कर्मधारय समास तत्पुरुष समास का ही एक भेद है, जिसका उत्तर पद प्रधान होता है तथा पूर्व पद और उत्तर पद में विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का सम्बन्ध होता है।
जैसे: 'नीलकमल' (नीला है जो कमल), 'महात्मा' (महान है जो आत्मा), 'चंद्रमुख' (चंद्रमा के समान मुख)।
अव्ययीभाव समास में प्रथम पद प्रधान व अव्यय होता है तथा बहुव्रीहि समास में दोनों पद मिलकर किसी अन्य तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं।
अतः उत्तर पद प्रधान और प्रथम पद द्वारा विशेषता बताने वाला समास कर्मधारय समास कहलाता है (विकल्प 3)।
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