) |
मुख्य प्लॉट 2 (\(A_2\)) |
| उप-प्लॉट: \(B_2\) |
उप-प्लॉट: \(B_1\) |
उप-प्लॉट: \(B_3\) |
उप-प्लॉट: \(B_1\) |
| उप-प्लॉट: \(B_1\) |
उप-प्लॉट: \(B_3\) |
उप-प्लॉट: \(B_1\) |
उप-प्लॉट: \(B_2\) |
| उप-प्लॉट: \(B_3\) |
उप-प्लॉट: \(B_2\) |
उप-प्लॉट: \(B_2\) |
उप-प्लॉट: \(B_3\) |
4. सांख्यिकीय मॉडल (Statistical Model)
$$ Y_{ijk} = \mu + r_k + A_i + e_{ik}^{(a)} + B_j + (AB)_{ij} + e_{ijk}^{(b)} $$
जहाँ:
- \(\mu = \) समग्र माध्य।
- \(r_k = \) \(k\)-वीं पुनरावृत्ति का प्रभाव (\(k = 1, 2, \dots, r\))।
- \(A_i = \) मुख्य प्लॉट कारक A के \(i\)-वें स्तर का प्रभाव (\(i = 1, 2, \dots, m\))।
- \(e_{ik}^{(a)} = \) मुख्य प्लॉट प्रयोगात्मक त्रुटि—त्रुटि (a), जो \(\sim N(0, \sigma_a^2)\) वितरित होती है।
- \(B_j = \) उप-प्लॉट कारक B के \(j\)-वें स्तर का प्रभाव (\(j = 1, 2, \dots, s\))।
- \((AB)_{ij} = \) मुख्य प्लॉट और उप-प्लॉट कारकों के बीच अंतर्क्रिया प्रभाव।
- \(e_{ijk}^{(b)} = \) उप-प्लॉट प्रयोगात्मक त्रुटि—त्रुटि (b), जो \(\sim N(0, \sigma_b^2)\) वितरित होती है।
5. प्रसरण विश्लेषण तालिका (ANOVA Table for Split Plot Design)
स्प्लिट प्लॉट डिजाइन की प्रसरण विश्लेषण तालिका को दो स्पष्ट भागों (मुख्य प्लॉट भाग और उप-प्लॉट भाग) में विभाजित किया जाता है:
| प्रसरण के स्रोत (Source of Variation) |
स्वतंत्रता की कोटि (d.f.) |
वर्गों का योग (SS) |
माध्य वर्ग योग (MSS) |
परिकलित F-अनुपात (\(F_{\text{cal}}\)) |
| भाग I: मुख्य प्लॉट विश्लेषण (Main Plot Analysis) |
| पुनरावृत्ति (Replications) |
\(r - 1\) |
\(RSS\) |
\(RMS = \frac{RSS}{r-1}\) |
\(F_R = \frac{RMS}{EMS(a)}\) |
| मुख्य प्लॉट कारक A (Main Plot A) |
\(m - 1\) |
\(ASS\) |
\(AMS = \frac{ASS}{m-1}\) |
\(F_A = \frac{AMS}{EMS(a)}\) |
| त्रुटि (a) [Error (a)] |
\((r - 1)(m - 1)\) |
\(ESS(a)\) |
\(EMS(a) = \frac{ESS(a)}{(r-1)(m-1)}\) |
— |
| मुख्य प्लॉट कुल (Main Plot Total) |
\(rm - 1\) |
\(SS_{\text{Main Total}}\) |
— |
— |
| भाग II: उप-प्लॉट विश्लेषण (Sub Plot Analysis) |
| उप-प्लॉट कारक B (Sub Plot B) |
\(s - 1\) |
\(BSS\) |
\(BMS = \frac{BSS}{s-1}\) |
\(F_B = \frac{BMS}{EMS(b)}\) |
| अंतर्क्रिया AB (\(A \times B\)) |
\((m - 1)(s - 1)\) |
\(ABSS\) |
\(ABMS = \frac{ABSS}{(m-1)(s-1)}\) |
\(F_{AB} = \frac{ABMS}{EMS(b)}\) |
| त्रुटि (b) [Error (b)] |
\(m(r - 1)(s - 1)\) |
\(ESS(b)\) |
\(EMS(b) = \frac{ESS(b)}{m(r-1)(s-1)}\) |
— |
| कुल (Total) |
\(rms - 1\) |
\(TSS\) |
— |
— |
महत्वपूर्ण बिंदु (F-परीक्षण के नियम):
- मुख्य प्लॉट कारक A का परीक्षण त्रुटि (a) के माध्य वर्ग [\(EMS(a)\)] के विरुद्ध किया जाता है।
- उप-प्लॉट कारक B और अंतर्क्रिया AB का परीक्षण त्रुटि (b) के माध्य वर्ग [\(EMS(b)\)] के विरुद्ध किया जाता है।
- सामान्यतः \(EMS(a) > EMS(b)\) होता है, क्योंकि उप-प्लॉट आकार में छोटे और सजातीय होते हैं।
6. वर्गों के योग (SS) की चरणबद्ध गणना विधि
चरण 1: सुधार कारक एवं कुल वर्गों का योग
$$ CF = \frac{(GT)^2}{rms}, \quad TSS = \sum Y_{ijk}^2 - CF $$
चरण 2: \(A \times R\) द्विमार्गी तालिका (Replication \(\times\) Factor A Table)
उप-प्लॉटों के आंकड़ों को जोड़कर \(A \times R\) तालिका बनाई जाती है:
चरण 3: \(A \times B\) द्विमार्गी तालिका (Factor A \(\times\) Factor B Table)
सभी पुनरावृत्तियों के आंकड़ों को जोड़कर \(A \times B\) तालिका बनाई जाती है:
चरण 4: त्रुटि (b) का वर्गों का योग [\(ESS(b)\)]
$$ ESS(b) = TSS - (A \times R \text{ तालिका का कुल SS}) - BSS - ABSS $$
7. विभिन्न स्तरों पर मानक त्रुटियां एवं क्रांतिक अंतर (Standard Errors & CD)
स्प्लिट प्लॉट डिजाइन में उपचार माध्यों की विभिन्न तुलनाओं के लिए अलग-अलग मानक त्रुटियों का उपयोग किया जाता है:
| तुलना का प्रकार |
मानक त्रुटि सूत्र (\(SE_d\)) |
\(t\)-मान हेतु स्वतंत्रता की कोटि |
| 1. दो मुख्य प्लॉट स्तरों (\(A_i\) vs \(A_{i'}\)) के माध्यों की तुलना: |
\(\sqrt{\frac{2 EMS(a)}{rs}}\) |
त्रुटि (a) की d.f. = \((r-1)(m-1)\) |
| 2. दो उप-प्लॉट स्तरों (\(B_j\) vs \(B_{j'}\)) के माध्यों की तुलना: |
\(\sqrt{\frac{2 EMS(b)}{rm}}\) |
त्रुटि (b) की d.f. = \(m(r-1)(s-1)\) |
| 3. एक ही मुख्य प्लॉट स्तर पर दो उप-प्लॉट स्तरों की तुलना (\(B_j\) vs \(B_{j'}\) at same \(A_i\)): |
\(\sqrt{\frac{2 EMS(b)}{r}}\) |
त्रुटि (b) की d.f. = \(m(r-1)(s-1)\) |
| 4. विभिन्न मुख्य प्लॉट स्तरों पर दो उप-प्लॉट स्तरों की तुलना (\(B_j\) at \(A_i\) vs \(B_{j'}\) at \(A_{i'}\)): |
\(\sqrt{\frac{2 [(s-1)EMS(b) + EMS(a)]}{rs}}\) |
सैटर्थवेट (Satterthwaite) का भारित \(t'\)-मान |
स्व-मूल्यांकन हेतु अभ्यास प्रश्न (Self-Assessment Questions)
भाग A: बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)
-
एक ही प्रयोग में विभिन्न आकार के प्रयोगात्मक भूखंडों की आवश्यकता वाले कारकों को समायोजित करने के लिए कौन-सी अभिकल्पना अपनाई जाती है?
(a) पूर्णतया यादृच्छिक अभिकल्पना (CRD)
(b) यादृच्छिक ब्लॉक अभिकल्पना (RBD)
(c) स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना (Split Plot Design)
(d) लैटिन स्क्वायर अभिकल्पना (LSD)
उत्तर: (c) स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना (Split Plot Design)।
-
स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना में प्रयोगात्मक त्रुटि पदों (Error Terms) की कुल संख्या होती है:
(a) एक (One)
(b) दो (Two)
(c) तीन (Three)
(d) चार (Four)
उत्तर: (b) दो (Two) — त्रुटि (a) मुख्य प्लॉट के लिए और त्रुटि (b) उप-प्लॉट के लिए।
-
स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना में मुख्य प्लॉट कारक का परीक्षण किसके विरुद्ध किया जाता है?
(a) त्रुटि (a) के माध्य वर्ग [EMS(a)]
(b) त्रुटि (b) के माध्य वर्ग [EMS(b)]
(c) कुल माध्य वर्ग
(d) पुनरावृत्ति माध्य वर्ग
उत्तर: (a) त्रुटि (a) के माध्य वर्ग [EMS(a)] के विरुद्ध।
भाग B: सत्य / असत्य कथन (True / False Statements)
- मुख्य प्लॉट उपचार की तुलना में उप-प्लॉट उपचार के लिए प्रयोगात्मक सटीकता अधिक होती है। — सत्य (True)
- मुख्य प्लॉट कारक और उप-प्लॉट कारक के लिए भूखंड का आकार समान होता है। — असत्य (False) (मुख्य प्लॉट का आकार बड़ा और उप-प्लॉट का आकार छोटा होता है।)
- स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना में यादृच्छिकीकरण दो अलग-अलग चरणों में किया जाता है। — सत्य (True)
- त्रुटि (b) के लिए स्वतंत्रता की कोटि का सूत्र \(m(r-1)(s-1)\) होता है। — सत्य (True)
भाग C: वर्णनात्मक प्रश्न (Descriptive Questions)
- स्प्लिट प्लॉट अभिकल्पना को किन परिस्थितियों में अपनाया जाता है?
उत्तर: जब दो कारकों में से एक कारक को बड़े भूखंडों (जैसे जुताई, सिंचाई) तथा दूसरे को छोटे भूखंडों (जैसे खाद, किस्में) की आवश्यकता हो, अथवा जब उप-प्लॉट कारक और अंतर्क्रिया का अधिक सटीकता से अध्ययन करना हो।
- 3 पुनरावृत्तियों (\(r = 3\)), 4 मुख्य प्लॉट उपचारों (\(m = 4\)) और 3 उप-प्लॉट उपचारों (\(s = 3\)) के साथ कंकाल प्रसरण विश्लेषण तालिका (Skeleton ANOVA Table) बनाइए।
उत्तर: स्वतंत्रता की कोटि (d.f.) की गणना निम्नलिखित होगी:
- पुनरावृत्ति d.f. = \(r - 1 = 3 - 1 = 2\)
- मुख्य प्लॉट A d.f. = \(m - 1 = 4 - 1 = 3\)
- त्रुटि (a) d.f. = \((r - 1)(m - 1) = 2 \times 3 = 6\)
- मुख्य प्लॉट कुल d.f. = \(rm - 1 = 12 - 1 = 11\)
- उप-प्लॉट B d.f. = \(s - 1 = 3 - 1 = 2\)
- अंतर्क्रिया AB d.f. = \((m - 1)(s - 1) = 3 \times 2 = 6\)
- त्रुटि (b) d.f. = \(m(r - 1)(s - 1) = 4 \times 2 \times 2 = 16\)
- कुल d.f. = \(rms - 1 = (3 \times 4 \times 3) - 1 = 36 - 1 = 35\)
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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