सार्थकता का परीक्षण (Test of Significance) - मूल अवधारणाएं - शून्य परिकल्पना (Null Hypothesis) - वैकल्पिक परिकल्पना (Alternative Hypothesis) - सार्थकता स्तर (Level of Significance) - मानक त्रुटि (Standard Error) और इसका महत्व - परीक्षण के चरण (Steps in Testing)
उद्देश्य (Objective): कृषि विज्ञान के विद्यार्थियों को परिकल्पना परीक्षण की मूल अवधारणाओं, परीक्षण में प्रयुक्त प्रमुख सांख्यिकीय शब्दावली तथा अनुसंधान प्रयोगों में विभिन्न सार्थकता परीक्षणों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों से परिचित कराना।
जब किसी समष्टि (Population) से समान आकार (\(n\)) के सभी संभव प्रतिदर्श (Samples) निकाले जाते हैं, तो प्रत्येक प्रतिदर्श के लिए हम किसी सांख्यिकी या प्रतिदर्शज (Statistic) की गणना कर सकते हैं; जैसे प्रतिदर्श माध्य (\(\bar{x}\))। यदि इन सभी प्रतिदर्शों से प्राप्त माध्यों का आवृत्ति वितरण अथवा प्रायिकता वितरण तैयार किया जाए, तो इसे उस सांख्यिकी का प्रतिचयन वितरण (Sampling Distribution) कहा जाता है। कृषि अनुसंधान में, यादृच्छिक प्रतिदर्शों के गुणों के आधार पर यह प्रतिचयन वितरण सैद्धांतिक रूप से निर्धारित किया जाता है।
समष्टि वितरण की भांति ही प्रतिचयन वितरण की विशेषताओं को भी माध्य और मानक विचलन (Standard Deviation) द्वारा वर्णित किया जाता है। चूँकि प्रतिदर्श सांख्यिकी एक यादृच्छिक चर (Random Variable) होती है, अतः किसी सांख्यिकी के प्रतिचयन वितरण के माध्य को उसका प्रत्याशित मान (Expected Value) कहा जाता है।
किसी सांख्यिकी के प्रतिचयन वितरण के मानक विचलन (SD) को उस सांख्यिकी की मानक त्रुटि (Standard Error - SE) कहते हैं। मानक त्रुटि का वर्ग (\(SE^2\)) सांख्यिकी के प्रसरण (Variance) के रूप में जाना जाता है।
मुख्य अंतर (Key Distinction): मानक विचलन व्यक्तिगत प्रेक्षणों या इकाइयों के फैलाव को दर्शाता है, जबकि मानक त्रुटि किसी प्रतिदर्श सांख्यिकी (जैसे प्रतिदर्श माध्य \(\bar{x}\)) के विचरण और परिशुद्धता को दर्शाती है।
परिकल्पना एक ऐसा सांख्यिकीय कथन या पूर्वधारणा (Assumption) है जिसकी सत्यता अभी सिद्ध नहीं हुई है और जिसकी प्रमाणिकता की जांच प्रतिदर्श आंकड़ों के आधार पर की जानी है।
जब किसी वैज्ञानिक अनुमान को समष्टि प्राचलों (Parameters) के रूप में सांख्यिकीय भाषा में व्यक्त किया जाता है, ताकि उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का वैज्ञानिक निर्णय लिया जा सके, तो इसे सांख्यिकीय परिकल्पना (Statistical Hypothesis) कहते हैं।
कृषि उदाहरण: 'धान की एक नई किस्म की औसत उपज 3500 किग्रा प्रति हेक्टेयर होगी' — यह एक वैज्ञानिक परिकल्पना है। सांख्यिकीय भाषा में इसे इस प्रकार व्यक्त करेंगे कि धान की उपज (\(X\)) समष्टि माध्य \(\mu = 3500\) किग्रा/हेक्टेयर के साथ प्रसामान्य रूप से वितरित (Normally Distributed) है।
जब कोई परिकल्पना प्रायिकता वितरण के सभी प्राचलों को पूर्णतः निर्दिष्ट (Specifies) करती है, तो उसे सरल परिकल्पना (Simple Hypothesis) कहते हैं।
उदाहरण: यदि किसी प्रसामान्य वितरण के लिए माध्य \(\mu = 0\) तथा मानक विचलन \(\sigma = 1\) दोनों स्पष्ट रूप से दिए गए हों, तो यह एक सरल परिकल्पना है।
यदि परिकल्पना प्रायिकता वितरण के केवल कुछ प्राचलों को निर्दिष्ट करती है और सभी को नहीं, तो उसे मिश्रित परिकल्पना (Composite Hypothesis) कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि केवल \(\mu = 0\) निर्दिष्ट हो और प्रसरण \(\sigma^2\) अज्ञात हो, तो यह मिश्रित परिकल्पना कहलाती है।
परीक्षण के उद्देश्य से बनाई गई प्रारंभिक आधारभूत परिकल्पना को शून्य परिकल्पना (Null Hypothesis) कहते हैं। इसे प्रो. आर.ए. फिशर ने प्रतिपादित किया था। यह परिकल्पना मानती है कि दो उपचारों के प्रभावों में अथवा प्रतिदर्श मान और समष्टि मान के बीच कोई सार्थक अंतर (Significant Difference) नहीं है। दोनों उपचार या विशेषताएं पूर्णतः स्वतंत्र हैं। इसे \(H_0\) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
कृषि उदाहरण: 'धान की दो किस्मों (किस्म A और किस्म B) की औसत उपज में कोई सार्थक अंतर नहीं है' अर्थात दोनों किस्में प्रति इकाई क्षेत्र में समान उपज देती हैं।
शून्य परिकल्पना के विपरीत या पूरक परिकल्पना को वैकल्पिक परिकल्पना (Alternative Hypothesis) कहते हैं। जब शून्य परिकल्पना \(H_0\) अस्वीकार होती है, तो हम वैकल्पिक परिकल्पना \(H_1\) को स्वीकार करते हैं। इसे \(H_1\) या \(H_a\) से दर्शाया जाता है।
उदाहरण: धान की दोनों किस्मों की पैदावार में सार्थक अंतर है।
यदि यह जांचना हो कि किस्म A की उपज किस्म B से कम है अथवा अधिक है:
वह सांख्यिकीय विधि या नियम जिसके द्वारा प्रतिदर्श आंकड़ों के आधार पर शून्य परिकल्पना को स्वीकार या अस्वीकार करने का औपचारिक निर्णय लिया जाता है, परिकल्पना का परीक्षण (Testing of Hypothesis) कहलाता है।
प्रतिदर्श आंकड़ों से परिकलित सांख्यिकी (जैसे प्रतिदर्श माध्य \(\bar{x}\)) तथा वास्तविक समष्टि प्राचल (जैसे समष्टि माध्य \(\mu\)) के बीच के अंतर को प्रतिचयन त्रुटि (Sampling Error) कहते हैं।
प्रतिदर्श से प्राप्त प्रेक्षित परिणामों (Observed Results) की तुलना प्रतिचयन वितरण पर आधारित प्रत्याशित परिणामों (Expected Results) से की जाती है। यदि प्रेक्षित और प्रत्याशित परिणामों के बीच का अंतर मानक त्रुटि की एक निश्चित सीमा से अधिक हो, तो इसे एक निर्दिष्ट प्रायिकता स्तर पर सार्थक (Significant) कहा जाता है। इस संपूर्ण जांच प्रक्रिया को सार्थकता का परीक्षण कहते हैं।
परिकल्पना परीक्षण में निर्णय लेते समय दो प्रकार की त्रुटियां होने की संभावना रहती है:
| वास्तविक स्थिति (True State) | \( H_0 \) स्वीकार करें (Accept \( H_0 \)) | \( H_0 \) अस्वीकार करें (Reject \( H_0 \)) |
|---|---|---|
| \( H_0 \) सत्य है (\( H_0 \) is True) | सही निर्णय (Correct Decision) प्रायिकता = \( 1 - \alpha \) (विश्वास स्तर) |
प्रथम प्रकार की त्रुटि (Type I Error) प्रायिकता = \( \alpha \) (सार्थकता स्तर) |
| \( H_0 \) असत्य है (\( H_0 \) is False) | द्वितीय प्रकार की त्रुटि (Type II Error) प्रायिकता = \( \beta \) |
सही निर्णय (Correct Decision) परीक्षण की शक्ति = \( 1 - \beta \) |
प्रथम प्रकार की त्रुटि (\(\alpha\)) और द्वितीय प्रकार की त्रुटि (\(\beta\)) परस्पर विपरीत रूप से संबंधित होती हैं; यदि एक को कम किया जाए तो दूसरी बढ़ जाती है। शून्य परिकल्पना के असत्य होने पर उसे अस्वीकार करने के सही निर्णय की प्रायिकता को परीक्षण की शक्ति (Power of the Test) कहते हैं, जिसका मान \(1 - \beta\) होता है।
प्रतिचयन वितरण का वह क्षेत्र जिसमें यदि परिकलित परीक्षण सांख्यिकी का मान पड़ता है, तो शून्य परिकल्पना \(H_0\) को अस्वीकार कर दिया जाता है, क्रांतिक क्षेत्र (Critical Region) या अस्वीकृति क्षेत्र (Rejection Region) कहलाता है। शेष क्षेत्र को स्वीकृति क्षेत्र (Acceptance Region) कहते हैं।
मान लीजिए शून्य परिकल्पना \(H_0: \mu_1 = \mu_2\) तथा वैकल्पिक परिकल्पना \(H_1: \mu_1 \neq \mu_2\) है। प्रसामान्य वितरण के अनुसार, प्रतिदर्श सांख्यिकी \(Z\) के 95% मान \(\pm 1.96 \times SE\) की सीमा में आते हैं।
यहाँ \(\pm 1.96\) का मान \(Z\) का क्रांतिक मान (Critical Value) या सारणी मान (Tabulated Value) कहलाता है।
निर्णय नियम (Decision Rule):
प्रतिदर्श आंकड़ों से परिकलित वह चर (जैसे \(Z, t, F, \chi^2\)) जिसके प्रतिचयन वितरण के आधार पर परिकल्पना का परीक्षण किया जाता है, परीक्षण सांख्यिकी (Test Statistic) कहलाता है। मात्रात्मक आंकड़ों में परीक्षण सांख्यिकी का चयन चर की प्रकृति, प्रसरण तथा प्रतिदर्श आकार पर निर्भर करता है।
प्रथम प्रकार की त्रुटि करने की अधिकतम निर्धारित प्रायिकता को सार्थकता स्तर (Level of Significance) कहते हैं। कृषि अनुसंधान में सामान्यतः 5% (\(\alpha = 0.05\)) या 1% (\(\alpha = 0.01\)) सार्थकता स्तर का प्रयोग किया जाता है। 5% सार्थकता स्तर का अर्थ है कि हमारे निर्णय के गलत होने की संभावना 5% है और सही होने का विश्वास स्तर 95% है।
वैकल्पिक परिकल्पना का स्वरूप क्रांतिक क्षेत्र की स्थिति निर्धारित करता है:
किसी प्रतिदर्श में कुल स्वतंत्र अवलोकनों की वह संख्या, जो दिए गए सांख्यिकीय प्रतिबंधों (Constraints) के बाद स्वतंत्र रूप से परिवर्तित हो सकती है, स्वतंत्रता की कोटि (Degrees of Freedom) कहलाती है। यदि प्रतिदर्श में \(n\) अवलोकन हों और उन पर \(k\) प्रतिबंध लगाए जाएं, तो स्वतंत्रता की कोटि \(df = n - k\) होती है।
जब प्रतिदर्श का आकार \(n \ge 30\) होता है, तो इसे बड़ा प्रतिदर्श (Large Sample) माना जाता है। केंद्रीय सीमा प्रमेय (Central Limit Theorem) के अनुसार बड़े प्रतिदर्शों के लिए प्रतिचयन वितरण प्रसामान्य वितरण (Normal Distribution) का अनुसरण करता है। अतः इसमें \(Z\)-परीक्षण लागू होता है।
जब प्रतिदर्श आकार \(n < 30\) होता है, तो इसे छोटा प्रतिदर्श (Small Sample) कहते हैं। छोटे प्रतिदर्शों में प्रसामान्य वितरण के स्थान पर छात्र के \(t\)-वितरण, \(F\)-वितरण अथवा \(\chi^2\)-वितरण का प्रयोग किया जाता है। उल्लेखनीय है कि छोटे प्रतिदर्श परीक्षणों को बड़े प्रतिदर्शों पर भी लागू किया जा सकता है।
बड़े प्रतिदर्शों के लिए प्रमुख परीक्षण दो श्रेणियों में विभाजित हैं:
गुणात्मक आंकड़ों (Attributes) के लिए दो प्रमुख परीक्षण होते हैं:
1. एकल अनुपात का परीक्षण (Test for Single Proportion):
बड़े आकार \(n\) के प्रतिदर्श में यह जांचना कि क्या प्रतिदर्श किसी निर्दिष्ट अनुपात \(P = P_0\) वाली समष्टि से लिया गया है।
शून्य परिकल्पना (\(H_0\)): \(P = P_0\)
वैकल्पिक परिकल्पना (\(H_1\)): \(P \neq P_0\) (द्विपक्षीय) अथवा \(P > P_0\) / \(P < P_0\) (एकपक्षीय)
परीक्षण सांख्यिकी (Test Statistic):
जहाँ \(p = x/n\) प्रतिदर्श अनुपात है तथा \(Q_0 = 1 - P_0\)। यह मानक प्रसामान्य वितरण \(N(0, 1)\) का अनुसरण करता है।
सार्थकता स्तर: 5% या 1%
सारणी मान (क्रांतिक मान \(Z_{tab}\)):
- द्विपक्षीय परीक्षण: 5% स्तर पर 1.96; 1% स्तर पर 2.58
- एकपक्षीय परीक्षण: 5% स्तर पर 1.65; 1% स्तर पर 2.33
निष्कर्ष: यदि \(|Z_{cal}| > Z_{tab}\), तो \(H_0\) अस्वीकार की जाती है; अन्यथा स्वीकार की जाती है।
2. दो अनुपातों की समानता का परीक्षण (Test for Equality of Two Proportions):
दो स्वतंत्र बड़े प्रतिदर्शों (\(n_1\) और \(n_2\)) के आधार पर यह परीक्षण करना कि क्या दोनों समष्टियों के अनुपात समान हैं।
शून्य परिकल्पना (\(H_0\)): \(P_1 = P_2\)
वैकल्पिक परिकल्पना (\(H_1\)): \(P_1 \neq P_2\) (अथवा \(P_1 > P_2\) / \(P_1 < P_2\))
परीक्षण सांख्यिकी:
विषम समष्टि (Heterogeneous Population) के लिए:
समरूप समष्टि (Homogeneous Population) के लिए, जहाँ पूलित अनुपात (Pooled Proportion) \(\hat{P} = \frac{n_1 p_1 + n_2 p_2}{n_1 + n_2}\) तथा \(\hat{Q} = 1 - \hat{P}\) है:
मात्रात्मक चरों के बड़े प्रतिदर्शों के लिए प्रमुख परीक्षण:
1. एकल माध्य का परीक्षण (Test for Single Mean):
यह जांचना कि क्या बड़ा प्रतिदर्श किसी निर्दिष्ट समष्टि माध्य \(\mu_0\) वाली समष्टि से आया है।
शून्य परिकल्पना (\(H_0\)): \(\mu = \mu_0\)
वैकल्पिक परिकल्पना (\(H_1\)): \(\mu \neq \mu_0\) (अथवा \(\mu > \mu_0\) / \(\mu < \mu_0\))
परीक्षण सांख्यिकी:
यदि समष्टि मानक विचलन \(\sigma\) अज्ञात हो, तो बड़े प्रतिदर्श में इसे प्रतिदर्श मानक विचलन \(s\) से प्रतिस्थापित किया जाता है:
2. दो माध्यों की समानता का परीक्षण (Test for Equality of Two Means):
दो स्वतंत्र बड़े प्रतिदर्शों (\(n_1\) और \(n_2\)) के आधार पर यह जांचना कि क्या दोनों समष्टि माध्य समान हैं।
शून्य परिकल्पना (\(H_0\)): \(\mu_1 = \mu_2\)
वैकल्पिक परिकल्पना (\(H_1\)): \(\mu_1 \neq \mu_2\) (अथवा \(\mu_1 > \mu_2\) / \(\mu_1 < \mu_2\))
परीक्षण सांख्यिकी:
जब समष्टि प्रसरण \(\sigma_1^2 \neq \sigma_2^2\) ज्ञात हों:
जब \(\sigma_1^2 = \sigma_2^2 = \sigma^2\) ज्ञात हों:
जब समष्टि प्रसरण अज्ञात हों, तो उनके स्थान पर प्रतिदर्श प्रसरण \(s_1^2\) तथा \(s_2^2\) का प्रयोग किया जाता है।
किसी सांख्यिकीय परिकल्पना को किस रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है?
(a) सरल परिकल्पना (Simple)
(b) मिश्रित परिकल्पना (Composite)
(c) शून्य परिकल्पना (Null)
(d) उपरोक्त सभी (All the above)
उत्तर (Ans): (d) उपरोक्त सभी (All the above)
क्रांतिक क्षेत्र (Critical Region) का क्षेत्रफल किस पर निर्भर करता है?
(a) प्रथम प्रकार की त्रुटि का आकार (Size of Type I Error)
(b) द्वितीय प्रकार की त्रुटि का आकार
(c) सांख्यिकी का मान
(d) अवलोकनों की संख्या
उत्तर (Ans): (a) प्रथम प्रकार की त्रुटि का आकार (Size of Type I Error - सार्थकता स्तर \(\alpha\))